Rajasthan Sharab Thekedar Dharna: आबकारी नीति में बार-बार बदलाव के खिलाफ जयपुर में अनिश्चितकालीन धरना — 6 बड़ी मांगें, दुकान का समय रात 11 बजे तक करने की मांग

राजस्थान के शराब ठेकेदार इस बार आर-पार के मूड में हैं। बुधवार को प्रदेश भर से आए ठेकेदार जयपुर के झालाना डूंगरी स्थित आबकारी आयुक्त कार्यालय के सामने धरने पर बैठ गए। राजस्थान लिकर कॉन्ट्रेक्टर वेलफेयर एसोसिएशन ने धरने को अनिश्चितकालीन घोषित किया है। ठेकेदारों का कहना है कि विभाग साल के बीच में बार-बार नीति बदल देता है, जबकि टेंडर के समय तय शर्तें 31 मार्च तक लागू रहनी चाहिए। गारंटी समायोजन, पेनल्टी में राहत, टेट्रा पैक की अनिवार्यता खत्म करने और दुकानों का समय बढ़ाने जैसी 6 प्रमुख मांगों को लेकर यह प्रदर्शन हो रहा है।

झालाना डूंगरी में क्यों जुटे प्रदेश भर के ठेकेदार

धरना बुधवार को जयपुर में आयुक्त कार्यालय के सामने शुरू हुआ। इसमें अलग-अलग जिलों से आए अनुज्ञाधारी शामिल हुए। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विनोद पारेता ने कहा कि जब ठेकेदार टेंडर लेता है तो विभाग के साथ उसका अनुबंध होता है, जिसे आबकारी पॉलिसी कहा जाता है। ठेकेदार उसी पॉलिसी को पढ़कर अपना नफा-नुकसान तय करता है और गारंटी राशि जमा करता है।

पारेता का आरोप है कि दुकान चालू होने के बाद विभाग बीच में नए नियम थोप देता है, जिससे पूरी गणना बिगड़ जाती है। उन्होंने कहा कि विभाग अपनी ही पॉलिसी पर नहीं टिकता। अगर पॉलिसी में किए बदलाव वापस लिए जाते हैं और मांगें पूरी होती हैं, तभी वे धरने से उठेंगे।

ठेकेदारों की 6 प्रमुख मांगें क्या हैं

धरने में रखी गई मांगें ठेकेदारों के रोजमर्रा के कारोबार से जुड़ी हैं। एसोसिएशन ने इन्हें बिंदुवार विभाग के सामने रखा है।

क्रम प्रमुख मांग ठेकेदारों की दलील
1 मार्च में उठाई अतिरिक्त गारंटी का पूर्ण समायोजन सभी अनुज्ञाधारियों को मिले अतिरिक्त मदिरा उठाने पर गलत या भिन्न गणना किए बिना पूरा समायोजन हो
2 टेट्रा पैक की अनिवार्य खरीद और उठाव की बाध्यता खत्म हो ग्राहकों में इसकी मांग नहीं है, फिर भी खरीदना पड़ता है
3 देसी मदिरा में न्यूनतम 40 प्रतिशत अनिवार्यता का आदेश हटे GSM उठाव 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने से दबाव बढ़ा है
4 शराब दुकानों का समय रात 11 बजे तक किया जाए पड़ोसी राज्यों में रात 10 से 11 बजे तक दुकानें खुलती हैं
5 अक्टूबर से देय वार्षिक लाइसेंस शुल्क यानी ALF का लाभ और समायोजन तुरंत मिले समय पर लाभ न मिलने से नकदी प्रवाह प्रभावित होता है
6 देसी मदिरा में GSM की आपूर्ति सुचारू और पर्याप्त मात्रा में हो अभी आपूर्ति पूरी नहीं हो रही, जिससे बिक्री प्रभावित है

इन मांगों के अलावा गारंटी समायोजन और पेनल्टी में राहत भी मुख्य मुद्दों में शामिल है। ठेकेदारों का कहना है कि जब आपूर्ति ही पूरी नहीं मिलती तो उठाव का लक्ष्य कैसे पूरा होगा और उस पर पेनल्टी लगाना कहां तक उचित है।

टेट्रा पैक और GSM पर क्यों है सबसे ज्यादा नाराजगी

धरने में सबसे तीखी नाराजगी दो फैसलों पर दिखी — टेट्रा पैक को अनिवार्य करना और GSM उठाव बढ़ाना। पारेता ने कहा कि टेट्रा पैक लेना कंपलसरी कर दिया गया है, जबकि ग्राहकों में उसकी डिमांड नहीं है। जो पैक ग्राहक लेना ही नहीं चाहता, उसे जबरन उठाने से ठेकेदार का पैसा फंसता है और स्टॉक पड़ा रहता है।

