बाड़मेर चिंकारा शिकार: राज्य पशु की मौत पर गांव में आक्रोश, धरना जारी
बाड़मेर चिंकारा शिकार की खबर ने शुक्रवार की रात पूरे चौहटन इलाके को हिला दिया है। राजस्थान के राज्य पशु चिंकारा के दो जानवरों को शिकारियों ने मार डाला — एक के शव को पेड़ पर उल्टा लटका दिया गया। घटना के बाद ग्रामीण और वन्यजीव प्रेमी धरने पर बैठे हैं, और वन विभाग ने तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। यह थार के लोगों के वन्यजीवों से दशकों पुराने भरोसे पर चोट है।
शिकार का तरीका चौंकाने वाला है। शिकारियों ने लोहे के डिब्बे में पत्थर डालकर ऐसी आवाज निकाली, जिससे चिंकारे उनकी ओर खिंचे चले आए। यही आवाज उनकी पकड़ का कारण बनी — बाड़े के पशु घबराकर चिल्लाने लगे, ग्रामीण जाग गए, शिकारी भाग निकले। लेकिन तब तक दो चिंकारे मारे जा चुके थे।
बाड़मेर चिंकारा शिकार: शुक्रवार रात 12 बजे क्या हुआ था
घटना बाड़मेर जिले के धनाऊ थाना क्षेत्र में चौहटन के नेहरों की नाड़ी और बिसारणिया गांव की सरहद की है। शुक्रवार रात करीब 12 बजे शिकारी लोहे का एक डिब्बा लेकर पहुंचे थे। डिब्बे में पत्थर डालकर लगातार आवाज निकाली जा रही थी — ग्रामीणों के अनुसार, इसी आवाज से हिरणों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश हो रही थी।
आवाज सुनकर बाड़े में बंधी गाय और भैंस घबराकर चिल्लाने लगीं। पशुओं के शोर से कंवराराम सहित अन्य ग्रामीणों की नींद खुल गई। लोग बाहर निकले तो शिकारियों का पता चला; ग्रामीणों ने उन्हें ललकारा, पर आरोपी अंधेरे में भाग निकले। शिकारी तीसरे चिंकारे का पीछा करते हुए पशुबाड़े तक पहुंच गए थे। मौके पर दो मृत चिंकारे मिले, जिनमें से एक को पैर बांधकर पेड़ पर उल्टा लटका दिया गया था।
लोहे के डिब्बे की आवाज — शिकारियों का फंसाने का तरीका
लोहे के डिब्बे में पत्थर डालकर निकाली गई आवाज से हिरण-चिंकारे भ्रमित होकर उसकी ओर बढ़ते हैं। शिकारी इसी का फायदा उठाते हैं — जानवर पास आते ही उन पर लाठियों से हमला कर दिया जाता है। पूछताछ में आरोपियों ने खुद बताया है कि उन्होंने लाठियों से चिंकारों का शिकार किया था।
इस तरीके में न बंदूक की आवाज होती है, न गोली का निशान — इसलिए शिकार रात के अंधेरे में चुपचाप हो जाता है। वन विभाग जांच कर रहा है कि यह तरीका पहले भी कहां इस्तेमाल हुआ और क्या गिरोह किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा है।
ग्रामीणों का धरना और वन विभाग की कार्रवाई
वन्यजीवों के लगातार शिकार से नाराज वन्यजीव प्रेमी और ग्रामीण शुक्रवार रात से धरने पर बैठे हैं। उनकी मांग साफ है — शिकारियों की जल्द गिरफ्तारी हो और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाए जाएं। ग्रामीणों का आरोप है कि पहले भी ऐसी घटनाएं हुईं, पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
शुक्रवार रात सूचना मिलने पर क्षेत्रीय वन अधिकारी चौहटन पदमकिशोर खीमावत टीम के साथ मौके पर पहुंचे। दोनों शव पोस्टमार्टम के लिए बाड़मेर भिजवाए गए; धनाऊ थाने का जाब्ता और चौहटन वृत्ताधिकारी जेठाराम भी मौके पर पहुंचे। शनिवार को तीन आरोपियों को हिरासत में लिया गया — हरदानपुरा निवासी उम्मेदाराम पुत्र भगाराम और गणपत पुत्र भगाराम, तथा आदर्श कातरला निवासी बंशीलाल पुत्र मोहनलाल। तीनों से पूछताछ की जा रही है।
बाड़मेर चिंकारा शिकार पर वन्यजीव कानून क्या कहता है
