राजस्थान के गांवों और कस्बों के उन लाखों परिवारों के लिए राहत भरी खबर आई है, जिनके छोटे बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र जाते हैं। अब बच्चे को शुरुआती पढ़ाई के लिए दूर के किसी महंगे प्ले स्कूल का रास्ता नहीं देखना पड़ेगा — उसी अपने गांव के आंगनबाड़ी केंद्र में उसे प्ले स्कूल जैसी शाला-पूर्व शिक्षा मिलेगी। यही राजस्थान आंगनबाड़ी प्ले स्कूल पहल का सार है। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने शनिवार को जयपुर में निर्देश दिया है कि प्रदेश के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल के रूप में विकसित किया जाए, ताकि 3 से 6 साल के बच्चों की पढ़ाई, खेल और देखभाल ज्यादा व्यवस्थित और गुणवत्तापूर्ण हो।
यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब प्रदेश की आंगनबाड़ी व्यवस्था पहले से ही बदलाव के दौर से गुजर रही है। पिछले सप्ताह की समीक्षा में सामने आया था कि प्रदेश के 98.5 प्रतिशत आंगनबाड़ी केंद्र — यानी 61,483 केंद्र — अब सरकारी विद्यालयों के साथ सह-स्थित हो चुके हैं। अब राजस्थान आंगनबाड़ी प्ले स्कूल का निर्देश इस व्यवस्था को एक कदम और आगे ले जाता है।
मुख्य सचिव ने जयपुर बैठक में क्या-क्या कहा
शनिवार को जयपुर के गांधीनगर स्थित समेकित बाल विकास सेवाएं (आईसीडीएस) निदेशालय में मुख्य सचिव ने पोषण 2.0 और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की कार्यप्रणाली की समीक्षा बैठक ली। इसमें महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव और आईसीडीएस निदेशक ने विभिन्न कार्यक्रमों का प्रस्तुतीकरण दिया, और उपस्थित कार्यकर्ताओं से केंद्रों के संचालन के बारे में जानकारी लेकर उनके काम की सराहना की गई।
बैठक में मुख्य सचिव ने तीन स्पष्ट निर्देश दिए। पहला, सभी आंगनबाड़ी केंद्रों को प्ले स्कूल के रूप में विकसित किया जाए। दूसरा, अधिकारी केंद्रों के दैनिक संचालन का समय-समय पर निरीक्षण करें, और औचक निरीक्षण में यह जांचें कि कार्यकर्ता निर्धारित कैलेंडर का पालन कर रही हैं। तीसरा, उत्कृष्ट कार्य करने वाली 100 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को चिन्हित करके उनके कार्यों का संकलन प्रकाशित किया जाए। बैठक के अंत में मुख्य सचिव ने राष्ट्रीय एकता दिवस पर सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जन्म तिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की और निदेशालय परिसर में पौधरोपण किया।
राजस्थान आंगनबाड़ी प्ले स्कूल में बच्चे का दिन कैसा होगा
आंगनबाड़ी केंद्रों पर पहले से ही 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए सत्रवार शाला-पूर्व शिक्षा की गतिविधियां चलती हैं। राजस्थान आंगनबाड़ी प्ले स्कूल के रूप में विकास का मतलब है कि ये गतिविधियां अब और नियमित और बच्चों के अनुकूल होंगी। आपके बच्चे का एक सामान्य दिन कैसा दिखेगा, यह नीचे दी गई तालिका से समझिए:
| समय / अवसर | केंद्र पर होने वाली गतिविधि |
|---|---|
| सुबह का सत्र | शाला-पूर्व शिक्षा: खेल, कहानी, गीत और गतिविधि आधारित सीखना |
| दोपहर का भोजन | अल्पाहार और गर्म पका हुआ भोजन |
| स्वास्थ्य और निगरानी | बच्चों के विकास की निगरानी, पोषण ट्रैकर पर गतिविधियों का अपडेट |
| परिवार से जुड़ाव | प्रतिदिन लक्षित गृह भ्रमण, परिवार सर्वेक्षण कार्य |
| महीने में 2 बार | समुदाय आधारित कार्यक्रम |
| महीने में 1 बार | एमसीएचएन दिवस, आंगनबाड़ी प्रबंधन समिति और कार्यकर्ता-अभिभावक बैठक |
इस तालिका से साफ है — आंगनबाड़ी अब सिर्फ भोजन वितरण का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चे की पढ़ाई, स्वास्थ्य और परिवार से जुड़ाव का पूरा तंत्र है।
मां और बच्चे की योजनाएं अब एक ही जगह जुड़ेंगी
