बरखंडी धाम संत हत्याकांड: चढ़ावे की लूट के लिए 80 वर्षीय संत को पहाड़ी से खाई में धक्का, 5 दिन में पुलिस ने आरोपी को दबोचा

जयपुर। झुंझुनूं जिले के प्रसिद्ध तीर्थराज लोहार्गल के बरखंडी धाम में रहने वाले 80 वर्षीय संत सूरजदास जी महाराज की हत्या की गुत्थी पुलिस ने महज पांच दिन में सुलझा ली है। गोठड़ा थाना पुलिस ने आरोपी सुरेश कुमार (44) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने चढ़ावे की रकम लूटने के इरादे से पहले संत को बाथरूम में बंद किया, नकदी लूटी और विरोध करने पर उन्हें पहाड़ी से गहरी खाई में धक्का दे दिया। फॉरेंसिक टीम, डॉग स्क्वॉड और साइबर टीम की मदद से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान हुई।

5 दिन में गुत्थी सुलझी — कैसे हुआ खुलासा

हत्या के मामले का खुलासा कितनी तेजी से हुआ, यह इस कांड का सबसे अहम पहलू है। संत सूरजदास जी महाराज 26 सितंबर की शाम से बरखंडी धाम से लापता थे। 27 सितंबर को पुलिस को सूचना मिली और गोठड़ा थाना पुलिस ने तुरंत रिपोर्ट दर्ज कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। घटनास्थल का एफएसएल टीम, डॉग स्क्वॉड, साइबर टीम और एमओबी (मोबाइल फॉरेंसिक) के माध्यम से निरीक्षण करवाया गया और मौके से कई महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाए गए।

तलाशी के दौरान संत का शव बरखंडी की पहाड़ियों में एक गहरी खाई में संदिग्ध अवस्था में मिला। शव को खाई से बाहर निकालने के लिए एसडीआरएफ जयपुर और जिला रेस्क्यू टीम की मदद ली गई। इसके बाद मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया गया और हत्या के आरोपी की तलाश तेज कर दी गई। पुलिस ने तकनीकी संसाधनों और घटनास्थल से जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की पहचान की और आरोपी सुरेश कुमार को गिरफ्तार कर लिया। अब पुलिस आरोपी से विस्तृत पूछताछ कर रही है।

बरखंडी धाम और तीर्थराज लोहार्गल की पृष्ठभूमि

झुंझुनूं जिले का लोहार्गल क्षेत्र राजस्थान के सबसे पुराने और प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों में गिना जाता है। लोहार्गल को तीर्थराज के नाम से जाना जाता है और यहां हर साल लाखों श्रद्धालु सूर्य मंदिर और अन्य धार्मिक स्थलों के दर्शन के लिए आते हैं। बरखंडी धाम इसी तीर्थ क्षेत्र में स्थित एक जाना-पहचाना धार्मिक स्थल है, जहां संत सूरजदास जी महाराज लंबे समय से रहते आ रहे थे।

80 वर्षीय संत का यहां अकेले रहना कोई असामान्य बात नहीं थी। धाम के परिसर में वह पूजा-अर्चना देखते थे और मेले के दौरान चढ़ावे में आने वाली धनराशि भी उन्हीं के पास रहती थी। यही चढ़ावे की रकम आरोपी की नजर में आई और उसी ने इस जघन्य वारदात को अंजाम दिया।

23 सितंबर से 4 अक्टूबर: पूरा घटनाक्रम एक नजर में

तारीख घटनाक्रम
23 सितंबर आरोपी पहली बार बरखंडी की पहाड़ी पर पहुंचा, रातभर धाम में रुका
24 सितंबर आरोपी पहाड़ी से नीचे उतर आया
25 सितंबर आरोपी दोबारा पहाड़ी पर पहुंचा; संत सूरजदास जी महाराज धाम में अकेले थे
26 सितंबर (सुबह) संत को बाथरूम में बंद कर चढ़ावे की नकदी लूटी; विरोध करने पर पहाड़ी से खाई में धक्का दिया
26 सितंबर (शाम) संत धाम से लापता
27 सितंबर पुलिस को सूचना मिली, गोठड़ा थाने में रिपोर्ट दर्ज, तलाशी शुरू
27–28 सितंबर एफएसएल, डॉग स्क्वॉड, साइबर टीम से निरीक्षण; खाई में शव मिला, एसडीआरएफ ने बाहर निकाला
4 अक्टूबर तकनीकी साक्ष्यों से आरोपी की पहचान; सुरेश कुमार (44) गिरफ्तार

आरोपी की चाल — दो बार पहाड़ी पर गया, दोनों बार रात वहीं बिताई

एडिशनल एसपी देवेंद्र सिंह राजावत के अनुसार आरोपी सुरेश कुमार (पुत्र ग्यारसीलाल, निवासी झाझम की ढाणी, तन पहाड़ीला, थाना गोठड़ा) 23 सितंबर को पहली बार बरखंडी की पहाड़ी पर गया था। वह रातभर बरखंडी धाम में रुका और 24 सितंबर को नीचे उतर आया।

