मंगलवार सुबह 11 बजे कक्षा के अंदर क्या हुआ
सरकारी स्कूल की कक्षा में बैठकर पढ़ रहे 32 मासूम बच्चों पर अचानक छत का प्लास्टर आ गिरे, तो इसे महज हादसा कहना आसान है — लेकिन उदयपुर के भींडर में मंगलवार सुबह घटी यह घटना एक पुराने सवाल को फिर जिंदा कर गई है। आखिर बच्चों की सुरक्षा की गारंटी कौन देगा, जब स्कूल की इमारत ही 25 साल पुरानी और जर्जर हो, और इसकी शिकायत पहले से दर्ज हो?
मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 11 बजे उदयपुर जिले के भींडर थाना क्षेत्र में वाणियातलाई ग्राम पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारदा में पढ़ाई चल रही थी। कक्षा में अलग-अलग कक्षाओं के 32 बच्चे बैठे थे। तभी तेज आवाज के साथ छत का प्लास्टर भरभराकर बच्चों पर आ गिरा। मलबे की चपेट में आकर तीन बच्चों के सिर में चोट लगी, जबकि दो अन्य बच्चों को मामूली खरोंचें आईं।
हादसे के समय स्कूल में सामान्य पढ़ाई चल रही थी। छत का प्लास्टर पहले हल्की आवाज के साथ दरका और फिर देखते ही देखते बड़ा हिस्सा नीचे आ गिरा। शिक्षकों ने तुरंत बच्चों को कमरे से बाहर निकाला और घायल बच्चों को संभाला।
घायलों में पहली कक्षा की छात्रा कृष्णा कुमारी, कार्तिक और पांचवीं कक्षा का छात्र गणेशलाल शामिल हैं। तीनों के सिर में चोट आई थी। उन्हें फौरन भींडर के सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद तीनों को घर भेज दिया गया। राहत की बात यह रही कि किसी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई — वरना 32 बच्चों से भरी कक्षा में नतीजा कहीं भयावह हो सकता था।
25 साल पुरानी इमारत, जिसकी हालत की खबर विभाग को पहले थी
इस हादसे का सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह इमारत अचानक जर्जर नहीं हुई थी। प्रधानाध्यापक लालसिंह शक्तावत के अनुसार स्कूल का भवन वर्ष 2001 में बना था — करीब 25 साल पुराना। उनके मुताबिक भवन के जर्जर होने की सूचना शिक्षा विभाग को पहले ही दी जा चुकी थी, लेकिन समय रहते मरम्मत नहीं कराई गई।
स्कूल में कुल 37 बच्चे नामांकित हैं और यह पांचवीं कक्षा तक संचालित होता है। भवन में सिर्फ दो कमरे और एक बरामदा है, जिनकी हालत भी ठीक नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद हर बार आश्वासन के सिवा कुछ नहीं मिला। उनका कहना है कि गनीमत रही कि पूरी छत नहीं ढही, वरना बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
यह अकेली घटना नहीं — 3,768 स्कूलों की इमारतें जर्जर
भींडर की यह घटना कोई अपवाद नहीं है। शिक्षा विभाग के अपने ताजा सर्वे के आंकड़े ही प्रदेश के सरकारी स्कूलों की खस्ता हालत की गवाही देते हैं। सर्वे के मुताबिक राजस्थान में 3,768 सरकारी स्कूलों की पूरी इमारतें और 83,783 कक्षाएं अत्यंत जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पाई गई हैं। इसके अलावा 16,765 शौचालय भी उपयोग लायक नहीं हैं।
विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल 2,19,902 कक्षाएं और 29,753 शौचालय ऐसे हैं, जिन्हें मरम्मत की जरूरत है। प्रदेश के करीब 65,000 सरकारी स्कूलों में से बड़ी संख्या के भवनों को तत्काल सुधार की दरकार है। झालावाड़ में हुए स्कूल भवन हादसे के बाद से ही सरकार पर दबाव बढ़ा था, और राजस्थान हाई कोर्ट भी स्कूलों की मरम्मत का स्पष्ट रोडमैप मांग चुका है।
इसी कड़ी में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर विधायकों को पत्र लिखकर कह चुके हैं कि वे अपने विधायक कोष का 20 प्रतिशत हिस्सा सरकारी स्कूलों की मरम्मत पर खर्च करें। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी ‘विधायक शिक्षा का साथी योजना’ के तहत हर वर्ष विधायक कोष के 20 प्रतिशत भाग को स्कूल भवनों के सुधार में लगाने की घोषणा कर चुके हैं। लेकिन भींडर की घटना बताती है कि घोषणाओं और जमीनी हकीकत के बीच की खाई अब भी भरी नहीं है।
