Alwar Mandi Me Bajre Ki Bumper Aavak: 24 Din Me 1.35 Lakh Quintal, 2175–2300 Tak Mile Bhav — Kisano Ke Chehre Khile

अलवर। खैरथल-तिजारा जिले के बुराड़ी गांव के किसान विकास कुमार जब इस सीजन बाजरे की उपज लेकर अलवर कृषि उपज मंडी पहुंचे, तो मंडी का नजारा देखकर उनका चेहरा खिल उठा। 10 बीघा में बोए गए बाजरे के लिए उन्हें 2175 से 2225 रुपये प्रति क्विंटल तक का भाव मिला। “इस बार पैदावार अच्छी रही और भाव भी अच्छे मिले हैं,” विकास कुमार ने कहा। मुंडावर के किसान सुब्बाराम की कहानी भी ऐसी ही है — दो बीघा में बाजरा बोया था, अच्छी उपज हुई और मंडी में 2155 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिला।

यह इस सीजन की बाजरे की खेती की सबसे सुखद खबर है — कम लागत वाली फसल और उस पर बेहतर भाव। अलवर मंडी में इन दिनों बाजरे की बंपर आवक हो रही है और भाव ऐसे हैं कि किसान उत्साह के साथ उपज लेकर मंडी पहुंच रहे हैं।

4-5 साल में भाव की सबसे बड़ी छलांग

बाजरे के भाव में इस बार जो सुधार देखने को मिल रहा है, वह पिछले चार-पांच वर्षों की तुलना में खास है। राजस्थान खाद्य व्यापार संघ के प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष सुरेश जलालपुरिया के अनुसार पहले मंडियों में बाजरा करीब 1600 से 1700 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर बिकता था, जबकि वर्तमान में इसकी कीमत 2100 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच रही है।

आंकड़े इस प्रकार हैं: पहले (लगभग 4-5 साल पूर्व) बाजरे का भाव 1600–1700 रुपये प्रति क्विंटल था; इस सीजन सामान्य भाव 2100–2300 रुपये; किसान विकास कुमार (बुराड़ी) को 2175–2225 रुपये; किसान सुब्बाराम (मुंडावर) को 2155 रुपये प्रति क्विंटल मिले।

जलालपुरिया का कहना है कि बाजरे की खेती में अन्य फसलों की अपेक्षा कम लागत आती है और अब मंडी में किसानों को अच्छा भाव भी मिल रहा है — यही वजह है कि बाजरा किसानों के लिए आय का प्रमुख साधन बनता जा रहा है।

24 दिन में 1.35 लाख क्विंटल — आवक के आंकड़े क्या कहते हैं

अलवर कृषि उपज मंडी के आंकड़े इस सीजन की धूम की गवाही देते हैं। 7 से 30 सितंबर तक महज 24 दिनों में मंडी में 1 लाख 35 हजार 800 क्विंटल बाजरा पहुंच चुका है। अगले 15 से 20 दिनों तक रोजाना करीब 10 हजार कट्टे आवक का अनुमान है, और उसके बाद भी सालभर रोजाना 1–2 हजार कट्टे की आवक बनी रह सकती है।

मांग कहां से आ रही है — पोल्ट्री फार्म से कैटल फीड तक

बाजरे के भाव में सुधार का एक बड़ा कारण मांग में लगातार बनी हुई तेजी है। राजस्थान में उत्पादित बाजरे की मांग दूसरे राज्यों के बाजारों में भी बनी हुई है। हरियाणा और पंजाब के पोल्ट्री फार्म में राजस्थान के बाजरे की खपत ज्यादा होती है। हरियाणा में पशु आहार और कैटल फीड के क्षेत्र में भी बाजरे का उपयोग होता है। पंजाब में स्थानीय उत्पादन अपेक्षाकृत कम होने के कारण वहां की कुछ कंपनियां हरियाणा के माध्यम से बाजरे की खरीद करती हैं।

अन्य प्रदेशों में भी बाजरे की मांग स्थिर बनी हुई है। यानी बाजरा अब केवल रोटी का अनाज नहीं रहा — यह फीड और पोल्ट्री उद्योग की अहम कच्ची सामग्री बनता जा रहा है।

