श्रीडूंगरगढ़ में पेयजल संकट: वार्ड-40 में मीठे पानी के लिए लगीं लंबी कतारें, 2000 TDS वाला खारा पानी पीने को मजबूर
सुबह होते ही घर की औरतें खाली घड़े-बर्तन उठाकर निकल पड़ती हैं। मंज़िल एक ही है — मोहल्ले की पानी की टंकी। टंकी के सामने लंबी कतार लगी होती है, और नंबर आने पर बमुश्किल कुछ बर्तन भर पाते हैं। ये तस्वीर किसी दूर-दराज़ के रेगिस्तानी गांव की नहीं, बल्कि बीकानेर जिले के श्रीडूंगरगढ़ शहर के वार्ड-40 की है, जहां पेयजल संकट इन दिनों गहराता जा रहा है।
स्थानीय मीडिया की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वार्ड में मीठे पानी की सप्लाई लगातार बाधित है। मोहल्ले के होली धोरा क्षेत्र में बनी पानी की टंकी पर जब मीठे पानी की सप्लाई आती है, तो प्रतिदिन यहां पानी के लिए लंबी कतारें लग जाती हैं। वार्डवासियों का कहना है कि वे अपने ही शहर में परायापन महसूस कर रहे हैं, क्योंकि पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए भी उन्हें रोज़ संघर्ष करना पड़ रहा है।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, श्रीडूंगरगढ़ के वार्ड-40 में लंबे समय से पेयजल सप्लाई सुचारू नहीं आ रही है। मोहल्ले में होली धोरा पर बनी पानी की टंकी में हनुमान धोरा का पानी पहुंचता है। इसी पानी को लेने के लिए मोहल्ले में बर्तन लेकर महिलाओं की कतारें लगती हैं। समस्या यह है कि पानी कम आता है और घरों तक नहीं पहुंच पाता। होली धोरा से मिलने वाली सप्लाई शारदा देवी, अंतराम नाई, मूलजी सुथार, धोलिया रोड, पत्रकार सप्लाई, रोशन बैंड, दधीमाता मंदिर, राजू पान पैलेस, लोकेश माली और आशु नाई जैसी कई सप्लाइयों के माध्यम से पानी देने की व्यवस्था है, लेकिन पानी नेचर पार्क और हनुमान धोरा का मिलाकर दिया जा रहा है — जो पीने लायक नहीं है।
वार्डवासियों ने पालिका चुनावों के दौरान भी पेयजल समस्या के समाधान की मांग की थी, लेकिन समाधान न निकलने पर अब वे संघर्ष की नई रणनीति बना रहे हैं।
पार्षद जीतेंद्र स्वामी का आरोप: 2000 TDS वाला पानी पीने को मजबूर
वार्ड पार्षद जीतेंद्र स्वामी ने बताया कि वार्ड में लंबे समय से पानी की सप्लाई सुचारू नहीं आ रही है। समस्या के समाधान के लिए नैचर पार्क में ट्यूबवेल का निर्माण करवाया गया, लेकिन उसका पानी 2 हजार टीडीएस का इतना खारा है कि मुंह में रखना भी संभव नहीं है।
स्वामी का आरोप है कि हनुमान धोरा से पानी की सप्लाई आती है, लेकिन उसे राजनीतिक कारणों से रास्ते में ही रोका जा रहा है। उन्होंने बताया कि वे विकास मंच के बैनर तले जलदाय विभाग के अधिकारियों से मुलाकात कर सप्लाई सुचारू करवाने की मांग करेंगे।
