नरेश मीणा का आमरण अनशन तीसरे दिन: पैरों में छाले, ठेले पर गांधी की तस्वीर लेकर जयपुर की ओर बढ़े — खाद संकट पर आर-पार की लड़ाई
जयपुर। राजस्थान के किसान नेता नरेश मीणा का खाद संकट के खिलाफ आमरण अनशन रविवार को तीसरे दिन में प्रवेश कर गया। अनशन के साथ-साथ बारां से जयपुर की ओर उनका पैदल कूच भी दूसरे दिन जारी रहा। बारां जिले के मांगरोल कस्बे में रात बिताने के बाद मीणा रविवार सुबह अपने समर्थकों के साथ फिर जयपुर की ओर बढ़ गए। लगातार पैदल चलने से उनके पैरों में छाले पड़ गए हैं, इसलिए अब वे ठेले पर सवार होकर महात्मा गांधी की तस्वीर के साथ अपनी किसान यात्रा आगे बढ़ा रहे हैं।
नरेश मीणा ने यात्रा शुरू करते समय ही साफ कर दिया था कि वे जयपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री से सीधी मुलाकात करेंगे। उनकी मांग है कि किसानों को खेती के रकबे के अनुपात में पर्याप्त खाद उपलब्ध कराई जाए। प्रशासन लगातार उन्हें समझाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन मीणा अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
पहले जानिए — नरेश मीणा की मुख्य मांगें क्या हैं
नरेश मीणा ने सरकार के सामने कुछ ठोस और सीधी मांगें रखी हैं:
- ₹1,350 की तय कीमत पर डीएपी: किसानों को डीएपी खाद तय सरकारी कीमत ₹1,350 पर मिलनी चाहिए, न कि ब्लैक में।
- डीएपी-यूरिया की ब्लैक मार्केटिंग पर रोक: खाद की कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई हो।
- रकबे के अनुपात में खाद: जिस किसान के पास जितना खेती का रकबा है, उसके हिसाब से खाद का कोटा तय हो।
- पूरे प्रदेश का मुद्दा: यह सिर्फ बारां की लड़ाई नहीं — हाड़ौती संभाग और देवली-उनियारा विधानसभा क्षेत्र के किसानों की संपूर्ण समस्याओं का समाधान जरूरी है।
- सीधी वार्ता की शर्त: जिला प्रशासन के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत का प्रस्ताव उन्होंने ठुकरा दिया है। उनकी मांग है कि मुख्य सचिव स्तर के अधिकारी या मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) स्तर पर सीधी वार्ता हो।
नरेश मीणा का कहना है कि जब तक किसानों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, तब तक उनका आमरण अनशन और जयपुर कूच जारी रहेगा।
आज का हाल: मांगरोल से कोटा की ओर बढ़ता काफिला
रविवार सुबह की तस्वीर आंदोलन की गंभीरता बयां करती है। मांगरोल से रवाना होने के बाद नरेश मीणा का काफिला कोटा जिले की सीमा में प्रवेश करने वाला था। योजना के अनुसार रात को कोटा जिले के इटावा कस्बे में विश्राम होगा।
पैदल चलने से पैरों में पड़े छालों के बावजूद मीणा ने यात्रा रोकने से इनकार कर दिया। उन्होंने पैदल चलने की जगह ठेले का सहारा लिया और राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर अपने साथ रखी। रास्ते भर समर्थक किसानों की मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते हुए उनके साथ चल रहे हैं।
प्रशासन की ओर से यात्रा रोकने के लिए लगातार समझाइश की जा रही है, लेकिन किसान नेता ने साफ कर दिया है कि मांगें माने बिना वे पीछे नहीं हटेंगे।
तीन दिन का सफर: कब क्या हुआ
| तारीख | घटनाक्रम |
|---|---|
