बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ के किसान और व्यापारी आज एक खुशखबरी के साथ उठे। कृषि उपज मंडी समिति श्रीडूंगरगढ़ के मुख्य मंडी यार्ड में 1 करोड़ 61 लाख 70 हजार रुपये के विकास कार्यों को प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति मिल गई है। राजस्थान सरकार के कृषि विपणन विभाग ने इस स्वीकृति के आदेश जारी कर दिए हैं। मंडी के उत्तर दिशा में स्थित पार्किंग क्षेत्र में सीमेंट कंक्रीट का पेवमेंट बिछेगा, जिससे बरसात के दिनों में कीचड़ से जूझने वाले किसानों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की सबसे बड़ी परेशानी दूर होगी।
विधायक ताराचंद सारस्वत ने इस स्वीकृति के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और राज्य सरकार का आभार जताया है। मंडी के व्यापारियों ने भी विधायक सारस्वत को धन्यवाद दिया है। दरअसल, यह स्वीकृति अकेली नहीं है — यह मुख्यमंत्री द्वारा प्रदेश की 30 कृषि उपज मंडी समितियों के लिए मंजूर किए गए 57 करोड़ 41 लाख रुपये के बड़े विकास पैकेज का हिस्सा है।
श्रीडूंगरगढ़ मंडी में क्या-क्या बदलेगा
स्वीकृति आदेश के मुताबिक मुख्य मंडी यार्ड के उत्तर दिशा में मौजूद पार्किंग क्षेत्र में सीमेंट कंक्रीट पेवमेंट का निर्माण कराया जाएगा। इस एक काम पर ही 161.70 लाख रुपये खर्च होंगे। मंडी में काम करने वालों के लिए यह खबर इसलिए बड़ी है, क्योंकि मंडी यार्ड में पार्किंग की अव्यवस्था लंबे समय से किसानों और व्यापारियों की शिकायत रही है। बरसात के मौसम में कच्ची पार्किंग में पानी भर जाता है, ट्रॉलियां फंसती हैं और उपज उतारने-चढ़ाने में घंटों की बर्बादी होती है।
पेवमेंट बनने के बाद पार्किंग क्षेत्र व्यवस्थित और सुविधाजनक होगा। मंडी में आने वाले किसानों, व्यापारियों और आमजन को आवागमन और पार्किंग की बेहतर सुविधा मिलेगी। खासकर रबी सीजन के दौरान जब मंडियों में आवक बढ़ती है, तब पक्की पार्किंग की अहमियत और बढ़ जाती है।
57.41 करोड़ का पैकेज: किन 30 मंडियों को मिलेगा फायदा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की 30 कृषि उपज मंडी समितियों में आधारभूत ढांचे को मजबूत करने के लिए कुल 57 करोड़ 41 लाख रुपये की लागत के विकास कार्यों को स्वीकृति दी है। इस राशि से तीन तरह के काम कराए जाएंगे — मंडी यार्ड का निर्माण, विद्युत कार्य, और संपर्क सड़कों का निर्माण व क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत।
सरकारी घोषणा के अनुसार इन मंडी समितियों को लाभ मिलेगा: बीकानेर (बज्जू, नोखा, खाजूवाला, श्रीडूंगरगढ़), सीकर (पलसाना, अनाज मंडी सीकर), टोंक (उनियारा, निवाई), दौसा (मंडावरी, महवा), बारां (बारां, नाहरगढ़, समरानियां), श्रीगंगानगर (रिडमलसर, घड़साना), ब्यावर (बिजयनगर), चूरू (सादुलपुर), चित्तौड़गढ़ (कपासन), झालावाड़ (चौमहला), हनुमानगढ़ (संगरिया), नागौर (नागौर, डीडवाना, डेगाना), उदयपुर (अनाज मंडी), कोटा (अनाज मंडी), डीग (कामां), जैसलमेर, प्रतापगढ़, भीनमाल और मदनगंज-किशनगढ़।
इस सूची में बीकानेर जिले की सबसे ज्यादा चार मंडियां हैं। बीकानेर संभाग रबी की फसलों का बड़ा केंद्र है, जहां सरसों, चना और गेहूं की आवक सबसे ज्यादा रहती है।
पैसा कहां लगेगा: यार्ड, बिजली और संपर्क सड़कें
