आपके मोबाइल पर अचानक एक संदेश आता है — “आपके खाते पर 699 डॉलर का प्री-अप्रूव्ड चार्ज लगा दिया गया है।” नीचे एक टोल-फ्री नंबर भी दिया होता है। अमेरिका में बैठा आम नागरिक घबरा जाता है और तुरंत नंबर डायल करता है। दूसरी तरफ से आवाज आती है — “Apple Customer Support, how can I help you?”
लेकिन हकीकत यह है कि यह कॉल अमेरिका नहीं, जयपुर में बैठे ठगों के फर्जी कॉल सेंटर में पहुंचती है — और फिर शुरू होता है डर और धोखे का वह खेल, जिसमें ठग अमेरिकी नागरिकों के खातों से हजारों डॉलर उड़ा लेते हैं। जयपुर पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट और जयपुर पश्चिम पुलिस की संयुक्त टीम ने बुधवार को इस नेटवर्क का भंडाफोड़ कर दिया। बिंदायका क्षेत्र में दो ठिकानों पर एक साथ दबिश देकर 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। मौके से 13 लैपटॉप, 24 मोबाइल फोन, राउटर और सिम कार्ड समेत सामान जब्त किया गया है।
कैसे चलता था ‘Fake Apple’ का खेल
गिरोह का तरीका बेहद सोचा-समझा था। आरोपी सबसे पहले अमेरिकी नागरिकों के मोबाइल और ईमेल पर Apple के नाम से फर्जी संदेश भेजते थे, जिनमें दावा होता था कि उनके खाते पर 399, 499 या 699 डॉलर का शुल्क पहले से मंजूर (प्री-अप्रूव्ड) कर लिया गया है। संदेश के नीचे दिया टोल-फ्री नंबर Apple का असली नंबर नहीं था।
जैसे ही कोई घबराया हुआ ग्राहक उस नंबर पर कॉल करता, कॉल VoIP और क्लाउड कॉलिंग के जरिए सीधे जयपुर स्थित फर्जी कॉल सेंटर में लैंड हो जाती। लैपटॉप में आइ-बीम और एक्स-लाइट जैसे सॉफ्टवेयर लगे थे, जिनसे पूरी व्यवस्था पेशेवर कॉल सेंटर जैसी दिखती थी। भरोसा बढ़ाने के लिए स्पूफ कॉलिंग और अमेरिकी ई-सिम का इस्तेमाल होता था, ताकि पीड़ित को लगे कि बात सच में विदेश से हो रही है।
पहले डराते, फिर खाते तक पहुंचते
पुलिस की जांच में ठगी की पूरी स्क्रिप्ट सामने आई है। आरोपी पहले फर्जी संदेश के जरिए पीड़ित को डराते कि उसके खाते से बड़ी रकम कटने वाली है। कॉल जुड़ते ही वे खुद को Apple Support का कर्मचारी बताकर भरोसा जीतते और बातचीत के बहाने पीड़ित के बैंक खाते व आर्थिक स्थिति की जानकारी जुटा लेते।
छोटी रकम वाले ग्राहकों से Apple Store के गिफ्ट कार्ड खरीदवाकर उनका कोड मंगवाया जाता। बड़े खाताधारकों के लिए स्क्रिप्ट और भी खतरनाक थी — आरोपी खुद को बैंक अधिकारी बताते, FBI, FDA या डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी के फर्जी गिरफ्तारी वारंट भेजते और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर आरोप लगाकर “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर मोटी रकम ऐंठ लेते थे। वसूली के बाद पीड़ित के नंबर व ईमेल को ब्लॉक कर दिया जाता। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि गिरोह ने कितने अमेरिकी नागरिकों से ठगी की और कुल कितनी रकम उड़ाई।
दबिश की पूरी कहानी — क्या-क्या बरामद हुआ
साइबर क्राइम यूनिट पुलिस मुख्यालय, जयपुर पश्चिम पुलिस और DST की संयुक्त टीम ने बिंदायका क्षेत्र में मंगलम ग्रैंड रेजिडेंसी और आरआर होम्स में एक ही गिरोह द्वारा संचालित दो फर्जी कॉल सेंटरों पर एक साथ दबिश दी। डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने बताया कि दबिश के समय दोनों जगहों पर कर्मचारी अमेरिकी नागरिकों से कॉल पर बात कर रहे थे — यानी ठगी का खेल रंगे हाथों पकड़ा गया।
कार्रवाई का ब्योरा
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| गिरफ्तार आरोपी | 14 |
| जब्त लैपटॉप | 13 |
| जब्त मोबाइल फोन | 24 |
