राजस्थान में उद्योग लगाने की प्रक्रिया को एक बड़ा डिजिटल पुश मिला है। रीको ई-लीज प्रणाली को लागू करने का फैसला रीको (RIICO) ने लिया है — अब औद्योगिक भूखंडों की लीज डीड रीको के ERP पोर्टल के जरिए ऑनलाइन निष्पादित और पंजीकृत हो सकेगी। आवंटियों को लीज एग्रीमेंट के लिए इकाई कार्यालयों और उप-पंजीयक कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे; प्रक्रिया सरल, पारदर्शी और समयबद्ध होगी।
सबसे बड़ा बदलाव: रीको ई-लीज प्रणाली से क्या-क्या घर बैठे होगा
रीको ई-लीज प्रणाली का मतलब है कि लीज डीड के निष्पादन की पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से पूरी होगी। इसमें बकाया भुगतान की ऑनलाइन जांच, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं का विवरण दर्ज करना, आधार आधारित प्रमाणीकरण, गवाहों का सत्यापन और इकाई कार्यालय की जांच शामिल रहेगी। इसके बाद आवंटी, गवाह और निगम के अधिकृत अधिकारी तय क्रम में इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर (e-Signature) करेंगे। दस्तावेज सील होकर इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उप-पंजीयक कार्यालय को भेजा जाएगा, और आवंटी को एक संदर्भ संख्या (Reference Number) मिलेगी — इसी संदर्भ संख्या के आधार पर वह अपनी सुविधा के अनुसार अपॉइंटमेंट लेकर उपस्थित हो सकेगा।
ERP पोर्टल पर लीज निष्पादन की चरण-दर-चरण प्रक्रिया
नई व्यवस्था में आवंटी को किसी भी कागज को हाथ में उठाए दफ्तरों में नहीं घूमना होगा। रीको ई-लीज प्रणाली में पूरी प्रक्रिया उसके ERP पोर्टल से संचालित होगी:
| क्रम | चरण | क्या होगा |
|---|---|---|
| 1 | बकाया भुगतान की जांच | पोर्टल पर आवंटी के सभी बकायों की ऑनलाइन स्थिति जांची जाएगी |
| 2 | हस्ताक्षरकर्ताओं का विवरण | कंपनी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं की जानकारी दर्ज होगी |
| 3 | आधार प्रमाणीकरण | आधार आधारित डिजिटल पहचान प्रमाणीकरण होगा |
| 4 | गवाहों का सत्यापन | गवाहों का विवरण और सत्यापन ऑनलाइन |
| 5 | इकाई कार्यालय की जांच | रीको की इकाई कार्यालय प्रक्रिया की जांच कर लीज एग्रीमेंट तैयार करेगी |
| 6 | इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर | आवंटी, गवाह और निगम अधिकारी तय क्रम में e-Signature करेंगे |
| 7 | दस्तावेज सील और प्रेषण | सील दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उप-पंजीयक कार्यालय भेजा जाएगा |
| 8 | संदर्भ संख्या और अपॉइंटमेंट | संदर्भ संख्या से आवंटी अपनी सुविधा पर अपॉइंटमेंट ले सकेगा |
एक काम के लिए अभी भी कार्यालय जाना होगा
रीको ई-लीज प्रणाली लगभग पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बना देगी, लेकिन एक चरण अभी भी भौतिक उपस्थिति मांगता है। पंजीयन अधिनियम, 1908 के तहत बायोमेट्रिक पहचान और फोटोग्राफी के लिए आवंटी और गवाहों को उप-पंजीयक कार्यालय में उपस्थित होना ही होगा। वहां स्टाम्प शुल्क और पंजीयन शुल्क जमा होने की पुष्टि तथा आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद लीज एग्रीमेंट का पंजीयन किया जाएगा। पंजीकृत दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से वापस रीको के इकाई कार्यालय को भेज दिया जाएगा।
पुरानी व्यवस्था में उद्यमियों को होती थी ये दिक्कतें
रीको ई-लीज प्रणाली से पहले स्थिति बिल्कुल अलग थी। भूखंड आवंटन के बाद लीज एग्रीमेंट भौतिक रूप से निष्पादित होता था — आम तौर पर पूरा प्रीमियम जमा करने के बाद 90 दिनों में फॉर्म ‘सी’ में और किस्तों में आवंटन की स्थिति में आवंटन की तिथि से 90 दिनों के भीतर फॉर्म ‘डी’ में। इसके लिए आवंटी को रीको के इकाई कार्यालय और उप-पंजीयक कार्यालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ता था।