2000 TDS का मतलब क्या है? कितना TDS वाला पानी पीना सुरक्षित?
पानी में टीडीएस (टोटल डिसॉल्व्ड सॉलिड्स) घुले हुए खनिजों, लवणों और अन्य पदार्थों की मात्रा बताता है। इसे मिलीग्राम प्रति लीटर (mg/L) में मापा जाता है। भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के IS 10500 मानदंड के मुताबिक पेयजल में टीडीएस का अधिकतम स्वीकार्य स्तर 500 mg/L है, जबकि वैकल्पिक स्रोत न होने की स्थिति में इसकी अधिकतम अनुमेय सीमा 2000 mg/L तय की गई है। यानी 2000 TDS वाला पानी पीने योग्य की सबसे निचली सीमा पर है।
| टीडीएस स्तर (mg/L) | पानी की गुणवत्ता | स्थिति |
|---|---|---|
| 50–300 | उत्कृष्ट | पीने के लिए सबसे उपयुक्त |
| 300–600 | अच्छा | सामान्य रूप से पीने योग्य |
| 600–900 | सामान्य | स्वाद में बदलाव महसूस हो सकता है |
| 900–1200 | खराब | स्वाद खारा, सेहत पर असर संभव |
| 1200–2000 | बहुत खराब | केवल अंतिम विकल्प के रूप में |
| 2000 से अधिक | अस्वास्थ्यकर | पीने योग्य नहीं |
लंबे समय तक इतना खारा पानी पीने से गुर्दे की समस्या, उच्च रक्तचाप और पाचन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं।
राजस्थान में पेयजल संकट की बड़ी तस्वीर
श्रीडूंगरगढ़ का यह मामला राजस्थान के पेयजल संकट की एक झलक भर है। पश्चिमी राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में भूजल स्तर लगातार नीचे जा रहा है और बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर व नागौर जैसे जिलों में भूजल प्राकृतिक रूप से खारा है। मानसून कमजोर होने वाले वर्षों में स्थिति और गंभीर हो जाती है।
जलदाय विभाग (PHED) की ओर से इन इलाकों में मीठे पानी की सप्लाई के लिए पाइपलाइन नेटवर्क बिछाया गया है, लेकिन बढ़ती आबादी और पुरानी पाइपलाइनों में लीकेज के कारण सप्लाई अक्सर बाधित होती है।
पेयजल शिकायत कहां दर्ज करें?
अगर आपके मोहल्ले में भी पानी की सप्लाई बाधित है, तो राजस्थान संपर्क 181 (टोल-फ्री) पर फोन करके या पोर्टल से ऑनलाइन शिकायत दर्ज करें और रेफरेंस नंबर नोट कर लें। अपने क्षेत्र के जलदाय कार्यालय में लिखित शिकायत भी दें। पानी का टीडीएस जानने के लिए बाजार से टीडीएस मीटर लें या जलदाय विभाग की प्रयोगशाला में नमूना जांच कराएं — रिपोर्ट शिकायत के साथ लगाएं। मोहल्ला समिति या वार्ड के माध्यम से सामूहिक ज्ञापन का ज्यादा असर होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: श्रीडूंगरगढ़ के वार्ड-40 में पानी की समस्या क्या है?
उत्तर: वार्ड-40 में लंबे समय से मीठे पानी की सप्लाई सुचारू नहीं आ रही है। होली धोरा टंकी पर जब पानी आता है तो लंबी कतारें लगती हैं, और नैचर पार्क के ट्यूबवेल का पानी 2000 TDS का खारा है, जिसे पीना मुश्किल है।
प्रश्न 2: 2000 TDS वाला पानी पीना कितना सुरक्षित है?
उत्तर: BIS मानकों के अनुसार टीडीएस 500 mg/L तक स्वीकार्य है और 2000 mg/L अधिकतम अनुमेय सीमा है — यानी यह पीने योग्य की सबसे निचली सीमा है। लंबे समय तक इतना खारा पानी पीने से किडनी, ब्लड प्रेशर और पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
प्रश्न 3: पेयजल सप्लाई की शिकायत कहां दर्ज करें?
उत्तर: राजस्थान संपर्क पोर्टल के टोल-फ्री नंबर 181 पर शिकायत दर्ज करें, या अपने क्षेत्र के जलदाय विभाग (PHED) कार्यालय में लिखित शिकायत दें।
प्रश्न 4: घर पर पानी का टीडीएस कैसे जांचें?
उत्तर: बाजार में टीडीएस मीटर आसानी से मिल जाते हैं। इसके अलावा जलदाय विभाग की प्रयोगशाला या प्रमाणित पानी परीक्षण लैब में नमूना देकर जांच कराई जा सकती है।
श्रीडूंगरगढ़ का यह मामला एक बार फिर याद दिलाता है कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा के लिए आज भी कितने लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है। जलदाय विभाग और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है कि समय पर इस संकट का समाधान निकालें, ताकि वार्ड-40 के लोगों को रोज़ पानी की कतारों में खड़े होने की मजबूरी से छुटकारा मिल सके। राज न्यूज़ इस मामले की आगे की गतिविधियों पर भी नजर बनाए रखेगा।