करणी माता फिल्म कर्णिका अब बड़े पर्दे की हकीकत बनने जा रही है — और ये खबर राजस्थान के हर उस श्रद्धालु के लिए है जो कभी देशनोक के दरबार में हाजिरी लगाने गया है। टी-सीरीज के भूषण कुमार और निर्देशक राज शांडिल्य की कथावाचक फिल्म्स ने करणी माता के 639वें जन्मोत्सव के पावन मौके पर इस बड़ी फिल्म का ऐलान किया है। फिल्म का नाम है ‘कर्णिका’, और इसे 2027 में ही सिनेमाघरों में रिलीज करने की योजना है। राजस्थान की कुलदेवी पर बनने वाली ये पहली बड़ी मेनस्ट्रीम फिल्म होगी, जिसकी पूरी शूटिंग देशनोक, बीकानेर और जोधपुर में होगी।
1. देशनोक का वो मंदिर जहां चूहों को खिलाया जाता है हलवा
बीकानेर से करीब 30 किलोमीटर दूर देशनोक में स्थित करणी माता का मंदिर दुनिया के सबसे अनोखे मंदिरों में गिना जाता है। यहां हजारों काले चूहे — जिन्हें श्रद्धालु ‘काबा’ कहते हैं — मंदिर परिसर में बेधड़क घूमते हैं, उन्हें हलवा-मेवा खिलाया जाता है, और अगर कोई काबा भक्त के पैरों पर चढ़ जाए तो इसे बेहद शुभ माना जाता है।
मंदिर के चारों ओर फैला ‘ओरण’ सभी जीव-जंतुओं के लिए अभयारण्य माना जाता है — यहां किसी भी जीव को नुकसान पहुंचाना वर्जित है। मंदिर का मुख्य गर्भगृह सफेद संगमरमर का बना है, जिसे महाराजा गंगा सिंह ने बनवाया था। नवरात्रि के सातवें दिन करणी माता का जन्मोत्सव मनाया जाता है, और इस बार 639वें जन्मोत्सव के शुभ मौके पर ही फिल्म की घोषणा की गई।
2. कौन थीं करणी माता? 639 साल पुरानी संत-योद्धा की गाथा
करणी माता का जन्म विक्रम संवत 1444 (1387 ईस्वी) में आश्विन शुक्ल सप्तमी को सुवाप गांव में हुआ था। जन्म के समय उनका नाम रिद्धि कंवर था। उनके पिता मेहाजी किनिया गांव के मुखिया थे और चारणों के किनिया वंश से संबंध रखते थे। बड़े होकर रिद्धि कंवर करणी माता कहलाईं — 14वीं शताब्दी की एक ऐसी संत-योद्धा जिनका जीवन साहस, आध्यात्मिक ज्ञान और अटूट आस्था का प्रतीक बना।
भक्त उन्हें हिंगलाज माता और मां दुर्गा का अवतार मानते हैं। करणी माता उत्तर-पश्चिमी भारत के राजपूतों और चारणों की कुलदेवी हैं। कहा जाता है कि उनके आशीर्वाद से ही राव जोधा ने जोधपुर और राव बीका ने बीकानेर राज्य की स्थापना की — और दोनों महाराजाओं के अनुरोध पर करणी माता ने बीकानेर किले और मेहरानगढ़ किले की नींव रखी थी। आज भी मारवाड़ क्षेत्र के भारतीय सेना के जवान उन्हें अपनी संरक्षक देवी मानते हैं।
3. करणी माता फिल्म कर्णिका की घोषणा — बड़े तथ्य एक नजर में
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| फिल्म का नाम | कर्णिका (Karnika) |
| घोषणा की तारीख | 18 अक्टूबर 2026, 639वें जन्मोत्सव पर |
| बैनर | टी-सीरीज और कथावाचक फिल्म्स |
| निर्माता | भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, राज शांडिल्य, विमल लाहोटी, निरंजन मुंधड़ा |
| शूटिंग स्थान | देशनोक, बीकानेर, जोधपुर |
| शूटिंग शुरू | 2027 की शुरुआत में |
| रिलीज | 2027 में ही |
| कास्ट और निर्देशक | अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ |
मेकर्स का कहना है कि फिल्म के जरिए करणी माता की असाधारण जीवनगाथा और उनकी गौरवशाली विरासत को बड़े पर्दे पर जीवंत किया जाएगा। घोषणा के साथ फिल्म की पहली झलक भी जारी की गई है। करणी सेना के मुंबई अध्यक्ष सुरजीत सिंह राठौड़ ने निर्देशक राज शांडिल्य, निर्माता भूषण कुमार और कृष्ण कुमार सहित पूरी टीम को शुभकामनाएं दी हैं — जिससे साफ है कि समाज के बड़े संगठनों ने इस प्रोजेक्ट को आशीर्वाद दे दिया है।
