डीडवाना में ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में साइबर फ्रॉड गिरोह का भंडाफोड़: 3 गिरफ्तार, 51 एटीएम कार्ड बरामद

जयपुर। डीडवाना-कुचामन पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग की आड़ में चल रहे एक अंतर-राज्यीय साइबर धोखाधड़ी गिरोह का पर्दाफाश किया है। तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है और उनके पास से नकद, दर्जनों एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, लैपटॉप व बैंकिंग दस्तावेज बरामद हुए हैं। मामला 3 अक्टूबर 2026 को सामने आया। पुलिस के मुताबिक यह गिरोह गांव-देहात के लोगों के बैंक खातों को किराए पर लेकर ठगी का पैसा घुमाता था।

इस खबर की सबसे अहम बात यह है कि ठग अब सीधे आपका खाता नहीं लूटते — वे आपसे ही आपका खाता इस्तेमाल करने की इजाजत लेते हैं, बदले में छोटे-मोटे पैसों का लालच देकर। और एक बार आपका खाता उनके हाथ लग जाए तो उसमें हुए हर लेनदेन की जिम्मेदारी सबसे पहले आप पर आती है।

‘म्यूल अकाउंट’ क्या है और आप क्यों फंस सकते हैं

पुलिस की जांच में सामने आया है कि यह गिरोह ग्रामीणों और आम लोगों को छोटे-मोटे भुगतान का लालच देकर उनके बैंक खाते इस्तेमाल के लिए लेता था। साइबर अपराध की भाषा में ऐसे खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ कहा जाता है — यानी ऐसा खाता जो असल अपराधी के नाम पर नहीं होता, लेकिन अपराध से मिला पैसा उसी में आता-जाता है।

ठग किसी व्यक्ति से संपर्क करते हैं, उसे कुछ हजार रुपये देकर उसका खाता या एटीएम कार्ड ले लेते हैं। खाताधारक को लगता है कि बस कुछ पैसे मिल रहे हैं, कोई नुकसान नहीं होगा। लेकिन उसी खाते में ठगी की रकम आने-जाने पर जांच एजेंसियों की नजर में पहला नाम उसी खाताधारक का होता है, क्योंकि खाता उसी के नाम पर है।

इसीलिए इस गिरोह की सबसे खतरनाक कड़ी कोई हैकर नहीं, बल्कि वह लालच था जिस पर आम लोग अपने खाते सौंप देते थे।

30 सितंबर की सूचना से छापे तक: ऐसे घेरा गया सिंडिकेट

यह कार्रवाई डीडवाना पुलिस और जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) के संयुक्त अभियान के तहत हुई। पुलिस अधीक्षक प्यारेलाल शिवरान के निर्देश पर यह ऑपरेशन चलाया गया, जिसमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु शर्मा और सर्किल ऑफिसर उमेश गुप्ता की देखरेख रही। मौके पर कार्रवाई की अगुवाई डीडवाना थानाधिकारी मोहन सिंह और डीएसटी टीम ने की।

पुलिस को 30 सितंबर को सूचना मिली थी कि कोलिया गांव में श्याम जी मार्ग पर एक घर के पीछे बने कमरे से अवैध ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ा काम चल रहा है। सूचना पुख्ता होने के बाद पुलिस टीम ने उस जगह पर छापा मारा और सिंडिकेट के तीन कथित सदस्यों को मौके पर ही धर दबोचा।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान दिनेश जेवालिया (32) निवासी कोलिया, घनश्याम जेवालिया (22) निवासी कोलिया और गिरधारी थालोड (26) निवासी चिंडालिया (मकराना थाना क्षेत्र) के रूप में हुई है। पुलिस ने तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर पूछताछ शुरू कर दी है।

छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ

पुलिस ने छापे के दौरान जो सामान जब्त किया है, वह बताता है कि यह गिरोह कितने बड़े पैमाने पर काम कर रहा था:

क्रम बरामद सामान मात्रा
1 नकद रुपये 96,820 रुपये
2 एटीएम कार्ड 51
3 मोबाइल फोन 19
4 लैपटॉप 4
5 चेक बुक 10
6 बैंक डायरी 10
7 इंटरनेट डोंगल 1
8 पेमेंट स्कैनर 2

पुलिस ने एक डायरी भी जब्त की है, जिसमें कथित ऑनलाइन फ्रॉड और बड़ी रकम से जुड़े सट्टेबाजी के लेनदेन का ब्योरा दर्ज बताया जा रहा है। जांचकर्ता जब्त मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंकिंग रिकॉर्ड की बारीकी से जांच कर रहे हैं ताकि इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों की पहचान हो सके।

