जयपुर रावण पुतले की इस बार की कहानी सिर्फ ऊंचाई की नहीं, इंसानियत की है। शहर के आदर्श नगर में 105 फीट ऊंचा रावण तैयार हो रहा है, जिसे विजयादशमी (20 अक्टूबर) को जलाया जाएगा। इसे बना रहे हैं मथुरा के 20 मुस्लिम कारीगर, जो करीब दो महीने से यहीं रहकर दिन-रात काम में जुटे हैं। ये कोई ठेके पर आए मजदूर नहीं — इनका परिवार पांच पीढ़ियों से, करीब 65 साल से, जयपुर का रावण बनाता आ रहा है। दशहरा कमेटी ने ऐलान किया है कि विजयादशमी के दिन इन कलाकारों को मंच पर सम्मानित किया जाएगा, ताकि देश को एक संदेश जाए: कला और मेहनत का कोई धर्म नहीं होता।
आदर्श नगर का दशहरा आयोजन जयपुर का सबसे बड़ा दशहरा आयोजन माना जाता है, और इस बार दहन के दिन करीब एक लाख लोगों के जुटने की उम्मीद है।
जयपुर रावण पुतला: आंकड़ों में 105 फीट, 20 कारीगर, 2 महीने
इस विशाल पुतले से जुड़े कुछ आंकड़े इसे और भी खास बनाते हैं:
पुतले की ऊंचाई: 105 फीट — जयपुर का सबसे बड़ा रावण पुतला
कारीगरों की संख्या: 20, सभी मथुरा के एक ही मुस्लिम परिवार से जुड़े
काम की अवधि: करीब दो महीने — कारीगर दो महीने पहले ही जयपुर पहुंच गए थे
काम की शुरुआत: जन्माष्टमी के अगले दिन से पुतले पर काम शुरू होता है
परंपरा की उम्र: पांच पीढ़ियां — करीब 65 साल पुराना रिश्ता
शुरुआती दौर: 65 साल पहले 20 फीट का पुतला महज 250 रुपये में तैयार हुआ था
उम्मीदित भीड़: दहन के दिन करीब एक लाख लोग जुटने की संभावना
दहन की तारीख: 20 अक्टूबर, विजयादशमी
पुतले के दहन से पहले जबरदस्त आतिशबाजी भी होगी, जो हर साल इस आयोजन का मुख्य आकर्षण रहती है। आदर्श नगर का दशहरा आयोजन जयपुर का सबसे बड़ा दशहरा आयोजन माना जाता है।
पांच पीढ़ियों की विरासत: चांद बाबू के पूर्वजों से शुरू हुआ सफर
इस पुतले को बनाने वाले मुख्य कारीगर का नाम चांद बाबू है। उनके परिवार का जयपुर के इस पुतले से रिश्ता करीब पांच पीढ़ी पुराना है। बताया जाता है कि लगभग 65 साल पहले उनके पूर्वजों ने यहां पहली बार रावण का पुतला तैयार किया था। उस समय 20 फीट ऊंचा पुतला बनाने में महज 250 रुपये लगे थे। आज वही परंपरा 105 फीट तक पहुंच गई है।
दिलचस्प बात यह है कि परिवार के कई लोग अब दूसरे काम-धंधों से जुड़ गए हैं, फिर भी दशहरा आते ही वे पुराने हुनर की ओर लौट आते हैं। कारीगरों के मुताबिक यह काम सिर्फ रोजी-रोटी नहीं — पूर्वजों की अमानत है, जिसे हर हाल में निभाना है। जयपुर में मिलने वाला प्यार और सम्मान उनके लिए पैसों से ज्यादा कीमती है।
मथुरा से जयपुर: डेढ़-दो महीने की मेहनत
मथुरा की यह टीम अगस्त के पहले हफ्ते में ही जयपुर पहुंच गई थी। पुतले का काम जन्माष्टमी के अगले दिन से शुरू हो जाता है, और पूरे समय कारीगर नियम-संयम का पालन करते हैं। सबसे खास बात: इन मुस्लिम कारीगरों के रहने-खाने का इंतजाम राम मंदिर के परिसर में ही किया जाता है, जिसकी व्यवस्था आयोजन समिति करती है।
कमेटी के मुताबिक जब अलग-अलग धर्मों के लोग मिलकर किसी परंपरा को आगे बढ़ाते हैं, तो वही असली भारत की तस्वीर होती है — इंसानियत, कला और आपसी सम्मान किसी एक धर्म तक सीमित नहीं। यही संदेश इस आयोजन से देशभर में पहुंचाना उनका मकसद है।
