जयपुर के चौगान स्टेडियम में दो दिन तक बेटियों की कबड्डी का रोमांच छाया रहा। जयपुर बालिका कबड्डी लीग के आखिरी दिन झोटवाड़ा की टीम चैंपियन बनी, जबकि चाकसू उपविजेता रहा। दोनों टीमों को ट्रॉफी और मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। यह लीग राजस्थान सरकार के पंच गौरव कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन ने आयोजित की थी, जिसमें जिले के 23 ब्लॉकों की छात्राओं ने हिस्सा लिया।
खास बात यह रही कि झोटवाड़ा का दबदबा सिर्फ एक दिन का नहीं था — पहले दिन छोटी कक्षाओं में भी उसी टीम ने खिताब जीता था। इसलिए यह जीत पूरे जिले में कबड्डी के प्रति बढ़ती गंभीरता का संकेत मानी जा रही है।
फाइनल के दिन मैदान पर क्या-क्या हुआ
लीग के दूसरे दिन कक्षा 10वीं से 12वीं तक की छात्राओं के मुकाबले हुए, जिनमें दमखम, खेल कौशल और टीम भावना का साफ प्रदर्शन देखने को मिला। कई मुकाबले आखिरी क्षणों तक रोमांचक बने रहे।
फाइनल के बाद विजेता झोटवाड़ा और उपविजेता चाकसू की टीमों को ट्रॉफी और मोमेंटो दिए गए। सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को कबड्डी पोशाक दी गई, जबकि फाइनल में पहुंची दोनों टीमों को मेट शूज भी वितरित किए गए। खिलाड़ियों के लिए नाश्ते और भोजन की समुचित व्यवस्था की गई थी, ताकि लंबी प्रतियोगिता के दौरान किसी को असुविधा न हो।
इस अवसर पर कलेक्ट्रेट जयपुर के आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग के संयुक्त निदेशक बाबूलाल मीना, जिला खेल अधिकारी मानसिंह और कबड्डी कोच शशि शर्मा मौजूद रहे। आयोजकों के मुताबिक इस तरह के आयोजनों का मकसद बालिकाओं को प्रतियोगी खेलों का मंच देना, उनकी प्रतिभा निखारना और कबड्डी के प्रति रुचि बढ़ाना है।
पहले दिन छोटी बेटियों ने भी दिखाया दम
लीग के पहले दिन कक्षा 6 से 9 की छात्राओं के मुकाबले हुए थे, जिनमें 23 ब्लॉकों की 23 टीमों की करीब 300 छात्राओं ने भाग लिया। पहले दिन भी झोटवाड़ा चैंपियन और चाकसू उपविजेता रहा था, और सभी खिलाड़ियों को कबड्डी यूनिफॉर्म व भोजन की व्यवस्था दी गई थी।
दोनों दिनों को मिलाकर तस्वीर साफ है — झोटवाड़ा की बेटियों ने छोटी और बड़ी, दोनों आयु वर्गों में दबदबा बनाए रखा। किसी एक टीम का दोनों वर्गों में जीतना बताता है कि वहां स्कूल स्तर पर कबड्डी की तैयारी लगातार हो रही है, न कि सिर्फ एक टूर्नामेंट के लिए।
पंच गौरव कार्यक्रम: एक जिला, एक खेल की सोच
पंच गौरव राजस्थान सरकार की पहल है, जिसके तहत “एक जिला, एक खेल” की अवधारणा पर काम होता है — हर जिले में किसी एक खेल को विशेष पहचान देकर उसी के जरिए स्थानीय प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना। जयपुर की यह लीग इसी कार्यक्रम के तहत आयोजित की गई।
आयोजन जिला प्रशासन ने किया, जिसमें राजस्थान राज्य क्रीड़ा परिषद, जयपुर से जुड़े अधिकारियों की भूमिका रही। छात्राओं के लिए यह लीग सिर्फ एक टूर्नामेंट नहीं — यह वह मंच है जहां वे पहली बार बड़े मैदान और व्यवस्थित मुकाबलों का अनुभव लेती हैं, जो आगे राज्य और राष्ट्रीय स्तर की नींव बनता है।
राजस्थान में कबड्डी की बेटियों की बढ़ती धमक
जयपुर की यह लीग अकेली घटना नहीं है — राजस्थान में महिला कबड्डी लगातार सुर्खियों में है। गंगापुर सिटी में 70वीं राज्य स्तरीय कबड्डी प्रतियोगिता हुई थी, और राजस्थान की निधि शर्मा भारतीय महिला टीम की कप्तान के रूप में मलेशिया को 73-13 से हरा चुकी हैं।
