राजस्थान में वरिष्ठ अध्यापक पेपर लीक के सबसे बड़े नेटवर्क पर शिकंजा और कस गया है। राज्य की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 के पेपर लीक मामले में एक और अहम कड़ी विनोद कुमार जाट उर्फ विनोद रेवाड़ को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी के साथ इस प्रकरण में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की संख्या 70 तक पहुंच गई है, जिनमें राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) के तत्कालीन सदस्य बाबूलाल कटारा जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। आरोपी को 20 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
यह गिरफ्तारी इसलिए भी अहम है क्योंकि विनोद रेवाड़ कोई नया चेहरा नहीं — एसओजी के अनुसार वह उप निरीक्षक भर्ती-2021, ग्राम विकास अधिकारी भर्ती-2021 और स्कूल व्याख्याता भर्ती-2022 के पेपर लीक मामलों में भी सक्रिय भूमिका निभा चुका है।
वरिष्ठ अध्यापक पेपर लीक: 70वीं गिरफ्तारी तक का सफर
वरिष्ठ अध्यापक पेपर लीक मामले की नींव 23 दिसंबर 2022 की रात पड़ी थी। उस रात उदयपुर जिले में बेकरिया थाना पुलिस ने नाकाबंदी के दौरान एक बस को रोका, जिसमें मूल अभ्यर्थियों के साथ डमी परीक्षार्थी भी सवार थे। तलाशी में बस से वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा विभाग) प्रतियोगी परीक्षा-2022 के सामान्य ज्ञान एवं शैक्षिक मनोविज्ञान विषय के हल प्रश्नपत्र बरामद हुए। अगले ही दिन 24 दिसंबर को इसी विषय की पहली परीक्षा होनी थी।
उस छापे से खुली कड़ी एसओजी को पूरे गिरोह तक ले गई — आरोपी अनिल कुमार मीणा उर्फ शेर सिंह मीणा ने प्रश्नपत्र की एक प्रति अरुण शर्मा उर्फ राजेंद्र शर्मा को दी थी (अरुण पहले ही गिरफ्तार है)। ताजा जांच में सामने आया कि विनोद कुमार जाट अभ्यर्थियों को अरुण शर्मा तक पहुंचाता था और रकम का लेन-देन संभालता था। जांच अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रकाश कुमार शर्मा की टीम ने उसे सोमवार (12 अक्टूबर) को गिरफ्तार किया; एसओजी एडीजी विशाल बंसल ने पुष्टि की है।
57 लाख का खेल: 3 ठिकाने, 29 अभ्यर्थी
इस पेपर लीक नेटवर्क की कार्यप्रणाली बेहद संगठित थी। गिरोह ने परीक्षा से पहले ही सामान्य ज्ञान एवं शैक्षिक मनोविज्ञान का पहला प्रश्नपत्र लीक कर दिया था और अभ्यर्थियों को तीन अलग-अलग ठिकानों पर बुलाकर प्रश्नपत्र हल करवाया गया। एसओजी के अनुसार कुल 29 अभ्यर्थियों से 57 लाख रुपये वसूले गए।
| ठिकाना | अभ्यर्थी | वसूली गई राशि |
|---|---|---|
| रेवासा-रानोली स्थित मिल्खा डिफेंस अकादमी | 13 | 25 लाख रुपये |
| जयपुर (बेनाड़) पूर्ण विहार कॉलोनी का किराए का मकान | 9 | 18 लाख रुपये |
| हाथोज बस स्टैंड के पास कालवाड़ रोड स्थित कंप्यूटर संस्थान | 7 | 14 लाख रुपये |
| कुल | 29 | 57 लाख रुपये |
यानी मेहनत करने वाले ईमानदार अभ्यर्थियों की सीटें पैसे के दम पर बेची जा रही थीं।
विनोद रेवाड़: एक नाम, कई पेपर लीक
वरिष्ठ अध्यापक पेपर लीक मामले में हुई यह गिरफ्तारी विनोद रेवाड़ के पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए और भी गंभीर हो जाती है। दैनिक भास्कर की एक पूर्व रिपोर्ट के अनुसार, एसओजी ने स्कूल व्याख्याता (कृषि विज्ञान) भर्ती परीक्षा-2022 के पेपर लीक प्रकरण में भी विनोद कुमार जाट उर्फ विनोद रेवाड़ को गिरफ्तार किया था। जांच में सामने आया था कि गिरोह के सरगना अनिल कुमार मीणा उर्फ शेर सिंह ने तत्कालीन आरपीएससी सदस्य बाबूलाल कटारा से 60 लाख रुपये में कृषि विज्ञान, अर्थशास्त्र, भूगोल और शारीरिक शिक्षा विषयों के प्रश्नपत्र हासिल किए थे, और विनोद रेवाड़ ने करीब 50 लाख रुपये में ये प्रश्नपत्र लेकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाए थे।
