राजस्थान में सेवारत कोटे से पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी पर वापस नहीं लौटे डॉक्टरों के लिए ये आखिरी चेतावनी है। गैरहाजिर डॉक्टर अंतिम नोटिस के तहत चिकित्सा विभाग ने लंबे समय से गैरहाजिर चल रहे डॉक्टरों को 27 अक्टूबर 2026 तक निदेशालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना प्रतिवेदन देने का निर्देश दिया है। समय पर संतोषजनक जवाब नहीं देने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी — और ये कार्रवाई सिर्फ निलंबन तक सीमित नहीं रहेगी। विभाग ने साफ कर दिया है कि पीजी के दौरान भरे गए बॉन्ड की शर्तों के मुताबिक पीडीआर एक्ट के तहत राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू होगी, साथ ही राजस्थान मेडिकल काउंसिल से जारी रजिस्ट्रेशन निरस्त करने तक की नौबत आ सकती है।
27 अक्टूबर की डेडलाइन — डॉक्टरों को क्या-क्या करना होगा
चिकित्सा विभाग की ओर से जारी अंतिम नोटिस में संबंधित डॉक्टरों के लिए दो चीजें अनिवार्य की गई हैं। पहली — 27 अक्टूबर 2026 तक निदेशालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना होगा। दूसरी — अपने प्रतिवेदन में ये बताना होगा कि पीजी पूरी होने के बावजूद तय अवधि तक नौकरी पर क्यों नहीं लौटे। नोटिस में चेतावनी का लहजा स्पष्ट है: निर्धारित समय सीमा में उपस्थित होकर संतोषजनक जवाब नहीं देने वाले डॉक्टरों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। विभाग का मानना है कि ये लोग लगातार अनुपस्थित चल रहे हैं और बार-बार के मौकों के बावजूद ड्यूटी पर नहीं लौटे, इसलिए अब “अंतिम” नोटिस जारी किया गया है।
बॉन्ड की वसूली और रजिस्ट्रेशन पर आफत — क्या-क्या खतरे में है
अगर कोई डॉक्टर 27 अक्टूबर तक हाजिर नहीं हुआ या उसका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया, तो उसके खिलाफ दो मोर्चों पर कार्रवाई हो सकती है। पहला — आर्थिक दंड। पीजी के दौरान भरे गए बॉन्ड की शर्तों के अनुसार पीडीआर एक्ट के तहत राशि वसूलने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। दूसरा — पेशेवर प्रतिबंध। संबंधित डॉक्टरों का राजस्थान मेडिकल काउंसिल से जारी रजिस्ट्रेशन भी निरस्त किया जा सकता है। रजिस्ट्रेशन निरस्त होने का मतलब है कि डॉक्टर वैधानिक रूप से प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा — ये सबसे कठोर कार्रवाई मानी जाती है। विभाग ने साफ किया है कि ऐसे मामलों में आर्थिक दंड के साथ-साथ पेशेवर स्तर पर भी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
सेवारत कोटा और बॉन्ड व्यवस्था क्या है — पूरी कहानी समझिए
राजस्थान में सेवारत कोटे की व्यवस्था का मकसद सरकारी अस्पतालों को विशेषज्ञ डॉक्टर देना है। इसके तहत सरकारी सेवा में कार्यरत चिकित्सक अपनी नौकरी के साथ पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) की पढ़ाई करते हैं। पढ़ाई के दौरान उनकी नौकरी सुरक्षित रहती है और सरकार उन्हें ये अवसर देती है, बदले में डॉक्टर बॉन्ड भरते हैं — यानि पीजी पूरी करने के बाद तय अवधि तक सरकारी सेवा में काम करने की लिखित प्रतिबद्धता। विभाग के पास चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की वेबसाइट पर इससे जुड़े नियम उपलब्ध हैं।
