राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री विश्वकर्मा पेंशन योजना से जुड़ी एक बड़ी और काम की खबर सामने आई है। मंगलवार, 29 सितंबर 2026 को चूरू जिले के साहवा कस्बे में योजना के तहत पंजीकरण के लिए विशेष शिविर लगाया जा रहा है। श्रमिकों, पथ विक्रेताओं और लोक कलाकारों के लिए चलाई जा रही इस पेंशन योजना का मकसद असंगठित क्षेत्र के उन मेहनतकशों को बुढ़ापे में आर्थिक सहारा देना है, जिनके पास न तो नौकरी की पेंशन है और न ही कोई दूसरा सुरक्षा कवच।
यह योजना वित्त विभाग ने 26 नवंबर 2024 को लागू की थी, और साहवा का आज का शिविर इसी कड़ी का हिस्सा है। अगर आप या आपके परिवार का कोई सदस्य इस श्रेणी में आता है, तो आज का दिन आपके लिए अहम हो सकता है। आइए, योजना की हर जरूरी बात को एक-एक करके समझते हैं।
आज कहां और कैसे होगा पंजीकरण — साहवा शिविर की पूरी जानकारी
चूरू जिले के साहवा नगर पालिका सभागार में आज विशेष शिविर आयोजित किया जा रहा है, जहां मुख्यमंत्री विश्वकर्मा पेंशन योजना के लिए पात्र आवेदक सीधे पंजीकरण करवा सकेंगे। राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग के सहायक निदेशक सुनील धायल के अनुसार, शिविर में पहुंचकर पात्र व्यक्ति आवेदन की प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे।
जो लोग आज शिविर में नहीं पहुंच पा रहे हैं, वे अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र से पंजीकरण करवा सकते हैं, या पोर्टल vishwakarmapension.rajasthan.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। सवाई माधोपुर, झालावाड़, प्रतापगढ़ और उदयपुर में पहले भी ऐसे ही निशुल्क कैंप लग चुके हैं।
योजना है क्या — ₹100 के मासिक अंशदान पर ₹3,000 की पेंशन का गणित
मुख्यमंत्री विश्वकर्मा पेंशन योजना असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों, पथ विक्रेताओं (स्ट्रीट वेंडर) और लोक कलाकारों के लिए राज्य सरकार की सामाजिक सुरक्षा योजना है। इसका मूल विचार बेहद सरल है — आज थोड़ा-थोड़ा जमा करो, बुढ़ापे में नियमित पेंशन पाओ।
योजना में लाभ लेने के लिए लाभार्थी को 60 वर्ष की आयु पूरी होने तक हर महीने महज 100 रुपये का अंशदान देना होता है। यह राशि बैंक खाते से ऑटो डेबिट के माध्यम से सीधे कटती है, यानी हर महीने अलग से जमा कराने की झंझट नहीं है। जब अभिदाता 60 वर्ष की आयु पूरी कर लेता है, तो उसे हर महीने 3,000 रुपये की पेंशन मिलनी शुरू हो जाती है।
एक और अहम बात — पेंशन मिलने के दौरान अगर किसी पेंशनर की मृत्यु हो जाती है, तो उसके पति या पत्नी को पेंशन का अधिकतम 50 प्रतिशत पारिवारिक पेंशन के रूप में दिए जाने का प्रावधान है। यानी योजना सिर्फ व्यक्ति की नहीं, उसके परिवार की भी हिफाजत करती है। और अगर कोई अभिदाता तीन वर्ष की अवधि पूरी होने से पहले या 60 वर्ष की आयु से पहले योजना से बाहर निकलना चाहता है, तो जमा की गई अंशदान राशि बचत खाते के समान ब्याज सहित लौटा दी जाती है।
कौन ले सकता है लाभ — पात्रता की शर्तें ध्यान से समझिए
योजना का लाभ उन्हीं लोगों को मिलेगा जो तय पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं। शर्तें कुछ इस प्रकार हैं:
- आयु सीमा: वर्तमान में 41 से 45 वर्ष आयु वर्ग के व्यक्तियों का पंजीकरण किया जा रहा है।
- मूल निवास: आवेदक का राजस्थान का मूल निवासी होना अनिवार्य है।
- आय सीमा: आवेदक की मासिक आय 15 हजार रुपये से कम होनी चाहिए।
- वर्ग: असंगठित क्षेत्र के श्रमिक, पथ विक्रेता और लोक कलाकार इस योजना के दायरे में आते हैं।
