श्रीडूंगरगढ़ कुश्ती: राज्य स्तरीय स्कूल खेलों में 3 पदक — हरीश सियाग को गोल्ड, जानें पूरी कहानी

राजस्थान के अखाड़ों में एक बार फिर ताल उठी है — और इस बार श्रीडूंगरगढ़ की धरती से। 70वीं राज्य स्तरीय स्कूली खेलकूद प्रतियोगिता में भारती निकेतन शिक्षण संस्थान, श्रीडूंगरगढ़ के तीन युवा पहलवानों ने तीन पदक जीतकर पूरे जिले का नाम रोशन कर दिया है। हरीश सियाग ने ग्रीको-रोमन वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, राजवीर कूकणा को रजत मिला और अभिजीत नाई ने कांस्य पदक अपने नाम किया।

ये तीनों पदक भरतपुर के बृजनगर राउमावि प्रांगण में जीते गए। संस्था में खबर फैलते ही उत्सव का माहौल बन गया।

तीन पदक, तीन कहानियां

सबसे चमकदार प्रदर्शन रहा हरीश सियाग का। 17 वर्षीय बालक वर्ग में 45 किलोग्राम ग्रीको-रोमन श्रेणी में हरीश ने स्वर्ण पदक जीतकर साबित कर दिया कि वह प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ युवा पहलवानों में से एक हैं। ग्रीको-रोमन वह शैली है जिसमें कमर से ऊपर के शरीर से ही दांव-पेंच लगाए जाते हैं।

दूसरे पदकवीर राजवीर कूकणा ने 50 किलोग्राम वर्ग में रजत पदक हासिल किया। पूरे टूर्नामेंट में उनका प्रदर्शन इतना दमदार रहा कि वे दर्शकों के चहेते बन गए।

तीसरे पदक की कहानी अभिजीत नाई की है, जिन्होंने 19 वर्षीय बालक वर्ग में 55 किलोग्राम श्रेणी में कांस्य पदक जीता। उम्र में बड़े वर्ग में मुकाबला करना आसान नहीं होता, लेकिन अभिजीत ने अपने अनुभव और शांत खेल से तीसरा स्थान पक्का किया।

70वीं स्कूली खेलकूद प्रतियोगिता: आयोजन और महत्व

यह प्रतियोगिता राजस्थान की स्कूली खेल व्यवस्था का सबसे प्रतिष्ठित मंच है। 70वें संस्करण का आयोजन इस बार भरतपुर के बृजनगर में हुआ, जहां प्रदेशभर के स्कूली पहलवान एक-दूसरे के सामने आए। स्कूली खेलकूद प्रतियोगिताओं का असली महत्व इसमें है कि यहां से ही भविष्य के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी उभरते हैं।

जो खिलाड़ी राज्य स्तर पर पदक जीतते हैं, उन्हें आगे चलकर राष्ट्रीय स्कूली खेलों (SGFI) में प्रदेश का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिलता है। यानी हरीश, राजवीर और अभिजीत — तीनों के लिए राष्ट्रीय मंच का रास्ता अब खुला है।

अखाड़े की मिट्टी: कोच सिकंदर सिंह की भूमिका

इन तीनों पहलवानों की सफलता के पीछे कुश्ती प्रशिक्षक सिकंदर सिंह की भूमिका अहम है। संस्था के स्पोर्ट्स एचओडी और एनआईएस जूडो कोच नितिन सिंह के साथ मिलकर उन्होंने खिलाड़ियों के लिए उच्च स्तरीय प्रशिक्षण का माहौल तैयार किया।

संस्था के निदेशक ओमप्रकाश स्वामी ने खिलाड़ियों की इस उपलब्धि पर गर्व जताते हुए कहा कि संस्थान क्षेत्र की खेल प्रतिभाओं को बेहतर मंच और उच्च स्तरीय प्रशिक्षण देने पर विशेष जोर दे रहा है। संस्था में खिलाड़ियों की उपलब्धि की खबर फैलते ही उत्सव का माहौल बन गया।

राजस्थान में कुश्ती की परंपरा

राजस्थान में कुश्ती कोई नया खेल नहीं है। यहां के अखाड़े सदियों से पहलवान तैयार कर रहे हैं। जयपुर के अखाड़ों से लेकर पश्चिमी राजस्थान के छोटे-छोटे गांवों तक, मिट्टी की अखाड़ा परंपरा आज भी जीवित है। सुबह की ठंड में अखाड़े की मिट्टी में लोटना, दंड-बैठक करना और गुरु से दांव-पेंच सीखना — यह सब राजस्थान के पहलवानों के लिए रोज़ का नियम है।

विशेष बात यह है कि अब स्कूल और संस्थान भी इस परंपरा को वैज्ञानिक प्रशिक्षण से जोड़ रहे हैं। एनआईएस-प्रशिक्षित कोचों की देखरेख में बच्चे राष्ट्रीय स्तर की तैयारी स्कूल के दिनों से ही शुरू कर देते हैं।

तीनों पदक विजेताओं की सूची

खिलाड़ी का नामवर्गभार श्रेणीपदकशैली
हरीश सियाग17 वर्षीय बालक45 किलोग्रामस्वर्णग्रीको-रोमन
राजवीर कूकणा17 वर्षीय बालक50 किलोग्रामरजतकुश्ती
अभिजीत नाई19 वर्षीय बालक55 किलोग्रामकांस्यकुश्ती

ग्रीको-रोमन कुश्ती क्या है?