लेकिन समस्या ये है कि कुछ डॉक्टर पीजी पूरी करके निजी अस्पतालों या निजी प्रैक्टिस की ओर चले जाते हैं और सरकारी नौकरी पर नहीं लौटते। सरकार का तर्क है कि जिस सुविधा पर सरकारी संसाधन खर्च हुए, उसका लाभ सरकारी अस्पतालों और मरीजों को मिलना चाहिए — और यही वजह है कि बॉन्ड की शर्तें रखी गई हैं। मौजूदा कार्रवाई का उद्देश्य भी यही है: सेवारत कोटे के तहत पीजी की पढ़ाई पूरी करने के बाद निर्धारित सेवा नहीं देने वालों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना।
सरकारी अस्पतालों के लिए क्यों अहम है ये कदम — बड़ा सवाल मरीजों का
ये नोटिस सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं है, इसके पीछे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी चिंता है। कुछ दिन पहले आई रिपोर्टों के मुताबिक सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ा मुद्दा बनी हुई है — 600 मेडिकल ऑफिसर पदों के लिए करीब 30 हजार आवेदन आने जैसे आंकड़े बताते हैं कि एक ओर नौकरी के लिए भीड़ है, तो दूसरी ओर ड्यूटी से गैरहाजिर डॉक्टरों की शिकायतें हैं।
विभाग का मानना है कि अगर सेवारत कोटे के डॉक्टर पीजी के बाद सरकारी सेवा में वापस नहीं लौटेंगे, तो ग्रामीण और दूरदराज के अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी और गहरी होगी। अजमेर के जेएलएन अस्पताल जैसे सरकारी संस्थानों में पहले से ही स्टाफ संबंधी चुनौतियां सामने आती रही हैं। इसीलिए विभाग लंबे समय से अनुपस्थित डॉक्टरों पर दबाव बढ़ाकर संदेश देना चाहता है कि सरकारी सेवा में लौटना अब टाला नहीं जा सकेगा।
नोटिस एक नजर में
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| नोटिस जारी करने वाला | राजस्थान चिकित्सा विभाग |
| किसके लिए | सेवारत कोटे से पीजी पूरी कर नौकरी पर न लौटे गैरहाजिर डॉक्टर |
| उपस्थित होने की अंतिम तिथि | 27 अक्टूबर 2026 |
| कहां उपस्थित होना है | चिकित्सा निदेशालय, व्यक्तिगत रूप से |
| साथ में क्या देना है | प्रतिवेदन — गैरहाजिरी का संतोषजनक जवाब |
| कार्रवाई 1 | बॉन्ड शर्तों के अनुसार पीडीआर एक्ट के तहत राशि की वसूली |
| कार्रवाई 2 | राजस्थान मेडिकल काउंसिल से रजिस्ट्रेशन निरस्त करने की कार्रवाई |
| नोटिस का उद्देश्य | पीजी के बाद निर्धारित सरकारी सेवा सुनिश्चित करना |
गैरहाजिर डॉक्टर अंतिम नोटिस — अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. गैरहाजिर डॉक्टर अंतिम नोटिस किसे जारी किया गया है? ये नोटिस उन डॉक्टरों के लिए है जिन्होंने सेवारत कोटे के तहत पीजी की पढ़ाई पूरी की, लेकिन उसके बाद नौकरी पर नहीं लौटे और लंबे समय से गैरहाजिर चल रहे हैं।
2. 27 अक्टूबर तक क्या करना होगा? संबंधित डॉक्टरों को 27 अक्टूबर 2026 तक चिकित्सा निदेशालय में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना प्रतिवेदन देना होगा, जिसमें गैरहाजिरी का संतोषजनक कारण बताना जरूरी है।
3. समय पर उपस्थित न होने पर क्या होगा? विभाग नियमानुसार कार्रवाई करेगा। इसमें पीजी के दौरान भरे गए बॉन्ड की शर्तों के अनुसार पीडीआर एक्ट के तहत राशि की वसूली और राजस्थान मेडिकल काउंसिल से रजिस्ट्रेशन निरस्त करने तक की कार्रवाई शामिल हो सकती है।
4. ये कार्रवाई क्यों की जा रही है? सेवारत कोटे की पीजी सुविधा सरकारी संसाधनों से मिलती है, बदले में डॉक्टर बॉन्ड भरते हैं कि पढ़ाई के बाद तय अवधि तक सरकारी सेवा देंगे। विभाग का उद्देश्य इस निर्धारित सेवा को सुनिश्चित करना है ताकि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता बनी रहे।