| अन्य सामान | राउटर, सिम कार्ड, चार्जर, एक्सटेंशन बोर्ड |
| कॉलिंग तकनीक | VoIP, क्लाउड कॉलिंग, स्पूफ कॉलिंग, अमेरिकी ई-सिम |
| लैपटॉप में मिले सॉफ्टवेयर | आइ-बीम, एक्स-लाइट |
| कार्रवाई का नेतृत्व | डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण, डिप्टी एसपी आदित्य पुनिया |
गिरफ्तार आरोपियों में गोहिल निकुंज, वाहिद, रहीस, ईरशाद, मोहम्मद ईनाम हुसैन चौधरी, सौरभ शर्मा, निशिथ, मानस खटनियार, अक्षय नारायण भाई पटेल, श्रेय भारद्वाज, गगन पाल, शिवम प्रजापति, देव दलाल और दर्पन शामिल हैं।
बहु-राज्य गैंग — मास्टरमाइंड अब भी फरार
जांच में सामने आया है कि यह एक संगठित बहु-राज्य गैंग है। गिरफ्तार आरोपी अलग-अलग राज्यों और पड़ोसी देश से भी हैं — 6 आरोपी गुजरात के, 2 मुंबई के, जबकि नागालैंड, असम, चंडीगढ़, नेपाल, सीकर और जयपुर के एक-एक आरोपी शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, जयपुर में खोले गए इस कॉल सेंटर का मास्टरमाइंड गुजरात का हिरेश भाई है, जो फिलहाल फरार चल रहा है। गिरोह ने जयपुर में करीब 15 दिन पहले ही यह कॉल सेंटर शुरू किया था। इससे पहले मुंबई और गुजरात में भी इसी तरह के फर्जी कॉल सेंटर चलाए जाने की जानकारी मिली है।
आपके लिए सबक — ऐसे फ्रॉड से खुद को कैसे बचाएं
यह खबर सिर्फ अमेरिका के लोगों के लिए नहीं है — इसी तरह की स्क्रिप्ट भारत में भी “डिजिटल अरेस्ट” और कस्टमर केयर फ्रॉड के नाम पर चल रही है। ये बातें हमेशा याद रखें:
- असली कंपनियां SMS में टोल-फ्री नंबर नहीं भेजतीं — कोई भी बड़ी कंपनी अचानक “चार्ज लग गया है” कहकर कॉल करने को नहीं कहेगी।
- गिफ्ट कार्ड मांगा जाए तो समझो फ्रॉड है — कोई भी असली अधिकारी या कंपनी भुगतान के लिए गिफ्ट कार्ड का कोड नहीं मांगती।
- “डिजिटल अरेस्ट” जैसा कुछ नहीं होता — FBI, CBI या पुलिस कभी फोन या वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी नहीं करती। ऐसा दावा आते ही फोन काट दें।
- घबराहट में फैसला न लें — ठगों का सबसे बड़ा हथियार आपकी घबराहट है। शांत रहें और आधिकारिक वेबसाइट से खुद नंबर निकालकर संपर्क करें।
- तुरंत रिपोर्ट करें — साइबर फ्रॉड की शिकायत 1930 हेल्पलाइन या cybercrime.gov.in पर दर्ज कराएं।
जयपुर पुलिस की यह कार्रवाई साबित करती है कि साइबर अपराधी अब सीमाओं से परे काम कर रहे हैं — जयपुर के एक फ्लैट से अमेरिका तक। अब सबकी नजर फरार मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी पर है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: जयपुर में पकड़े गए आरोपी अमेरिकी नागरिकों को कैसे ठगते थे?
उत्तर: आरोपी Apple Customer Support के नाम से फर्जी SMS भेजते थे, जिसमें 399, 499 या 699 डॉलर के प्री-अप्रूव्ड चार्ज का दावा होता था। दिए गए टोल-फ्री नंबर पर कॉल जयपुर के फर्जी कॉल सेंटर में पहुंचती, जहां आरोपी बैंक खाते की जानकारी निकालकर ठगी करते थे।
प्रश्न 2: पुलिस कार्रवाई में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए और क्या-क्या जब्त हुआ?
उत्तर: साइबर क्राइम यूनिट और जयपुर पश्चिम पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में 14 आरोपी गिरफ्तार किए गए। मौके से 13 लैपटॉप, 24 मोबाइल फोन, राउटर, सिम कार्ड, चार्जर और एक्सटेंशन बोर्ड जब्त किए गए।
प्रश्न 3: इस ठगी नेटवर्क का मास्टरमाइंड कौन है?
उत्तर: पुलिस के मुताबिक, जयपुर में खोले गए फर्जी कॉल सेंटर का मास्टरमाइंड गुजरात का हिरेश भाई है, जो फिलहाल फरार है। गिरोह के सदस्य गुजरात, मुंबई, नागालैंड, असम, चंडीगढ़, नेपाल, सीकर और जयपुर से हैं।