राजस्थान की राजधानी जयपुर के सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल में डॉक्टरों ने एक ऐसी सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया है, जिसकी खबर सुनकर आम आदमी की आंखें खुली रह जाती हैं। 59 साल की एक महिला के पेट से 28.6 किलोग्राम वजन का विशाल ट्यूमर निकाला गया। करीब तीन घंटे चली इस हाई रिस्क सर्जरी के बाद महिला की हालत स्थिर बताई जा रही है। और सबसे बड़ी राहत की बात ये है कि इतनी जटिल सर्जरी राजस्थान सरकार की RGHS योजना के तहत पूरी तरह निशुल्क हुई — यानी परिवार को इलाज के लिए एक रुपया भी नहीं देना पड़ा।
तीन साल तक ‘गुब्बारा’ बनता रहा पेट, कई डॉक्टरों ने कर दिया मना
इस महिला की कहानी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। करीब तीन साल पहले उसके पेट में एक छोटी-सी गांठ दिखी थी, जिस पर परिवार ने शुरू में ज्यादा ध्यान नहीं दिया। लेकिन समय के साथ गांठ लगातार बढ़ती गई और एक दिन ऐसा आया जब पेट का आकार ‘गुब्बारे’ जैसा लगने लगा। धीरे-धीरे हालत इतनी बिगड़ी कि महिला को रोजमर्रा की सामान्य गतिविधियां करना भी मुश्किल हो गया — चलना-फिरना तो दूर, घर के काम भी एक-एक करके छूटते चले गए।
परिवार ने महिला के इलाज के लिए कई अस्पतालों के चक्कर लगाए। अलग-अलग जगह जांच और परामर्श कराए गए। लेकिन ट्यूमर का असाधारण आकार देखकर और ऑपरेशन से जुड़े गंभीर जोखिमों को भांपकर ज्यादातर डॉक्टर सर्जरी करने से बचते रहे। तीन साल की इस भटकाव भरी यात्रा के बाद आखिरकार महिला इलाज के लिए जयपुर के SMS अस्पताल पहुंची।
यहां जांच में पेट के अंदर 28.6 किलोग्राम का विशाल रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर मिला। कैंसर विभाग से परामर्श के बाद डॉक्टरों ने जोखिम का आकलन कर सर्जरी का फैसला लिया।
ऑपरेशन थियेटर के तीन घंटे: यूरेटर से धमनियों तक, हर कदम पर जोखिम
सर्जरी के दिन डॉक्टरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खुद ट्यूमर का आकार नहीं, बल्कि उसके आसपास की स्थिति थी। ट्यूमर पेट के अंदर इतनी जगह घेर चुका था कि वह आंतों, लिवर, अग्न्याशय, मूत्राशय और शरीर की बड़ी-बड़ी धमनियों के आसपास चिपका हुआ था। इससे भी ज्यादा खतरनाक बात ये थी कि विशाल ट्यूमर के ठीक सामने यूरेटर — यानी मूत्रवाहिनी — मौजूद थी। यूरेटर को सुरक्षित रखते हुए ट्यूमर को अलग करना बेहद कठिन काम था, क्योंकि जरा-सी चूक भी गंभीर जटिलता पैदा कर सकती थी।
डॉ. जीवन कांकरिया के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने करीब तीन घंटे तक बेहद सावधानी से ऑपरेशन किया। डॉक्टरों को एक तरफ ट्यूमर को पूरी तरह निकालना था, तो दूसरी तरफ आसपास के महत्वपूर्ण अंगों और रक्त वाहिकाओं को किसी भी तरह के नुकसान से बचाना था। एक-एक अंग और रक्त वाहिका की स्थिति को ध्यान में रखते हुए सर्जरी धीरे-धीरे आगे बढ़ाई गई। आखिरकार टीम को सफलता मिली और 28.6 किलोग्राम का विशाल ट्यूमर महिला के शरीर से बाहर निकाल दिया गया।
ऑपरेशन के तुरंत बाद महिला को सीधे आईसीयू में शिफ्ट किया गया, जहां डॉक्टरों की टीम लगातार उसकी निगरानी करती रही। इतनी बड़ी और जोखिम भरी सर्जरी के बाद मरीज की स्थिति पर नजर रखना बेहद जरूरी था। अस्पताल के मुताबिक, ऑपरेशन के बाद महिला की हालत स्थिर रही। रिकवरी संतोषजनक रहने के बाद उसे आईसीयू से सामान्य वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया। तीन साल से जिस ट्यूमर के कारण महिला की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही थी, उसे सफलतापूर्वक निकालने के बाद अब उसके स्वास्थ्य में तेजी से सुधार की उम्मीद है।
