Kota में बिजली कंपनी पर संकट: ऊर्जा मंत्री ने KEDL को कहा — “सुधार नहीं हुआ तो फ्रेंचाइजी खत्म”

कोटा शहर के घरों में अगर आपके मीटर तक पहुंचने वाली बिजली की ज़िम्मेदारी जिस कंपनी के हाथ में है, उसी कंपनी के दिन अब गिने-चुने नज़र आ रहे हैं। प्रदेश के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने शनिवार को कोटा में दो ग्रिड सब-स्टेशनों (GSS) का औचक निरीक्षण किया और जो कुछ वहां देखा, उस पर कंपनी को दो-टूक चेतावनी दे दी — नोटिस पहले से दिए हुए हैं, अब सुधार नहीं हुआ तो फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट टर्मिनेट कर दिया जाएगा। यानी, कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (KEDL) नाम की जिस निजी कंपनी के भरोसे शहर की बिजली व्यवस्था है, उसका ठेका छिन सकता है।

यह बयान हवा में नहीं आया है। मंत्री के साथ जेवीवीएनएल के अधिशासी अभियंता आशीष चौधरी खुद मौजूद थे, और कंपनी के अपने अधिकारियों ने निरीक्षण के दौरान मान लिया कि जीएसएस की मॉनिटरिंग ठीक से नहीं हो रही है।

पहले समझिए — कोटा की बिजली KEDL के हाथ में क्यों है

राजस्थान में बिजली का उत्पादन, ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन अलग-अलग कंपनियों के पास है। कोटा शहर में उपभोक्ताओं तक बिजली पहुंचाने का काम जयपुर विद्युत वितरण निगम (जेवीवीएनएल) ने फ्रेंचाइजी मॉडल के तहत KEDL को सौंपा हुआ है — यानी मीटरिंग, बिलिंग, लाइन-ट्रांसफार्मर-जीएसएस की देखभाल और नए कनेक्शन सब कुछ यह निजी कंपनी चलाती है, लेकिन शर्तें और नियम सरकार के होते हैं।

सिद्धांत में यह मॉडल इसलिए लाया गया था ताकि सेवा बेहतर हो। व्यवहार में कोटा के उपभोक्ताओं की शिकायतें लगातार बढ़ती गईं — बिलिंग की गड़बड़ियों से लेकर अघोषित कटौती तक। मई 2026 में तो इन शिकायतों की जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति को जनसुनवाई तक करनी पड़ी थी।

निरीक्षण में मंत्री को क्या-क्या दिखा

शनिवार को मंत्री ने दो जीएसएस का अचानक दौरा किया। उनके साथ भाजपा के जिला अध्यक्ष राकेश जैन, पार्षद गोपाल राम मंडा और जेवीवीएनएल के अधिकारी भी थे। निरीक्षण में जो तस्वीर सामने आई, मंत्री के शब्दों में वह “जीरो मेंटेनेंस” की थी — भवनों की हालत खराब, परिसर में मिट्टी डालकर पौधे उगा दिए गए, जबकि सब-स्टेशन के आसपास ऐसा नहीं होना चाहिए।

चार-पांच घंटे बिजली बंद, पर काम “शून्य”

कोटा के उपभोक्ता लंबे समय से एक अजीब परेशानी झेल रहे हैं — मेंटेनेंस के नाम पर बिजली घंटों बंद कर दी जाती है, लेकिन उसके बाद कोई काम होता नहीं दिखता। मंत्री ने निरीक्षण के बाद यही बात खुलकर कही: कंपनी चार से पांच घंटे बिजली बंद रखती है, जबकि उस दौरान मेंटेनेंस जैसा कोई काम होता ही नहीं है। उपभोक्ता इसलिए चुप रहता है कि शायद लाइन सुधर रही है, लेकिन अगर बंदी के पीछे काम ही न हो तो यह सिर्फ असुविधा नहीं, व्यवस्था की नाकामी है।

वीसीआर और सेटलमेंट पर भी सवाल

निरीक्षण के दौरान मंत्री ने एक और गंभीर मुद्दा उठाया — वीसीआर यानी बिजली चोरी या अनियमितता पकड़े जाने पर बनाई जाने वाली जांच रिपोर्ट। उनका कहना है कि कई मामलों में उपभोक्ताओं की गलत वीसीआर भरी गई है, ऑनलाइन प्रक्रिया नहीं अपनाई गई और कंपनी ने खुद ही सेटलमेंट कर लिए हैं।

यह बात इसलिए अहम है क्योंकि वीसीआर का सेटलमेंट करने का अधिकार सिर्फ सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर स्तर के अधिकारी के पास होता है, कंपनी के पास नहीं। मंत्री के मुताबिक कंपनी ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर सेटलमेंट किए, जिनकी जांच के बाद नोटिस जारी किए गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी सिर्फ मुनाफे के लिए काम कर रही है और जनता की सुविधाओं पर ध्यान “जीरो” है।

