Panchayat Chunav 2026: BJP ने 7 संभागों में उतारे 21 दिग्गज — चुनाव संचालन समितियों की घोषणा

पंचायत चुनाव के कार्यक्रम की घोषणा के साथ ही भारतीय जनता पार्टी ने राजस्थान में संगठनात्मक मोर्चे पर बड़ा दांव चल दिया है। प्रदेश के सभी सात संभागों के लिए चुनाव संचालन समितियों की घोषणा कर दी गई है और हर संभाग में तीन-तीन अनुभवी नेताओं को चुनावी रणनीति की कमान सौंपी गई है। कुल 21 वरिष्ठ नेता अब अगले करीब दो महीनों तक अपने-अपने संभाग के पंचायत चुनावों की रणनीति, समन्वय और निगरानी संभालेंगे।

यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि राज्य निर्वाचन आयोग ने इसी दिन — शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को — पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया है। पंच और सरपंच के चुनाव 25 अक्टूबर से 16 नवंबर के बीच चार चरणों में होंगे, जबकि जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों के चुनाव इससे पहले शुरू हो जाएंगे। तारीखें सामने आते ही भाजपा ने अपना संगठनात्मक तंत्र सक्रिय कर दिया है।

शनिवार को क्या फैसला हुआ

भाजपा राजस्थान के 3 अक्टूबर 2026 के पत्र में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के निर्देश पर यह घोषणा की गई है। पार्टी के प्रदेश महामंत्री एवं मुख्यालय प्रभारी श्रवण सिंह बगड़ी के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, कोटा, बीकानेर, भरतपुर और अजमेर — सातों संभागों के लिए तीन-तीन नेताओं के नाम दर्ज हैं।

घोषणा में ऐसे नेताओं को शामिल किया गया है जो संगठन के साथ-साथ सरकार में भी अनुभवी भूमिकाएं निभा चुके हैं। सूची में पूर्व नेता प्रतिपक्ष, पूर्व केंद्रीय मंत्री, पूर्व सांसद, पूर्व विधायक, आयोगों और बोर्डों के अध्यक्ष शामिल हैं। यानी पार्टी ने संभागीय कमान ऐसे चेहरों को सौंपी है जो अपने-अपने क्षेत्रों में राजनीतिक समीकरण साधने का अनुभव रखते हैं।

21 नाम, 7 संभाग — पूरी सूची एक नजर में

संभाग जिम्मेदार नेता
जयपुर ओंकार सिंह लखावत, डॉ. अलका गुर्जर, शंकर सिंह राजपुरोहित
जोधपुर सी.आर. चौधरी, प्रमोद सामर, चंपा लाल गेदर
उदयपुर राजेंद्र राठौड़, नारायण पंचारिया, हेमंत विजय
कोटा मुकेश दाधीच, मेघराज लोहिया, डॉ. महेंद्र कुमावत
बीकानेर प्रसन्न चंद मेहता, कैलाश चौधरी, राजेंद्र कुमार गहलोत
भरतपुर अशोक परनामी, हेमराज मीणा, छगन माहुर
अजमेर अरुण चतुर्वेदी, देवजी भाई पटेल, लालचंद कटारिया

जयपुर संभाग की समिति में ओंकार सिंह लखावत राजस्थान धरोहर प्राधिकरण बोर्ड के अध्यक्ष हैं, डॉ. अलका गुर्जर राज्यसभा सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, जबकि शंकर सिंह राजपुरोहित जालौर के पूर्व विधायक हैं। जोधपुर संभाग में किसान आयोग के अध्यक्ष सी.आर. चौधरी, प्रदेश संयोजक (सहकारिता प्रकोष्ठ) प्रमोद सामर और ओबीसी मोर्चा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष चंपा लाल गेदर को जिम्मेदारी मिली है।

उदयपुर संभाग में पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ के साथ पूर्व सांसद नारायण पंचारिया और कोटा शहर के पूर्व जिलाध्यक्ष हेमंत विजय शामिल हैं। कोटा संभाग की कमान प्रदेश उपाध्यक्ष मुकेश दाधीच, लघु उद्योग विकास बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष मेघराज लोहिया और भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. महेंद्र कुमावत के हाथ में होगी।

बीकानेर संभाग के लिए जोधपुर नगर निगम के पूर्व महापौर प्रसन्न चंद मेहता, प्रदेशाध्यक्ष किसान मोर्चा और पूर्व केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी तथा पूर्व प्रदेश महामंत्री राजेंद्र कुमार गहलोत को तैनात किया गया है। भरतपुर संभाग में भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अशोक परनामी, पूर्व विधायक हेमराज मीणा और प्रदेश उपाध्यक्ष छगन माहुर को शामिल किया गया है। अजमेर संभाग में राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष एवं भाजपा के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी, पूर्व सांसद देवजी भाई पटेल और राजस्थान सरकार के पूर्व मंत्री लालचंद कटारिया को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

