कुचामन मंडी में बेमौसम बारिश: खुले में रखा धान, बाजरा, मूंग भीगा — शेडों पर व्यापारियों का कब्जा, किसानों को भाव गिरने का डर
डीडवाना-कुचामन। मानसून की विदाई से ठीक पहले बेमौसम बारिश ने डीडवाना-कुचामन जिले की कुचामन कृषि उपज मंडी में किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। मंगलवार (29 सितंबर) को अचानक आंधी-तूफान के साथ हुई तेज बारिश में मंडी परिसर में खुले आसमान के नीचे रखे किसानों के हजारों कट्टों में भरा धान, बाजरा, मूंग और ग्वार भीग गया। अब किसानों की सबसे बड़ी चिंता भीगे अनाज को सुखाकर उसे सड़ने से बचाने की है — धान में नमी बढ़ने का मतलब है खराब ग्रेडिंग और गिरता भाव।
अचानक आई आंधी-बारिश ने बिगाड़ा सब कुछ
किसानों के मुताबिक, मंगलवार को दिनभर मौसम साफ था और मंडी में रोज की तरह नीलामी व तौल का काम चल रहा था। तभी तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। बारिश इतनी तेज थी कि तिरपाल डालने का मौका तक नहीं मिला।
सबसे ज्यादा नुकसान धान की फसल का हुआ है — भीगने के बाद धान में नमी बढ़ जाती है, रंग काला पड़ने लगता है और मंडी व्यापारी घटिया ग्रेड बताकर भाव काट लेते हैं। बाजरा, मूंग और ग्वार का भी यही हाल है — दो-तीन दिन में धूप न निकली और अनाज न सूखा, तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
टीन शेड बने किसके लिए? किसानों का बड़ा आरोप
इस घटना में सबसे ज्यादा आक्रोश की बात यह है कि मंडी में किसानों की उपज को बारिश से बचाने के लिए बनाए गए टीन शेड और बरामदे आज भी व्यापारियों और दुकानदारों के कब्जे में हैं। किसान मांगीलाल चौधरी ने बताया कि शेड और बरामदे किसानों की फसल को मौसम की मार से बचाने के लिए बनाए गए थे, लेकिन वहां सालों से व्यापारियों का माल डंप रहता है। मजबूरन किसान अपनी फसल खुले मैदान में रखते हैं। किसान मनोहर लाल का कहना है कि मंडी सचिव और अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ — पर्याप्त शेड और तिरपाल होते तो यह नुकसान काफी हद तक टाला जा सकता था।
मंडी प्रशासन की सफाई और व्यापारियों को नोटिस
कृषि मंडी अधिकारी घनश्याम विश्नोई ने नुकसान की बात स्वीकार करते हुए कहा कि अचानक हुई बारिश में किसानों का खुले में रखा माल भीग गया है। उन्होंने बताया कि टीन शेड और बरामदों में व्यापारियों का सामान रखा होने की शिकायत पर आज ही सभी संबंधित व्यापारियों और दुकानदारों को नोटिस जारी कर दिया गया है — शेड खाली कराए जाएंगे और आने वाले समय में इनका उपयोग प्राथमिकता के आधार पर किसानों की उपज के लिए होगा।
हालांकि किसान इन आश्वासनों से संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि नोटिस तो पहले भी दिए गए हैं, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदला। किसान चाहते हैं कि शेड खाली कराने के साथ मंडी में आई फसल की समय पर खरीद और सुरक्षित भंडारण की स्थायी व्यवस्था हो, ताकि भविष्य में आंधी-तूफान या बेमौसम बारिश में उनकी मेहनत का नुकसान न हो।
नुकसान की एक झलक: कुचामन मंडी में क्या-क्या भीगा
| फसल / उपज | रखने की स्थिति | नुकसान की प्रकृति |
|---|---|---|
| धान | खुले में कट्टों और ढेर में | नमी बढ़ी, रंग काला पड़ने का खतरा, भाव घटने की आशंका |