इसके बाद 25 सितंबर को आरोपी एक बार फिर पहाड़ी पर पहुंचा, जहां संत सूरजदास जी महाराज अकेले थे। आरोपी ने उस रात भी वहीं बिताई। 26 सितंबर की सुबह आरोपी ने संत को बाथरूम में बंद कर दिया और चढ़ावे की धनराशि निकाल ली। संत किसी तरह बाथरूम से बाहर निकल आए और उन्होंने रकम ले जाने का विरोध किया। विरोध करने पर आरोपी ने उन्हें पहाड़ी से गहरी खाई में धक्का दे दिया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी मौके से निकल गया।

जांच का तरीका — कौन-कौन सी टीम ने काम किया

इस मामले में गोठड़ा थाना पुलिस ने पारंपरिक जांच के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया। घटनास्थल का निरीक्षण एफएसएल टीम ने किया, जिससे फॉरेंसिक साक्ष्य जुटाए गए। डॉग स्क्वॉड को भी मौके पर लाया गया। साइबर टीम ने आरोपी की लोकेशन और कॉल डिटेल जैसे तकनीकी सुराग खंगाले। एमओबी के माध्यम से भी मौके का बारीकी से परीक्षण हुआ।

पूरी कार्रवाई एसपी कावेन्द्र सिंह सागर के निर्देशन में, एडिशनल एसपी देवेंद्र सिंह राजावत के मार्गदर्शन, सीओ नवलगढ़ सुगन सिंह के सुपरविजन तथा गोठड़ा थानाधिकारी प्रेमप्रकाश के नेतृत्व में गठित विशेष पुलिस टीम ने की। वरिष्ठ अधिकारियों की सीधी निगरानी से जांच में तेजी आई और पांच दिन के भीतर आरोपी सलाखों के पीछे पहुंच गया।

तीर्थस्थलों में अकेले रहने वाले संतों की सुरक्षा पर सवाल

इस हत्याकांड ने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है — तीर्थस्थलों और धार्मिक परिसरों में अकेले रहने वाले वृद्ध संतों की सुरक्षा कौन सुनिश्चित करेगा? बरखंडी धाम जैसे धार्मिक स्थलों पर मेले के समय चढ़ावे की नकदी की आवक बढ़ जाती है और यही रकम अपराधियों को आकर्षित करती है। संत सूरजदास जी महाराज की उम्र 80 वर्ष थी और वह धाम में अकेले रहते थे, जिससे वह आसान निशाना बन गए।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि तीर्थ क्षेत्र के प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन को मिलकर ऐसे धार्मिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी होगी — जैसे सीसीटीवी कैमरे, रात्रि गश्त और चढ़ावे की राशि को सुरक्षित स्थान पर जमा कराने की व्यवस्था। पुलिस अब आरोपी से पूछताछ के जरिए यह भी पता लगाएगी कि वारदात में कोई और शख्स शामिल था या नहीं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: बरखंडी धाम में संत की हत्या का आरोपी कौन है?

जवाब: पुलिस ने सुरेश कुमार (44), पुत्र ग्यारसीलाल, निवासी झाझम की ढाणी, तन पहाड़ीला, थाना गोठड़ा को गिरफ्तार किया है। उस पर चढ़ावे की रकम लूटने के दौरान विरोध करने पर संत को पहाड़ी से खाई में धक्का देने का आरोप है।

सवाल: संत सूरजदास जी महाराज की हत्या कब और कहां हुई?

जवाब: पुलिस जांच के अनुसार 26 सितंबर की सुबह झुंझुनूं जिले के लोहार्गल स्थित बरखंडी धाम में वारदात हुई। संत 26 सितंबर की शाम से लापता थे और 27 सितंबर को पुलिस को सूचना मिलने के बाद तलाशी में उनका शव बरखंडी की पहाड़ियों में एक गहरी खाई में मिला।

सवाल: पुलिस ने हत्या का खुलासा कितने दिन में किया?

जवाब: महज 5 दिन में। 27 सितंबर को रिपोर्ट दर्ज होने के बाद एफएसएल टीम, डॉग स्क्वॉड, साइबर टीम और एमओबी की मदद से साक्ष्य जुटाए गए और 4 अक्टूबर को आरोपी गिरफ्तार कर लिया गया।

सवाल: धाम में चढ़ावे की रकम आरोपी की नजर में कैसे आई?

जवाब: बरखंडी धाम में मेले और धार्मिक आयोजनों के दौरान चढ़ावे की धनराशि संत के पास रहती थी। आरोपी इसी रकम को लूटने के इरादे से दो बार पहाड़ी पर गया था।

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