सर्जरी के आंकड़े: एक नजर में पूरा मामला
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| अस्पताल | सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल, जयपुर |
| मरीज की उम्र | 59 वर्ष |
| ट्यूमर का वजन | 28.6 किलोग्राम |
| ट्यूमर का प्रकार | रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर (सारकोमा) |
| परेशानी की अवधि | लगभग 3 साल |
| ऑपरेशन की अवधि | करीब 3 घंटे |
| सर्जिकल टीम के प्रमुख | डॉ. जीवन कांकरिया |
| ऑपरेशन के बाद | पहले ICU, अब सामान्य वार्ड में |
| इलाज की लागत | RGHS योजना के तहत निशुल्क |
RGHS योजना: इतनी बड़ी सर्जरी कैसे हुई बिल्कुल मुफ्त
इस पूरे मामले की सबसे खास बात ये रही कि करीब 28.6 किलोग्राम के ट्यूमर को निकालने जैसी जटिल सर्जरी राजस्थान सरकार की राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (RGHS) के तहत निशुल्क की गई। RGHS योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को निर्धारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलता है। इस महिला की सर्जरी भी इसी योजना के अंतर्गत हुई, जिससे इलाज पर होने वाले भारी खर्च का बोझ परिवार पर नहीं पड़ा।
RGHS से जुड़े मरीजों को सलाह है कि योजना के तहत इलाज के लिए अस्पताल में पात्रता की जानकारी पहले ले लें। योजना के दायरे में आने वाले गंभीर और जटिल ऑपरेशन सूचीबद्ध अस्पतालों में कैशलेस तरीके से कराए जा सकते हैं।
टीम का जुटाव: दर्जनभर डॉक्टरों ने संभाली कमान
इस चुनौतीपूर्ण ऑपरेशन को सफल बनाने में कई डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका रही। सर्जिकल टीम का नेतृत्व डॉ. जीवन कांकरिया ने किया। उनके साथ डॉ. देवेंद्र सैनी, डॉ. गरिमा, डॉ. आशिमा, डॉ. गीतांश, डॉ. आकाश, डॉ. देवांश, डॉ. रजत और डॉ. हिमांशु शामिल रहे। वहीं, एनेस्थीसिया टीम में डॉ. सुशील भाटी, डॉ. सुनील चौहान, डॉ. कंचन, डॉ. दीनदयाल और डॉ. दिव्या भटनागर ने योगदान दिया। ऑपरेशन के दौरान नर्सिंग स्टाफ के यूनुस अली की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही। डॉक्टरों और सहयोगी स्टाफ के सामूहिक प्रयास से इस हाई रिस्क सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
फिलहाल महिला की हालत स्थिर है और अस्पताल में उसकी रिकवरी पर नजर रखी जा रही है।
अकसर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न: जयपुर के SMS अस्पताल में कितने वजन का ट्यूमर निकाला गया?
उत्तर: 59 साल की महिला के पेट से 28.6 किलोग्राम वजन का विशाल रेट्रोपेरिटोनियल ट्यूमर निकाला गया। ऑपरेशन करीब 3 घंटे चला।
प्रश्न: क्या इस सर्जरी का खर्च मरीज के परिवार को देना पड़ा?
उत्तर: नहीं। ये पूरी सर्जरी राजस्थान सरकार की RGHS योजना के तहत निशुल्क की गई। इलाज पर होने वाले बड़े खर्च का बोझ परिवार पर नहीं पड़ा।
प्रश्न: सर्जरी में इतना जोखिम क्यों था?
उत्तर: ट्यूमर आंतों, लिवर, अग्न्याशय, मूत्राशय और बड़ी धमनियों के आसपास चिपका हुआ था। ट्यूमर के ठीक सामने यूरेटर (मूत्रवाहिनी) मौजूद था। ऑपरेशन के दौरान जरा-सी चूक भी गंभीर जटिलता पैदा कर सकती थी।
प्रश्न: महिला की मौजूदा हालत कैसी है?
उत्तर: ऑपरेशन के बाद महिला को आईसीयू में रखा गया था। हालत स्थिर और रिकवरी संतोषजनक रहने पर उसे सामान्य वार्ड में स्थानांतरित कर दिया गया है।