जयपुर रावण पुतला और 2011 की घटना: राम की कृपा
चांद बाबू के परिवार से जुड़ा एक भावुक प्रसंग भी है। साल 2011 में जब उनके छोटे भाई का परिवार यहां पुतला बनाने के काम में लगा था, तभी उनके घर बेटे का जन्म हुआ। परिवार आज भी इसे भगवान राम की कृपा मानता है — और इसी आस्था ने उन्हें इस परंपरा से और गहरा जोड़ा है।
‘कलाकार का कोई धर्म नहीं होता’
आदर्श नगर दशहरा कमेटी के उपाध्यक्ष राजीव मनचंदा के मुताबिक कलाकारों को धर्म के चश्मे से नहीं देखना चाहिए — पहचान हुनर और मेहनत से होती है, धर्म से नहीं। उन्होंने बताया कि मुस्लिम कारीगर पूरी लगन और जिम्मेदारी से काम करते हैं, इसीलिए कमेटी हर साल उनकी मेहनत को सम्मान देती है। इस बार विजयादशमी के दिन इन 20 कलाकारों को मंच पर सम्मानित किया जाएगा, ताकि समाज में एकता और सद्भाव का संदेश जाए।
गौरतलब है कि राजस्थान में दशहरे के बड़े आयोजन सिर्फ जयपुर तक सीमित नहीं हैं। कोटा में भी इस बार 105 फीट का हाईटेक रावण तैयार किया गया है, जिसके बारे में हमने पहले विस्तार से बताया था — कोटा का 105 फीट रावण: 360 डिग्री घूमेगी गर्दन, 20 अक्टूबर को दहन। वहीं कोटा के 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले का पूरा कार्यक्रम भी पाठकों के लिए उपयोगी रहेगा।
रावण दहन देखने जाएं तो ये जान लें
स्थान: आदर्श नगर, जयपुर — शहर का सबसे बड़ा दशहरा आयोजन
तारीख: 20 अक्टूबर (विजयादशमी), मंगलवार
मुख्य आकर्षण: 105 फीट ऊंचे पुतले का दहन, उससे पहले भव्य आतिशबाजी
भीड़ का अंदाजा: करीब एक लाख लोगों के जुटने की उम्मीद — समय से पहले पहुंचें
विशेष: विजयादशमी के दिन मंच पर मुस्लिम कारीगरों का सम्मान समारोह भी होगा
भीड़ को देखते हुए अपने वाहन थोड़ी दूरी पर पार्क करके पैदल पहुंचना बेहतर रहेगा। बच्चों और बुजुर्गों के साथ जाने वाले लोग दहन स्थल से सुरक्षित दूरी बनाए रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न 1: जयपुर के आदर्श नगर में रावण का पुतला कितना ऊंचा है?
उत्तर: इस बार रावण के पुतले की ऊंचाई 105 फीट है। यह जयपुर का सबसे बड़ा रावण पुतला माना जा रहा है और इसे आदर्श नगर में दशहरे के सबसे बड़े आयोजन में जलाया जाएगा।
प्रश्न 2: जयपुर का रावण पुतला कौन बना रहा है?
उत्तर: मथुरा के एक मुस्लिम परिवार के 20 कारीगर इस पुतले को तैयार कर रहे हैं। मुख्य कारीगर चांद बाबू हैं। यह परिवार पिछले पांच पीढ़ियों से जयपुर में रावण का पुतला बनाता आ रहा है — करीब 65 साल पुरानी परंपरा।
प्रश्न 3: मुस्लिम कारीगरों को सम्मान क्यों दिया जा रहा है?
उत्तर: कमेटी विजयादशमी पर इन 20 कलाकारों को मंच पर सम्मानित करेगी, ताकि एकता और सद्भाव का संदेश जाए — कलाकार की पहचान उसके हुनर से होती है, धर्म से नहीं।
प्रश्न 4: जयपुर में रावण दहन कब होगा?
उत्तर: 20 अक्टूबर (मंगलवार) को आदर्श नगर में दहन होगा। पहले भव्य आतिशबाजी होगी और करीब एक लाख लोगों के जुटने की उम्मीद है।
*नोट: इस खबर की मुख्य जानकारी राष्ट्रीय समाचार स्रोतों से ली गई है। पुतले के निर्माण और परंपरा से जुड़े तथ्यों की पुष्टि एबीपी न्यूज़ की रिपोर्ट से की गई है।*