खेलो इंडिया सिलंबम अस्मिता वूमेंस लीग: उदयपुर की बेटियों ने जीते 14 गोल्ड समेत 25 पदक, 110 खिलाड़ियों ने दिखाया दम

उदयपुर की बेटियों ने एक बार फिर साबित कर दिया कि मौका मिले तो वे किसी भी खेल में पीछे नहीं रहतीं। शहर के शोभागपुरा स्थित मीकाडो इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित खेलो इंडिया राजस्थान सिलंबम अस्मिता वूमेंस लीग 2026 में उदयपुर की खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 14 स्वर्ण, 10 रजत और 1 कांस्य समेत कुल 25 पदक अपने नाम किए और प्रतियोगिता में पहला स्थान हासिल किया। बांस की लाठी घुमाती, तेजी से वार और बचाव करती करीब 110 बालिकाओं का जोश देखकर मौजूद हर शख्स तालियां बजाने पर मजबूर हो गया।

110 बालिकाओं ने दिखाया दम, उदयपुर रहा अव्वल

उदयपुर सिलंबम एसोसिएशन की सचिव रुक्मणि लोहार ने बताया कि यह लीग भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से मान्यता प्राप्त है। प्रतियोगिता का आयोजन राजस्थान सिलंबम एसोसिएशन के महासचिव मांगीलाल सालवी की देखरेख में किया गया, जिसमें लगभग 110 बालिका खिलाड़ियों ने विभिन्न आयु और भार वर्गों में हिस्सा लिया। हर वर्ग में मुकाबले कड़े रहे, लेकिन मेजबान उदयपुर की खिलाड़ियों ने घरेलू मैदान का पूरा फायदा उठाते हुए पदक तालिका में सबसे ऊपर जगह बनाई।

प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि मीकाडो इंटरनेशनल स्कूल के निदेशक केतन जैन थे, जिन्होंने सभी विजेता खिलाड़ियों को शुभकामनाएं दीं और बेटियों के खेल में आगे बढ़ने को समाज के लिए शुभ संकेत बताया।

पदक तालिका: उदयपुर का प्रदर्शन

पदक संख्या खास बात
स्वर्ण (गोल्ड) 14 सबसे ज्यादा गोल्ड उदयपुर के नाम
रजत (सिल्वर) 10 कई फाइनल मुकाबले बेहद करीबी रहे
कांस्य (ब्रॉन्ज) 1 कनिका चुंडावत ने जीता पदक
कुल पदक 25 उदयपुर पदक तालिका में पहला स्थान

ये बेटियां बनीं गोल्डन गर्ल्स

स्वर्ण पदक जीतने वाली खिलाड़ियों की सूची लंबी है और यही इस लीग की सबसे खूबसूरत तस्वीर है — छोटे-छोटे शहरों और स्कूलों की बेटियां अब मार्शल आर्ट जैसे कठिन खेल में भी गोल्ड जीत रही हैं। गोल्ड जीतने वालों में अंजना वैष्णव, मोनल सेन, ऊषा लोहार, समायरा शर्मा, कैप्रिशा गोस्वामी, गीत जैन, गौरांगना राठौर, अलीना रंगवाला, ध्रुविका कंवर, अक्षा बोस, वैभवी सिंह शक्तावत, तमन्ना लोहार, एमरीना राही और आराध्या शामिल रहीं।

रजत पदक जीतने वालों में जदविगा चौहान, लेहाना चौधरी, निकिता भील, देवांशी पाठक, रिद्धि परमार, तराली टाक, धारवी गोस्वामी, हितांशी वैष्णव, पायल सालवी और मायरा चौधरी जैसी खिलाड़ियों के नाम शामिल रहे, जबकि कनिका चुंडावत ने कांस्य पदक हासिल किया। कोचों का कहना है कि कई खिलाड़ियों के लिए यह किसी राज्य स्तरीय मंच पर पहला अनुभव था, फिर भी उन्होंने बिना झिझक अनुभवी प्रतिद्वंद्वियों का सामना किया।

सिलंबम क्या है? बांस की लाठी वाला प्राचीन खेल

बहुत से पाठकों के मन में सवाल उठेगा कि आखिर सिलंबम है क्या। सिलंबम दक्षिण भारत, खासकर तमिलनाडु की एक प्राचीन मार्शल आर्ट है, जिसमें बांस की लंबी लाठी को हथियार बनाकर वार, बचाव और घुमाव की तकनीकें सिखाई जाती हैं। इसमें खिलाड़ी की तेजी, संतुलन, लचीलापन और एकाग्रता — चारों की परीक्षा होती है। लाठी के अलावा इस खेल में पैरों की चाल और शरीर की मुद्राओं का भी बड़ा महत्व होता है।

अच्छी बात यह है कि यह खेल अब सिर्फ दक्षिण भारत तक सीमित नहीं रहा। राजस्थान समेत देश के कई राज्यों में इसके एसोसिएशन सक्रिय हैं और स्कूल स्तर से ही बेटियां इसमें प्रशिक्षण लेने लगी हैं। आत्मरक्षा की दृष्टि से भी यह खेल बेटियों के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है, क्योंकि यह सिर्फ खेल नहीं, बल्कि मुश्किल हालात में खुद को सुरक्षित रखने का हुनर भी सिखाता है।

अस्मिता वूमेंस लीग क्यों है खास?

