21 साल की एक युवती। दो महीने से खाना पच नहीं रहा, सीने में जलन और खट्टी डकारों ने जीना मुहाल कर रखा है, और दवाइयां भी बेअसर हो चुकी हैं। इलाज का एक ही रास्ता बचा था — सर्जरी। लेकिन यह कोई आम सर्जरी नहीं, बल्कि हायटस हर्निया रोबोटिक सर्जरी जैसी हाई-टेक प्रक्रिया थी, जिस पर प्राइवेट अस्पताल में 5 से 6 लाख रुपये खर्च आते। अजमेर के जवाहरलाल नेहरू (JLN) अस्पताल में यही सर्जरी बिल्कुल मुफ्त कर दी गई — और वह भी सफलतापूर्वक। पूरे प्रदेश में हायटस हर्निया का यह सिर्फ दूसरा रोबोटिक ऑपरेशन है।
यह सिर्फ एक मरीज के ठीक होने की कहानी नहीं, राजस्थान के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र की बदलती तस्वीर है — रोबोटिक जैसी तकनीक अब आम मरीज की पहुंच में है।
5-6 लाख का ऑपरेशन, खर्च शून्य — आयुष्मान योजना की असली ताकत
हायटस हर्निया की रोबोटिक सर्जरी सस्ता इलाज नहीं है। रोबोटिक सिस्टम, विशेषज्ञ सर्जन और महंगे उपकरणों की वजह से किसी बड़े प्राइवेट अस्पताल में इस ऑपरेशन का बिल 5 से 6 लाख रुपये तक पहुंच जाता है। आम परिवार के लिए यह रकम कर्ज या गहने बेचने जैसी नौबत ला देती है।
लेकिन अजमेर की इस युवती को एक रुपया भी नहीं देना पड़ा। JLN अस्पताल में यह हायटस हर्निया रोबोटिक सर्जरी मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना के तहत पूरी तरह निशुल्क की गई। यह वही मुख्यमंत्री आयुष्मान आरोग्य योजना है, जिसे अब मां योजना के नाम से जाना जाता है और जो लाखों परिवारों को कैशलेस इलाज देती है। योजना से जुड़ी हमारी विस्तृत रिपोर्ट यहां पढ़ें — मां योजना: 25 लाख का कवर, फिर भी अस्पतालों में ‘नो एंट्री’?।
यह मामला साबित करता है कि सही योजना और सरकारी अस्पतालों में बढ़ती सुविधाएं मिल जाएं तो महंगा से महंगा इलाज भी आम परिवार की पहुंच में आ सकता है।
हायटस हर्निया आखिर है क्या — दो महीने से युवती क्या झेल रही थी
हायटस हर्निया में पेट का ऊपरी हिस्सा डायाफ्राम (छाती और पेट को अलग करने वाली मांसपेशी) के छेद से ऊपर खिसककर छाती में चला जाता है। नतीजा — पेट का एसिड बार-बार भोजन नली में वापस आने लगता है।
इस युवती को दो महीनों से ठीक यही तकलीफ थी — सीने में जलन, खट्टी डकारें, खाना न पचना और वजन घटना। वह पहले भी इलाज ले चुकी थी, लेकिन दवाइयों से स्थायी आराम नहीं मिला।
JLN के गैस्ट्रोलॉजी विभाग में डॉ. एमपी शर्मा ने एंडोस्कोपी से हायटस हर्निया की पुष्टि की। जब दवाइयां बेअसर हों तो सर्जरी ही एकमात्र रास्ता बचता है — फिर लेप्रोस्कोपी एवं रोबोटिक सर्जन डॉ. शिव कुमार बुनकर ने हायटस हर्निया रोबोटिक सर्जरी का फैसला लिया।
रोबोट ने ऑपरेशन में क्या किया — निसेन फंडोप्लिकेशन समझिए
चिकित्सकीय भाषा में इस प्रक्रिया को “रोबोटिक निसेन फंडोप्लिकेशन” कहते हैं। नाम कठिन है, प्रक्रिया समझना आसान है।
रोबोटिक तकनीक से पेट के ऊपरी हिस्से को भोजन नली के निचले सिरे के चारों ओर लपेटा गया। इससे वाल्व जैसी संरचना बनी, जो पेट के एसिड को वापस भोजन नली में आने से रोकती है। साथ ही डायाफ्राम के हायटस दोष को भी ठीक किया गया। यानी एक ही ऑपरेशन में बीमारी की जड़ और उसके असर — दोनों का इलाज हो गया।
