जयपुर वालों और वन्यजीव प्रेमियों के लिए बुधवार को एक अच्छी खबर आई। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में करीब चार हफ्ते से बंद पड़ी टाइगर और लायन सफारी फिर से शुरू कर दी गई है। 2 सितंबर को हुए दर्दनाक हादसे के बाद इस सफारी को बंद कर दिया गया था, जिसमें एक महिला मजदूर की जान चली गई थी। अब वन विभाग ने सुरक्षा इंतजामों की पूरी समीक्षा करने, कमियां दूर करने और जिम्मेदार अधिकारियों की स्वीकृति लेने के बाद ही सफारी को दोबारा खोलने का फैसला किया है। यानी पर्यटक एक बार फिर बाघ और शेर को उनके एनक्लोजर में करीब से देख सकेंगे, लेकिन इस बार सुरक्षा को लेकर विभाग पहले से कहीं ज्यादा सतर्क नजर आ रहा है।
आखिर सफारी बंद क्यों हुई थी, पूरी कहानी समझिए
इस पूरी घटना की जड़ 2 सितंबर की सुबह में है। उस दिन हमेशा की तरह कुछ महिला मजदूर पार्क में काम करने पहुंची थीं। बाघ ‘शिवाजी’ के एनक्लोजर में कुल 7 महिलाएं घास काटने का काम कर रही थीं। आरोप है कि इसी दौरान वन विभाग के केयरटेकर ने मजदूरों को बाहर निकाले बिना ही पिंजरे का गेट खोल दिया। गेट खुलते ही बाघ डिस्प्ले एरिया में आ गया और वहां काम कर रही महिलाओं के पीछे दौड़ पड़ा।
हालात अचानक इतने बिगड़ गए कि महिलाओं को अपनी जान बचाने के लिए पेड़ों और जाल पर चढ़ना पड़ा। इसी अफरा-तफरी में बाघ ने एक महिला पर हमला करके उसे नीचे गिरा दिया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। बाकी 6 महिलाएं किसी तरह जाल पर चढ़कर बाहर की ओर कूद गईं, जबकि एक महिला पेड़ पर चढ़कर बच गई। इस हादसे ने पूरे पार्क प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे कि आखिर एनक्लोजर में मजदूरों के होते हुए गेट क्यों खोला गया।
हादसे के बाद 4 सितंबर से टाइगर और लायन सफारी को अगले आदेश तक बंद कर दिया गया। बाघ शिवाजी को भी तभी से क्वॉरेंटाइन में रखा गया था। बाघ की सफारी बंद होने का असर शेरों की सफारी पर भी पड़ा और उसका संचालन भी प्रभावित रहा। करीब एक महीने तक सफारी के वाहन पार्क में खड़े रहे और जयपुर घूमने आए पर्यटकों को बिना सफारी किए ही लौटना पड़ा।
अब क्या बदला, सफारी शुरू करने से पहले क्या हुआ
सफारी को यूं ही अचानक नहीं खोला गया है। एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत के मुताबिक, सफारी बहाल करने से पहले मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक केसी अरुण प्रसाद और डीएफओ आशीष व्यास की स्वीकृति ली गई है। वन विभाग ने पार्क की सुरक्षा व्यवस्थाओं की बारीकी से समीक्षा की और जो कमियां सामने आईं, उन्हें दूर किया गया। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और सभी जरूरी इंतजाम पूरे होने के बाद ही पर्यटकों के लिए गेट दोबारा खोले गए हैं।
विभाग का यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि हादसे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही था कि क्या पार्क में काम करने वाले कर्मचारियों और घूमने आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम हैं या नहीं। चार हफ्ते की बंदी के दौरान यही समीक्षा चली और अब विभाग दावा कर रहा है कि आवश्यक सुधार पूरे कर लिए गए हैं। पर्यटकों के लिए राहत की बात यह है कि इंतजार खत्म हो गया है और वे फिर से टाइगर व लायन सफारी का लुत्फ उठा सकेंगे।