आने वाले महीनों में कबड्डी को एक और बड़ा मंच मिलेगा — खेलो राजस्थान गेम्स 2026 दिसंबर से शुरू होंगे, जिनमें 12 खेल हैं और कबड्डी दूसरे चरण में है। इनके लिए ऑनलाइन पंजीयन 16 नवंबर तक खुला है (जन आधार कार्ड से)। जयपुर लीग की बेटियों के लिए यह सीधा अगला पड़ाव हो सकता है।
लीग एक नजर में
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| आयोजन | जिला स्तरीय जयपुर बालिका कबड्डी लीग |
| कार्यक्रम | पंच गौरव (एक जिला, एक खेल) |
| स्थान | चौगान स्टेडियम, जयपुर |
| आयोजक | जिला प्रशासन, जयपुर |
| पहला दिन | कक्षा 6-9; 23 टीमें, करीब 300 छात्राएं |
| दूसरा दिन | कक्षा 10 से 12 |
| विजेता | झोटवाड़ा |
| उपविजेता | चाकसू |
| पुरस्कार | ट्रॉफी, मोमेंटो, पोशाक, मेट शूज |
| मौजूद अधिकारी | बाबूलाल मीना, मानसिंह, शशि शर्मा |
जयपुर बालिका कबड्डी लीग बेटियों के खेल के लिए क्यों अहम है
स्कूल स्तर की लड़कियों के लिए खेल का सबसे बड़ा रोड़ा मंच की कमी होती है — प्रतिभा होने के बावजूद नियमित मुकाबले न मिलें तो खेल आगे नहीं बढ़ता। इस लीग ने ठीक यही कमी पूरी की, 23 ब्लॉकों की छात्राओं को एक ही मैदान पर बराबरी का मौका देकर।
दूसरी बात, यहां सिर्फ ट्रॉफी नहीं मिली — हर खिलाड़ी को पोशाक और फाइनलिस्टों को मेट शूज दिए गए। खेल के सामान की यह मदद छोटी नहीं है; कई परिवारों के लिए यही सहारा बच्ची का खेल जारी रखता है।
तीसरी बात, जिला खेल अधिकारी और कबड्डी कोच की मौजूदगी का मतलब है कि यहां दिखी प्रतिभाओं पर नजर रहेगी। अगर इन बेटियों को आगे भी ऐसे मंच मिलते रहे, तो जयपुर से राज्य और राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी निकलना हैरानी की बात नहीं होगी।
जयपुर बालिका कबड्डी लीग के बाद आगे क्या
जयपुर लीग खत्म होने के बाद अब नजरें दिसंबर में शुरू होने वाले खेलो राजस्थान गेम्स पर हैं। कबड्डी उन खेलों में शामिल है, इसलिए इस लीग में अच्छा प्रदर्शन करने वाली खिलाड़ियों के लिए आगे का रास्ता खुला है। इच्छुक खिलाड़ियों को पंजीयन की अंतिम तिथि 16 नवंबर का ध्यान रखना चाहिए।
स्कूलों और अभिभावकों के लिए भी यह मौका है कि वे छात्राओं को ऐसे आयोजनों से जोड़ें। कबड्डी में शारीरिक मजबूती के साथ टीम भावना, अनुशासन और आत्मविश्वास बढ़ता है — जयपुर की बेटियों ने चौगान स्टेडियम में यह करके दिखाया है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
जयपुर बालिका कबड्डी लीग में कौन चैंपियन बना?
झोटवाड़ा की टीम चैंपियन बनी, जबकि चाकसू की टीम उपविजेता रही। दोनों आयु वर्गों — कक्षा 6 से 9 और कक्षा 10 से 12 — में यही परिणाम रहा।
यह लीग कहां और किसके तहत आयोजित हुई?
लीग जयपुर के चौगान स्टेडियम में राजस्थान सरकार के पंच गौरव कार्यक्रम के तहत जिला प्रशासन की ओर से आयोजित की गई।
लीग में कितनी छात्राओं ने भाग लिया?
पहले दिन 23 ब्लॉकों की 23 टीमों की करीब 300 छात्राओं ने भाग लिया। दूसरे दिन कक्षा 10 से 12 की छात्राओं के मुकाबले हुए।
विजेता और प्रतिभागियों को क्या-क्या मिला?
विजेता और उपविजेता टीमों को ट्रॉफी व मोमेंटो दिए गए, सभी खिलाड़ियों को कबड्डी पोशाक मिली और फाइनलिस्ट टीमों को मेट शूज वितरित किए गए।