अगस्त की समितियों से कितना अलग है यह फैसला

ध्यान देने वाली बात यह है कि अगस्त 2026 में भी भाजपा ने सातों संभागों के लिए चुनाव संचालन समितियों की घोषणा की थी, लेकिन अक्टूबर की इस सूची में कई नाम बदले हुए हैं। उस समय की सूची में कई सांसद और अन्य चेहरे शामिल थे, जबकि नई सूची में संगठन और आयोग-बोर्ड के अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता दी गई है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, अगस्त की घोषणा मुख्यतः निकाय चुनाव की तैयारी के संदर्भ में थी, जबकि अक्टूबर की समितियां स्पष्ट रूप से पंचायत चुनाव के कार्यक्रम के अनुरूप बनाई गई हैं। अब हर समिति का काम अपने संभाग के पंचायत चुनावों पर केंद्रित होगा — उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया से लेकर मतदान तक की निगरानी तक।

इन समितियों का काम क्या होगा

भाजपा के अनुसार इन समितियों का मुख्य काम चुनावी रणनीति तैयार करना, संगठन के विभिन्न मोर्चों के बीच समन्वय स्थापित करना और स्थानीय स्तर पर चुनाव प्रबंधन को मजबूत करना है। निकाय चुनाव में अपनाई गई व्यवस्था को यहां भी दोहराया जाएगा, जहां बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के फीडबैक के आधार पर प्रत्याशियों का चयन किया गया था।

पार्टी का लक्ष्य स्पष्ट है — पंचायत चुनावों को भी उतनी ही गंभीरता से लड़ना जितनी गंभीरता से विधानसभा चुनाव लड़े जाते हैं। समितियों में शामिल नेता अपने संभाग के जिलों का दौरा करेंगे, बूथ समितियों से जुड़ेंगे और जिला संगठन के साथ मिलकर चुनावी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा है कि नेताओं से लेकर बूथ स्तर तक के कार्यकर्ता पंचायती राज के सशक्तिकरण के लिए डबल इंजन के साथ पंचायती राज का तीसरा इंजन जोड़ने को कृत संकल्प हैं।

समय और सियासी गणित

इस घोषणा का समय भी काफी मायने रखता है। हाल ही में संपन्न निकाय चुनावों में मतदान दो चरणों में 9 और 11 सितंबर को हुआ था, जिसके बाद अध्यक्ष-उपाध्यक्ष पदों के चुनाव भी पूरे हो चुके हैं। उन नतीजों के बाद अब राजनीतिक दलों की नजर ग्रामीण चुनावों पर है।

राज्य में कुल 14,403 ग्राम पंचायतें, 457 पंचायत समितियां और 41 जिला परिषदें हैं, और इस बार पंचायत चुनावों में 4.03 करोड़ से अधिक मतदाताओं को मताधिकार का इस्तेमाल करना है। इतने बड़े पैमाने के चुनाव के लिए पार्टी ने चुनाव संचालन को सात संभागीय इकाइयों में बांट दिया है, ताकि हर क्षेत्र की स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से रणनीति बनाई जा सके।

चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक जिला परिषद सदस्यों के लिए 8 अक्टूबर को लोकसूचना जारी होगी, जबकि पंच-सरपंच के पहले चरण का मतदान 25 अक्टूबर को होगा। पूरी चुनाव प्रक्रिया 28 नवंबर तक संपन्न करा ली जाएगी। ऐसे में इन समितियों के पास तैयारियों के लिए मात्र कुछ सप्ताह का समय है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पंचायत चुनाव के लिए भाजपा ने कितने नेताओं को जिम्मेदारी दी है?

सातों संभागों के लिए तीन-तीन नेता, यानी कुल 21 वरिष्ठ नेताओं को चुनाव संचालन समितियों में शामिल किया गया है।

घोषणा कब और किसके निर्देश पर हुई?

3 अक्टूबर 2026 के पत्र में प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के निर्देश पर प्रदेश महामंत्री श्रवण सिंह बगड़ी ने समितियों की सूची जारी की है।

क्या पहले भी ऐसी समितियां बनी थीं?

हां, अगस्त 2026 में भी सातों संभागों के लिए चुनाव संचालन समितियों की घोषणा हुई थी, लेकिन अक्टूबर की नई सूची में कई नाम बदले गए हैं और यह स्पष्ट रूप से पंचायत चुनाव के अनुरूप बनाई गई है।

इन समितियों का मुख्य काम क्या होगा?

चुनावी रणनीति तैयार करना, संगठन के बीच समन्वय, बूथ स्तर तक की तैयारियों की समीक्षा और चुनावी प्रबंधन की निगरानी — यही इन समितियों की मुख्य जिम्मेदारी होगी।

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