घटना से जुड़ी अहम तारीखें और तथ्य एक नजर में
| जानकारी | विवरण |
|---|---|
| हादसा कब हुआ | 2 सितंबर 2026, सुबह |
| हादसे में किसकी मौत हुई | एनक्लोजर में काम कर रही एक महिला मजदूर |
| एनक्लोजर में कितनी महिलाएं थीं | कुल 7, जिनमें 6 बाल-बाल बच गईं |
| बाघ का नाम | शिवाजी, हादसे के बाद क्वॉरेंटाइन में रहा |
| सफारी कब बंद हुई | 4 सितंबर 2026 से |
| सफारी कब दोबारा शुरू हुई | 30 सितंबर 2026, करीब 4 हफ्ते बाद |
| स्वीकृति किसकी मिली | मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक केसी अरुण प्रसाद और डीएफओ आशीष व्यास |
| जानकारी किसने दी | एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत |
पर्यटकों के लिए क्यों खास है नाहरगढ़ की यह सफारी
जयपुर आने वाले सैलानियों के लिए नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क हमेशा से पसंदीदा जगहों में रहा है। शहर के पास अरावली की पहाड़ियों के बीच बना यह पार्क उन चुनिंदा जगहों में है जहां पर्यटक एक ही परिसर में बाघ और शेर दोनों की सफारी का अनुभव ले सकते हैं। यही वजह है कि सफारी बंद रहने के एक महीने में पार्क आने वाले लोगों को अधूरा अनुभव मिला और सफारी के वाहन खड़े रहने से पार्क की रौनक भी फीकी रही।
अब सफारी बहाल होने से वीकेंड और आने वाले पर्यटन सीजन में पार्क में फिर से भीड़ बढ़ने की उम्मीद है। हालांकि, इस हादसे ने एक कड़वी सीख भी दी है कि वन्यजीवों के साथ काम करते समय एक छोटी सी लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। एनक्लोजर में मजदूरों के काम और जानवरों को बाहर निकालने के समय के बीच तालमेल कितना जरूरी है, यह बात इस घटना ने साफ कर दी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि विभाग ने समीक्षा में सिर्फ कागजी सुधार नहीं किए होंगे, बल्कि जमीन पर भी वही सतर्कता नजर आएगी जिसका दावा किया जा रहा है।
पर्यटकों को भी अपनी ओर से पार्क के नियमों का पालन करना चाहिए। सफारी के दौरान वाहन से उतरना, शोर मचाना या जानवरों को चिढ़ाने जैसी हरकतें न सिर्फ नियमों के खिलाफ हैं, बल्कि खतरनाक भी हो सकती हैं। बाघ और शेर जैसे जानवरों को सुरक्षित दूरी से देखना ही इस अनुभव को यादगार और सुरक्षित दोनों बनाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: नाहरगढ़ में टाइगर और लायन सफारी कब दोबारा शुरू हुई?
जवाब: सफारी बुधवार, 30 सितंबर 2026 को दोबारा शुरू की गई। यह करीब चार हफ्ते तक बंद रही थी।
सवाल 2: सफारी बंद क्यों की गई थी?
जवाब: 2 सितंबर को बाघ शिवाजी के एनक्लोजर में हुए हादसे में एक महिला मजदूर की मौत हो गई थी। इसके बाद 4 सितंबर से सफारी अगले आदेश तक बंद कर दी गई थी।
सवाल 3: सफारी शुरू करने की मंजूरी किसने दी?
जवाब: एसीएफ जितेंद्र सिंह शेखावत के अनुसार, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक केसी अरुण प्रसाद और डीएफओ आशीष व्यास की स्वीकृति के बाद, सुरक्षा समीक्षा पूरी करके सफारी बहाल की गई है।
सवाल 4: बाघ शिवाजी का क्या हुआ?
जवाब: हादसे के बाद से बाघ शिवाजी क्वॉरेंटाइन में था। इसी दौरान टाइगर सफारी के साथ लायन सफारी का संचालन भी प्रभावित रहा था, जो अब बहाल कर दिया गया है।