मोती लाल कुमावत बने राजस्थान के किसान ब्रांड एम्बेसेडर: जैविक-प्राकृतिक खेती सिखाएंगे, मिलेगा ₹11,000 मासिक मानदेय
राजस्थान के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। राज्य के कृषि विभाग ने जैविक, परंपरागत और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए नई पहल शुरू की है। इसके तहत जयपुर जिले के मौजमाबाद तहसील के बिचून गांव के प्रगतिशील किसान मोती लाल कुमावत को ‘किसान ब्रांड एम्बेसेडर एवं ट्रेनर’ नियुक्त किया गया है। अब वे प्रदेशभर में किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती की तकनीक सिखाएंगे, और इसके बदले हर महीने 11,000 रुपए का मानदेय भी मिलेगा।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने यह नियुक्ति 2 अक्टूबर 2026 को की। इसके पीछे सोच यह है कि किसान से किसान तक का संदेश सबसे ज्यादा असर करता है। जब एक सफल किसान खुद अपने खेत का अनुभव साझा करता है, तो सुनने वाला किसान भी उस पर भरोसा करता है। इसी सोच के साथ विभाग ने ‘खेत से खेत तक’ प्राकृतिक खेती का संदेश पहुंचाने का फैसला किया है।
कैसे मिला मोती लाल कुमावत को ये सम्मान
मोती लाल कुमावत कोई आम किसान नहीं हैं। वे वर्षों से जैविक, परंपरागत और प्राकृतिक खेती के तरीकों पर काम कर रहे हैं और अपने खेत में कई तरह के सफल प्रयोग किए हैं। विभाग को उनकी प्रस्तुति इतनी प्रभावी और सराहनीय लगी कि कृषि आयुक्त ने उन्हें सीधे यह जिम्मेदारी सौंपने का निर्णय लिया।
कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने कहा कि मोती लाल कुमावत का इन खेती पद्धतियों के प्रति समर्पण, उनका व्यावहारिक अनुभव और किसानों के बीच प्राकृतिक एवं टिकाऊ कृषि को लोकप्रिय बनाने की उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई है। यानी यह सम्मान सिर्फ डिग्री या पद का नहीं, बल्कि खेत की मिट्टी में किए गए असली काम का है।
दिलचस्प बात यह है कि यह पहल कोई अचानक नहीं है। इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उदयपुर दौरे के दौरान किसानों के साथ हुई चौपाल में भी प्राकृतिक और गौ-आधारित खेती के क्षेत्र में नवाचार करने वाले प्रेमचंद कपाया को ब्रांड एम्बेसेडर बनाया गया था। उसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए अब मोती लाल कुमावत को राज्य स्तर पर किसान ब्रांड एम्बेसेडर एवं ट्रेनर की जिम्मेदारी दी गई है।
मास्टर ट्रेनर के रूप में क्या करेंगे मोती लाल
नियुक्ति के बाद मोती लाल कुमावत राजस्थान के अलग-अलग क्षेत्रों में आयोजित होने वाले कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कार्यशालाओं में मास्टर ट्रेनर के रूप में सेवाएं देंगे। उनका काम सिर्फ भाषण देना नहीं होगा, बल्कि किसानों को व्यवहारिक चीजें सिखाना होगा।
मुख्य विषय इस प्रकार होंगे:
- जैविक और प्राकृतिक खेती की तकनीकें — बिना रासायनिक खाद और कीटनाशक के फसल कैसे उगाएं
- गौ-आधारित कृषि — गोबर, गोमूत्र और देशी गाय के संसाधनों से खेती के मॉडल
- स्थानीय और प्राकृतिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग — मिट्टी, पानी और जैविक संसाधनों का सही इस्तेमाल
- टिकाऊ कृषि पद्धतियां — लंबे समय तक जमीन की उर्वरता बनाए रखने वाले तरीके
वे अपने खेत पर किए गए प्रयोगों और व्यावहारिक अनुभवों को किसानों के साथ साझा करेंगे, ताकि किसान इन पद्धतियों को समझकर अपने स्तर पर अपनाने की दिशा में आगे बढ़ सकें। विभाग ने संबंधित अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं कि विभिन्न कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कार्यशालाओं में मोती लाल कुमावत की मास्टर ट्रेनर के रूप में सेवाएं लेना सुनिश्चित किया जाए।
कितना मिलेगा मानदेय, क्या सुविधाएं रहेंगी
