गणेश राज बंसल हाईकोर्ट राहत: गिरफ्तारी पर लगी अंतरिम रोक
हनुमानगढ़ के विधायक गणेश राज बंसल को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। गणेश राज बंसल हाईकोर्ट राहत के ताजा आदेश में जोधपुर स्थित उच्च न्यायालय ने धमकी के एक मामले में विधायक की गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगा दी है। यह सुनवाई 16 अक्टूबर को न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार की अदालत में हुई। अदालत ने विधायक को मामले की जांच में शामिल होने का निर्देश भी दिया है और अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद होगी।
यह राहत सिर्फ गिरफ्तारी पर रोक तक सीमित है। विधायक ने अपने खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को निरस्त करने की भी मांग की थी, लेकिन अदालत ने इस चरण में एफआईआर रद्द करने पर कोई अंतिम फैसला नहीं सुनाया है। यानी मामला खत्म नहीं हुआ — कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी।
गणेश राज बंसल हाईकोर्ट राहत के बाद: 16 अक्टूबर की सुनवाई में क्या हुआ
जोधपुर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में दर्ज प्राथमिकी संख्या 669/2026 का मुद्दा था। विधायक की ओर से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 528 के तहत याचिका दायर कर इस प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की गई थी।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आदेश दिया कि अगले आदेश तक विधायक को गिरफ्तार न किया जाए। साथ ही विधायक को जांच में पूरा सहयोग करने और जांच अधिकारी के सामने पेश होने का निर्देश दिया गया। अगली सुनवाई की तारीख आठ सप्ताह बाद तय हुई है।
धमकी मामला: तीन जनवरी की घटना, सात अक्टूबर की एफआईआर
विवाद धमकी के एक आरोप से जुड़ा है। शिकायतकर्ता रिछपाल सिंह खर्रा का कहना है कि 3 जनवरी 2026 को हनी बॉक्सर नाम के व्यक्ति ने फोन करके उन्हें जान से मारने की धमकी दी थी। शिकायत में इस धमकी का संबंध विधायक गणेश राज बंसल से भी जोड़ा गया है।
मामले में भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 351(3), 61(2) और 111(2)(बी) के तहत प्राथमिकी दर्ज है। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि जनवरी की घटना की प्राथमिकी 7 अक्टूबर 2026 को — करीब नौ महीने की देरी से — दर्ज कराई गई। बचाव पक्ष ने अदालत में इसी देरी को अपनी सबसे मजबूत दलील बनाया है।
बचाव पक्ष की तीन बड़ी दलीलें
विधायक के अधिवक्ताओं ने अदालत में तीन मुख्य तर्क रखे:
- प्राथमिकी में अत्यधिक देरी: जनवरी की घटना, अक्टूबर में एफआईआर — इतनी लंबी देरी से शिकायत की विश्वसनीयता पर सवाल उठता है।
- सीधी धमकी का आरोप नहीं: विधायक ने खुद शिकायतकर्ता को कभी सीधे धमकी नहीं दी; धमकी का आरोप एक अन्य व्यक्ति पर है।
- पुरानी प्रतिद्वंद्विता: दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से रंजिश चली आ रही है और इसी पृष्ठभूमि में विधायक के खिलाफ कई मामले दर्ज कराए गए हैं।
बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि विधायक के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी संख्या 624/2026 और 625/2026 को हाईकोर्ट की समन्वय पीठ ने 23 सितंबर 2026 को निरस्त कर दिया था, और प्राथमिकी संख्या 641/2026 में उन्हें पहले से अंतरिम संरक्षण मिला हुआ है।
सरकार और शिकायतकर्ता का कड़ा विरोध
सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी और शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता हस्तीमल सारस्वत ने याचिका का कड़ा विरोध किया। उनका तर्क था कि प्राथमिकी में गंभीर आरोप हैं और शिकायतकर्ता के बयान दर्ज होना अभी बाकी है।
शिकायतकर्ता पक्ष ने उच्चतम न्यायालय के नीहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले का हवाला दिया और अखबारों की कतरनें पेश करके विधायक के खिलाफ दर्ज अन्य आरोपों की जानकारी अदालत को दी। लंबी बहस के बाद अदालत ने गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक तो लगा दी, लेकिन एफआईआर निरस्त करने की मांग पर फैसला टालते हुए अगली सुनवाई की तारीख तय कर दी।
गणेश राज बंसल से जुड़े अन्य कानूनी मामले
यह पहला मौका नहीं है जब हनुमानगढ़ विधायक का नाम कानूनी विवादों में आया हो। गणेश राज बंसल हनुमानगढ़ से निर्दलीय विधायक के रूप में चुनाव जीते थे और पिछले कुछ महीनों से कई मामलों को लेकर सुर्खियों में हैं।
इससे पहले 23 साल पुराने एक फर्जी पट्टा मामले में सीआईडी-सीबी ने विधायक के खिलाफ कार्रवाई की थी और उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में भी रहना पड़ा था। इसी कड़ी में 23 सितंबर को हाईकोर्ट ने विधायक की पत्नी संतोष बंसल और बेटी वंदना जैन के खिलाफ दर्ज अलग-अलग एफआईआर में भी गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक लगाई थी। यानी बंसल परिवार से जुड़े कई मामलों में अदालत से चरणबद्ध राहत मिलती रही है।
आगे क्या: आठ सप्ताह बाद फिर सुनवाई
फिलहाल विधायक को गिरफ्तारी से अंतरिम राहत मिली है, लेकिन उन्हें जांच में शामिल होना होगा। पुलिस की जांच आगे बढ़ेगी और शिकायतकर्ता के बयान भी दर्ज किए जाएंगे। आठ सप्ताह बाद जब अदालत फिर सुनवाई करेगी, तब एफआईआर निरस्त करने की मांग पर भी विचार हो सकता है।
तब तक विधायक के लिए सबसे अहम शर्त जांच में सहयोग है। अगर सहयोग न करने या शर्तों के उल्लंघन की बात सामने आती है, तो राहत वापस भी ली जा सकती है। कानूनी जानकारों के मुताबिक यह राहत अस्थायी जरूर है, लेकिन विधायक के लिए फिलहाल बड़ी जीत है।
घटनाक्रम की टाइमलाइन
| तारीख | घटना |
|---|---|
| 3 जनवरी 2026 | फोन पर जान से मारने की धमकी का आरोप (शिकायतकर्ता: रिछपाल सिंह खर्रा) |
| 23 सितंबर 2026 | FIR 624/2026 और 625/2026 निरस्त; FIR 641/2026 में अंतरिम संरक्षण |
| 7 अक्टूबर 2026 | धमकी मामले में हनुमानगढ़ जंक्शन थाने में FIR 669/2026 दर्ज |
| 16 अक्टूबर 2026 | जोधपुर हाईकोर्ट में सुनवाई; गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक |
| दिसंबर 2026 (लगभग) | आठ सप्ताह बाद अगली सुनवाई; FIR निरस्त करने की मांग पर विचार संभव |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: गणेश राज बंसल कौन हैं?
उत्तर: गणेश राज बंसल हनुमानगढ़ से निर्दलीय विधायक हैं, जो पिछले कुछ महीनों से कई कानूनी मामलों को लेकर चर्चा में हैं।
प्रश्न: धमकी मामले में क्या आरोप है?
उत्तर: शिकायतकर्ता का आरोप है कि 3 जनवरी 2026 को हनी बॉक्सर ने फोन पर जान से मारने की धमकी दी और इसका संबंध विधायक से जोड़ा गया है। इस पर FIR 669/2026 दर्ज है।
प्रश्न: हाईकोर्ट ने क्या राहत दी?
उत्तर: राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) ने गिरफ्तारी पर अगले आदेश तक अंतरिम रोक लगाई और विधायक को जांच में शामिल होने का निर्देश दिया। FIR निरस्त करने पर अभी फैसला नहीं हुआ है।
प्रश्न: अगली सुनवाई कब होगी?
उत्तर: इस याचिका पर अगली सुनवाई आठ सप्ताह बाद, यानी दिसंबर 2026 के आसपास होगी।
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