गेमिंग की आड़ में फ्रॉड: पूरा तरीका

पुलिस के मुताबिक इस गिरोह का काम कई परतों वाला था। पहली परत थी ऑनलाइन गेमिंग की आड़ — जांचकर्ताओं को शक है कि पीड़ितों को ऑनलाइन गेमिंग के मौकों और ज्यादा मुनाफे का लालच दिया जाता था। लोग गेमिंग के नाम पर पैसे लगाते और फिर ठगी का शिकार हो जाते।

दूसरी परत थी पैसे को घुमाने का जाल। ठगी की रकम को सीधे अपने खाते में लेने के बजाय आरोपी किराए के बैंक खातों — म्यूल अकाउंट्स — के जरिए इधर-उधर करते थे, ताकि असली अपराधी तक जांच की पहुंच न हो।

तीसरी परत थी तकनीकी छलावा। पुलिस के अनुसार आरोपी लेनदेन के लिए नकली सिम कार्ड का इस्तेमाल करते थे और व्हाट्सऐप, टेलीग्राम व फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म के साथ-साथ नकली ऐप्स के जरिए भी संपर्क और लेनदेन करते थे। इसका मकसद एक ही था — अपनी असली पहचान छिपाना और जांच एजेंसियों को गुमराह करना।

अपने खाते और पैसे को बचाने के 5 जरूरी नियम

1. अपना बैंक खाता कभी किसी को इस्तेमाल के लिए न दें: चाहे कोई कितना भी लालच दे, अपना खाता, एटीएम कार्ड या नेटबैंकिंग की जानकारी किसी और को न सौंपें। आपके खाते का हर लेनदेन कानूनी रूप से आपकी जिम्मेदारी है।

2. अनजान ऐप और लिंक से दूर रहें: ‘ज्यादा मुनाफे’ का दावा करने वाले गेमिंग ऐप अक्सर ठगी का जाल होते हैं। डाउनलोड से पहले उनकी असलियत जांचें।

3. ओटीपी और पिन किसी से साझा न करें: बैंक या पुलिस का अधिकारी बनकर ओटीपी मांगने वाले कॉल ठगी का सबसे आम तरीका हैं। कोई असली संस्था फोन पर ओटीपी नहीं मांगती।

4. संदिग्ध लेनदेन दिखे तो तुरंत रिपोर्ट करें: अगर आपके खाते में कोई ऐसा लेनदेन दिखे जो आपने नहीं किया, तो तुरंत बैंक को सूचित करें और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। जितनी जल्दी रिपोर्ट होगी, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होगी।

5. ‘कमाई के मौके’ वाले संदेशों पर भरोसा न करें: व्हाट्सऐप, टेलीग्राम या फेसबुक पर अनजान नंबरों से आए ऐसे संदेशों से सावधान रहें। ठग इन्हीं प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल संपर्क साधने के लिए करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: डीडवाना में कितने आरोपी गिरफ्तार हुए हैं?

उत्तर: पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है — दिनेश जेवालिया (32) और घनश्याम जेवालिया (22), दोनों निवासी कोलिया, तथा गिरधारी थालोड (26), निवासी चिंडालिया (मकराना थाना क्षेत्र)।

प्रश्न 2: छापेमारी में क्या-क्या मिला?

उत्तर: 96,820 रुपये नकद, 51 एटीएम कार्ड, 19 मोबाइल फोन, 4 लैपटॉप, 10 चेक बुक, 10 बैंक डायरी, एक डोंगल, दो पेमेंट स्कैनर और लेनदेन का ब्योरा दर्ज एक डायरी जब्त हुई है।

प्रश्न 3: म्यूल अकाउंट क्या होता है?

उत्तर: म्यूल अकाउंट वह बैंक खाता है जो अपराधी के नाम पर नहीं होता, लेकिन ठगी की रकम उसी के जरिए घुमाई जाती है। ठग आम लोगों को पैसे का लालच देकर उनके खाते इस्तेमाल करते हैं। खाता आपके नाम पर होने के कारण जांच में पहला शक आप पर ही जाता है।

प्रश्न 4: साइबर ठगी का शिकार होने पर कहां शिकायत करें?

उत्तर: तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। इसके साथ ही अपने बैंक को भी तुरंत सूचित करें।

फिलहाल पुलिस तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है और जब्त उपकरणों की जांच जारी है। पुलिस के मुताबिक जांच आगे बढ़ने पर इस सिंडिकेट से जुड़े और नाम सामने आ सकते हैं।

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