अजमेर नगर निगम के मेयर चुनाव में कानून का पालन करने की कीमत एक प्रशासनिक अधिकारी को चुकानी पड़ी है। चुनाव अधिकारी की भूमिका निभा रहे राजस्थान प्रशासनिक सेवा (RAS) के अधिकारी अनिल कुमार पूनिया का तबादला कर दिया गया है। राज्य सरकार ने उन्हें अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) के सचिव पद से हटाकर बांसवाड़ा स्थित गुरु गोविंद यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार बना दिया है। प्रशासनिक गलियारों में इस तबादले को उस ईमानदार और निष्पक्ष फैसले की सजा के तौर पर देखा जा रहा है, जो पूनिया ने मेयर चुनाव के दौरान लिया था।
पहले समझिए: 80 सीटों में भाजपा के पास सिर्फ 32
अजमेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं और मेयर बनने के लिए 41 वोट चाहिए। इस बार पार्षद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को पिछले 36 वर्षों का सबसे कमजोर प्रदर्शन देखने को मिला। पार्टी के सिर्फ 32 पार्षद जीतकर आए। पांच अन्य पार्षदों का समर्थन मिलने के बाद भी भाजपा का आंकड़ा 37 तक ही पहुंचा, जो बहुमत के जादुई अंक 41 से चार कदम दूर था।
वहीं कांग्रेस के 37 पार्षद जीते थे और 11 निर्दलीय पार्षद जीतकर आए थे। दोनों ही प्रमुख दलों की नजर इन्हीं 11 निर्दलीयों पर थी, क्योंकि मेयर की कुर्सी का फैसला उनके रुख से तय होना था। भाजपा की ओर से मेयर पद की प्रत्याशी वार्ड 3 की पार्षद अनामिका शर्मा थीं, जबकि कांग्रेस ने वार्ड 57 की पार्षद किरण गढ़वाल को मैदान में उतारा था।
आधी रात को फाइलें, 19 लाख का टैक्स और रद्द हुई एनओसी
मतदान से पहले ही मामला दिलचस्प मोड़ पर पहुंच चुका था। कांग्रेस का गंभीर आरोप था कि भाजपा के शहर अध्यक्ष और निगम के अधिकारी आधी रात को पुराने कार्यालय से फाइलें ले गए। इसके बाद भाजपा प्रत्याशी अनामिका शर्मा ने कांग्रेस प्रत्याशी किरण गढ़वाल पर 19 लाख रुपये के बकाया टैक्स का आरोप लगाते हुए उनका नामांकन रद्द करने की याचिका दाखिल कर दी।
इस आपत्ति के बाद आनन-फानन में एक कमेटी बनाई गई और किरण गढ़वाल की एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) रद्द कर दी गई। कांग्रेस ने इस कदम का कड़ा विरोध किया। पार्टी का तर्क था कि एनओसी की जरूरत पार्षद पद के नामांकन के समय होती है, मेयर पद के चुनाव के इस चरण पर ऐसी आपत्ति विधि सम्मत नहीं है।
परीक्षा घड़ी में चुनाव अधिकारी की कुर्सी
यहीं पर चुनाव अधिकारी के तौर पर नियुक्त अनिल पूनिया की असली परीक्षा शुरू हुई। सूत्रों के मुताबिक, पूनिया पर सरकार और सत्ताधारी दल का भारी दबाव था कि वे भाजपा की आपत्ति को स्वीकार करके कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन निरस्त कर दें। ऐसा होता तो भाजपा की अनामिका शर्मा निर्विरोध मेयर चुन ली जातीं और चुनाव कराने की नौबत ही नहीं आती।
लेकिन पूनिया ने नियमविरुद्ध निर्णय से साफ इनकार कर दिया। वे जानते थे कि ऐसा फैसला हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में टिकेगा नहीं। कानून को सर्वोपरि रखते हुए उन्होंने भाजपा की आपत्ति खारिज की और कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन बहाल रखा। इसके बाद चुनाव कराना अनिवार्य हो गया।
मतदान, 43-37 का नतीजा और 11 निर्दलीयों का रुख
मेयर पद के लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान हुआ और रिटर्निंग अधिकारी अनिल पूनिया की अगुवाई में महज 15 मिनट में परिणाम घोषित हो गया। भाजपा की अनामिका शर्मा ने 43 वोट हासिल कर कांग्रेस की किरण गढ़वाल (37 वोट) को 6 वोट के अंतर से हरा दिया।