राज्य या जिले से बाहर रहने वाले आवंटियों और कंपनियों के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं के लिए यह प्रक्रिया बेहद समय लेने वाली साबित होती थी। पहचान सत्यापन में देरी, दस्तावेजों की भौतिक आवाजाही और अभिलेखों की सुरक्षा जैसी चुनौतियां लगातार सामने आती थीं।
डिस्पोजल ऑफ लैंड रूल्स, 1979 में होगा संशोधन
रीको ई-लीज प्रणाली को कानूनी आधार देने के लिए रीको डिस्पोजल ऑफ लैंड रूल्स, 1979 में संशोधन किया जाएगा। इसी के जरिए मौजूदा ऑफलाइन व्यवस्था की जगह ऑनलाइन ई-लीज सिस्टम को नियमबद्ध किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार ई-पंजीयन तथा ऑनलाइन सेवाओं को बढ़ावा दे रही हैं, और रीको के इस कदम को उसी दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है। निगम का मानना है कि इससे दस्तावेजों की भौतिक आवाजाही कम होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी और उद्यमियों व निवेशकों के लिए व्यावसायिक प्रक्रियाएं काफी सरल हो जाएंगी।
पहले और अब: उद्यमियों के लिए क्या बदलेगा
| पहले (ऑफलाइन) | अब (रीको ई-लीज प्रणाली) |
|---|---|
| इकाई कार्यालय के बार-बार चक्कर | बकाया जांच और दस्तावेज सत्यापन ERP पोर्टल पर |
| दस्तावेजों की भौतिक आवाजाही | सील दस्तावेज इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भेजा जाएगा |
| आधार/पहचान सत्यापन के लिए कतारें | आधार आधारित ऑनलाइन प्रमाणीकरण |
| बिना ट्रैकिंग की कागजी फाइल | संदर्भ संख्या से अपॉइंटमेंट और ट्रैकिंग |
| संशोधित लीज के लिए फिर से लंबी प्रक्रिया | हस्तांतरण/संशोधन पूरक एग्रीमेंट भी डिजिटल |
संशोधित और पूरक लीज एग्रीमेंट भी डिजिटल होगा
रीको ई-लीज प्रणाली सिर्फ नई लीज तक सीमित नहीं रहेगी। लीजहोल्ड अधिकारों के हस्तांतरण, संस्था के गठन में परिवर्तन, अनुमत गतिविधि में परिवर्तन और मूल पंजीकृत लीज एग्रीमेंट में संशोधन जैसी स्थितियों में पूरक या संशोधित लीज एग्रीमेंट के निष्पादन की प्रक्रिया को भी इसी डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप सुगम बनाया जाएगा। यानी उद्योग के पूरे जीवनचक्र में कागजी दफ्तरबाजी कम होने की उम्मीद है।
रीको की डिजिटल पहल से जुड़े अहम अपडेट
गौरतलब है कि रीको ने हाल ही में 500 से अधिक औद्योगिक भूखंडों की ई-नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू की है, जिसमें ईएमडी जमा कराने की अंतिम तारीख 13 और 14 अक्टूबर है। इससे पहले रीको ने 94 औद्योगिक क्षेत्रों में 4,700 से ज्यादा भूखंडों के सीधे आवंटन की व्यवस्था भी लागू की थी। नागौर में JSW सीमेंट के नए संयंत्र जैसे बड़े निवेश भी प्रदेश में आ रहे हैं, ऐसे में ई-लीज जैसी व्यवस्था निवेशकों के लिए Ease of Doing Business को मजबूत करेगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: रीको ई-लीज प्रणाली से उद्यमियों को क्या फायदा होगा?
उत्तर: लीज डीड का निष्पादन ERP पोर्टल पर ऑनलाइन होगा — बकाया जांच, आधार प्रमाणीकरण, गवाह सत्यापन और ई-हस्ताक्षर सब डिजिटल। दफ्तरों के चक्कर और कागजी प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम होगा।
प्रश्न 2: क्या ई-लीज के बाद उप-पंजीयक कार्यालय जाना बंद हो जाएगा?
उत्तर: नहीं। पंजीयन अधिनियम, 1908 के तहत बायोमेट्रिक पहचान और फोटोग्राफी के लिए एक बार कार्यालय जाना होगा, लेकिन संदर्भ संख्या से अपॉइंटमेंट अपनी सुविधा पर ले सकेंगे।
प्रश्न 3: रीको ई-लीज प्रणाली लागू होने के लिए क्या बदलाव किया जा रहा है?
उत्तर: रीको डिस्पोजल ऑफ लैंड रूल्स, 1979 में संशोधन किया जाएगा, ताकि ऑनलाइन ई-लीज सिस्टम को कानूनी मान्यता मिल सके और मौजूदा ऑफलाइन व्यवस्था की जगह नई डिजिटल प्रक्रिया नियमबद्ध हो।
प्रश्न 4: क्या पुरानी लीज में संशोधन भी ऑनलाइन होगा?
उत्तर: हां। लीजहोल्ड अधिकारों के हस्तांतरण, संस्था के गठन या अनुमत गतिविधि में बदलाव और मूल पंजीकृत लीज एग्रीमेंट में संशोधन की प्रक्रिया को भी इसी डिजिटल व्यवस्था के अनुरूप सुगम बनाया जाएगा।