राजस्थान में इलाज की सुविधाएं बेहतर करने की कोशिशों को केंद्र सरकार से बड़ी राहत मिली है। केंद्र ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन यानी PM-ABHIM की अवधि 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी है। सुनने में यह सिर्फ एक तारीख का बदलाव लग सकता है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका मतलब है कि प्रदेश में जो स्वास्थ्य सुविधाओं के काम पहले से मंजूर होकर चल रहे हैं, वे अब बिना रुके आगे बढ़ते रहेंगे — न काम अधूरे छूटेंगे, न मंजूरी की लंबी प्रक्रिया दोबारा झेलनी पड़ेगी। गांव के स्वास्थ्य केंद्र से लेकर जिला अस्पताल तक, हर स्तर पर इसका असर दिखेगा।
क्या है केंद्र सरकार का ताजा फैसला?
केंद्र सरकार ने PM-ABHIM की समय-सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी है। इसके बाद मिशन के तहत पहले से स्वीकृत स्वास्थ्य गतिविधियां और निर्माण कार्य आगे भी जारी रहेंगे। विभाग ने साफ किया है कि ये काम तय दिशा-निर्देशों, मंजूर मानकों और उपलब्ध बजट के दायरे में ही पूरे किए जाएंगे। यानी विस्तार का फायदा उन्हीं कामों को मिलेगा जो पहले से पाइपलाइन में हैं — स्वास्थ्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण, जांच सुविधाओं का विस्तार और अस्पतालों की बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्य अब तय समय में पूरे करने का दबाव और अवसर दोनों रहेगा।
PM-ABHIM आखिर है क्या? आसान भाषा में समझिए
PM-ABHIM को देश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के सबसे बड़े कार्यक्रमों में गिना जाता है। इसकी घोषणा बजट 2021-22 में हुई थी और अक्टूबर 2021 में इसे शुरू किया गया, शुरुआती प्रावधान करीब 64,180 करोड़ रुपये का था। इसका मकसद सिर्फ बड़े अस्पताल बनाना नहीं है, बल्कि इलाज की सुविधा मरीज के घर के पास तक पहुंचाना है, ताकि छोटी बीमारी के लिए भी लोगों को बड़े शहरों के चक्कर न काटने पड़ें।
| मिशन का प्रमुख अंग | इससे क्या होता है |
|---|---|
| ग्रामीण और शहरी स्वास्थ्य व कल्याण केंद्र | गांव और मोहल्ला स्तर पर प्राथमिक इलाज, जांच और दवा की सुविधा मजबूत होती है |
| ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयां | ब्लॉक स्तर पर जांच और निगरानी की व्यवस्था बनती है |
| एकीकृत सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रयोगशालाएं (IPHL) | जिला स्तर पर बीमारियों की जांच एक ही छत के नीचे होती है |
| क्रिटिकल केयर अस्पताल ब्लॉक | गंभीर मरीजों के लिए जिला अस्पतालों में विशेष इलाज की सुविधा बढ़ती है |
| रोग निगरानी व्यवस्था | संक्रामक बीमारियों पर नजर रखकर समय पर चेतावनी मिलती है |
महामारी के दौर ने सिखाया था कि संकट आने पर सबसे पहले स्वास्थ्य ढांचे की ही परीक्षा होती है। PM-ABHIM उसी सीख से निकला कार्यक्रम है, जिसमें प्राथमिक इलाज से लेकर गंभीर देखभाल तक की पूरी कड़ी मजबूत करने की योजना है।
राजस्थान के लिए इस विस्तार के क्या मायने हैं?
राजस्थान भौगोलिक रूप से देश का सबसे बड़ा राज्य है। यहां कई इलाके ऐसे हैं जहां जिला अस्पताल तक पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। ऐसे में ब्लॉक और जिला स्तर पर जांच व इलाज की सुविधा मजबूत होना किसी वरदान से कम नहीं। अवधि बढ़ने से प्रदेश में चल रहे स्वीकृत कार्य अब 31 मार्च 2027 तक पूरे किए जा सकेंगे। इसका सीधा फायदा उन जिलों को मिलेगा जहां स्वास्थ्य केंद्रों के सुदृढ़ीकरण, प्रयोगशालाओं और क्रिटिकल केयर से जुड़े काम प्रगति पर हैं।
एक और अहम बात — काम रुकने से लागत बढ़ती है और फायदा जनता को देर से मिलता है। समय-सीमा बढ़ने से प्रशासन पर दबाव रहेगा कि स्वीकृत काम नई अंतिम तारीख से पहले जमीन पर उतारे जाएं। ये गतिविधियां केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से आगे बढ़ेंगी, जैसा कि विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी संकेत दिया है।
मंत्री और प्रमुख सचिव ने क्या कहा?
