पीएम विश्वकर्मा योजना राजस्थान: 62,000+ ऋण मंजूर

राजस्थान के कारीगरों और शिल्पकारों के लिए मंगलवार को बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई। पीएम विश्वकर्मा योजना राजस्थान में इस बार पंजीकरण से लेकर ऋण मंजूरी और प्रशिक्षण तक हर मोर्चे पर जबरदस्त प्रगति दर्ज हुई है। प्रदेश में अब तक 2 लाख 30 हजार से अधिक कारीगरों का पंजीकरण हो चुका है, 62 हजार से ज्यादा को सस्ता ऋण मिल चुका है और 2 लाख 17 हजार से अधिक लाभार्थियों को टूलकिट खरीदने के लिए ई-वाउचर जारी किए गए हैं। इस प्रदर्शन के दम पर राजस्थान पूरे देश में चौथे स्थान पर पहुंच गया है।

जिन हाथों से इमारतें बनती हैं और बर्तन गढ़े जाते हैं, उन्हें अब आधुनिक तकनीक, सस्ता कर्ज और सरकारी प्रशिक्षण का सहारा मिल रहा है — और ताजा आंकड़े बताते हैं कि फायदा जमीन पर दिखने लगा है।

पीएम विश्वकर्मा योजना राजस्थान में 62 हजार से ज्यादा ऋण मंजूर

इस योजना की सबसे बड़ी ताकत है सस्ता ऋण। पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत पात्र कारीगरों को अधिकतम 3 लाख रुपये तक का ऋण रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध करवाया जाता है। ताजा जानकारी के मुताबिक राजस्थान में अब तक 62 हजार से अधिक ऋण स्वीकृत किए जा चुके हैं।

छोटे कारीगर के लिए बैंक से कर्ज लेना सबसे बड़ी चुनौती होता है। रियायती ब्याज दर पर मिलने वाला यह ऋण इसी अड़चन को दूर करता है — इससे कारीगर कच्चा माल खरीद सकते हैं और कार्यशाला का विस्तार कर सकते हैं।

ऋण के साथ टूलकिट के लिए 15 हजार रुपये तक की सहायता भी मिलती है। प्रदेश में अब तक 2 लाख 17 हजार 84 ई-वाउचर जारी हो चुके हैं। आधुनिक टूलकिट मिलने से कारीगर का काम तेज होता है और गुणवत्ता सुधरती है — यानी सीधे कमाई बढ़ती है।

2.30 लाख पंजीकरण: देश में चौथे स्थान पर राजस्थान

पंजीकरण के मोर्चे पर राजस्थान की उपलब्धि और भी बड़ी है। पीएम विश्वकर्मा योजना राजस्थान में अब तक 2 लाख 30 हजार से अधिक कारीगरों और शिल्पकारों का पंजीकरण हो चुका है। इतनी बड़ी संख्या के साथ राजस्थान इस श्रेणी में पूरे देश में चौथे स्थान पर है।

यह आंकड़ा इसलिए अहम है क्योंकि योजना का लाभ पाने की पहली शर्त ही पंजीकरण है। प्रदेश सरकार ने गांव-गांव तक शिविर लगाकर पंजीकरण की रफ्तार बढ़ाई है, जिसका नतीजा अब सामने आ रहा है।

गौरतलब है कि राजस्थान सरकार मुख्यमंत्री विश्वकर्मा पेंशन योजना के तहत श्रमिकों, पथ विक्रेताओं और लोक कलाकारों के लिए अलग से पेंशन की व्यवस्था भी चला रही है, ताकि हुनरमंद वर्ग को बुढ़ापे में भी आर्थिक सुरक्षा मिल सके।

2.22 लाख को प्रशिक्षण: हुनर को मिली आधुनिक धार

पैसे के साथ हुनर निखारना भी जरूरी है। योजना में कारीगरों को बुनियादी और उन्नत प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसमें पारंपरिक कौशल के साथ आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल और उद्यमिता की समझ पर जोर दिया जाता है।

राजस्थान में अब तक 2 लाख 22 हजार 473 लाभार्थियों का बुनियादी प्रशिक्षण पूरा हो चुका है, और प्रशिक्षण पूरा करने वालों को प्रमाणपत्र भी मिलता है। आईआईएम मुंबई के एक मूल्यांकन में पाया गया कि सर्वे में शामिल 93 प्रतिशत लाभार्थियों की आय में प्रशिक्षण के बाद उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

