कोटा में 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले का ऐलान: 11 अक्टूबर से 5 नवंबर तक 26 दिन का उत्सव, रावण दहन 20 अक्टूबर को

राजस्थान का कोटा एक बार फिर देश के सबसे भव्य मेलों की मेजबानी के लिए तैयार है। नगर निगम कोटा ने गुरुवार को 133वें राष्ट्रीय दशहरा मेले का कार्यक्रम जारी कर दिया है, जो 11 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलेगा। महापौर अनुसूइया गोस्वामी ने बताया कि 11 अक्टूबर की सुबह आशापुरा माता की पूजा-अर्चना होगी और शाम को दशहरा मैदान स्थित श्री राम रंगमंच पर मेले का विधिवत उद्घाटन व ध्वजारोहण होगा। इस बार मेले की औपचारिक शुरुआत 20 अक्टूबर को रावण दहन के दिन से मानी जाएगी, जब गढ़ पैलेस से भगवान श्री लक्ष्मीनारायण जी की शोभायात्रा दशहरा मैदान पहुंचेगी और मुहूर्त अनुसार रावण दहन के साथ आतिशबाजी होगी।

कोटा का दशहरा मेला राष्ट्रीय दर्जा रखता है और 133 साल पुरानी परंपरा है। हर साल लाखों लोग यहां पहुंचते हैं। इस बार रामलीला मंचन के साथ-साथ अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, ड्रोन शो, लेजर शो, कुश्ती दंगल, पंजाबी नाइट और सिने संध्या जैसे आकर्षण कार्यक्रम में शामिल किए गए हैं।

11 अक्टूबर: आशापुरा माता की पूजा से होगी शुरुआत

जारी कार्यक्रम के अनुसार 11 अक्टूबर (रविवार) को सुबह 9:00 बजे आशापुरा माता मंदिर में दुर्गा पूजन होगा, जो कोटा के मेले की पुरानी परंपरा है। मान्यता है कि मेले की सफल शुरुआत के लिए देवी का आशीर्वाद जरूरी है। दोपहर 1:00 बजे रामायण पाठ शुरू होगा।

शाम 5:30 बजे दशहरा मैदान स्थित श्री राम रंगमंच पर मेले का विधिवत उद्घाटन और ध्वजारोहण होगा, जिसमें पर्यटन विभाग की ओर से सांस्कृतिक लोक उत्सव रात का भी आयोजन होगा। रात 8:00 बजे से श्री राम रंगमंच पर रामलीला मंचन शुरू होगा, जो कई दिनों तक चलेगा। कोटा की रामलीला दशकों से आसपास के गांवों और कस्बों से बड़ी भीड़ खींचती आ रही है।

रावण दहन 20 अक्टूबर को, गढ़ पैलेस से निकलेगी शोभायात्रा

मेले का सबसे बड़ा आकर्षण 20 अक्टूबर (मंगलवार) को रावण दहन होगा। महापौर ने बताया कि इसी दिन से मेले की औपचारिक शुरुआत मानी जाएगी। शाम 5:00 बजे गढ़ पैलेस से दशहरा मैदान तक श्री लक्ष्मीनारायण जी की सवारी और शोभायात्रा निकाली जाएगी। पारंपरिक वेशभूषा में सजे बैंड-बाजे, घुड़सवार और झांकियों वाली यह शोभायात्रा देखने हजारों लोग सड़कों पर उमड़ेंगे।

मैदान पहुंचने पर मुहूर्त के अनुसार रावण दहन और आतिशबाजी होगी। कोटा का रावण दहन अपने विशाल पुतले के लिए प्रसिद्ध है। 21 अक्टूबर को शाम 5:00 बजे किशोरपुरा से मेला मैदान तक भारत मिलाप शोभायात्रा निकलेगी और श्री राम रंगमंच पर भगवान राम का राज्याभिषेक होगा। 15 अक्टूबर को शाम 5:00 बजे गीता भवन से राम रंगमंच तक राम बारात और 19 अक्टूबर को आशापुरा माता मंदिर परिसर में भजन संध्या होगी।

22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक हर दिन कुछ खास: पूरा कार्यक्रम

रावण दहन के बाद मेले का रंगारंग दौर शुरू होगा। 22 अक्टूबर से 5 नवंबर तक हर शाम विजयश्री रंगमंच पर आयोजन होंगे — संगीत, हास्य, प्रतियोगिताएं और पारंपरिक कला, सब कुछ:

तारीख मुख्य आयोजन स्थान
22 अक्टूबर कुकिंग प्रतियोगिता (सुबह 10), सिंधी समाज कार्यक्रम (रात 8:30) निगम परिसर, विजयश्री रंगमंच
23 अक्टूबर स्थानीय सांस्कृतिक कार्यक्रम (शाम 7), पर्यटन विभाग का कार्यक्रम (रात 8:30) विजयश्री रंगमंच
24 अक्टूबर मलखंब प्रतियोगिता (शाम 7), एक शाम शहीदों के नाम (रात 8:30) विजयश्री रंगमंच
25 अक्टूबर सांस्कृतिक कार्यक्रम (रात 8:30) विजयश्री रंगमंच
26 अक्टूबर हत्था-माला प्रतियोगिता (शाम 7), भजन संध्या (रात 8:30) विजयश्री रंगमंच
27 अक्टूबर रंगोली-मांडना-मेहंदी (दोपहर 12), साफा-पगड़ी प्रतियोगिता (शाम 7), अखिल भारतीय कवि सम्मेलन (रात 8:30) निगम परिसर, विजयश्री रंगमंच
28 अक्टूबर बेस्ट ब्राइडल मेकअप (शाम 7), लाफ्टर शो (रात 8:30) विजयश्री रंगमंच
29 अक्टूबर लेजर शो (शाम 7), राजस्थानी भाषा कवि सम्मेलन (रात 8:30) विजयश्री रंगमंच
30 अक्टूबर लेजर शो (शाम 7), बाल प्रतिभा कार्यक्रम भाग-1 (रात 8:30) विजयश्री रंगमंच
31 अक्टूबर लेजर शो (शाम 7), भोजपुरी कार्यक्रम (रात 8:30) विजयश्री रंगमंच
1 नवंबर कुश्ती दंगल (सुबह 9 से शाम 7), मोटिवेशनल प्रोग्राम (शाम 5:30), दाढ़ी-मूंछ प्रतियोगिता (रात 8), स्थानीय प्रतिभाएं (रात 9) श्री राम रंगमंच, विजयश्री रंगमंच
2 नवंबर कुश्ती दंगल (सुबह 9 से शाम 7), बाल प्रतिभा कार्यक्रम भाग-2 (रात 8:30) विजयश्री रंगमंच
3 नवंबर ड्रोन शो (शाम 7), गतका प्रदर्शन (शाम 7:30), पंजाबी नाइट (रात 8:30) विजयश्री रंगमंच
4 नवंबर परिधान उत्सव (शाम 7), सिने संध्या (रात 8:30) विजयश्री रंगमंच
5 नवंबर मेले का समापन और आतिशबाजी दशहरा मैदान

27 अक्टूबर को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, 3 नवंबर को पंजाबी नाइट और 4 नवंबर को सिने संध्या सबसे चर्चित आयोजन रहेंगे। महापौर ने बताया कि कलाकारों का चयन जल्द पूरा कर लिया जाएगा। कुश्ती दंगल 1 और 2 नवंबर को पूरे दिन चलेगा, जिसमें नामी पहलवानों के आने की उम्मीद है।

कोटा का दशहरा मेला क्यों है इतना खास?

कोटा का दशहरा मेला राजस्थान के उन मेलों में है, जिसे राष्ट्रीय दर्जा प्राप्त है। इसकी जड़ें 1893 ईस्वी से जुड़ी हैं, जब कोटा रियासत के समय में इसे भव्य रूप दिया गया। खास बात यह है कि यहां का मेला सिर्फ धार्मिक नहीं, बल्कि बहु-सांस्कृतिक है — राजस्थानी लोक संस्कृति के साथ पंजाबी, भोजपुरी, सिंधी, मलखंब और गतका जैसी विधाएं एक ही मंच पर दिखती हैं।

व्यापारिक दृष्टि से भी यह मेला अहम है। मेले के दिनों में दशहरा मैदान और आसपास के बाजारों में भारी चहल-पहल रहती है। दुकानदारों, खानपान के ठेलों, झूलों और हस्तशिल्प विक्रेताओं के लिए यह साल का सबसे बड़ा कारोबारी सीजन होता है। प्रशासन ने सुरक्षा, भीड़ प्रबंधन, स्वास्थ्य, स्वच्छता और यातायात के विशेष इंतजाम करने की बात कही है।

मेला देखने जाने वालों के लिए जरूरी जानकारी

  • सबसे अच्छे दिन: 20 अक्टूबर को रावण दहन, 27 अक्टूबर को अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, और 3 नवंबर को पंजाबी नाइट।
  • पहुंच: दशहरा मैदान कोटा शहर के बीचोंबीच है। रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से ऑटो व बसें आसानी से मिलती हैं।
  • समय: अधिकतर सांस्कृतिक कार्यक्रम शाम 7:00 से रात 8:30 तक होते हैं। रावण दहन 20 अक्टूबर को शाम 5:00 बजे शोभायात्रा के बाद होगा।
  • पार्किंग: भीड़ ज्यादा रहती है, इसलिए वाहन थोड़ी दूर पार्क करके पैदल आना बेहतर रहेगा।
  • बच्चों के लिए: 30 अक्टूबर और 2 नवंबर को बाल प्रतिभा कार्यक्रम, 1 नवंबर को कुश्ती दंगल अच्छा विकल्प है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: कोटा का 133वां राष्ट्रीय दशहरा मेला कब से कब तक होगा?

उत्तर: मेला 11 अक्टूबर से 5 नवंबर तक चलेगा — कुल 26 दिन। औपचारिक शुरुआत 20 अक्टूबर को रावण दहन के दिन से मानी जाएगी।

प्रश्न 2: रावण दहन कब और कहां होगा?

उत्तर: 20 अक्टूबर को। शाम 5:00 बजे गढ़ पैलेस से श्री लक्ष्मीनारायण जी की शोभायात्रा दशहरा मैदान पहुंचेगी, फिर मुहूर्त अनुसार रावण दहन और आतिशबाजी होगी।

प्रश्न 3: मेले के मुख्य आकर्षण क्या हैं?

उत्तर: रामलीला मंचन, रावण दहन, अखिल भारतीय कवि सम्मेलन (27 अक्टूबर), पंजाबी नाइट (3 नवंबर), सिने संध्या (4 नवंबर), ड्रोन व लेजर शो, कुश्ती दंगल, मलखंब और गतका प्रदर्शन।

प्रश्न 4: मेले में प्रवेश शुल्क है क्या?

उत्तर: जारी कार्यक्रम के अनुसार अधिकतर सांस्कृतिक कार्यक्रम आम लोगों के लिए खुले हैं। किसी विशेष टिकट या शुल्क का ऐलान नहीं किया गया है।

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