प्रदेश के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि PM-ABHIM के जारी रहने से प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाओं और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के प्रयासों को निरंतर सहारा मिलेगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आमजन को बेहतर, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए लगातार काम कर रही है।
वहीं प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने कहा कि अवधि बढ़ने से स्वीकृत गतिविधियों को निरंतर गति मिलेगी और केंद्र-राज्य समन्वय से स्वास्थ्य सुविधाएं और बेहतर होंगी। दोनों बयानों से साफ है कि राज्य सरकार इस विस्तार को अपने स्वास्थ्य सुधार कार्यक्रमों के लिए जरूरी मान रही है।
आम मरीज को इससे क्या मिलेगा? ये बातें आपके काम की हैं
आधे-अधूरे काम पूरे होंगे: जिन स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों में स्वीकृत काम चल रहे हैं, वे अब नई समय-सीमा के भीतर पूरे होने की उम्मीद है।
जिला स्तर पर जांच आसान होगी: एकीकृत प्रयोगशालाओं और ब्लॉक इकाइयों के मजबूत होने से कई जांचों के लिए बड़े शहर नहीं जाना पड़ेगा।
गंभीर मरीजों को नजदीक इलाज: क्रिटिकल केयर सुविधाएं बढ़ने से गंभीर हालत में मरीज को दूर के बड़े अस्पताल ले जाने की मजबूरी धीरे-धरे कम होगी।
कोई नया आवेदन नहीं करना है: यह विस्तार सरकारी स्तर का फैसला है। एक मरीज के तौर पर आपको इसके लिए कोई फॉर्म नहीं भरना है — फायदा बेहतर सुविधाओं के रूप में अपने आप मिलेगा।
तारीख याद रखें: मिशन की नई अंतिम तारीख 31 मार्च 2027 है। अपने जिले में चल रहे स्वास्थ्य कार्यों की प्रगति पर नजर रखना हर नागरिक का हक है।
कुल मिलाकर यह फैसला राजस्थान के लिए राहत भरा है, लेकिन असली परीक्षा अब क्रियान्वयन की होगी। तारीख बढ़ना तभी सार्थक होगा जब स्वीकृत काम समय पर और गुणवत्ता के साथ पूरे हों।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: PM-ABHIM की अवधि कब तक बढ़ाई गई है?
उत्तर: केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (PM-ABHIM) की अवधि 31 मार्च 2027 तक बढ़ा दी है।
प्रश्न 2: इस विस्तार से राजस्थान को क्या फायदा होगा?
उत्तर: प्रदेश में मिशन के तहत पहले से स्वीकृत स्वास्थ्य कार्य — जैसे स्वास्थ्य केंद्रों का सुदृढ़ीकरण, जांच सुविधाएं और अस्पतालों की बुनियादी सुविधाएं — बिना रुके जारी रहेंगे और नई समय-सीमा के भीतर पूरे किए जा सकेंगे।
प्रश्न 3: क्या आम नागरिक को इस योजना के लिए आवेदन करना होगा?
उत्तर: नहीं। यह स्वास्थ्य ढांचे से जुड़ा सरकारी कार्यक्रम है। इसका लाभ नागरिकों को बेहतर अस्पताल, जांच और इलाज की सुविधाओं के रूप में मिलता है, किसी व्यक्तिगत आवेदन के रूप में नहीं।
प्रश्न 4: PM-ABHIM के तहत मुख्य रूप से कौन-कौन से काम होते हैं?
उत्तर: इस मिशन के तहत ग्रामीण व शहरी स्वास्थ्य केंद्रों को मजबूत करना, ब्लॉक सार्वजनिक स्वास्थ्य इकाइयां बनाना, जिला स्तर पर एकीकृत प्रयोगशालाएं स्थापित करना, क्रिटिकल केयर ब्लॉक तैयार करना और रोग निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करना जैसे काम शामिल हैं।
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