बाजरे की एक बोरी मंडी में बेचने पर किसान की जेब में न्यूनतम समर्थन मूल्य से लगभग 900 रुपए प्रति क्विंटल कम आ रहा है — यही वह आंकड़ा है जिसने राजस्थान में नए आंदोलन की नींव रखी है। भारतीय किसान संघ ने MSP पर बाजरे की सरकारी खरीद शुरू कराने की मांग को लेकर आंदोलन का ऐलान कर दिया है, और 5 अक्टूबर को जयपुर प्रांत की सभी 160 तहसीलों में धरना-प्रदर्शन होगा। किसान तहसील मुख्यालयों पर इकट्ठा होकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।
संगठन ने साफ संकेत दिया है कि अगर सरकार की ओर से मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर आगे बढ़ाया जा सकता है। यानी 5 अक्टूबर की तहसील-स्तरीय कार्रवाई महज शुरुआत होगी — इसके बाद आंदोलन का दायरा बढ़ सकता है।
5 अक्टूबर को क्या होगा
किसान संघ की योजना के मुताबिक 5 अक्टूबर को जयपुर प्रांत की हर तहसील में किसान अपने तहसील मुख्यालय पहुंचेंगे। वहां धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और उसके बाद मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा, जिसमें बाजरे की MSP पर सरकारी खरीद शुरू करने की मांग होगी।
प्रदेश उपाध्यक्ष छोगालाल सैनी ने बताया कि प्रदर्शन की पूरी तैयारी तहसील स्तर पर चल रही है। संगठन का दावा है कि 160 तहसीलों में एक ही दिन एक साथ धरने होंगे, जिससे मांग की गंभीरता सरकार तक पहुंचे। आंदोलन के अगले चरण की रणनीति 5 अक्टूबर के बाद तय होगी — मांग नहीं मानी गई तो प्रदेशव्यापी आंदोलन का रास्ता खुला है।
आंकड़े क्या कहते हैं: 2900 बनाम 2000
इस पूरे आंदोलन की जड़ में दो आंकड़ों का अंतर है। केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,900 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। वहीं किसान संघ के प्रांत अध्यक्ष कालूराम बागड़ा का दावा है कि इस समय कई मंडियों में किसानों को बाजरा करीब 2,000 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर बिक रहा है।
मुख्य आंकड़े: बाजरे का MSP (खरीफ सीजन 2026-27) — 2,900 रुपए/क्विंटल; मंडियों में दावा किया जा रहा भाव — लगभग 2,000 रुपए/क्विंटल; प्रति क्विंटल अंतर — लगभग 900 रुपए; प्रदर्शन की तारीख — 5 अक्टूबर; तहसीलों की संख्या — 160 (जयपुर प्रांत)।
किसान संघ का तर्क है कि जब सरकार ने समर्थन मूल्य घोषित किया है, तो बाजार में उससे काफी नीचे भाव मिलने पर सरकार को हस्तक्षेप करना चाहिए — खरीद व्यवस्था शुरू होनी चाहिए ताकि घोषित मूल्य का लाभ किसान तक पहुंचे।
किसान संघ की चार बड़ी मांगें
- MSP पर बाजरे की सरकारी खरीद शुरू हो — किसान संघ की मुख्य मांग है कि राज्य सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर बाजरे की खरीद की व्यवस्था तुरंत बनाए।
- भावांतर व्यवस्था लागू हो — अगर सीधी खरीद संभव न हो, तो हरियाणा की तर्ज पर भावांतर योजना लाई जाए, यानी बाजार भाव और MSP के अंतर की भरपाई किसानों को की जाए।
- बाजरे के निर्यात को बढ़ावा मिले — प्रांत महामंत्री डॉ. सांवर मल सोलेट के मुताबिक बाजरे के अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात की संभावनाओं पर काम होना चाहिए, ताकि किसानों को सीधा फायदा मिले।