रकबा घटा, पर भाव ने संभाला

इस साल एक दिलचस्प विरोधाभास भी देखने को मिला है — बाजरे का रकबा घटा है, लेकिन भाव ने किसानों की आमदनी संभाल ली है। कृषि विभाग के अधिकारी पीसी मीणा के अनुसार इस साल अलवर जिले में बाजरे का रकबा 1 लाख 45 हजार 600 हेक्टेयर रहा, जबकि गत वर्ष यह 1 लाख 48 हजार 356 हेक्टेयर था। वहीं खैरथल-तिजारा जिले में इस साल बाजरे का रकबा 84 हजार 200 हेक्टेयर रहा है।

इस साल जिले में बाजरे का उत्पादन 2.16 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर रहने की उम्मीद है। अलवर के आसपास खैरथल, मालाखेड़ा, खेड़ली सहित कई क्षेत्रों में किसान बाजरे की खेती करते रहे हैं। रकबे में मामूली कमी के बावजूद बेहतर भाव और अच्छी पैदावार ने किसानों के चेहरे पर मुस्कान ला दी है।

श्रीअन्न की बढ़ती प्रतिष्ठा और खरीफ-रबी का जुड़ाव

केंद्र सरकार की ओर से मोटे अनाज (श्रीअन्न) को प्रोत्साहन मिलने से बाजरे की खेती के प्रति किसानों का आकर्षण बढ़ा है। बाजरा पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और भोजन के साथ पशु आहार व अन्य व्यावसायिक जरूरतों में भी काम आता है।

मंडी में बेहतर भाव मिलने से खरीफ फसल से होने वाली आय अगली फसल के लिए बीज, खाद और अन्य कृषि जरूरतों को पूरा करने में किसानों के लिए बड़ा सहारा बनती है। यानी बाजरे से मिली यह राहत सीधे रबी सीजन की तैयारी में काम आएगी।

आगे क्या — किसानों के लिए काम की बातें

  1. अगले 15–20 दिन अहम हैं: व्यापार संघ के अनुमान के अनुसार यही वह अवधि है जब आवक सबसे ज्यादा रहेगी। किसानों को अपनी उपज की गुणवत्ता के अनुसार समय पर मंडी लाने की सलाह है।
  2. भाव पर नजर रखें: 2100–2300 के दायरे में भाव चल रहे हैं। जिन किसानों की फसल अभी खेत में है, वे मंडी के दैनिक भाव अपडेट पर नजर रखें।
  3. गुणवत्ता ही कीमत है: सूखी, साफ और अच्छी तरह से झाड़ी-छटी हुई उपज को हमेशा बेहतर भाव मिलता है।
  4. योजनाओं की जानकारी लें: बाजरे पर भावांतर जैसी योजनाओं के प्रावधान राज्य के अनुसार बदलते हैं — पात्रता और कागजात की जांच नजदीकी कृषि कार्यालय से कराएं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

  1. अलवर मंडी में बाजरे का वर्तमान भाव क्या है? — वर्तमान में अलवर कृषि उपज मंडी में बाजरे का भाव 2100 से 2300 रुपये प्रति क्विंटल के बीच चल रहा है।
  2. 7 से 30 सितंबर के बीच मंडी में कितना बाजरा पहुंचा? — महज 24 दिनों में मंडी में 1 लाख 35 हजार 800 क्विंटल बाजरे की आवक हुई है।
  3. राजस्थान के बाजरे की मांग किन राज्यों में है? — हरियाणा और पंजाब के पोल्ट्री फार्म, पशु आहार और कैटल फीड उद्योग में राजस्थान के बाजरे की अच्छी मांग है।
  4. इस साल अलवर में बाजरे का रकबा कितना रहा? — अलवर जिले में 1,45,600 हेक्टेयर और खैरथल-तिजारा जिले में 84,200 हेक्टेयर रकबा रहा। उत्पादन अनुमान 2.16 मीट्रिक टन प्रति हेक्टेयर है।

अलवर मंडी की यह तस्वीर साफ बताती है कि सही भाव और सही समय पर बिकी उपज किसान की मेहनत का पूरा हिसाब देती है।

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