बीकानेर PBM अस्पताल में मरीज की मौत: 17 घंटे नहीं मिला बेड, परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भर्ती एक मरीज की इलाज के दौरान मौत हो गई है, जिससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। परिजनों का आरोप है कि श्रीडूंगरगढ़ के पूनरासर निवासी राधेश्याम को कागजों में भर्ती तो कर लिया गया, लेकिन करीब 17 घंटे तक बेड नहीं दिया गया। मामले की गंभीरता देखते हुए अस्पताल अधीक्षक ने जांच कमेटी गठित कर दी है, जो तय करेगी कि इलाज में लापरवाही हुई थी या नहीं।

सबसे पहले पूरी घटना समझिए: 12 अक्टूबर की रात से 13 अक्टूबर तक

जानकारी के अनुसार राधेश्याम को 12 अक्टूबर की रात करीब 2:30 बजे पीबीएम अस्पताल की नई मेडिसिन विंग के जी वार्ड में भर्ती किया गया था। वह डॉक्टर विजय तुंडवाल की यूनिट में भर्ती हुए थे। परिजनों का कहना है कि भर्ती के कागज तो तुरंत बन गए, लेकिन करीब 17 घंटे तक उन्हें बेड नहीं मिला — इस दौरान मरीज को तीमारदारों के बैठने वाले साइड बेड पर ही लिटाकर रखा गया। परिवार का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद हर बार टाल दिया गया, और आखिरकार 13 अक्टूबर की शाम करीब 7 बजे बेड मिल सका।

लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। परिजनों ने बताया कि 13 अक्टूबर की रात करीब 2 बजे राधेश्याम ने सीने में तेज दर्द की शिकायत की। आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद रेजिडेंट डॉक्टर ने इसे मरीज का वहम बताते हुए टाल दिया और एक इंजेक्शन लगाकर चले गए। इसके बाद हालत लगातार बिगड़ती गई। आईसीयू शिफ्ट की मांग पर पहले बेड खाली न होने की बात कही गई; बाद में राधेश्याम को आईसीयू-2 के बेड नंबर 3 पर वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया, लेकिन तब तक हालत बेहद गंभीर हो चुकी थी। 13 अक्टूबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

17 घंटे का इंतजार: पूरी टाइमलाइन एक नजर में

समय क्या हुआ
12 अक्टूबर, रात ~2:30 बजे राधेश्याम पीबीएम अस्पताल की नई मेडिसिन विंग (जी वार्ड) में भर्ती
12-13 अक्टूबर, करीब 17 घंटे परिजनों के अनुसार बेड नहीं मिला; अटेंडेंट के साइड बेड पर रखा गया
13 अक्टूबर, शाम ~7 बजे काफी गुहार के बाद मरीज को बेड दिया गया
13 अक्टूबर, रात ~2 बजे सीने में तेज दर्द की शिकायत; परिजनों का आरोप — डॉक्टर ने वहम कहकर टाला
इसके बाद हालत बिगड़ने पर आईसीयू-2 (बेड नंबर 3) में वेंटिलेटर पर शिफ्ट
13 अक्टूबर इलाज के दौरान मौत; भाई विष्णु दत्त ने अधीक्षक को पत्र लिखा
14 अक्टूबर अस्पताल अधीक्षक ने जांच कमेटी गठित की

परिजनों के तीन आरोप

मृतक के भाई विष्णु दत्त ने अस्पताल अधीक्षक को पत्र देकर डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं और सख्त कार्रवाई की मांग की है:

  • पहला — कागजी भर्ती, जमीनी उपेक्षा: भर्ती के कागज बनने के बावजूद 17 घंटे तक बेड नहीं दिया गया। परिजनों का कहना है कि इतने लंबे इंतजार में मरीज साइड बेड पर तड़पता रहा।
  • दूसरा — दर्द की शिकायत को हल्के में लेना: सीने में तेज दर्द जैसी गंभीर शिकायत पर ड्यूटी डॉक्टर ने इसे वहम बताकर टाल दिया। परिजनों का मानना है कि समय पर सही जांच होती तो नतीजा कुछ और हो सकता था।
  • तीसरा — आईसीयू में देरी: हालत बिगड़ने पर आईसीयू शिफ्ट की मांग के बावजूद पहले बेड खाली न होने की बात कही गई। जब तक वेंटिलेटर पर शिफ्ट किया गया, तब तक देर हो चुकी थी।

यह ध्यान रखना जरूरी है कि ये सभी आरोप परिजनों के हैं। सच्चाई जांच कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगी।

