Bikaner Kushti: राज्य स्तरीय कुश्ती में बीकानेर के युवा पहलवानों का जलवा — विकास और भागीरथ को गोल्ड, 6 पदकों के साथ ग्रीको-रोमन में प्रदेश में अव्वल

राजस्थान की कुश्ती पट्टी से एक बार फिर गर्व करने वाली खबर आई है। बीकानेर जिले के युवा पहलवानों ने राज्य स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में दमदार प्रदर्शन करते हुए कुल 6 पदक अपने नाम किए हैं — दो स्वर्ण, एक रजत और तीन कांस्य। सबसे बड़ी बात यह है कि ग्रीको-रोमन शैली में बीकानेर की टीम ने प्रदेशभर में ओवरऑल पहला स्थान हासिल किया है। टीम प्रभारी शंकर सिद्ध ने इसकी जानकारी दी और खिलाड़ियों के प्रदर्शन को जिले के लिए बड़ी उपलब्धि बताया।

इन युवा पहलवानों की उम्र 17 से 19 साल के बीच है — मतलब ये सभी स्कूली खेल व्यवस्था से उभरती हुई नई पीढ़ी के चेहरे हैं। ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले इन खिलाड़ियों ने राज्य के बड़े शहरों के मंजे हुए पहलवानों के बीच अपनी ताकत और तकनीक का लोहा मनवाया है।

किन्हें मिला कौन सा पदक? पूरी सूची

प्रतियोगिता में बीकानेर के खिलाड़ियों ने जिला का प्रतिनिधित्व किया और छह ने पदक जीते। पदक विजेताओं का ब्योरा इस प्रकार है:

खिलाड़ी गांव/शहर स्कूल/टीम उम्र भार वर्ग पदक शैली
विकास गोदारा बेनीसर टेगोर पब्लिक स्कूल, कितासर 17 वर्ष 65 किलो स्वर्ण फ्रीस्टाइल
भागीरथ गोदारा कुंतासर सार्दुल स्पोर्ट्स 17 वर्ष 51 किलो स्वर्ण ग्रीको-रोमन
हिमानी सारण श्रीडूंगरगढ़ भारती निकेतन 19 वर्ष 57 किलो रजत —
यशस्वी गहलोत बीकानेर — 19 वर्ष 57 किलो कांस्य —
मीनाक्षी जोशी — — 17 वर्ष 69 किलो कांस्य —
मोनिका — — 17 वर्ष 65 किलो कांस्य —

विकास गोदारा ने 65 किलो भार वर्ग में स्वर्ण जीतकर अपनी फुर्ती और पकड़ का बेहतरीन नमूना पेश किया। वहीं भागीरथ गोदारा ने ग्रीको-रोमन शैली के 51 किलो भार वर्ग में सोना जीता — ग्रीको-रोमन वह शैली है जिसमें पैरों से आक्रमण की अनुमति नहीं होती, पूरी कुश्ती ऊपरी शरीर की ताकत और तकनीक पर टिकी होती है। हिमानी सारण ने 57 किलो भार वर्ग में रजत पदक जीता, जबकि यशस्वी गहलोत, मीनाक्षी जोशी और मोनिका ने कांस्य पदक हासिल कर टीम की पदक तालिका को और मजबूत किया।

ग्रीको-रोमन में बीकानेर अव्वल — कोचों की कड़ी मेहनत का फल

टीम प्रभारी शंकर सिद्ध के अनुसार, ऑल ओवर ग्रीको-रोमन में बीकानेर प्रदेश भर में अव्वल रहा है। यह उपलब्धि इसलिए खास है क्योंकि इस शैली में राज्य के कई जिलों की टीमों के बीच सीधी और कड़ी टक्कर होती है।

इस सफलता के पीछे कोचों और सहयोगी स्टाफ की मेहनत भी अहम रही। टीम के साथ कुश्ती कोच रामदेव कुलड़िया मौजूद रहे, जिनके मार्गदर्शन में खिलाड़ियों ने अपनी तकनीक निखारी। इसके अलावा भूराराम हुड्डा और श्याम सुंदर भी दल के साथ रहे और व्यवस्था से लेकर मानसिक तैयारी तक हर मोर्चे पर खिलाड़ियों का साथ दिया। विजेताओं की घोषणा के बाद स्कूलों के स्टाफ, साथी छात्रों और क्षेत्र के खेलप्रेमियों ने खिलाड़ियों को बधाइयां दीं।

क्यों खास है यह उपलब्धि? ग्रामीण प्रतिभाओं की बड़ी जीत

भारतीय खेलों में अकसर यह चर्चा होती है कि गांव-कस्बों की प्रतिभाएं संसाधनों की कमी से पीछे रह जाती हैं। लेकिन विकास और भागीरथ जैसे खिलाड़ी इस धारणा को तोड़ते हैं। बेनीसर और कुंतासर जैसे गांवों से निकलकर राज्य स्तर पर स्वर्ण जीतना इस बात का प्रमाण है कि सही मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास मिले तो ग्रामीण युवा किसी से कम नहीं।