सरकार के मुताबिक स्वीकृति की राशि तीन मुख्य मदों में खर्च होगी। पहला — मंडी यार्ड का निर्माण और सुधार। मंडी यार्ड वह जगह है जहां किसान अपनी उपज उतारते हैं, नीलामी होती है और व्यापारी खरीद करते हैं। पुराने और जर्जर यार्डों में फर्श टूटा होता है, नीलामी प्लेटफॉर्म अधूरे होते हैं और शेड की कमी रहती है। नए निर्माण से उपज की खरीद-बिक्री की प्रक्रिया व्यवस्थित होगी।
दूसरा मद है विद्युत कार्य। मंडियों में बिजली की व्यवस्था दुरुस्त होने से नीलामी हॉल, कार्यालय, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। कई मंडियों में शाम को नीलामी के समय बिजली कटौती की शिकायत रहती है, जिससे किसानों को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
तीसरा और सबसे अहम मद है संपर्क सड़कें। मंडियों तक जाने वाली कच्ची और टूटी-फूटी सड़कों का निर्माण और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराई जाएगी। सरकार का तर्क है कि अच्छी संपर्क सड़कों से गांवों के किसान अपनी उपज आसानी से मंडी तक ला सकेंगे, फसलों की आवक बढ़ेगी और मंडी राजस्व में भी वृद्धि होगी।
किसानों के लिए इसका मतलब क्या है
रबी सीजन की दहलीज पर खड़े किसानों के लिए मंडी की बुनियादी सुविधाएं सीधे उनकी जेब से जुड़ी हैं। पक्की पार्किंग और सुधरे यार्ड का मतलब है कि ट्रैक्टर-ट्रॉली फंसने का डर खत्म, उपज उतारने में लगने वाला समय कम, और बरसात में फसल के भीगने का खतरा घटेगा।
अच्छी संपर्क सड़कों का सीधा असर परिवहन लागत पर पड़ेगा। गांव से मंडी तक का सफर आसान होने पर किसान अपनी उपज दूर की मंडी में भी बेच सकेंगे, जहां भाव बेहतर मिले। इससे उनकी सौदेबाजी की ताकत बढ़ेगी। मंडी राजस्व बढ़ने से आगे चलकर मंडियों में और सुविधाएं बढ़ाने की गुंजाइश भी बनेगी।
कृषि विपणन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विकास कार्य चरणबद्ध तरीके से शुरू होंगे और संबंधित मंडी समितियों को काम की समय-सीमा तय करके रिपोर्ट देनी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: 30 मंडियों के लिए 57.41 करोड़ रुपये की स्वीकृति किसने दी?
उत्तर: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रदेश की 30 कृषि उपज मंडी समितियों में आधारभूत ढांचे के विकास के लिए 57 करोड़ 41 लाख रुपये के प्रस्ताव को स्वीकृति दी है। स्वीकृति आदेश कृषि विपणन विभाग ने जारी किए हैं।
प्रश्न 2: श्रीडूंगरगढ़ मंडी को कितनी राशि मिली और किस काम के लिए?
उत्तर: कृषि उपज मंडी समिति श्रीडूंगरगढ़ के मुख्य मंडी यार्ड में 1 करोड़ 61 लाख 70 हजार रुपये (161.70 लाख) के विकास कार्यों को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिली है। इससे मंडी यार्ड के उत्तर दिशा स्थित पार्किंग क्षेत्र में सीमेंट कंक्रीट पेवमेंट का निर्माण होगा।
प्रश्न 3: इस पैकेज में कौन-कौन से काम कराए जाएंगे?
उत्तर: तीन तरह के काम होंगे — मंडी यार्ड का निर्माण, विद्युत कार्य, और मंडियों से जुड़ी संपर्क सड़कों का निर्माण व क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत।
प्रश्न 4: किन जिलों की मंडियां इस पैकेज में शामिल हैं?
उत्तर: बीकानेर, सीकर, टोंक, दौसा, बारां, श्रीगंगानगर, ब्यावर, चूरू, चित्तौड़गढ़, झालावाड़, हनुमानगढ़, नागौर, उदयपुर, कोटा, डीग, जैसलमेर और प्रतापगढ़ सहित कई जिलों की 30 मंडी समितियां शामिल हैं। बीकानेर जिले की सबसे ज्यादा चार मंडियों — बज्जू, नोखा, खाजूवाला और श्रीडूंगरगढ़ — को लाभ मिलेगा।