4. ‘हनुमान अंश’ के बाद भक्ति सिनेमा की नई लहर
ये घोषणा एक बड़े ट्रेंड का हिस्सा है — नीम करोली बाबा पर आधारित ‘हनुमान अंश’ की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद देश में भक्ति ड्रामा फिल्मों की लाइन लग गई है।
इस लहर में ‘कर्णिका’ इसलिए खास है क्योंकि ये राजस्थान की अपनी देवी की कहानी है। अब तक धार्मिक फिल्में ज्यादातर अखिल भारतीय देवताओं या संतों पर बनती थीं। करणी माता जैसी लोकदेवी — जिनकी आस्था लाखों राजपूत और चारण परिवारों की रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी है — को इतने बड़े बैनर पर पेश करना अपने आप में ऐतिहासिक कदम है।
5. करणी माता फिल्म कर्णिका राजस्थान के लिए क्यों खास
पहली और सबसे बड़ी बात — पूरी शूटिंग राजस्थान में होगी। देशनोक, बीकानेर और जोधपुर में शूटिंग का मतलब है स्थानीय लोगों को रोजगार, होटल-ट्रांसपोर्ट कारोबार को बढ़ावा, और राजस्थान के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान।
दूसरी बात — देशनोक मंदिर और करणी माता की गाथा अब देश के हर सिनेमाघर तक पहुंचेगी। नवरात्रि के दिनों में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का त्रिपुरा सुंदरी मंदिर दर्शन भी दिखाता है कि प्रदेश में धार्मिक आस्था और संस्कृति कितनी गहराई से जुड़ी है।
तीसरी बात — ये फिल्म राजस्थान की चारण परंपरा और लोकगाथाओं को मुख्यधारा के सिनेमा में जगह देगी। ऐसी कहानियां आमतौर पर लोकगीतों और मेलों तक सीमित रह जाती हैं — बड़े पर्दे पर आना इस विरासत के संरक्षण की दिशा में भी एक कदम है।
6. देशनोक कैसे पहुंचें — श्रद्धालुओं के लिए काम की जानकारी
देशनोक बीकानेर से करीब 30 किलोमीटर दक्षिण में है — बीकानेर जंक्शन से टैक्सी या बस से आसानी से पहुंचा जा सकता है। मंदिर सुबह से रात तक खुला रहता है, और सुबह-शाम आरती होती है। दर्शन के लिए सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च के बीच माना जाता है, जब राजस्थान का मौसम सुहावना रहता है।
नवरात्रि के दिनों में यहां भारी भीड़ उमड़ती है, इसलिए उस समय जाने पर समय का खास ध्यान रखें। मंदिर परिसर में जूते-चप्पल उतारकर ही प्रवेश मिलता है, और काबा को किसी तरह का नुकसान पहुंचाना वर्जित है — ये आस्था का विषय है, इसका सम्मान करें। एक ही यात्रा में आप बीकानेर का जूनागढ़ किला भी देख सकते हैं — उसी किले की नींव करणी माता ने रखी थी। त्योहारी सीजन में जयपुर की दीपावली रौनक के साथ राजस्थान की यात्रा का प्लान बनाना भी एक अच्छा विकल्प है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: ‘कर्णिका’ फिल्म कब रिलीज होगी?
फिल्म की शूटिंग 2027 की शुरुआत में शुरू होगी और मेकर्स का लक्ष्य उसी साल फिल्म को सिनेमाघरों में रिलीज करना है।
प्रश्न 2: फिल्म की शूटिंग कहां होगी?
पूरी शूटिंग राजस्थान में होगी — देशनोक, बीकानेर और जोधपुर। ये सभी स्थान करणी माता की विरासत से गहराई से जुड़े हैं।
प्रश्न 3: फिल्म के निर्माता कौन हैं?
फिल्म टी-सीरीज और कथावाचक फिल्म्स के बैनर तले बन रही है। निर्माताओं में भूषण कुमार, कृष्ण कुमार, राज शांडिल्य, विमल लाहोटी और निरंजन मुंधड़ा शामिल हैं। कास्ट और निर्देशक का फैसला अभी बाकी है।
प्रश्न 4: करणी माता कौन थीं?
करणी माता 14वीं शताब्दी की संत-योद्धा थीं, जो राजपूतों और चारणों की कुलदेवी मानी जाती हैं। देशनोक स्थित उनका मंदिर हजारों काले चूहों (काबा) के लिए प्रसिद्ध है।