दूसरा मुद्दा GSM का है। ठेकेदारों के अनुसार GSM उठाव पहले 25 प्रतिशत था, जिसे बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया। अधिक माल के एडजस्टमेंट को अप्रैल तक करने की बात हुई थी, लेकिन वह भी नहीं किया गया। ऊपर से देसी मदिरा में GSM की आपूर्ति पूरी नहीं हो रही। यानी उठाव का प्रतिशत बढ़ा दिया गया और आपूर्ति अधूरी है — इसी दोहरी मार को ठेकेदार विरोध की बड़ी वजह बता रहे हैं।

दुकान का समय रात 8 से 11 बजे क्यों मांग रहे हैं ठेकेदार

धरने में दुकानों के समय को लेकर भी पुरानी मांग फिर जोर से उठी। राजस्थान लिकर वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष नीलेश मेवाड़ा ने कहा कि वे लंबे समय से ठेका खुलने का समय बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। पड़ोसी राज्यों में दुकानें रात 10 से 11 बजे तक खुलती हैं, लेकिन राजस्थान में अभी रात 8 बजे तक का ही समय है।

मेवाड़ा का तर्क है कि समय बढ़ने से काफी समस्याएं हल हो सकती हैं। शाम को काम से लौटने वाले ग्राहकों को सीमित समय में भीड़ लगानी पड़ती है और ठेकेदार की बिक्री भी सीमित घंटों में सिमट जाती है। उन्होंने कहा कि ठेकेदार चाहते हैं कि व्यापार अच्छी तरह चले, ताकि सरकार को भी ज्यादा राजस्व मिल सके। फिलहाल विभाग की ओर से इस मांग पर कोई नया आश्वासन सामने नहीं आया है।

आम लोगों और सरकारी राजस्व पर क्या पड़ सकता है असर

यह धरना सिर्फ ठेकेदारों का मामला नहीं है। आबकारी विभाग राजस्व के बड़े स्रोतों में से एक है। अगर टकराव लंबा खिंचता है और दुकानों के संचालन पर असर पड़ता है तो राजस्व वसूली भी प्रभावित हो सकती है। ठेकेदार खुद भी यही दलील दे रहे हैं कि स्थिर नीति होगी तो व्यापार चलेगा और सरकार को राजस्व मिलेगा।

आम उपभोक्ता के लिहाज से दुकानों का समय और देसी मदिरा की उपलब्धता सीधे बाजार से जुड़े हैं। अगर आपूर्ति सुधरती है तो ग्राहक को दिक्कत कम होगी। वहीं अगर धरना लंबा चला तो उपभोक्ताओं को परेशानी हो सकती है, हालांकि फिलहाल धरना प्रदर्शन तक सीमित है। अब नजर इस पर है कि विभाग बातचीत का रास्ता निकालता है या टकराव और बढ़ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: शराब ठेकेदारों का धरना कहां और कब शुरू हुआ?

जवाब: धरना बुधवार को जयपुर के झालाना डूंगरी स्थित आयुक्त कार्यालय के सामने शुरू हुआ। एसोसिएशन ने इसे अनिश्चितकालीन घोषित किया है।

सवाल: ठेकेदारों की सबसे बड़ी शिकायत क्या है?

जवाब: सबसे बड़ी शिकायत यह है कि विभाग साल के बीच में बार-बार नीति बदल देता है। ठेकेदारों का कहना है कि टेंडर के समय तय पॉलिसी 31 मार्च तक लागू रहनी चाहिए।

सवाल: GSM उठाव को लेकर विवाद क्या है?

जवाब: GSM उठाव 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है, जबकि आपूर्ति पूरी नहीं हो रही और अप्रैल तक एडजस्टमेंट भी नहीं हुआ। इसी वजह से वे यह आदेश हटाने की मांग कर रहे हैं।

सवाल: दुकानों का समय कितना बढ़ाने की मांग है?

जवाब: ठेकेदार दुकानों का समय रात 8 बजे से बढ़ाकर 11 बजे तक करने की मांग कर रहे हैं। पड़ोसी राज्यों में दुकानें रात 10 से 11 बजे तक खुलती हैं।


नोट: यह जानकारी 30 सितंबर 2026 को जयपुर में आबकारी आयुक्त कार्यालय के सामने हुए ठेकेदारों के धरने पर आधारित है। मांगों पर अंतिम निर्णय आबकारी विभाग और राज्य सरकार के स्तर पर होगा।

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