नतीजे की सबसे बड़ी कहानी 11 निर्दलीय पार्षदों के रुख में छिपी थी। भाजपा के पास सिर्फ 32 पार्षद थे, लेकिन अनामिका शर्मा को 43 वोट मिले, यानी 11 वोट ज्यादा। इसका सीधा मतलब है कि सभी 11 निर्दलीय पार्षद भाजपा के साथ चले गए, जबकि कांग्रेस को अपने 37 पार्षदों के वोट ही मिले।
मतदान के दिन भी निगम परिसर के बाहर माहौल गर्म रहा।
अब तबादला: अजमेर से बांसवाड़ा का रास्ता
चुनाव के कुछ दिनों बाद आई आरएएस तबादला सूची ने सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया। पंचायत चुनाव की आचार संहिता लागू होने से ठीक पहले जारी इस सूची में सरकार ने अनिल पूनिया को अजमेर से बांसवाड़ा का रास्ता दिखा दिया। उन्हें अजमेर विकास प्राधिकरण के सचिव जैसे अहम पद से हटाकर गुरु गोविंद यूनिवर्सिटी, बांसवाड़ा में रजिस्ट्रार बना दिया गया।
यद्यपि बाद में भाजपा ने कथित दबाव और चर्चित खरीद-फरोख्त के जरिए जरूरी 6 वोट जुटाकर अपना मेयर काबिज कर ही लिया, लेकिन पूनिया को निर्विरोध रास्ता न देने के लिए जो अतिरिक्त जद्दोजहद करनी पड़ी, उसी की गाज उन पर गिरी, ऐसा प्रशासनिक गलियारों में माना जा रहा है।
चुनाव के आंकड़े एक नजर में
| विवरण | आंकड़ा |
|---|---|
| नगर निगम में कुल वार्ड | 80 |
| बहुमत के लिए जरूरी वोट | 41 |
| भाजपा के जीते पार्षद | 32 |
| कांग्रेस के जीते पार्षद | 37 |
| निर्दलीय पार्षद | 11 |
| अनामिका शर्मा (भाजपा) को मिले वोट | 43 |
| किरण गढ़वाल (कांग्रेस) को मिले वोट | 37 |
| जीत का अंतर | 6 वोट |
| मतदान का समय | सुबह 10 से दोपहर 2 बजे |
| रिटर्निंग अधिकारी | अनिल कुमार पूनिया (RAS) |
| पूनिया का नया पद | रजिस्ट्रार, गुरु गोविंद यूनिवर्सिटी, बांसवाड़ा |
बड़ा सवाल: क्या निष्पक्ष अधिकारी होना अब जोखिम है?
इस घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की निष्पक्षता और सत्ता के हस्तक्षेप को लेकर फिर चर्चाएं गर्म हैं। सवाल है कि चुनाव जैसे संवैधानिक काम में कानून का पालन करने वाले अधिकारी को क्या अपने फैसले की कीमत चुकानी पड़ेगी।
फिलहाल सरकार की ओर से तबादले के पीछे कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है, लेकिन समय और घटनाक्रम का मेल इस चर्चा को हवा दे रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मामला अदालत या प्रशासनिक सेवा के मंचों पर भी उठता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
अनिल पूनिया कौन हैं?
अनिल कुमार पूनिया RAS अधिकारी हैं। वे अजमेर विकास प्राधिकरण (ADA) के सचिव थे और मेयर चुनाव में चुनाव अधिकारी थे। अब उनका तबादला बांसवाड़ा के गुरु गोविंद यूनिवर्सिटी में रजिस्ट्रार के पद पर हुआ है।
अजमेर मेयर चुनाव का नतीजा क्या रहा?
भाजपा की अनामिका शर्मा ने 43 वोट पाकर कांग्रेस की किरण गढ़वाल (37 वोट) को 6 वोट से हराया। 11 निर्दलीय पार्षदों का समर्थन भाजपा को मिला।
कांग्रेस प्रत्याशी का नामांकन क्यों चुनौती दी गई थी?
भाजपा ने किरण गढ़वाल पर 19 लाख रुपये के बकाया टैक्स का आरोप लगाकर नामांकन रद्द करने की मांग की थी। चुनाव अधिकारी ने आपत्ति खारिज कर नामांकन बहाल रखा था।
तबादले को विवादास्पद क्यों माना जा रहा है?
चर्चा है कि पूनिया ने कानून का पालन करके भाजपा को निर्विरोध जीत नहीं दी, इसलिए उन्हें हटाया गया। पंचायत चुनाव की आचार संहिता से ठीक पहले का यह तबादला इस चर्चा को और हवा दे रहा है।