71 करोड़ की पुरानी जब्ती से जुड़े तार, जांच को मिला सबसे बड़ा सुराग
देश के दवा बाजार में सक्रिय नकली दवा गैंग के अंतरराज्यीय नेटवर्क को लेकर पुलिस और औषधि विभाग की जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। ताजा घटनाक्रम में आगरा और राजस्थान के भरतपुर में मिली नामी कंपनियों की दवाओं का मिलान जब पिछले साल फव्वारा में सीज की गई 71 करोड़ रुपये की दवाओं से किया गया, तो दोनों के बीच समानता सामने आई है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि एक ही संगठित नकली दवा गैंग की कड़ी हो सकती है जो कार्रवाई के डर से अब अपने अवैध गोदामों से दवाएं निकालकर उन्हें नष्ट कराने में जुटा है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि तीनों जगहों से बरामद दवाएं देश-विदेश की एक ही पांच नामी कंपनियों के नाम पर हैं — एंटीबायोटिक, एलर्जी, मधुमेह, हृदय रोग और ब्लड प्रेशर की दवाएं। यानी मामला एक जिले तक सीमित नहीं; तार कई राज्यों तक फैले होने की आशंका अब आधिकारिक जांच में दर्ज है।
नकली दवा गैंग राजस्थान: तीन जगह, एक जैसी दवाएं — पूरा घटनाक्रम एक नजर में
पुलिस और औषधि विभाग की अब तक की जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उन्हें क्रम से समझना जरूरी है, क्योंकि इन्हीं कड़ियों को जोड़कर अंतरराज्यीय गैंग की थ्योरी बनी है।
| स्थान | कब और क्या मिला | खास बात |
|---|---|---|
| धनौली, आगरा (उत्तर प्रदेश) | 29 सितंबर — अवैध गोदाम से करीब 5 करोड़ की दवाएं | नकली होने की आशंका |
| टेढ़ी बगिया, आगरा | नाले-झाड़ियों में भारी मात्रा में दवाएं फेंकी मिलीं | सबूत मिटाने की कोशिश का संकेत |
| बयाना, भरतपुर (राजस्थान) | सूखे कुएं से 274 कार्टन, करीब 5 करोड़ की दवाएं | आगरा से ट्रक से लाकर छिपाई गईं |
| फव्वारा (2025) | 71 करोड़ की दवाएं सीज, 58 थोक फर्मों के लाइसेंस निरस्त | मौजूदा खेप से समानता मिली |
| पुडुचेरी | फैक्टरी पर छापा — कच्चा माल, मशीनें, 25 करोड़ की पैकिंग मशीन | ब्रांडेड पैकिंग का ठिकाना |
यमुना किनारे भी भारी मात्रा में दवाएं जलाई गईं। एक आरोपी के मोबाइल से 27 सितंबर की रात का वीडियो बरामद हुआ है, जिसमें वह नदी किनारे दवाओं पर डीजल डालकर आग लगाता दिख रहा है। जांच अधिकारियों का कहना है कि यह सबूत इस बात की ओर इशारा करता है कि गैंग सबूत मिटाने की जल्दबाजी में है। भरतपुर के बयाना में सूखे कुएं से दवाएं बरामद होने की पहले की खबर यहां पढ़ें।
यूपी-राजस्थान बॉर्डर पर अब गोदामों की तलाश, औषधि निरीक्षक ने क्या कहा
इस पूरे मामले में अब जांच का केंद्र उत्तर प्रदेश-राजस्थान सीमा क्षेत्र बन गया है। औषधि निरीक्षक आशुतोष मिश्रा ने बताया कि बॉर्डर पर और भी ऐसे गोदाम हो सकते हैं, जहां दवाएं छिपाकर रखी गई हों। संबंधित क्षेत्रों की पुलिस और औषधि विभाग से संपर्क साधा गया है और तलाश तेज कर दी गई है।
अब राजस्थान और मध्य प्रदेश में अवैध गोदामों की तलाश में पुलिस-औषधि विभाग की टीमें सक्रिय हैं। तीनों जगहों से मिली दवाओं के बैच नंबर और पैकिंग पैटर्न का मिलान किया जा रहा है ताकि पता चल सके कि ये खेपें एक ही स्रोत से आई हैं या नहीं। मिलान पुख्ता हुआ तो यह नेटवर्क के खिलाफ अब तक का सबसे मजबूत सबूत होगा।