| बाजरा | खुले में कट्टों में | भीगने से अंकुरण और सड़न का खतरा |
| मूंग | खुले में | नमी से दाल की गुणवत्ता प्रभावित |
| ग्वार | खुले में | भीगने से दाने काले पड़ने का खतरा |
| टीन शेड / बरामदे | व्यापारियों के माल से भरे | किसानों की फसल को जगह नहीं मिली |
भीगे अनाज पर MSP और भाव का सवाल
किसानों की दूसरी बड़ी चिंता भाव को लेकर है। नीलामी के समय भीगे अनाज की नमी नापी जाती है — तय सीमा से ज्यादा नमी पर भाव में कटौती होती है, और कई बार खरीदार खरीदने से ही इनकार कर देते हैं। धान में तो कुछ घंटों की बारिश भी ग्रेड बिगाड़ देती है।
कृषि विशेषज्ञों का सुझाव है कि जिन किसानों की फसल भीगी है, वे उसे तुरंत सुखाने की व्यवस्था करें — धूप निकलते ही अनाज को फैलाकर सुखाएं और नमी कम होने के बाद ही मंडी में बेचने लाएं। साथ ही नुकसान का आकलन करवाकर फसल बीमा योजना के तहत दावा दर्ज कराने की सलाह भी दी जा रही है।
मानसून विदाई के समय क्यों बढ़ा खतरा
गौरतलब है कि इस समय राजस्थान से मानसून की विदाई चल रही है और मौसम विभाग के मुताबिक विदाई की यह बारिश अक्सर अचानक और तेज होती है। पूर्वी राजस्थान के कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट भी जारी है। ऐसे में कृषि उपज मंडियों में खुले में रखी फसल की सुरक्षा को लेकर पहले से ही सतर्कता की जरूरत थी।
किसानों की 4 बड़ी मांगें
- शेड तुरंत खाली कराए जाएं: टीन शेड और बरामदों से व्यापारियों का माल हटाकर किसानों की उपज के लिए आरक्षित किया जाए।
- तिरपाल की आपात व्यवस्था: हर मंडी में बारिश के समय तुरंत बांटने के लिए पर्याप्त तिरपाल का स्टॉक रखा जाए।
- समय पर खरीद: मंडी में आई फसल की नीलामी और तौल में देरी न हो, ताकि उपज खुले में कम से कम समय रहे।
- नुकसान का सर्वे: भीगी फसल का राजस्व विभाग से सर्वे कराकर फसल बीमा के तहत मुआवजा दिलाया जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: कुचामन मंडी में क्या हुआ?
उत्तर: 29 सितंबर को अचानक आंधी-तूफान के साथ हुई बारिश में कुचामन कृषि उपज मंडी में खुले में रखा किसानों का धान, बाजरा, मूंग और ग्वार भीग गया। हजारों कट्टों में भरा अनाज पानी की चपेट में आ गया।
प्रश्न 2: किसानों का मंडी प्रशासन पर क्या आरोप है?
उत्तर: किसानों का आरोप है कि उनकी फसल के लिए बनाए गए टीन शेड और बरामदों पर व्यापारियों का कब्जा है, इसलिए फसल खुले में रखनी पड़ती है। कई बार शिकायत के बावजूद समाधान नहीं हुआ।
प्रश्न 3: मंडी अधिकारी ने क्या कार्रवाई की?
उत्तर: कृषि मंडी अधिकारी घनश्याम विश्नोई ने बताया कि शेडों में सामान रखने वाले व्यापारियों को नोटिस जारी कर शेड खाली कराए जाएंगे और भविष्य में शेडों का उपयोग किसानों की उपज के लिए प्राथमिकता से होगा।
प्रश्न 4: भीगी फसल वाले किसान अब क्या करें?
उत्तर: किसान अनाज को धूप में अच्छी तरह सुखाएं, नमी कम होने के बाद ही बेचें और नुकसान का आकलन करवाकर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत दावा जरूर दर्ज कराएं।
कुचामन मंडी की यह घटना सिर्फ एक मंडी की कहानी नहीं है — प्रदेश की दर्जनों मंडियों में यही हाल है। अगर समय रहते शेड, तिरपाल और समय पर खरीद की व्यवस्था नहीं हुई, तो मानसून विदाई की हर बारिश किसानों की मेहनत पर पानी फेरती रहेगी।