अस्पताल का पक्ष: जांच कमेटी क्या करेगी

मामले के तूल पकड़ने के बाद अस्पताल अधीक्षक ने जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। यह कमेटी कई अहम सवालों के जवाब तलाशेगी — क्या मरीज को वाकई 17 घंटे तक बेड नहीं मिला? बेड आवंटन में देरी की वजह क्या थी? सीने में दर्द की शिकायत पर ड्यूटी डॉक्टर ने क्या प्रोटोकॉल अपनाया? अस्पताल के रिकॉर्ड, ड्यूटी रोस्टर और भर्ती रजिस्टर की पड़ताल के बाद ही यह तय होगा कि किसी के खिलाफ कार्रवाई होगी या नहीं।

पीबीएम अस्पताल बीकानेर: संभाग का सबसे बड़ा अस्पताल, पहले भी उठे सवाल

पीबीएम अस्पताल बीकानेर संभाग का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है और सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज से संबद्ध है। रोजाना हजारों मरीज यहां इलाज के लिए आते हैं। लेकिन यह पहला मौका नहीं है जब इसकी व्यवस्थाओं पर सवाल उठे हों — कुछ दिन पहले ही अस्पताल में डेंगू के मरीजों की बढ़ती कतार और बेड की कमी की खबरें आई थीं। प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों में भी संसाधनों की कमी दिखती रही है — चाहे छोटीसादड़ी अस्पताल में डॉक्टरों के 23 खाली पदों का मामला हो या आरएमएससीएल की दवा खरीद में अनियमितताओं का।

सरकारी अस्पताल में आपके अधिकार

इस घटना से एक बड़ा सबक यह भी है कि हर मरीज और परिजन को अपने अधिकार पता होने चाहिए:

  • समय पर इलाज का अधिकार: भर्ती के बाद बिना अनावश्यक देरी के बेड और इलाज मिलना चाहिए। बेड न हो तो अस्पताल को वैकल्पिक व्यवस्था या रेफरल की जानकारी देनी चाहिए।
  • जानकारी का अधिकार: बीमारी, इलाज की प्रक्रिया और दवाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी पाने का हक है।
  • शिकायत का अधिकार: लापरवाही महसूस हो तो अस्पताल अधीक्षक, जिला कलेक्टर या स्वास्थ्य विभाग से शिकायत की जा सकती है।
  • रिकॉर्ड का अधिकार: इलाज से जुड़े कागजात और रिपोर्ट की प्रति मांगने का अधिकार मरीज के पास होता है।

शिकायत कहां करें

अगर आपको या किसी जानने वाले को सरकारी अस्पताल में लापरवाही का सामना करना पड़े, तो चुप न रहें। राजस्थान सरकार के राजस्थान संपर्क पोर्टल पर घर बैठे स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी शिकायत दर्ज की जा सकती है। 181 टोल-फ्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत हो सकती है। शिकायत में अस्पताल का नाम, तारीख, समय और घटना का संक्षिप्त विवरण जरूर लिखें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

सवाल: बीकानेर PBM अस्पताल में क्या हुआ था?
जवाब: परिजनों के अनुसार पूनरासर (श्रीडूंगरगढ़) निवासी राधेश्याम को 12 अक्टूबर की रात भर्ती किया गया, लेकिन करीब 17 घंटे तक बेड नहीं मिला। 13 अक्टूबर को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई और अस्पताल ने जांच कमेटी गठित की है।

सवाल: परिजनों ने क्या आरोप लगाए हैं?
जवाब: मृतक के भाई विष्णु दत्त ने अधीक्षक को पत्र देकर आरोप लगाया है कि 17 घंटे तक बेड नहीं दिया गया, सीने में दर्द की शिकायत को डॉक्टर ने वहम कहकर टाल दिया, और आईसीयू शिफ्ट में भी देरी हुई।

सवाल: क्या अस्पताल ने कोई कार्रवाई की है?
जवाब: हां, अस्पताल अधीक्षक ने जांच कमेटी गठित कर दी है। कमेटी की रिपोर्ट के बाद ही लापरवाही और जिम्मेदारी तय होगी।

सवाल: सरकारी अस्पताल में लापरवाही की शिकायत कहां करें?
जवाब: राजस्थान संपर्क पोर्टल (sampark.rajasthan.gov.in) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें, या 181 टोल-फ्री हेल्पलाइन पर संपर्क करें। अस्पताल अधीक्षक और जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत भी दी जा सकती है।

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