उदयपुर गांजा कार्रवाई में राजस्थान की एजेंसियों ने नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ बड़ी कामयाबी दर्ज की है। उदयपुर जिले के मांडवा थाना क्षेत्र में संयुक्त अभियान चलाकर करीब 200 करोड़ रुपये मूल्य की गांजे की अवैध खेती को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया। यह जानकारी 15 अक्टूबर की सुबह सामने आई।
नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) जोधपुर, राजस्थान की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने ‘ऑपरेशन गांजगवेषणा’ के तहत यह कार्रवाई अंजाम दी। एजेंसियों के मुताबिक, एक ही जगह इतनी बड़ी मात्रा में गांजे की खेती का पर्दाफाश होना बताता है कि दुर्गम इलाकों में यह अवैध धंधा कितने सुनियोजित तरीके से चल रहा था।
आंकड़ों में देखें उदयपुर गांजा कार्रवाई का पैमाना
उदयपुर गांजा कार्रवाई के पैमाने को नीचे दिए गए आंकड़े साफ करते हैं:
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| नष्ट किए गए गांजे के पौधे | 1,33,075 |
| अनुमानित वजन | 39,922.5 किलोग्राम (करीब 399 क्विंटल) |
| अनुमानित बाजार मूल्य | ₹199.50 करोड़ |
| खेती का फैलाव | करीब 57 हेक्टेयर (250 बीघा) |
| खेतों की संख्या | 56 |
| अभियान का नाम | ऑपरेशन गांजगवेषणा |
| शामिल जवान और कर्मी | 45 (एएनटीएफ, एनसीबी, स्थानीय पुलिस) |
| कार्रवाई का स्थान | मांडवा थाना क्षेत्र, उदयपुर |
अधिकारियों का अनुमान है कि अगर यह फसल तैयार होकर बाजार पहुंच जाती, तो इससे करीब 39,900 किलोग्राम गांजा मिल सकता था। यही पैमाना इस कार्रवाई को राज्य में नशे के खिलाफ बड़ी सफलताओं में शामिल करता है।
उदयपुर गांजा कार्रवाई: पांच जिलों की टीमें, 45 जवान
उदयपुर गांजा कार्रवाई सिर्फ एक छापा नहीं, बल्कि कई जिलों की टीमों का समन्वित अभियान था। एएनटीएफ की उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़ और पाली — पांच जिलों की टीमों के साथ एनसीबी और स्थानीय पुलिस के कुल 45 जवान शामिल रहे।
इतनी बड़ी मात्रा में पौधों को उखाड़कर नष्ट करने के लिए तीन ट्रैक्टरों और 10 मजदूरों की मदद ली गई। मौके पर राजस्व विभाग की टीम को भी बुलाया गया, जिसने संबंधित खसरों और जमीन के मालिकों के रिकॉर्ड चिह्नित किए — आगे की जांच के लिए यह कदम बेहद अहम है।
अभियान का नेतृत्व एएनटीएफ प्रमुख विकास कुमार और एनसीबी के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी ने किया, जबकि पूरे अभियान को पुलिस महानिदेशक विकास कुमार, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दिनेश एम.एन. के मार्गदर्शन में चलाया गया। एएनटीएफ की हालिया बड़ी कार्रवाइयों की कड़ी में यह एक और अहम उपलब्धि है।
गुप्त सूचना से दुर्गम पहाड़ियों तक: ऐसे मिला लीड
उदयपुर गांजा कार्रवाई की नींव एक गुप्त सूचना पर टिकी थी। एएनटीएफ राजस्थान को मांडवा क्षेत्र में अवैध खेती की जानकारी मिली, जिसे एनसीबी जोधपुर के साथ साझा किया गया। निगरानी और सत्यापन के बाद दोनों एजेंसियों ने संयुक्त कार्रवाई की रणनीति बनाई।
मांडवा के जंगल और पहाड़ी इलाके दुर्गम माने जाते हैं, और खेती इन्हीं इलाकों में फैली थी। तस्करों ने जानबूझकर ऐसे ठिकाने चुने थे, जहां आम लोगों की नजर कम पड़ती हो। टीमों ने कठिन रास्तों से होकर खेतों तक पहुंच बनाई और फसल नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू की।