मुख्य सचिव ने बैठक में प्रदेश में चल रहे ‘कैश प्लस मॉडल’ की विशेष प्रशंसा की। इसके तहत प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना और मुख्यमंत्री मातृत्व पोषण योजना से गर्भवती और धात्री महिलाओं को प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के साथ व्यवहार परिवर्तन संचार की गतिविधियों से भी जोड़ा गया है — यानी आर्थिक मदद के साथ सही जानकारी भी परिवार तक पहुंचती है।
केंद्र पर कार्यकर्ता इन योजनाओं के लाभार्थियों का पंजीकरण करती हैं और बच्चों के विकास पर नजर रखती हैं।
निगरानी और स्वास्थ्य पर भी सख्त निर्देश
निगरानी भी निर्देशों का अहम हिस्सा है। मुख्य सचिव ने कहा है कि अधिकारी केंद्रों का नियमित भ्रमण करें और औचक निरीक्षण में कैलेंडर की अनुपालना जांचें, ताकि योजनाओं का लाभ कागज पर नहीं, बल्कि जमीन पर हर लाभार्थी तक पहुंचे। बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर भी दो निर्देश दिए गए। पहला, विकासात्मक विलंब के लक्षणों की शीघ्र पहचान के लिए फील्ड कार्यकर्ताओं का क्षमता वर्धन किया जाए, और इसके लिए यूनिसेफ और विभाग डिजिटल प्रबंधन पर काम करें। दूसरा, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और आशा सहयोगिनी — यानी एएए — के बीच कन्वर्जेंस और बेहतर किया जाए, ताकि महिला और बच्चों के स्वास्थ्य और पोषण में सुधार आ सके।
पृष्ठभूमि में यह भी जानना जरूरी है कि पिछले सप्ताह की समीक्षा में विभाग के कई नवाचारों की सराहना हुई थी। इनमें 1,000 चैंपियन आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का क्षमता वर्धन शामिल है — ये अपनी ग्राम पंचायत की 3-4 आंगनबाड़ियों को मेंटर करेंगी। प्रवेशोत्सव के तहत 5 से 6 वर्ष आयु वर्ग के 2.47 लाख से अधिक बच्चों ने निकटवर्ती विद्यालयों का भ्रमण किया, जिससे नामांकन को बढ़ावा मिला।
अभिभावकों के लिए इसका क्या मतलब है
अगर आपका बच्चा 3 से 6 साल का है, तो सबसे पहले अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र पर पूछिए कि शाला-पूर्व शिक्षा के सत्र किस समय चलते हैं और आपके बच्चे का नामांकन हुआ है या नहीं। महीने में एक बार होने वाले एमसीएचएन दिवस और कार्यकर्ता-अभिभावक बैठक में जरूर शामिल हों — वहीं बच्चे के विकास, टीकाकरण और पोषण की सीधी जानकारी मिलती है। गर्भवती या नई मांएं मातृ वंदना और मातृत्व पोषण योजना के पंजीकरण के बारे में कार्यकर्ता से पूछ सकती हैं।
राजस्थान में पोषण और बाल विकास से जुड़ी योजनाओं और महिला एवं बाल विकास विभाग के कार्यक्रमों पर पहले भी काम होता रहा है। ताजा निर्देशों से उम्मीद है कि आंगनबाड़ी केंद्र अब बच्चों के लिए सच में पहला विद्यालय बनेंगे — जहां बच्चा खेल-खेल में सीखेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या हर आंगनबाड़ी केंद्र प्ले स्कूल बन जाएगा?
मुख्य सचिव ने राजस्थान आंगनबाड़ी प्ले स्कूल के तहत सभी केंद्रों को प्ले स्कूल के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं। इसका क्रियान्वयन चरणों में होगा, और अधिकारियों को नियमित निरीक्षण के निर्देश भी मिले हैं।
इसका लाभ किस उम्र के बच्चों को मिलेगा?
आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए सत्रवार शाला-पूर्व शिक्षा चलती है। यही आयु वर्ग इस बदलाव का मुख्य लाभार्थी होगा।
क्या आंगनबाड़ी में पढ़ाई के साथ भोजन भी मिलेगा?
हां, केंद्र पर अल्पाहार और गर्म पका हुआ भोजन मिलता है, और पोषण ट्रैकर पर गतिविधियों का अपडेट किया जाता है।
गर्भवती और धात्री महिलाओं को क्या मिलेगा?
मातृ वंदना और मातृत्व पोषण योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण के साथ व्यवहार परिवर्तन संचार से जोड़ा जाता है। पंजीकरण के लिए अपने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से संपर्क करें।
स्रोत: पत्रिका (जयपुर), 31 अक्टूबर 2026।