खास बात यह भी है कि कुश्ती जैसे खेल में सफलता रातों-रात नहीं मिलती। अखाड़े में सालों की मिट्टी की गंध, रोज की दौड़-कसरत, संतुलित खानपान और गुरु की डांट-फटकार — यही वह रास्ता है जिससे होकर हर बड़ा पहलवान गुजरता है। इन छह पदकों के पीछे भी इसी अनुशासन की लंबी कहानी छिपी है।

आगे का रास्ता: राज्य पदक से राष्ट्रीय मंच तक

राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक जीतना किसी भी युवा खिलाड़ी के करियर का अहम पड़ाव होता है। ऐसे प्रदर्शन से खिलाड़ियों को कई फायदे मिलते हैं — राज्य खेल परिषद की नजरों में आना, आगे की चयन प्रक्रियाओं में मजबूती, और सबसे बढ़कर आत्मविश्वास का बढ़ना। भागीरथ गोदारा का ग्रीको-रोमन में स्वर्ण और विकास गोदारा का 65 किलो में स्वर्ण, दोनों ही उन्हें अपने-अपने भार वर्ग के उभरते हुए दावेदारों की सूची में लाते हैं।

छात्राओं की बात करें तो हिमानी सारण, मीनाक्षी जोशी और मोनिका के पदक यह संदेश देते हैं कि राजस्थान की बेटियां भी कुश्ती जैसे पारंपरिक रूप से पुरुष-प्रधान माने जाने वाले खेल में बराबरी से हिस्सा ले रही हैं और पदक जीत रही हैं। यशस्वी गहलोत का कांस्य भी 19 वर्ष आयु वर्ग की कड़ी प्रतिस्पर्धा में अहम माना जाएगा।

युवा खिलाड़ियों और अभिभावकों के लिए सीख

इस सफलता से कुछ व्यावहारिक बातें सामने आती हैं जो खेल में रुचि रखने वाले हर युवा के काम की हैं:

  • स्कूल खेलों को गंभीरता से लें: विकास गोदारा टेगोर पब्लिक स्कूल कितासर और हिमानी सारण भारती निकेतन जैसे स्कूलों से हैं — स्कूल स्तरीय प्रतियोगिताएं राज्य स्तर का रास्ता खोलती हैं।
  • अच्छे कोच का चुनाव जरूरी: रामदेव कुलड़िया जैसे अनुभवी कोच के मार्गदर्शन में तकनीक निखरती है। किसी भी खेल में शुरुआत सही गुरु से होनी चाहिए।
  • नियमितता ही असली ताकत है: 17-19 साल की उम्र में यह सफलता रोज के अभ्यास का नतीजा है, किसी एक दिन के चमत्कार का नहीं।
  • अभिभावकों का सहयोग निर्णायक: ग्रामीण परिवारों से आने वाले इन खिलाड़ियों की सफलता में परिवार के समर्थन की बड़ी भूमिका होती है। बच्चों के खेल के शौक को गंभीरता से लेना उनकी सबसे बड़ी मदद है।

FAQ

प्रश्न: राज्य स्तरीय कुश्ती में बीकानेर ने कितने पदक जीते?
उत्तर: बीकानेर जिले के खिलाड़ियों ने कुल 6 पदक जीते — 2 स्वर्ण (विकास गोदारा, भागीरथ गोदारा), 1 रजत (हिमानी सारण) और 3 कांस्य (यशस्वी गहलोत, मीनाक्षी जोशी, मोनिका)।

प्रश्न: ग्रीको-रोमन में बीकानेर की क्या उपलब्धि रही?
उत्तर: टीम प्रभारी शंकर सिद्ध के अनुसार ऑल ओवर ग्रीको-रोमन में बीकानेर प्रदेश भर में अव्वल रहा। भागीरथ गोदारा ने 51 किलो ग्रीको-रोमन में स्वर्ण जीता।

प्रश्न: यह प्रतियोगिता कब हुई और जानकारी किसने दी?
उत्तर: यह राज्य स्तरीय प्रतियोगिता 4 अक्टूबर 2026 को श्रीडूंगरगढ़ टाइम्स में प्रकाशित खबर के अनुसार हुई। पदकों की जानकारी टीम प्रभारी शंकर सिद्ध ने दी।

प्रश्न: ग्रीको-रोमन कुश्ती और फ्रीस्टाइल में क्या अंतर है?
उत्तर: ग्रीको-रोमन शैली में कमर के नीचे पैरों से पकड़ या आक्रमण की अनुमति नहीं होती — पूरी कुश्ती ऊपरी शरीर की ताकत, संतुलन और तकनीक पर निर्भर करती है। फ्रीस्टाइल में पैरों का इस्तेमाल भी मान्य होता है।

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