हादसे के बाद क्या कदम उठाए गए
घटना की सूचना मिलते ही सीबीईओ भींडर राजेंद्र कुमार चौबीसा मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। शिक्षा विभाग और स्थानीय प्रशासन के निर्देश पर एहतियातन जर्जर स्कूल भवन पर ताला लगा दिया गया है। अब स्कूल का संचालन माताजी के चबूतरे के पास सुरक्षित स्थान से किया जाएगा, ताकि बच्चों की पढ़ाई बाधित न हो।
घटना ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है। विपक्षी नेता आशुतोष रांका ने सोशल मीडिया पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर को घेरते हुए स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। अब देखना है कि क्या इस हादसे के बाद जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत में वाकई तेजी आएगी।
एक नज़र में मुख्य तथ्य
| हादसे की तारीख व समय | मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026, सुबह करीब 11 बजे |
| स्थान | राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारदा, वाणियातलाई ग्राम पंचायत, भींडर (उदयपुर) |
| कक्षा में मौजूद बच्चे | 32 |
| घायल बच्चे | 3 (सिर में चोट), 2 को मामूली खरोंच |
| घायलों के नाम | कृष्णा कुमारी (कक्षा 1), कार्तिक, गणेशलाल (कक्षा 5) |
| इलाज | भींडर के सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार, फिर घर भेजा गया |
| स्कूल में कुल नामांकन | 37 बच्चे (पांचवीं कक्षा तक) |
| भवन की उम्र | वर्ष 2001 में निर्मित, करीब 25 साल पुराना |
| प्रधानाध्यापक | लालसिंह शक्तावत |
| हादसे के बाद की कार्रवाई | भवन सील, स्कूल माताजी के चबूतरे के पास शिफ्ट |
| प्रदेश का बड़ा आंकड़ा | 3,768 स्कूल भवन व 83,783 कक्षाएं जीर्ण-शीर्ण (विभागीय सर्वे) |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: उदयपुर के भींडर में स्कूल हादसा कब और कहां हुआ?
जवाब: यह हादसा मंगलवार, 6 अक्टूबर 2026 की सुबह करीब 11 बजे उदयपुर जिले के भींडर थाना क्षेत्र में वाणियातलाई ग्राम पंचायत के राजकीय प्राथमिक विद्यालय नारदा में हुआ।
सवाल: हादसे में कितने बच्चे घायल हुए और उनकी हालत कैसी है?
जवाब: तीन बच्चों — कृष्णा कुमारी, कार्तिक और गणेशलाल — के सिर में चोट आई, दो बच्चों को मामूली खरोंचें आईं। तीनों घायलों को भींडर के सरकारी अस्पताल में प्राथमिक उपचार देकर घर भेज दिया गया है। किसी की हालत गंभीर नहीं है।
सवाल: क्या स्कूल का भवन पहले से जर्जर था?
जवाब: हां। प्रधानाध्यापक के अनुसार 2001 में बना यह भवन करीब 25 साल पुराना था और इसके जर्जर होने की सूचना शिक्षा विभाग को पहले ही दी जा चुकी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद समय पर मरम्मत नहीं कराई गई।
सवाल: हादसे के बाद स्कूल कहां चलेगा और आगे क्या होगा?
जवाब: जर्जर भवन को सील कर दिया गया है। अब स्कूल का संचालन माताजी के चबूतरे के पास दूसरी सुरक्षित जगह से किया जाएगा। सीबीईओ भींडर ने मौके का जायजा लिया है। ग्रामीण और अभिभावक भवन की जल्द मरम्मत की मांग कर रहे हैं।
अभिभावकों के लिए सुझाव: अगर आपके क्षेत्र के सरकारी स्कूल का भवन भी जर्जर दिख रहा हो — दीवारों में दरारें, छत से झड़ता प्लास्टर — तो इसकी लिखित शिकायत प्रधानाध्यापक और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को जरूर दें। समय पर उठाया गया एक कदम किसी बड़े हादसे को रोक सकता है।