‘NO UPI Day’: 2 और 15 अक्टूबर को डिजिटल पेमेंट नहीं लेंगे व्यापारी — MDR चार्ज के विरोध में जयपुर से बड़ा ऐलान

‘NO UPI Day’: 2 और 15 अक्टूबर को डिजिटल पेमेंट नहीं लेंगे व्यापारी — MDR चार्ज के विरोध में जयपुर से बड़ा ऐलान

अगर आप रोज़ाना दुकानों पर यूपीआई से भुगतान करते हैं, तो अक्टूबर की शुरुआत में आपको थोड़ी तैयारी के साथ बाज़ार जाना होगा। जयपुर से देशभर के व्यापारियों ने एक बड़ा ऐलान किया है — 2 अक्टूबर और 15 अक्टूबर को ‘नो यूपीआई डे’ (NO UPI Day) मनाया जाएगा। यानी इन दो दिनों में व्यापारी डिजिटल भुगतान स्वीकार नहीं करेंगे और केवल नकद लेनदेन करेंगे।

यह फैसला भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल की गवर्निंग बॉडी की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया है। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने खुद इस बात की जानकारी दी। सरकार द्वारा यूपीआई ट्रांजेक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के विरोध में राजस्थान समेत 17 राज्यों के व्यापारी एकजुट हो गए हैं और अब आर-पार की लड़ाई के मूड में नज़र आ रहे हैं।

यूपीआई पर MDR चार्ज क्या है और व्यापारी क्यों नाराज़ हैं?

MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट — एक तरह का शुल्क जो हर डिजिटल ट्रांजेक्शन पर व्यापारी को चुकाना पड़ता है। व्यापारियों के मुताबिक सरकार ने यूपीआई डिजिटल भुगतान पर 40 पैसा प्रति सैकड़ा MDR लागू कर दिया है। सीधे शब्दों में कहें तो 1,000 रुपये के भुगतान पर करीब 4 रुपये व्यापारी की जेब से निकलेंगे।

इसके अलावा रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और खेती-किसानी से जुड़े सामानों पर भी 5 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का फिक्स्ड MDR थोप दिया गया है। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल इंडिया को बढ़ावा देने के नाम पर अब छोटे और बड़े व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जा रहा है, जिसे वे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं करेंगे।

छोटे दुकानदारों की गणित सीधी है — दिनभर में सैकड़ों छोटे-छोटे ट्रांजेक्शन होते हैं। हर लेनदेन पर कटौती होने से महीने के आखिर में यह रकम हज़ारों में पहुंच जाती है। बड़े शोरूम या कंपनियों के लिए यह शायद झेलने लायक हो, लेकिन गली-मोहल्ले की दुकान, ठेले और छोटे व्यापारियों के लिए यह सीधे मुनाफे पर चोट है।

आंदोलन की तारीख-दर-तारीख रूपरेखा

व्यापारियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली है। कार्यक्रम कुछ इस तरह तय हुआ है:

2 अक्टूबर — आंदोलन की शुरुआत: राष्ट्रव्यापी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत होगी। भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल से जुड़े सभी व्यापारी लगातार काली पट्टी बांधकर अपना विरोध दर्ज कराएंगे। व्यापारियों का कहना है कि सरकार को डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देना चाहिए, न कि उस पर टैक्स और चार्ज लगाकर व्यापारियों व आम जनता की जेब ढीली करनी चाहिए।

10 अक्टूबर — शहर-शहर प्रदर्शन: देशभर की सभी व्यापारिक संस्थाएं अपने-अपने शहरों में जिला स्तर पर जोरदार विरोध प्रदर्शन करेंगी। राजस्थान के सभी प्रमुख बाज़ारों में भी इस दिन व्यापारियों के उतरने की उम्मीद है।