| 2 अक्टूबर (शुक्रवार) | गांधी जयंती के दिन झालावाड़ के कामखेड़ा बालाजी मंदिर से “किसान हुंकार” बाइक रैली शुरू — 50-60 बाइक, 150-200 समर्थक। रैली बारां कलेक्ट्रेट पहुंची, गांधी प्रतिमा पर माल्यार्पण के बाद आमरण अनशन शुरू। |
| 3 अक्टूबर (शनिवार) | कलेक्ट्रेट के बाहर अनशन जारी। प्रशासनिक वार्ता का प्रस्ताव ठुकराया, मुख्य सचिव स्तर पर बातचीत की शर्त। 4 अक्टूबर को जयपुर कूच और मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी। |
| 4 अक्टूबर (रविवार) | जयपुर कूच का दूसरा दिन — मांगरोल से रवाना, कोटा सीमा की ओर बढ़ता काफिला। पैरों में छाले, ठेले पर गांधी की तस्वीर। इटावा में रात्रि विश्राम की योजना। |
अनशन मंच से सियासी वार भी
यह आंदोलन सिर्फ खाद की मांग तक सीमित नहीं रहा — मंच से सियासी बयानबाजी भी तेज हो गई है। शनिवार को अनशन स्थल से नरेश मीणा ने पूर्व मंत्री प्रमोद जैन भाया पर सीधा निशाना साधा। उन्होंने चुनौती दी कि “पकवान बनाओ या राहुल गांधी-डोटासरा को बुलाओ, भीड़ मेरी ज्यादा होगी।”
दूसरी ओर, पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा ने अनशन को खुला समर्थन दिया है और सरकार को चेतावनी दी है। इससे यह आंदोलन अब सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के लिए नजरअंदाज करना मुश्किल होता जा रहा है।
अब आगे क्या होगा
नरेश मीणा का अगला पड़ाव जयपुर है। उनकी योजना मुख्यमंत्री से सीधी मुलाकात कर खाद संकट समेत किसानों की समस्याओं का समाधान करवाने की है। अगर मुलाकात या ठोस आश्वासन नहीं मिला, तो मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी भी पहले ही दी जा चुकी है।
सवाल यह है कि सरकार इस आंदोलन को कितनी गंभीरता से लेती है। रबी सीजन की बुवाई का समय नजदीक है और किसानों को समय पर डीएपी-यूरिया न मिलना फसल पर सीधा असर डाल सकता है। यही वजह है कि खाद संकट का मुद्दा किसानों के बीच तेजी से सुलग रहा है।
क्यों अहम है यह आंदोलन
खाद की किल्लत राजस्थान के किसानों के लिए नई समस्या नहीं है, लेकिन इस बार आंदोलन का तरीका अलग है — आमरण अनशन के साथ सैकड़ों किलोमीटर का पैदल कूच। हाड़ौती संभाग राजस्थान का प्रमुख कृषि क्षेत्र है, जहां सोयाबीन और धान जैसी फसलों के लिए समय पर खाद बेहद जरूरी है। अगर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच जल्द बातचीत नहीं हुई, तो यह मुद्दा प्रदेशव्यापी किसान आंदोलन का रूप भी ले सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
नरेश मीणा की मुख्य मांग क्या है?
किसानों को खेती के रकबे के अनुपात में पर्याप्त खाद (डीएपी-यूरिया) ₹1,350 की तय कीमत पर उपलब्ध कराना, ब्लैक मार्केटिंग रोकना और CMO स्तर पर सीधी वार्ता।
आमरण अनशन कब से चल रहा है?
2 अक्टूबर 2026 (गांधी जयंती) से बारां कलेक्ट्रेट के बाहर। रविवार 4 अक्टूबर को यह तीसरे दिन में है।
जयपुर कूच का मकसद क्या है?
जयपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री से सीधी मुलाकात और खाद संकट समेत किसानों की समस्याओं का समाधान करवाना। मांगें न माने जाने पर मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी भी दी गई है।
यात्रा अभी कहां पहुंची है?
रविवार सुबह काफिला बारां के मांगरोल से रवाना होकर कोटा जिले की सीमा की ओर बढ़ रहा था। रात को इटावा (कोटा) में विश्राम की योजना है।