बीकानेर की गर्विता चौधरी ने जीता नेशनल बॉक्सिंग गोल्ड, जिले के नाम कुल 4 पदक

बीकानेर की बेटियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि रिंग में उतरने का हौसला अगर बुलंद हो, तो पदक जीतने से कोई नहीं रोक सकता। हरियाणा के कैथल में 15 से 20 अक्टूबर 2026 तक आयोजित सीबीएसई नेशनल बालिका बॉक्सिंग प्रतियोगिता में बीकानेर की मुक्केबाज गर्विता चौधरी ने स्वर्ण पदक अपने नाम किया है। गर्विता की इस जीत के साथ ही बीकानेर की चारों बालिका मुक्केबाजों ने पदक जीते — एक स्वर्ण और तीन कांस्य। जिले के खेल इतिहास में एक ही राष्ट्रीय प्रतियोगिता में चार पदक का यह पहला बड़ा मौका माना जा रहा है।

सबसे बड़ी बात: एक ही टूर्नामेंट में बीकानेर के नाम 4 पदक

राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में बीकानेर से पांच बालिका मुक्केबाज उतरी थीं — गर्विता चौधरी, बेनेश, हर्षिता पंचारिया, कृति व्यास और वंशिका व्यास। इनमें से गर्विता ने स्वर्ण पदक जीता, जबकि बेनेश, वंशिका व्यास और हर्षिता पंचारिया ने कांस्य पदक अपने नाम किए। पांच में से चार खिलाड़ियों का पदक जीतना बताता है कि बीकानेर में बालिका बॉक्सिंग की तैयारियां किसी से पीछे नहीं हैं।

क्र. खिलाड़ी का नाम पदक भार वर्ग/श्रेणी
1 गर्विता चौधरी स्वर्ण सीबीएसई नेशनल बालिका बॉक्सिंग
2 बेनेश कांस्य सीबीएसई नेशनल बालिका बॉक्सिंग
3 वंशिका व्यास कांस्य सीबीएसई नेशनल बालिका बॉक्सिंग
4 हर्षिता पंचारिया कांस्य सीबीएसई नेशनल बालिका बॉक्सिंग

कौन हैं गर्विता चौधरी — पहले भी कई बार कर चुकी हैं राजस्थान का प्रतिनिधित्व

गर्विता चौधरी की यह पहली बड़ी कामयाबी नहीं है। इससे पहले भी वह अनेक राष्ट्रीय स्तर की बॉक्सिंग प्रतियोगिताओं में राजस्थान का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का यह अनुभव उनकी सबसे बड़ी ताकत बना, और कैथल के रिंग में यही अनुभव काम आया।

गर्विता की खेल शैली में दमदार पंचों के साथ-साथ रिंग में समझदारी से खेले गए मुकाबलों की भी चर्चा रहती है। खेल प्रेमियों का मानना है कि वह इस बार अपनी पूरी तैयारी के साथ टूर्नामेंट में उतरी थीं, जिसका नतीजा स्वर्ण पदक के रूप में सामने आया।

कैथल में 15 से 20 अक्टूबर तक चली प्रतियोगिता

यह सीबीएसई नेशनल बालिका बॉक्सिंग प्रतियोगिता हरियाणा के कैथल स्थित आरकेएसडी पब्लिक स्कूल में 15 से 20 अक्टूबर 2026 तक आयोजित की गई थी। देशभर के सीबीएसई स्कूलों की शीर्ष बालिका मुक्केबाज इस प्रतियोगिता में आमने-सामने थीं। ऐसे कड़े मुकाबलों में गर्विता का स्वर्ण जीतना उनके कौशल और मानसिक दृढ़ता का प्रमाण है।

प्रतियोगिता से पहले ही खेल जगत में गर्विता से स्वर्ण पदक की उम्मीद जताई जा रही थी। उनके अनुभव और शानदार खेल कौशल को देखते हुए कोचों और खेल प्रेमियों को विश्वास था कि वह दमदार पंचों से बीकानेर का नाम रोशन करेंगी — और उन्होंने यह उम्मीद सच कर दिखाई।

कोच राजेन्द्र सिंह राठौड़ का मार्गदर्शन — सफलता की असली नींव

गर्विता की इस शानदार सफलता के पीछे बीकानेर के वरिष्ठ बॉक्सिंग कोच राजेन्द्र सिंह राठौड़ का निरंतर मार्गदर्शन और कठिन प्रशिक्षण अहम रहा है। राजेन्द्र सिंह लंबे समय से गर्विता को बॉक्सिंग की बारीकियों, बेहतर तकनीक, पंचों की सटीकता, रिंग में रणनीति और मुकाबले के दौरान आत्मविश्वास बनाए रखने के लिए नियमित रूप से प्रशिक्षित कर रहे हैं।

अनुभवपूर्ण मार्गदर्शन, अनुशासित अभ्यास और खिलाड़ी की मेहनत के बेहतरीन समन्वय का नतीजा ही यह स्वर्ण पदक है। यह उपलब्धि कोच और खिलाड़ी के बीच समर्पण, विश्वास और निरंतर मेहनत का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जा रही है। कोच राजेन्द्र सिंह राठौड़ के अलावा कोच विजेन्द्र रंगा ने भी इन बालिका मुक्केबाजों की तैयारियों में अहम भूमिका निभाई।