कृषि विभाग की ओर से मोती लाल कुमावत को प्रशिक्षण एवं प्रचार-प्रसार से जुड़े कार्यक्रमों के दौरान यात्रा, परिवहन और भोजन सहित आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। इसके अलावा श्री रामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कोटा के चेयरमैन ताराचंद गोयल के माध्यम से उन्हें 11,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय अग्रिम आदेश तक दिया जाएगा।
एक नजर में पूरी जानकारी:
| बिंदु | विवरण |
| नियुक्ति | किसान ब्रांड एम्बेसेडर एवं ट्रेनर |
| नियुक्त व्यक्ति | मोती लाल कुमावत (ग्राम बिचून, तहसील मौजमाबाद) |
| नियुक्ति प्राधिकारी | कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल |
| तारीख | 2 अक्टूबर 2026 |
| मासिक मानदेय | ₹11,000 (अग्रिम आदेश तक) |
| मानदेय माध्यम | श्री रामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कोटा (चेयरमैन ताराचंद गोयल) |
| अतिरिक्त सुविधाएं | यात्रा, परिवहन और भोजन |
| कार्यक्षेत्र | संपूर्ण राजस्थान (प्रशिक्षण कार्यक्रम एवं कार्यशालाएं) |
| मुख्य विषय | जैविक, परंपरागत एवं प्राकृतिक खेती, गौ-आधारित कृषि |
क्यों अहम है जैविक और प्राकृतिक खेती
राजस्थान के किसान लंबे समय से रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर निर्भर रहे हैं। इससे जहां एक ओर लागत बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी ओर जमीन की सेहत भी खराब हो रही है। प्राकृतिक और जैविक खेती इसी समस्या का जवाब है।
गौ-आधारित खेती में देशी गाय के गोबर और गोमूत्र से बनी जीवामृत, बीजामृत जैसी चीजें रासायनिक खाद का सस्ता और टिकाऊ विकल्प बनती हैं। इससे किसान की लागत कम होती है, उपज की गुणवत्ता बेहतर होती है और जमीन लंबे समय तक उपजाऊ बनी रहती है। यही कारण है कि सरकार अब इन्हीं पद्धतियों को किसानों के बीच फैलाना चाहती है।
किसानों के लिए इसका क्या मतलब है
यदि आप राजस्थान के किसान हैं, तो यह खबर सीधे आपके काम की है। आने वाले महीनों में आपके जिले में भी कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम हो सकता है, जिसमें मोती लाल कुमावत मास्टर ट्रेनर के रूप में शामिल होंगे। वहां आप उनसे सीधे सवाल पूछ सकते हैं — जैविक खेती शुरू करने का तरीका, गौ-आधारित मॉडल की लागत, या अपने खेत के हिसाब से उपयुक्त तकनीक।
अपने क्षेत्र के कार्यक्रमों की जानकारी के लिए नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: मोती लाल कुमावत को किसान ब्रांड एम्बेसेडर क्यों बनाया गया?
उत्तर: वे जैविक, परंपरागत और प्राकृतिक खेती में वर्षों से व्यावहारिक प्रयोग कर रहे प्रगतिशील किसान हैं। उनकी प्रस्तुति और समर्पण को देखते हुए कृषि आयुक्त नरेश कुमार गोयल ने 2 अक्टूबर 2026 को उन्हें यह जिम्मेदारी दी है।
प्रश्न 2: मोती लाल कुमावत कौन हैं और कहां के रहने वाले हैं?
उत्तर: मोती लाल कुमावत ग्राम बिचून, तहसील मौजमाबाद के प्रगतिशील किसान हैं, जो जैविक और प्राकृतिक खेती के क्षेत्र में नवाचार के लिए जाने जाते हैं।
प्रश्न 3: उन्हें कितना मानदेय मिलेगा और कैसे?
उत्तर: उन्हें श्री रामशांताय जैविक कृषि अनुसंधान एवं प्रशिक्षण केंद्र, कोटा के चेयरमैन ताराचंद गोयल के माध्यम से 11,000 रुपए प्रतिमाह मानदेय अग्रिम आदेश तक दिया जाएगा। साथ ही कार्यक्रमों के दौरान यात्रा, परिवहन और भोजन की सुविधा भी मिलेगी।
प्रश्न 4: क्या इससे पहले भी किसी किसान को ब्रांड एम्बेसेडर बनाया गया था?
उत्तर: हां, इससे पहले मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के उदयपुर दौरे के दौरान किसानों के साथ हुई चौपाल में प्राकृतिक और गौ-आधारित खेती के क्षेत्र में नवाचार करने वाले प्रेमचंद कपाया को ब्रांड एम्बेसेडर बनाया गया था।