RIICO ई-नीलामी: 12 भूखण्डों के लिए 128 निवेशकों ने लगाई बोली, रीको को मिले ₹569 करोड़ का राजस्व

RIICO ई-नीलामी: 12 भूखण्डों के लिए 128 निवेशकों ने लगाई बोली, रीको को मिले ₹569 करोड़ का राजस्व

राजस्थान में उद्योग लगाने की सोच रहे निवेशकों के लिए एक अच्छी खबर है। राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (रीको) द्वारा आयोजित अविकसित और अर्धविकसित भूखण्डों की ई-नीलामी में निवेशकों का जबरदस्त रुझान देखने को मिला है। सिर्फ 12 भूखण्डों के लिए 128 निवेशकों ने बोली में हिस्सा लिया, और इस एक नीलामी से रीको को ₹569 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति हुई है। ये आंकड़े साफ बताते हैं कि राजस्थान में निवेश के लिए माहौल तेजी से बदल रहा है और उद्यमी अब प्रदेश की ओर गंभीरता से देख रहे हैं।

30 सितंबर 2026 को समाप्त हुई ऑनलाइन बोली में करीब 391 एकड़ क्षेत्रफल वाले ये 12 भूखण्ड औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन — तीनों गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए रखे गए थे। नीलामी का परिणाम बताता है कि रीको की नीतियों और योजनाओं पर निवेशकों का विश्वास लगातार बढ़ रहा है।

नीलामी में क्या-क्या हुआ: आंकड़ों पर एक नजर

इस ई-नीलामी की सबसे बड़ी खासियत ये रही कि लगभग हर भूखण्ड पर अच्छी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। 12 भूखण्डों के मुकाबले 128 निवेशकों का हिस्सा लेना मतलब औसतन हर भूखण्ड के लिए 10 से ज्यादा दावेदार। यही वजह है कि रीको को ₹569 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ।

  • कुल भूखण्ड: 12 (करीब 391 एकड़ क्षेत्रफल)
  • बोली लगाने वाले निवेशक: 128
  • रीको को मिला राजस्व: ₹569 करोड़
  • बोली समापन तिथि: 30 सितंबर 2026
  • भूखण्डों की श्रेणी: औद्योगिक, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन

ये भूखण्ड अविकसित और अर्धविकसित श्रेणी के थे, यानी निवेशकों को अपने उद्यम की जरूरत के हिसाब से इन्हें विकसित करने की सुविधा मिलेगी। उद्योग, लॉजिस्टिक्स और पर्यटन — तीनों क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें राजस्थान की अर्थव्यवस्था का भविष्य निहित है।

कहां-कहां के भूखण्ड नीलाम हुए: पूरी सूची

नीलामी में प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों के भूखण्ड शामिल थे। इससे साफ है कि निवेश सिर्फ जयपुर तक सीमित नहीं, बल्कि राज्य के कोने-कोने में फैल रहा है।

स्थान (जिला)भूखण्ड की संख्याक्षेत्र / श्रेणीमिली बोलियां
उदयपुर — माल की टूस2पर्यटन68
भिवाड़ी — राबड़का1लॉजिस्टिक्स7
दौसा — आई.जी.पी. जयरामपुरा1औद्योगिक3
दौसा — बांदीकुई (साउथ वेस्ट जोन)4औद्योगिक32
राजसमंद — तनाजा का बांसा2औद्योगिक6
उदयपुर — पीपाड़2औद्योगिक12

सबसे ज्यादा उत्साह पर्यटन भूखण्डों को लेकर दिखा। उदयपुर के माल की टूस में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से उपलब्ध कराए गए 2 भूखण्डों के लिए 68 उद्यमियों ने बोली लगाई। इन भूखण्डों पर पर्यटन आधारित परियोजनाएं स्थापित होने से प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र में निवेश को नई गति मिलने की उम्मीद है।

उदयपुर के पर्यटन भूखण्ड क्यों रहे खास

उदयपुर पहले से ही राजस्थान का पर्यटन केंद्र है, और यहां पर्यटन आधारित परियोजनाओं के लिए भूखण्डों पर 68 बोलियां आना कोई आश्चर्य नहीं। होटल, रिसॉर्ट, हेरिटेज प्रॉपर्टी या एडवेंचर टूरिज्म — हर तरह की पर्यटन परियोजना के लिए उदयपुर की लोकेशन प्रीमियम मानी जाती है।