15 अक्टूबर — ‘काला दिवस’ और नो यूपीआई डे: इस दिन व्यापारी काला दिवस मनाते हुए पूरे राज्य और देश में डिजिटल भुगतान पूरी तरह बंद रखेंगे। यानी यूपीआई, कार्ड या किसी भी डिजिटल माध्यम से पेमेंट स्वीकार नहीं होगा — केवल नकद लेनदेन होगा।

आम ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका असर आम जनता पर कितना पड़ेगा। 2 अक्टूबर को काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध होगा और पेमेंट सामान्य रहेगा। 10 अक्टूबर को शहर-शहर विरोध प्रदर्शन होंगे, कुछ बाज़ारों में असर संभव है — ज़रूरी खरीदारी पहले कर लें। 15 अक्टूबर को ‘काला दिवस’ मनाते हुए डिजिटल भुगतान पूरी तरह बंद रहेगा और केवल नकद लेनदेन होगा — उस दिन पर्याप्त नकद साथ रखें और बड़े भुगतान पहले निपटा लें।

राजस्थान समेत 17 राज्यों के व्यापारिक संगठनों के इस फैसले से डिजिटल भुगतान व्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। खासतौर पर 15 अक्टूबर को अगर बड़ी संख्या में व्यापारी वाकई डिजिटल पेमेंट लेना बंद कर देते हैं, तो उन ग्राहकों को परेशानी हो सकती है जो पूरी तरह यूपीआई पर निर्भर हैं।

डिजिटल इंडिया बनाम व्यापारी हित — दोनों पक्षों की बात

व्यापारी संगठनों का तर्क है कि सरकार एक तरफ डिजिटल इंडिया और कैशलेस अर्थव्यवस्था की बात करती है, दूसरी तरफ उसी डिजिटल लेनदेन पर चार्ज लगाती है। उनका कहना है कि MDR का बोझ आखिर में या तो व्यापारी उठाएगा या ग्राहक — दोनों ही स्थितियों में आम आदमी की जेब पर असर पड़ेगा।

दूसरी तरफ, डिजिटल भुगतान व्यवस्था चलाने में बैंकों और पेमेंट कंपनियों का भी खर्च आता है, और लंबे समय से यह बहस चल रही है कि इस खर्च का बंटवारा कैसे हो। सरकार की ओर से अभी इस आंदोलन पर औपचारिक प्रतिक्रिया आनी बाकी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि केंद्र सरकार व्यापारियों की इस नाराज़गी को कैसे संभालती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: MDR चार्ज आखिर है क्या?
जवाब: MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट — हर डिजिटल ट्रांजेक्शन पर व्यापारी से वसूला जाने वाला शुल्क। व्यापारियों के मुताबिक यूपीआई पर अब 40 पैसा प्रति सैकड़ा और कुछ सेक्टर्स में 5 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन फिक्स्ड MDR लागू किया गया है।

सवाल: 2 अक्टूबर को क्या यूपीआई काम नहीं करेगा?
जवाब: नहीं, 2 अक्टूबर को सिर्फ काली पट्टी बांधकर सांकेतिक विरोध होगा। पेमेंट व्यवस्था सामान्य रहने की उम्मीद है। पूरी तरह डिजिटल पेमेंट बंद रखने का ऐलान 15 अक्टूबर के लिए है।

सवाल: क्या 15 अक्टूबर को वाकई कोई डिजिटल पेमेंट नहीं लेगा?
जवाब: भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल ने 15 अक्टूबर को ‘काला दिवस’ मनाते हुए डिजिटल भुगतान पूरी तरह बंद रखने का फैसला किया है। हालांकि, इसमें कितने व्यापारी शामिल होंगे, यह उस दिन ही साफ होगा। सुरक्षित रहने के लिए उस दिन नकद साथ रखें।

सवाल: इस आंदोलन में कौन-कौन शामिल है?
जवाब: भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल के नेतृत्व में राजस्थान समेत 17 राज्यों के व्यापारिक संगठन इस आंदोलन में शामिल हैं। संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने आंदोलन की रूपरेखा की घोषणा की है।

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