कुश्ती के दो मुख्य रूप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेले जाते हैं — फ्रीस्टाइल और ग्रीको-रोमन। फ्रीस्टाइल में पहलवान पूरे शरीर का इस्तेमाल कर सकते हैं, पैरों से भी पकड़ और दांव लगा सकते हैं। वहीं ग्रीको-रोमन में कमर से नीचे पकड़ प्रतिबंधित होती है — सिर्फ ऊपरी शरीर से ही दांव-पेंच चलने हैं।

इसीलिए ग्रीको-रोमन में कंधों, बाहों और कमर की ताकत के साथ-साथ तकनीकी समझ निर्णायक होती है। हरीश सियाग का 45 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण जीतना यह बताता है कि उनकी तकनीक और पकड़ दोनों प्रदेश स्तर पर सबसे बेहतर हैं।

स्कूल खेलों से राष्ट्रीय मंच तक का रास्ता

राजस्थान में स्कूली खेलों का ढांचा काफी स्पष्ट है — जिला स्तर से राज्य स्तर, फिर राष्ट्रीय स्कूली खेल (स्कूल गेम्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) और वहां से आगे। राज्य स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को खेल प्रमाणपत्र (sports certificate) मिलते हैं, जो आगे सरकारी नौकरियों में खेल कोटे और उच्च शिक्षा में प्रवेश के काम आते हैं।

स्कूली खेलों में राज्य स्तरीय पदक विजेताओं के लिए रास्ता कुछ इस तरह है:

1. जिला स्तरीय चयन — विद्यालय से जिला टीम में चयन

2. राज्य स्तरीय प्रतियोगिता — प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ से मुकाबला (यही वह मंच है जहां ये तीनों पदक आए)

3. राष्ट्रीय स्कूली खेल (SGFI) — प्रदेश का प्रतिनिधित्व

4. जूनियर/सीनियर राष्ट्रीय चैंपियनशिप — कुश्ती संघ की राष्ट्रीय स्पर्धाएं

यानी हरीश, राजवीर और अभिजीत अब दूसरे पड़ाव पर खड़े हैं और उनकी अगली चुनौती राष्ट्रीय मंच होगा।

श्रीडूंगरगढ़ के लिए क्या मायने रखती है यह जीत?

श्रीडूंगरगढ़ बीकानेर संभाग का एक कस्बा है, जिसे आमतौर पर व्यापार और कृषि के लिए जाना जाता है। लेकिन अब वहां के बच्चे खेलों में भी नाम कमा रहे हैं। भारती निकेतन शिक्षण संस्थान की यह उपलब्धि उस बदलाव का संकेत है, जहां कस्बाई इलाकों के स्कूल भी खेलों में बड़े शहरों के स्कूलों को टक्कर दे रहे हैं।

स्थानीय खेल प्रेमियों का मानना है कि इस तरह की जीतें छोटे शहरों के बच्चों के लिए प्रेरणा का काम करती हैं। जब अपने ही कस्बे का कोई लड़का राज्य चैंपियन बनता है, तो सैकड़ों बच्चे अखाड़े की ओर खिंचते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

प्रश्न: 70वीं राज्य स्तरीय स्कूली खेलकूद प्रतियोगिता में कुश्ती के मुकाबले कहां हुए? उत्तर: मुकाबले भरतपुर के बृजनगर स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय प्रांगण में आयोजित किए गए।

प्रश्न: श्रीडूंगरगढ़ के कितने पहलवानों ने पदक जीते और कौन-कौन? उत्तर: तीन पहलवानों ने पदक जीते — हरीश सियाग (स्वर्ण, 45 किग्रा ग्रीको-रोमन, 17 वर्ष वर्ग), राजवीर कूकणा (रजत, 50 किग्रा) और अभिजीत नाई (कांस्य, 55 किग्रा, 19 वर्ष वर्ग)।

प्रश्न: इन खिलाड़ियों को प्रशिक्षण कौन देता है? उत्तर: भारती निकेतन के कुश्ती प्रशिक्षक सिकंदर सिंह मुख्य कोच हैं, जबकि स्पोर्ट्स एचओडी और एनआईएस जूडो कोच नितिन सिंह भी प्रशिक्षण व्यवस्था में जुड़े हैं।

प्रश्न: राज्य स्तर पर पदक जीतने के बाद आगे क्या अवसर मिलते हैं? उत्तर: खेल प्रमाणपत्र, राष्ट्रीय स्कूली खेलों में चयन का मौका, सरकारी नौकरियों में खेल कोटा और उच्च शिक्षा में प्रवेश में लाभ।

श्रीडूंगरगढ़ के इन युवा पहलवानों को राज न्यूज़ की शुभकामनाएं — राष्ट्रीय मंच पर भी नाम रोशन करें!

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