बीकानेर में खुशी का माहौल, खेल जगत ने दी बधाई

गर्विता और अन्य बालिकाओं की सफलता की खबर बीकानेर पहुंचते ही खेल जगत में खुशी की लहर दौड़ गई। बधाई देने वालों में ब्लॉसम इंटरनेशनल स्कूल के डायरेक्टर प्रदीप सिंह शेखावत, जिला बॉक्सिंग संघ के अध्यक्ष मकबूल हुसैन सोढ़ा, बॉक्सिंग संघ की आयोजन समिति के चेयरमैन एवं पूर्व सरपंच राजपाल कुल्हरी, बास्केटबॉल के पूर्व कप्तान दानवीर सिंह भाटी, भैरुरतन ओझा, शीशपाल सिंह शेखावत और सीताराम सियाग शामिल रहे।

जिला कबड्डी संघ के अध्यक्ष महेन्द्र कुमार व्यास और भूपेंद्र सिंह राठौड़ ने भी खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना की। खेल प्रेमियों ने उम्मीद जताई कि जिले की बेटियां आगे भी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर बीकानेर और राजस्थान का गौरव बढ़ाएंगी।

राजस्थान में बालिका मुक्केबाजी का बढ़ता रुतबा

हाल के महीनों में राजस्थान की बेटियों ने मुक्केबाजी और अन्य खेलों में लगातार शानदार प्रदर्शन किया है। गर्विता की यह जीत उसी सिलसिले की ताजा कड़ी है। सीबीएसई नेशनल जैसे मंच पर बीकानेर की बेटियों का चमकना उन अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा है, जो बेटियों को खेलों में आगे बढ़ाने से हिचकते हैं।

राजस्थान में महिला मुक्केबाजों के लिए प्रशिक्षण सुविधाएं और प्रतियोगिताओं के अवसर धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं। जिला स्तर पर हो रही तैयारियां अब राष्ट्रीय पदकों में बदल रही हैं — और गर्विता चौधरी का स्वर्ण इसका सबसे ताजा उदाहरण है।

अब आगे क्या — अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों की ओर नजरें

राष्ट्रीय स्वर्ण के बाद अब गर्विता के लिए अगला लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जगह बनाना होगा। राष्ट्रीय स्तर पर लगातार प्रदर्शन करने वाले मुक्केबाजों को अंतरराष्ट्रीय शिविरों और प्रतियोगिताओं के लिए चुना जाता है। बीकानेर के खेल प्रेमियों को उम्मीद है कि गर्विता की यह जीत उन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का रास्ता खोलेगी।

जिले की अन्य तीन कांस्य विजेता बालिकाओं — बेनेश, वंशिका और हर्षिता — के लिए भी यह पदक आगे की राह आसान करेगा। राष्ट्रीय पदक मिलने से खिलाड़ियों को खेल छात्रवृत्ति, नौकरियों में खेल कोटा और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं जैसे लाभों की राह खुलती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: गर्विता चौधरी ने कौन-सा पदक जीता है?

गर्विता चौधरी ने हरियाणा के कैथल में 15 से 20 अक्टूबर 2026 तक आयोजित सीबीएसई नेशनल बालिका बॉक्सिंग प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीता है।

प्रश्न 2: बीकानेर की और किन बालिका मुक्केबाजों ने पदक जीते?

गर्विता के अलावा बेनेश, वंशिका व्यास और हर्षिता पंचारिया ने कांस्य पदक जीते हैं। इस तरह बीकानेर की चार बेटियों ने राष्ट्रीय स्तर पर पदक अपने नाम किए।

प्रश्न 3: गर्विता चौधरी को प्रशिक्षण किसने दिया?

गर्विता को बीकानेर के वरिष्ठ बॉक्सिंग कोच राजेन्द्र सिंह राठौड़ ने प्रशिक्षित किया है। कोच विजेन्द्र रंगा का भी इन खिलाड़ियों की तैयारियों में योगदान रहा।

प्रश्न 4: यह प्रतियोगिता कहां और कब हुई थी?

सीबीएसई नेशनल बालिका बॉक्सिंग प्रतियोगिता हरियाणा के कैथल स्थित आरकेएसडी पब्लिक स्कूल में 15 से 20 अक्टूबर 2026 तक आयोजित की गई थी।

राजस्थान की बेटियां लगातार राष्ट्रीय मंच पर चमक रही हैं — हाल ही में एशियन पैरा गेम्स में सीकर की मोना अग्रवाल ने स्वर्ण और अजमेर की सृष्टि अरोड़ा ने कांस्य जीता था, वहीं बिजयनगर में इंटर-कॉलेज बॉक्सिंग चैंपियनशिप भी सफलतापूर्वक संपन्न हुई। गर्विता चौधरी की यह जीत इसी सिलसिले की नई कड़ी है — बीकानेर और पूरे राजस्थान को उन पर गर्व है।

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