गौर करने वाली बात यह है कि बयाना में मिली दवाओं में लोसार-50, जानुमेट, केटोरोल-एम, एलेग्रा-एम और जालरा जैसी रोजाना इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं — अगर इनमें से कोई खेप बाजार में खप चुकी होती, तो मरीजों की सेहत पर सीधा और गंभीर असर पड़ता।
नकली दवा गैंग पर कार्रवाई: अब तक की गिरफ्तारियां और जांच की दिशा
भरतपुर के बयाना मामले में पुलिस ने आगरा से तीन आरोपियों — इकरार, शामिन और सलुआ उर्फ मुकीम — को गिरफ्तार किया है। दवाएं आगरा से ट्रक में भरकर बयाना लाई गई थीं। दवा होलसेलर हिमांशु अग्रवाल और आशीष की तलाश जारी है। सूत्रों का कहना है कि मुख्य आरोपी पहले भी नकली दवाओं के प्रकरण में पकड़ा जा चुका है — आशंका है कि यूपी में कार्रवाई से बचने के लिए ही दवाएं राजस्थान लाकर छिपाई गई थीं।
जांच अब दो दिशाओं में आगे बढ़ रही है। पहली — वितरण नेटवर्क: ये दवाएं किन मेडिकल स्टोरों या थोक विक्रेताओं तक पहुंचनी थीं? सूत्रों के मुताबिक, बयाना इलाके के किसी स्थानीय मेडिकल स्टोर से कनेक्शन हो सकता है, क्योंकि आगरा से आए ट्रक चालक को गांव के सूखे कुएं की सटीक जानकारी थी। दूसरी — स्रोत: दवाएं बनी कहां थीं? पुडुचेरी की फैक्टरी और 25 करोड़ की पैकिंग मशीन इस सवाल का जवाब देने में अहम साबित हो सकती है। भरतपुर से जुड़ी अन्य खबरें यहां देखें।
आपकी दवा असली है या नहीं — ऐसे करें पहचान
इस तरह के मामलों के बीच आम मरीज के मन में सबसे बड़ा सवाल यही होता है कि वह जो दवा खा रहा है, वह असली भी है या नहीं। कुछ बुनियादी सावधानियां हर किसी को बरतनी चाहिए:
- लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से ही खरीदें: बिना लाइसेंस वाली दुकान या संदिग्ध ऑनलाइन स्रोत से दवा न लें।
- बिल जरूर लें: हर खरीद पर पक्का बिल लें — यही आपकी सबसे बड़ी कानूनी सुरक्षा है।
- बैच नंबर और एक्सपायरी जांचें: स्ट्रिप या बोतल पर बैच नंबर व एक्सपायरी साफ अंकित होनी चाहिए। धुंधली प्रिंटिंग या मिटा लेबल खतरे का संकेत है।
- पैकिंग पर गौर करें: नामी कंपनी की दवा की पैकिंग में हिज्जे की गलती, फीका रंग या हल्का कागज दिखे तो सतर्क हो जाएं।
- शक हो तो शिकायत करें: केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) के पोर्टल पर दवा की गुणवत्ता को लेकर शिकायत दर्ज की जा सकती है।
याद रखें — नकली या घटिया दवा सिर्फ पैसे की बर्बादी नहीं, जान का खतरा है। हार्ट, डायबिटीज और ब्लड प्रेशर की दवाओं में जरा सी मिलावट भी मरीज के लिए घातक साबित हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल: क्या बरामद दवाएं पक्के तौर पर नकली हैं?
जवाब: अभी जांच जारी है। नकली होने की आशंका है; गुणवत्ता, बैच नंबर व एक्सपायरी की गहन जांच हो रही है। अंतिम निष्कर्ष लैब रिपोर्ट के बाद आएगा।
सवाल: किन बीमारियों की दवाएं मिली हैं?
जवाब: हृदय रोग, ब्लड प्रेशर, मधुमेह, एलर्जी और एंटीबायोटिक — जिनमें लोसार-50, जानुमेट, केटोरोल-एम, एलेग्रा-एम और जालरा शामिल हैं।
सवाल: राजस्थान में और गोदाम कहां हो सकते हैं?
जवाब: औषधि निरीक्षक के मुताबिक उत्तर प्रदेश-राजस्थान बॉर्डर के आसपास और गोदाम होने की आशंका है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में तलाश तेज कर दी गई है।
सवाल: आम नागरिक इस मामले में क्या सावधानी बरते?
जवाब: हमेशा लाइसेंसधारी मेडिकल स्टोर से बिल लेकर दवा खरीदें, बैच नंबर व एक्सपायरी जांचें और संदिग्ध पैकिंग दिखे तो CDSCO पोर्टल पर शिकायत करें।