उप निरीक्षक भर्ती-2021 में उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित था — उसने आठ अभ्यर्थियों से 10-10 लाख रुपये लेकर प्रश्नपत्र दिए थे। वर्ष 2025 में उसे ओडिशा से पकड़ा गया था, और ग्राम विकास अधिकारी भर्ती-2021 में भी वह वांछित रहा है।
वरिष्ठ अध्यापक पेपर लीक में 70 गिरफ्तारियां: RPSC सदस्य तक पहुंचा जाल
इस प्रकरण में अब तक 70 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें अनिल कुमार मीणा उर्फ शेर सिंह, भूपेंद्र सारण, सुरेश कुमार सऊ और आरपीएससी के तत्कालीन सदस्य बाबूलाल कटारा जैसे नाम शामिल हैं। आयोग के ही सदस्य का पेपर लीक गिरोह से जुड़ा होना इस मामले की सबसे गंभीर कड़ी है, क्योंकि प्रश्नपत्रों की गोपनीयता की जिम्मेदारी सीधे आयोग पर होती है।
20 अक्टूबर तक के पुलिस रिमांड में एसओजी यह पता लगाएगी कि नेटवर्क से जुड़े और कौन बाहर हैं और क्या गिरोह के तार किसी नई भर्ती परीक्षा से भी जुड़े हैं।
अभ्यर्थियों के लिए सबक: पैसे देकर नौकरी का झांसा
यह वरिष्ठ अध्यापक पेपर लीक मामला हर सरकारी नौकरी के अभ्यर्थी के लिए एक चेतावनी है। गिरोह अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेकर “पक्की नौकरी” का झांसा देते हैं, लेकिन पकड़े जाने पर अभ्यर्थी की पात्रता रद्द होने के साथ आपराधिक मामला भी दर्ज होता है। आरपीएससी पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि पेपर लीक में शामिल अभ्यर्थियों को अयोग्य घोषित किया जाएगा और भविष्य की परीक्षाओं से भी वंचित किया जा सकता है।
अगर कोई व्यक्ति या कोचिंग संस्थान परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र दिलाने का दावा करे या पैसे मांगे, तो उसकी सूचना तुरंत एसओजी या स्थानीय पुलिस को दें। पेपर लीक में फंसे अभ्यर्थी की पात्रता रद्द होने के साथ आपराधिक मामला भी दर्ज होता है, इसलिए ऐसे झांसे से दूर रहें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: वरिष्ठ अध्यापक पेपर लीक मामले में ताजा गिरफ्तारी किसकी हुई है?
उत्तर: एसओजी ने 12 अक्टूबर को विनोद कुमार जाट उर्फ विनोद रेवाड़ को गिरफ्तार किया है। वह अभ्यर्थियों को पेपर लीक गिरोह के अरुण शर्मा तक पहुंचाता था और रकम का लेन-देन संभालता था। उसे 20 अक्टूबर तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।
प्रश्न: यह पेपर लीक किस परीक्षा से जुड़ा है?
उत्तर: यह मामला आरपीएससी अजमेर की वरिष्ठ अध्यापक (माध्यमिक शिक्षा विभाग) भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़ा है। 24 दिसंबर 2022 को होने वाली सामान्य ज्ञान एवं शैक्षिक मनोविज्ञान की परीक्षा का प्रश्नपत्र पहले ही लीक कर दिया गया था।
प्रश्न: इस प्रकरण में अब तक कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?
उत्तर: विनोद जाट की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में अब तक 70 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं। इनमें गिरोह के सरगना अनिल कुमार मीणा उर्फ शेर सिंह, अरुण शर्मा और आरपीएससी के तत्कालीन सदस्य बाबूलाल कटारा भी शामिल हैं।
प्रश्न: विनोद रेवाड़ का नाम और किन पेपर लीक मामलों में आया है?
उत्तर: एसओजी के अनुसार वह उप निरीक्षक भर्ती-2021, ग्राम विकास अधिकारी भर्ती-2021 और स्कूल व्याख्याता भर्ती-2022 के पेपर लीक मामलों में भी शामिल रहा है।