उपचार योजना डॉ. श्याम भट्ट के मार्गदर्शन में बनी; ऑपरेशन से पहले और बाद की देखभाल प्राचार्य डॉ. अनिल सामरिया की निगरानी में हुई, और डॉ. अरविंद खरे सहित पूरी टीम ने साथ दिया।
हायटस हर्निया रोबोटिक सर्जरी बनाम पारंपरिक सर्जरी — फायदा किसमें
अब तक इस तरह के ऑपरेशन लेप्रोस्कोपी (दूरबीन) से होते थे। रोबोटिक सर्जरी उससे एक कदम आगे की तकनीक है:
| पहलू | पारंपरिक सर्जरी | लेप्रोस्कोपिक सर्जरी | रोबोटिक सर्जरी |
|---|---|---|---|
| चीरा | बड़ा | छोटे छेद | न्यूनतम चीरा |
| खून का बहना | ज्यादा | कम | सबसे कम |
| सटीकता | हाथ पर निर्भर | अच्छी | अत्यधिक सटीक |
| दृश्यता | सीमित | अच्छी | 3D हाई-डेफिनिशन |
| ठीक होने में समय | लंबा | कम | सबसे तेज |
डॉ. बुनकर के अनुसार, रोबोटिक तकनीक जटिल सर्जरी में बेहतर दृश्यता, अधिक सटीकता और सूक्ष्म गतिविधियों पर बेहतर नियंत्रण देती है। रोबोट आने के बाद अस्पताल की कोशिश यही रहती है कि जहां संभव हो, हायटस हर्निया रोबोटिक सर्जरी से ही इलाज किया जाए।
अजमेर संभाग के लिए ऐतिहासिक — प्रदेश में दूसरी, संभाग में पहली
इस हायटस हर्निया रोबोटिक सर्जरी की सबसे बड़ी खासियत इसका “पहली बार” वाला पहलू है। प्रदेश में यह सिर्फ दूसरा मामला है — इससे पहले ऐसी सर्जरी जयपुर के SMS अस्पताल में हुई थी। और अजमेर संभाग में यह पहली सफल रोबोटिक सर्जरी है। अब अजमेर के मरीजों को इस हाई-टेक इलाज के लिए जयपुर या प्राइवेट अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा।
यह उपलब्धि सरकारी अस्पतालों में आ रहे बदलाव की कड़ी है। हाल ही में जयपुर SMS अस्पताल में 28.6 किलो के ट्यूमर की हाई-रिस्क सर्जरी सफल हुई थी — पूरी कहानी यहां पढ़ें। वहीं स्वास्थ्य तकनीक के मोर्चे पर राजस्थान ने टाइप-1 डायबिटीज से जूझ रहे बच्चों के लिए “मधुरूप AI” जैसा देश का पहला प्रोजेक्ट शुरू किया है — उस पहल की जानकारी यहां।
फिलहाल युवती स्वस्थ है और जल्द छुट्टी मिल जाएगी — दो महीने की तकलीफ के बाद अब सामान्य जिंदगी।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. हायटस हर्निया क्या होता है? इसमें पेट का ऊपरी हिस्सा डायाफ्राम के छेद से ऊपर खिसककर छाती में चला जाता है। लक्षणों में सीने में जलन, खट्टी डकारें, खाना न पचना, निगलने में दिक्कत और पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द शामिल हैं।
2. हायटस हर्निया रोबोटिक सर्जरी में कितना खर्च आता है? प्राइवेट अस्पताल में 5 से 6 लाख रुपये तक। लेकिन मुख्यमंत्री आयुष्मान योजना के तहत पात्र मरीजों को सरकारी अस्पतालों में यह मुफ्त मिल सकती है, जैसा अजमेर के इस मामले में हुआ।
3. रोबोटिक सर्जरी कितनी सुरक्षित है? इसमें चीरा कम लगता है, खून कम निकलता है और मरीज जल्दी ठीक होता है। रोबोटिक भुजाएं अत्यधिक सटीकता देती हैं। फिर भी, हर मरीज के लिए उपयुक्तता डॉक्टर की जांच के बाद ही तय होती है।
4. दवाइयों से आराम न मिले तो क्या करें? शुरुआती मामलों में दवाइयों और जीवनशैली बदलाव से आराम मिल सकता है, लेकिन दवाइयां बेअसर हों तो सर्जरी ही स्थायी समाधान है। गैस्ट्रोलॉजी विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें।
स्रोत: ETV Bharat राजस्थान