सुखाकर देशभर में बेचने का था प्लान
जांच का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह किसी छोटे स्थानीय धंधे का हिस्सा नहीं था। प्रारंभिक जांच के अनुसार, फसल को सुखाकर और प्रसंस्कृत करने के बाद स्थानीय बाजारों के साथ देश के दूसरे हिस्सों में सप्लाई करने की योजना थी।
एजेंसियों की समय पर की गई कार्रवाई से बड़ी मात्रा में गांजा अवैध बाजार तक पहुंचने से पहले ही नष्ट हो गया। मादक पदार्थों के खिलाफ राजस्थान पुलिस की यह सख्ती एनडीपीएस एक्ट के तहत चल रहे लगातार अभियानों का हिस्सा है।
इससे पहले भी हो चुके हैं ऐसे ऑपरेशन
उदयपुर गांजा कार्रवाई अकेली घटना नहीं है। एएनटीएफ इससे पहले कोटड़ा थाना क्षेत्र में ‘ऑपरेशन गजरगज’ के तहत 10 बीघा जमीन पर उगी गांजे की फसल नष्ट कर चुकी है, और पिछले वर्ष ‘ऑपरेशन गांजार्चन’ के तहत भी बड़ी कार्रवाई हुई थी। मांडवा की ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर दुर्गम क्षेत्रों में चल रही अवैध खेती पर एजेंसियों का ध्यान केंद्रित किया है।
जमीन मालिकों पर अब जांच का फोकस
कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि 250 बीघा जमीन पर 56 खेतों में चल रही खेती के पीछे कौन लोग थे। राजस्व विभाग ने खसरों और मालिकों के रिकॉर्ड चिह्नित कर लिए हैं, और अब उनकी भूमिका की जांच की जाएगी — इसी से पता चलेगा कि इस नेटवर्क के तार कितनी दूर तक फैले हैं।
एएनटीएफ महानिदेशक/आईजी विकास कुमार के अनुसार, अभियान में शामिल एएनटीएफ, एनसीबी और मांडवा थाना पुलिस की टीमों को एएनटीएफ मुख्यालय पर सम्मानित किया जाएगा। साथ ही, एएनटीएफ ने आमजन से अपील की है कि अवैध मादक पदार्थों की खेती या तस्करी की कोई जानकारी मिले तो नियंत्रण कक्ष नंबर 0141-2502877 या व्हाट्सएप नंबर 9261225056 पर सूचना दें — सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। एनसीबी की आधिकारिक जानकारी नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की वेबसाइट पर भी उपलब्ध है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: उदयपुर गांजा कार्रवाई में कितने पौधे नष्ट किए गए?
जवाब: ‘ऑपरेशन गांजगवेषणा’ में मांडवा थाना क्षेत्र के 56 खेतों से गांजे के 1,33,075 पौधे उखाड़कर नष्ट किए गए। अनुमानित वजन 39,922.5 किलोग्राम और बाजार मूल्य करीब ₹199.50 करोड़ आंका गया है।
सवाल 2: इस कार्रवाई में कौन-कौन सी एजेंसियां शामिल थीं?
जवाब: एनसीबी जोधपुर, एएनटीएफ राजस्थान और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। एएनटीएफ की उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, प्रतापगढ़ और पाली की पांच टीमों के 45 जवान शामिल रहे।
सवाल 3: नशे के कारोबार की सूचना कहां दी जा सकती है?
जवाब: एएनटीएफ के नियंत्रण कक्ष नंबर 0141-2502877 और व्हाट्सएप नंबर 9261225056 पर सूचना दी जा सकती है। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाती है।
सवाल 4: गांजे की अवैध खेती पर क्या सजा हो सकती है?
जवाब: एनडीपीएस एक्ट, 1985 के तहत गांजे की अवैध खेती गंभीर अपराध है। मामले की गंभीरता के आधार पर 10 से 20 साल तक की कठोर कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है।