- बेहतर बाजार व्यवस्था — बाजरे के लिए स्थायी और भरोसेमंद बाजार तंत्र बने, ताकि हर सीजन में किसान भाव को लेकर असमंजस में न रहें।
डॉ. सोलेट ने कहा कि राजस्थान देश का सबसे बड़ा बाजरा उत्पादक राज्य है, इसलिए यहां की खरीद और बाजार व्यवस्था का असर सीधे देशभर के बाजरा किसानों पर पड़ता है।
पृष्ठभूमि: संकल्प पत्र का वादा और ढाई साल का इंतजार
किसान संघ ने राज्य सरकार को उसके चुनावी संकल्प पत्र की याद दिलाई है। संगठन का कहना है कि सरकार ने बाजार में MSP पर खरीद का भरोसा दिया था, लेकिन ढाई साल बीत जाने के बाद भी इस दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रांत अध्यक्ष कालूराम बागड़ा के मुताबिक, किसानों को अब तक बाजरे की खरीद को लेकर वैसी व्यवस्था नहीं मिल पाई है, जैसी उम्मीद थी। यही वजह है कि संगठन ने अब सड़कों पर उतरने का फैसला किया है। आंदोलन की घोषणा जयपुर में आयोजित प्रेसवार्ता में की गई, जिसमें प्रांत मंत्री श्रीचंद सिद्ध, जिलाध्यक्ष लक्ष्मीनारायण यादव, जिला मंत्री डॉ. लोकेश कुमार चंदेल सहित संगठन के अन्य पदाधिकारी मौजूद रहे।
किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
अगर आप बाजरा उगाते हैं, तो यह आंदोलन सीधे आपकी जेब से जुड़ा है। प्रति क्विंटल लगभग 900 रुपए का अंतर एक छोटे किसान के लिए भी सीजन भर में हजारों रुपए का नुकसान बन जाता है। MSP पर खरीद शुरू होने या भावांतर व्यवस्था लागू होने से यह अंतर पाटा जा सकता है।
5 अक्टूबर के प्रदर्शन के बाद सरकार का रुख साफ होगा। अगर मांग पर ठोस निर्णय लिया जाता है, तो खरीफ सीजन की बची हुई बिक्री पर किसानों को राहत मिल सकती है। नहीं तो आंदोलन प्रदेश स्तर पर फैल सकता है, जिससे दबाव और बढ़ेगा। फिलहाल किसान संघ की नजर 5 अक्टूबर की तहसील-स्तरीय कार्रवाई पर है — उसी दिन की भागीदारी तय करेगी कि आगे की रणनीति कितनी बड़ी होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: 5 अक्टूबर को प्रदर्शन कहां-कहां होगा? जवाब: जयपुर प्रांत की सभी 160 तहसीलों में। किसान अपने-अपने तहसील मुख्यालयों पर धरना देंगे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।
सवाल: बाजरे का मौजूदा MSP कितना है? जवाब: केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,900 रुपए प्रति क्विंटल तय किया है।
सवाल: किसान संघ का मुख्य आरोप क्या है? जवाब: संगठन का दावा है कि मंडियों में बाजरा करीब 2,000 रुपए प्रति क्विंटल पर बिक रहा है, यानी MSP से लगभग 900 रुपए कम। इसी अंतर को पाटने के लिए सरकारी खरीद या भावांतर व्यवस्था की मांग की जा रही है।
सवाल: भावांतर व्यवस्था क्या होती है? जवाब: इसमें सरकार फसल की सीधी खरीद नहीं करती, बल्कि बाजार भाव और MSP के बीच के अंतर की राशि किसानों को सीधे देती है। हरियाणा में यह व्यवस्था लागू है, और किसान संघ राजस्थान में भी यही मॉडल चाहता है।
सवाल: अगर मांग नहीं मानी गई तो क्या होगा? जवाब: किसान संघ ने कहा है कि 5 अक्टूबर के तहसील-स्तरीय प्रदर्शन के बाद अगर ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन को प्रदेश स्तर पर आगे बढ़ाया जाएगा।