माल की टूस के इन दो भूखण्डों पर आने वाली परियोजनाओं से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी खुलेंगे और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा पहुंचेगा। पर्यटन क्षेत्र में एक प्रोजेक्ट के साथ होटल स्टाफ, परिवहन, गाइड, खानपान और हस्तशिल्प जैसे कई सहायक रोजगार भी जुड़ते हैं।

निवेशकों का बढ़ता भरोसा: रीको की नीतियों का असर

रीको ने हाल के वर्षों में भूखण्ड आवंटन की प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और ऑनलाइन बनाने पर जोर दिया है। ई-नीलामी, ई-लॉटरी और प्रत्यक्ष आवंटन जैसे माध्यमों से निवेशक घर बैठे ही भूखण्ड के लिए आवेदन और बोली लगा सकते हैं। इसी पारदर्शिता का नतीजा है कि निवेशकों का भरोसा बढ़ रहा है।

इस नीलामी से पहले रीको ने प्रत्यक्ष आवंटन योजना का 14वां चरण भी शुरू किया था, जिसमें 94 औद्योगिक क्षेत्रों में 4,700 से ज्यादा भूखण्ड उपलब्ध कराए गए हैं। इसके अलावा जोधपुर-पाली-मारवाड़ इंडस्ट्रियल एरिया (JPMIA) में 30 भूखण्डों के आवंटन की प्रक्रिया भी चल रही है, जहां 31 अक्टूबर 2026 तक आवेदन किए जा सकते हैं। मतलब, उद्योग लगाने के इच्छुक उद्यमियों के लिए इस समय राजस्थान में विकल्पों की भरमार है।

लीज की शर्तें: 33 साल, फिर नवीनीकरण का विकल्प

निवेशकों के लिए सबसे जरूरी जानकारी है लीज की शर्तें। रीको इन भूखण्डों का आवंटन प्रारंभ में 33 वर्ष की अवधि के लिए करती है। इसके बाद लीज अवधि को दो बार 33-33 वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है, यानी कुल मिलाकर निवेशक लंबे समय तक निश्चिंत होकर अपना उद्यम चला सकता है।

नवीनीकरण के समय संबंधित औद्योगिक क्षेत्र में प्रचलित आवंटन दर के आधार पर 10 प्रतिशत भूमि प्रीमियम देना होगा। ये शर्तें निवेशकों को लंबी अवधि की योजना बनाने का विश्वास देती हैं, जो किसी भी बड़े निवेश के लिए सबसे जरूरी होती हैं।

राजस्थान की अर्थव्यवस्था के लिए इसका मतलब

₹569 करोड़ की ये नीलामी अकेली घटना नहीं है। ये उस बड़ी तस्वीर का हिस्सा है जिसमें राजस्थान औद्योगिक निवेश के मानचित्र पर तेजी से उभर रहा है। जब 128 निवेशक 12 भूखण्डों के लिए बोली लगाते हैं, तो इसका मतलब है कि मांग आपूर्ति से कहीं ज्यादा है — और यही अर्थव्यवस्था की सेहत का अच्छा संकेत है।

इन परियोजनाओं के धरातल पर उतरने के बाद औद्योगिक उत्पादन बढ़ेगा, लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत होगा, पर्यटन को नया विस्तार मिलेगा और सबसे महत्वपूर्ण — हजारों युवाओं के लिए सीधे और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न: RIICO की इस ई-नीलामी में कितने भूखण्ड थे और कितना राजस्व मिला?

उत्तर: इस नीलामी में करीब 391 एकड़ क्षेत्रफल वाले 12 भूखण्ड थे, जिनके लिए 128 निवेशकों ने बोली लगाई। इससे रीको को ₹569 करोड़ के राजस्व की प्राप्ति हुई।

प्रश्न: सबसे ज्यादा बोली किस भूखण्ड पर आई?

उत्तर: उदयपुर के माल की टूस में पर्यटन के 2 भूखण्डों के लिए सबसे ज्यादा — 68 उद्यमियों ने बोली में हिस्सा लिया।

प्रश्न: रीको भूखण्ड की लीज अवधि कितनी होती है?

उत्तर: प्रारंभ में 33 वर्ष की लीज अवधि मिलती है, जिसे दो बार 33-33 वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है। नवीनीकरण पर 10 प्रतिशत भूमि प्रीमियम देना होता है।

प्रश्न: उद्योग लगाने के इच्छुक निवेशक अभी कहां आवेदन कर सकते हैं?

उत्तर: रीको की प्रत्यक्ष आवंटन योजना के 14वें चरण में 12 अक्टूबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन किए जा सकते हैं, और JPMIA के 30 भूखण्डों के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक आवेदन का मौका है।

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