- अन्य शर्त: लाभार्थी के वेतन से ईपीएफ (भविष्य निधि) या आयकर की कटौती नहीं होनी चाहिए।
उदयपुर के संयुक्त निदेशक (राज्य बीमा एवं प्राविधायी निधि विभाग) श्वेता तिवारी के अनुसार, पटेल सर्किल स्थित विभागीय कार्यालय में प्रतिदिन सुबह 10 से शाम 5 बजे तक पंजीयन का कार्य किया जा रहा है। जिलों में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविरों में भी राज्य बीमा एवं प्रावधायी निधि विभाग और पंचायतीराज विभाग मिलकर पात्र लाभार्थियों का पंजीयन कर रहे हैं — एक जिले में अब तक 236 व्यक्तियों ने ऐसे ही शिविरों में पंजीकरण कराया है।
पंजीकरण के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए — पूरी चेकलिस्ट
शिविर या ई-मित्र केंद्र पर पंजीकरण के लिए जाते समय ये दस्तावेज साथ ले जाना अनिवार्य है:
| क्रम | दस्तावेज | नोट |
| 1 | जनआधार कार्ड | जनआधार में पंजीकृत मोबाइल नंबर आवश्यक |
| 2 | आधार कार्ड (स्वयं का) | पहचान सत्यापन हेतु |
| 3 | नॉमिनी (मनोनीत) का आधार कार्ड | पारिवारिक पेंशन के लिए जरूरी |
| 4 | बैंक पासबुक की फोटो प्रति | ऑटो डेबिट के लिए खाता विवरण |
| 5 | ई-श्रम कार्ड | असंगठित क्षेत्र के श्रमिक की पहचान |
ध्यान रहे — योजना में पंजीकरण निशुल्क है। प्रतापगढ़ में स्थापित हेल्पडेस्क के अनुसार किसी भी कार्य दिवस में कार्यालय समय के दौरान रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। झालावाड़ में मिनी सचिवालय स्थित कमरा संख्या 402 में सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक निशुल्क कैंप लगाया गया था।
यह पेंशन क्यों खास है — मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन से अलग लाभ
इस योजना की पेंशन मुख्यमंत्री वृद्धजन सम्मान पेंशन के अतिरिक्त मिलेगी — यानी पात्रता होने पर दोनों लाभ एक साथ मिल सकते हैं।
इसके अलावा, योजना की सबसे बड़ी खूबी इसका छोटा अंशदान है। ₹100 प्रतिमाह यानी रोज के हिसाब से लगभग 3-4 रुपये — एक चाय की कीमत से भी कम। इसके बदले 60 की उम्र के बाद जीवन भर ₹3,000 प्रतिमाह की नियमित आय, और उसके बाद परिवार के लिए पारिवारिक पेंशन। असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए, जिनके पास आमतौर पर कोई रिटायरमेंट सुरक्षा नहीं होती, यह वाकई एक मजबूत सहारा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: आज के साहवा शिविर में कौन-कौन जा सकता है?
उत्तर: मुख्यमंत्री विश्वकर्मा पेंशन योजना के पात्र अभिदाता — यानी 41 से 45 वर्ष आयु वर्ग के श्रमिक, पथ विक्रेता और लोक कलाकार — साहवा नगर पालिका सभागार में आयोजित शिविर में पहुंचकर पंजीकरण करवा सकते हैं। साथ में ऊपर बताए गए सभी दस्तावेज अवश्य ले जाएं।
प्रश्न 2: अगर मैं शिविर में नहीं जा पाया तो पंजीकरण कैसे होगा?
उत्तर: कोई दिक्कत नहीं। आप अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र से पंजीकरण करवा सकते हैं, या राज्य सरकार के पोर्टल vishwakarmapension.rajasthan.gov.in पर स्वयं ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। जिलों में विभागीय कार्यालयों में भी पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध है।
प्रश्न 3: अंशदान कैसे कटेगा और बीच में योजना छोड़ने पर पैसा वापस मिलेगा?
उत्तर: ₹100 प्रतिमाह का अंशदान आपके बैंक खाते से ऑटो डेबिट के माध्यम से कटेगा। अगर आप तीन साल की अवधि पूरी होने से पहले या 60 वर्ष की आयु से पहले योजना से बाहर निकलते हैं, तो जमा राशि बचत खाते के समान ब्याज सहित वापस मिल जाएगी।