खेलो इंडिया के तहत चलने वाली अस्मिता वूमेंस लीग का मकसद महिला खिलाड़ियों को नियमित प्रतियोगिताओं का मंच देना है। अक्सर देखा जाता है कि बेटियों को प्रशिक्षण तो मिल जाता है, लेकिन मुकाबलों के अवसर कम मिलते हैं — ऐसे में इस तरह की लीग उन्हें असली प्रतियोगिता का अनुभव देती है। उदयपुर में हुई इस लीग में अलग-अलग आयु और भार वर्ग रखे गए, ताकि हर खिलाड़ी को अपने स्तर के प्रतिद्वंद्वी से खेलने का मौका मिले और कोई भी बेटी सिर्फ अनुभवहीनता की वजह से बाहर न हो।

खेल विशेषज्ञ मानते हैं कि मार्शल आर्ट जैसे खेलों में बेटियों की बढ़ती भागीदारी समाज की सोच बदलने का संकेत है। जब 110 बेटियां एक साथ मैदान में उतरती हैं, तो यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं रहती — यह उन सैकड़ों परिवारों के लिए प्रेरणा बन जाती है, जो अब भी सोचते हैं कि ऐसे खेल बेटियों के लिए नहीं हैं।

आपकी बेटी भी खेलना चाहे तो क्या करें?

अगर आपके घर की बेटी भी सिलंबम या किसी मार्शल आर्ट में रुचि रखती है, तो ये बातें काम आएंगी:

  • जिला एसोसिएशन से संपर्क करें: हर जिले में खेल संघों की इकाइयां होती हैं। उदयपुर में सिलंबम की गतिविधियां उदयपुर सिलंबम एसोसिएशन के माध्यम से संचालित होती हैं।
  • स्कूल से शुरुआत सबसे आसान: कई स्कूल अब मार्शल आर्ट को खेल गतिविधियों में शामिल कर रहे हैं। स्कूल के खेल शिक्षक से जानकारी लें।
  • आयु और भार वर्ग समझें: प्रतियोगिताएं आयु और वजन के हिसाब से होती हैं, इसलिए प्रशिक्षण के साथ सही वर्ग की तैयारी जरूरी है।
  • नियमित अभ्यास ही कुंजी है: सिलंबम में तेजी और संतुलन रोज के अभ्यास से आता है। हफ्ते में नियमित प्रशिक्षण लेने वाली खिलाड़ी ही लीग स्तर तक पहुंचती हैं।
  • खेलो इंडिया की लीगों पर नजर रखें: अस्मिता जैसी लीगों की जानकारी राज्य खेल संघों और स्कूलों के माध्यम से मिलती रहती है — समय पर पंजीकरण कराना न भूलें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न 1: खेलो इंडिया सिलंबम अस्मिता वूमेंस लीग 2026 कहां आयोजित हुई?

उत्तर: यह लीग उदयपुर के शोभागपुरा स्थित मीकाडो इंटरनेशनल स्कूल में आयोजित हुई, जिसमें करीब 110 बालिका खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया।

प्रश्न 2: उदयपुर ने इस लीग में कुल कितने पदक जीते?

उत्तर: उदयपुर की खिलाड़ियों ने 14 स्वर्ण, 10 रजत और 1 कांस्य समेत कुल 25 पदक जीते और पदक तालिका में पहला स्थान हासिल किया।

प्रश्न 3: सिलंबम खेल क्या होता है?

उत्तर: सिलंबम तमिलनाडु की प्राचीन मार्शल आर्ट है, जिसमें बांस की लाठी से वार और बचाव की तकनीकें सिखाई जाती हैं। यह खेल तेजी, संतुलन और आत्मरक्षा के लिए जाना जाता है।

प्रश्न 4: इस लीग का आयोजन किसके द्वारा किया गया?

उत्तर: लीग का आयोजन राजस्थान सिलंबम एसोसिएशन के महासचिव मांगीलाल सालवी की देखरेख में हुआ। यह लीग भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय से मान्यता प्राप्त है।

अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और आयोजकों द्वारा दी गई जानकारी पर आधारित है। खिलाड़ियों के नाम और पदकों का विवरण आयोजन समिति द्वारा उपलब्ध कराई गई सूची के अनुसार है।

Leave a Comment