पीएम विश्वकर्मा योजना राजस्थान: बढ़ई और राजमिस्त्री सबसे आगे

श्रेणीवार आंकड़ों पर नजर डालें तो सबसे ज्यादा पंजीकरण बढ़ई और राजमिस्त्री वर्ग में हुआ है। प्रदेश में बढ़ई श्रेणी में 45 हजार 958 और राजमिस्त्री में 38 हजार 450 कारीगरों का पंजीकरण हुआ है।

यह तस्वीर राजस्थान की जमीनी हकीकत दर्शाती है — निर्माण कार्यों में राजमिस्त्री और बढ़ई की मांग हमेशा बनी रहती है। इन दोनों वर्गों का बड़ी संख्या में जुड़ना इस बात का संकेत है कि योजना सही लोगों तक पहुंच रही है।

प्रमुख आंकड़ा संख्या
कुल पंजीकृत कारीगर (राजस्थान) 2,30,000 से अधिक
देश में राजस्थान का स्थान चौथा
बुनियादी प्रशिक्षण पूर्ण 2,22,473
स्वीकृत ऋण 62,000 से अधिक
जारी टूलकिट ई-वाउचर 2,17,084
अधिकतम ऋण राशि 3,00,000 रुपये तक
टूलकिट सहायता 15,000 रुपये तक

देश का 2028 वाला लक्ष्य समय से पहले पूरा

राष्ट्रीय स्तर पर भी बड़ी उपलब्धि रही है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2028 तक 30 लाख कारीगरों के पंजीकरण का लक्ष्य रखा था, जो समय से पहले ही हासिल हो गया — 30 सितंबर 2026 तक 30 लाख 3 हजार 925 कारीगर पंजीकृत हो चुके हैं। देशभर में 24.39 लाख का प्रशिक्षण पूर्ण, 5,350 करोड़ रुपये के 6.23 लाख से अधिक ऋण स्वीकृत और 26.17 लाख से अधिक ई-वाउचर जारी हो चुके हैं।

कारीगरों को योजना से क्या-क्या मिलता है

योजना का लाभ उठाने के लिए सबसे पहले pmvishwakarma.gov.in पोर्टल या नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर पर पंजीकरण करवाना होता है। योजना 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े कारीगरों के लिए है — जिनमें बढ़ई, लोहार, सुनार, कुम्हार, मोची, दर्जी, नाई और राजमिस्त्री जैसे व्यवसाय शामिल हैं।

लाभार्थी को पहले बुनियादी प्रशिक्षण दिया जाता है, जिसके दौरान दैनिक भत्ता भी मिलता है। इसके बाद टूलकिट के लिए 15 हजार रुपये का ई-वाउचर और व्यवसाय बढ़ाने के लिए 3 लाख रुपये तक का रियायती ऋण मिलता है, साथ ही डिजिटल भुगतान पर प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।

असंगठित क्षेत्र के कामगारों के लिए पेंशन योजनाएं भी चल रही हैं — अटल पेंशन योजना से राजस्थान में 50 लाख से ज्यादा लोग पहले ही जुड़ चुके हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न: पीएम विश्वकर्मा योजना में कौन आवेदन कर सकता है?

उत्तर: 18 पारंपरिक व्यवसायों से जुड़े 18 वर्ष या उससे अधिक आयु के कारीगर और शिल्पकार आवेदन कर सकते हैं। आवेदक को संबंधित व्यवसाय में कार्यरत होना चाहिए।

प्रश्न: योजना में कितना ऋण मिलता है?

उत्तर: अधिकतम 3 लाख रुपये तक का ऋण रियायती ब्याज दर पर मिलता है। टूलकिट के लिए 15 हजार रुपये तक की सहायता ई-वाउचर के माध्यम से दी जाती है।

प्रश्न: टूलकिट के लिए ई-वाउचर कैसे मिलता है?

उत्तर: बुनियादी प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पात्र लाभार्थियों को ई-वाउचर जारी किया जाता है। राजस्थान में अब तक 2,17,084 ई-वाउचर जारी हो चुके हैं।

प्रश्न: राजस्थान में अब तक कितने कारीगरों को फायदा मिला है?

उत्तर: 2.30 लाख से अधिक पंजीकरण, 2,22,473 का प्रशिक्षण पूर्ण, 62 हजार से अधिक ऋण स्वीकृत और 2.17 लाख से अधिक ई-वाउचर जारी हो चुके हैं।

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