चिंकारा वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति है — यह अधिनियम की अनुसूची-1 में आता है। अनुसूची-1 के जानवर का शिकार करना गंभीर अपराध है, जिसमें 3 से 7 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है। वन विभाग ने साफ किया है कि दोषियों के विरुद्ध इसी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी।
कानून की सख्ती के बावजूद शिकार इसलिए नहीं रुकता, क्योंकि यह रात में, सुनसान इलाकों में और ऐसे तरीकों से होता है, जिनका पता देर से चलता है। वन विभाग के पास हर गांव तक पहुंचने के लिए पर्याप्त अमला नहीं होता — इसलिए ग्रामीणों की सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
चिंकारा: राजस्थान का राज्य पशु क्यों खास है
चिंकारा, जिसे भारतीय गजेला भी कहा जाता है, राजस्थान का राज्य पशु है। थार के रेतीले मैदानों में यह जानवर कम पानी और तेज धूप में भी अपनी रफ्तार और सतर्कता से जी लेता है। बाड़मेर, जैसलमेर और बीकानेर के ग्रामीण इलाकों में चिंकारे अक्सर गांवों के आसपास दिखाई देते हैं,
थार में बिश्नोई समाज की वन्यजीवों के प्रति श्रद्धा जगजाहिर है — इस समाज के लोग हिरणों और चिंकारों की रक्षा को धार्मिक कर्तव्य मानते हैं। इसलिए राज्य पशु के शिकार पर गुस्सा सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं रहता — चिंकारों की संख्या आवास सिकुड़ने और शिकार के कारण पहले से दबाव में है।
बाड़मेर चिंकारा शिकार: घटना का पूरा हिसाब
| बात | जानकारी |
|---|---|
| जिला | बाड़मेर |
| स्थान | चौहटन, धनाऊ थाना क्षेत्र |
| घटना का समय | शुक्रवार रात करीब 12 बजे, 6-7 नवंबर 2026 |
| मारे गए चिंकारे | 2 (एक को पेड़ पर उल्टा लटकाया गया) |
| शिकार का तरीका | डिब्बे की आवाज से फंसाकर लाठियों से हमला |
| हिरासत में आरोपी | 3 — उम्मेदाराम, गणपत, बंशीलाल |
| कानून | वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (चिंकारा अनुसूची-1 प्रजाति) |
| ग्रामीणों की मांग | शिकारियों की गिरफ्तारी, वन्यजीव सुरक्षा के कड़े कदम |
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
प्रश्न: बाड़मेर चिंकारा शिकार कहां और कब हुआ?
उत्तर: बाड़मेर के चौहटन क्षेत्र में नेहरों की नाड़ी-बिसारणिया सरहद पर शुक्रवार रात करीब 12 बजे दो चिंकारों का शिकार हुआ।
प्रश्न: शिकारियों ने चिंकारों को कैसे फंसाया?
उत्तर: शिकारियों ने पत्थरों से भरे लोहे के डिब्बे से आवाज निकालकर चिंकारों को अपनी ओर आकर्षित किया, फिर लाठियों से उन पर हमला किया। एक चिंकारे के शव को पेड़ पर उल्टा लटका दिया गया था।
प्रश्न: इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई हुई है?
उत्तर: वन विभाग ने तीन आरोपियों — उम्मेदाराम, गणपत और बंशीलाल — को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है। दोनों शवों का पोस्टमार्टम बाड़मेर में कराया गया है; वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत कार्रवाई होगी।
प्रश्न: चिंकारा का शिकार करना इतना गंभीर अपराध क्यों है?
उत्तर: चिंकारा राजस्थान का राज्य पशु और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की अनुसूची-1 प्रजाति है। इसके शिकार पर 3 से 7 साल की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
स्रोत: पत्रिका — राजस्थान में आधी रात 2 चिंकारों का शिकार कर पेड़ पर लटकाया, रहस्यमयी डिब्बे से आवाज निकालकर बुला रहे थे शिकारी | प्रभासाक्षी — बाड़मेर में दो हिरणों के शिकार पर भड़के ग्रामीण, धरना देकर तुरंत गिरफ्तारी की मांग की