यह पहली चेतावनी नहीं है

कोटा में KEDL के खिलाफ यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा है। करीब पांच महीने पहले, मई 2026 में, कंपनी की वित्तीय अनियमितताओं की जांच के लिए गठित समिति ने कोटा में जनसुनवाई की थी। उस सुनवाई में उपभोक्ताओं ने सबूतों के साथ बताया था कि बिल जमा करने के बाद भी बकाया दिखाया जा रहा है, अनावश्यक सरचार्ज और भारी पेनल्टी लगाई जा रही है, पीएम सूर्यघर योजना की सब्सिडी अटकी हुई है और बिना नोटिस बिजली काट दी जाती है।

दिलचस्प बात यह है कि कंपनी को घेरने में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों आगे रहे हैं। भाजपा के शहर जिलाध्यक्ष ने मुख्यमंत्री के “24 घंटे में बिजली कनेक्शन” के संकल्प की अवहेलना का मुद्दा उठाया था, तो कांग्रेस ने भी जांच समिति को ज्ञापन सौंपकर बिलिंग और वीसीआर की समस्याएं उठाई थीं। यानी मंत्री का यह दौरा एक लंबी शिकायतों की कड़ी का ताजा अध्याय है, शुरुआत नहीं।

अब आगे क्या होगा

ऊर्जा मंत्री ने जो रोडमैप बताया है, उसके तीन हिस्से हैं। पहला — हाई लेवल कमेटी की बैठक होगी। दूसरा — जयपुर से एक टीम भेजकर जीएसएस की जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग करवाई जाएगी। तीसरा — कंपनी को पहले से दिए गए नोटिस के बाद भी सुधार न हुआ तो फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट टर्मिनेट कर दिया जाएगा।

टर्मिनेशन का मतलब समझिए: अगर फ्रेंचाइजी खत्म होती है तो कोटा शहर की बिजली वितरण व्यवस्था वापस सरकारी हाथों में आ जाएगी। लेकिन यह तुरंत नहीं होगा — पहले नोटिस की प्रक्रिया, जांच रिपोर्ट और कमेटी की सिफारिशें आएंगी। उपभोक्ताओं के लिए फिलहाल सबसे काम की बात यह है कि शिकायतों का रिकॉर्ड बन रहा है और सरकार की नजर सीधे कंपनी पर है।

घटना की मुख्य बातें एक नज़र में

बिंदुविवरण
निरीक्षण3 अक्टूबर 2026 (शनिवार), कोटा के दो जीएसएस का औचक निरीक्षण
निरीक्षणकर्ताऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, साथ में जेवीवीएनएल के अधिशासी अभियंता आशीष चौधरी
कंपनीकोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (KEDL) — फ्रेंचाइजी मॉडल पर कोटा का वितरण
मुख्य खामीजीएसएस का “जीरो मेंटेनेंस”, भवनों की दुर्दशा, मिट्टी-पौधे, मॉनिटरिंग नहीं
गंभीर आरोप4-5 घंटे की शटडाउन पर काम नहीं; गलत वीसीआर; अनधिकृत सेटलमेंट
चेतावनीनोटिस पहले से जारी; सुधार न हुआ तो फ्रेंचाइजी एग्रीमेंट टर्मिनेट
अगला कदमहाई लेवल कमेटी की बैठक, जयपुर से मॉनिटरिंग टीम

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

प्रश्न 1: KEDL क्या है?

उत्तर: KEDL यानी कोटा इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड एक निजी कंपनी है, जिसे फ्रेंचाइजी मॉडल के तहत कोटा शहर में बिजली वितरण का काम सौंपा गया है। बिलिंग, मेंटेनेंस और नए कनेक्शन उसी की जिम्मेदारी हैं, नियम सरकार तय करती है।

प्रश्न 2: निरीक्षण में क्या खामियां मिलीं?

उत्तर: दो जीएसएस में मेंटेनेंस लगभग शून्य मिला, भवनों की हालत खराब थी और परिसर में मिट्टी डालकर पौधे उगा दिए गए थे। मेंटेनेंस के नाम पर 4-5 घंटे बिजली बंद रखने पर भी काम न होने का आरोप है।

प्रश्न 3: अगर KEDL की फ्रेंचाइजी खत्म होती है तो उपभोक्ताओं पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर: फ्रेंचाइजी टर्मिनेट होने पर कोटा की वितरण व्यवस्था वापस सरकारी नियंत्रण में आ जाएगी। इससे सेवा में बदलाव आ सकता है, लेकिन यह प्रक्रिया नोटिस, जांच और कमेटी की सिफारिशों के बाद ही पूरी होगी — यह रातोंरात नहीं होगा।

प्रश्न 4: बिजली की शिकायत अभी कहां दर्ज कराएं?

उत्तर: कंपनी के कस्टमर केयर के साथ-साथ जिला स्तर पर बिजली विभाग के शिकायत निवारण तंत्र में समस्या दर्ज कराई जा सकती है। बिल, वीसीआर या कटौती की शिकायत का लिखित रिकॉर्ड रखना हमेशा फायदेमंद रहता है।

कोटा के उपभोक्ताओं के लिए संदेश साफ है — शिकायतें अब सरकार के सबसे ऊंचे ऊर्जा मंच तक पहुंच चुकी हैं। अब देखना यह है कि नोटिस और चेतावनी के बाद KEDL अपने कामकाज में सुधार करती है या कोटा की बिजली व्यवस्था एक नए अध्याय की ओर बढ़ती है।

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