अक्सर हम तबीयत खराब होने पर डॉक्टर के पास दौड़ पड़ते हैं, लेकिन मन के अंदर चल रही उथल-पुथल को नजरअंदाज कर देते हैं। तनाव, चिंता, उदासी — ये सब बिना बुलाए घर कर लेते हैं, और हम शर्म या डर के मारे किसी को बताते तक नहीं। इसी चुप्पी को तोड़ने के लिए राजस्थान सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश में 10 सितंबर से 10 अक्टूबर तक मानसिक स्वास्थ्य माह मनाया जा रहा है, और 10 अक्टूबर को प्रदेशव्यापी डिजिटल शपथ अभियान होगा। उस दिन आम लोग अपने मोबाइल फोन से ही डिजिटल शपथ लेकर इस मुहिम से जुड़ सकेंगे।
आखिर यह शपथ अभियान है क्या?
अभियान का मकसद बहुत सीधा है — मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में फैली झिझक और भ्रम को खत्म करना। मानसिक स्वास्थ्य माह के दौरान स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी दफ्तरों और सामाजिक संस्थाओं में जागरूकता कार्यक्रम हो रहे हैं। रैलियां निकाली जा रही हैं, जागरूकता सभाएं हो रही हैं, और लोगों को समझाया जा रहा है कि मानसिक परेशानी कोई कमजोरी नहीं, बल्कि इलाज योग्य स्थिति है।
अभियान का चरम बिंदु 10 अक्टूबर को होगा, जब पूरे प्रदेश में एक साथ मानसिक स्वास्थ्य की डिजिटल शपथ दिलाई जाएगी। दिलचस्प बात यह है कि इस शपथ के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं — घर बैठे, मोबाइल फोन से कुछ ही मिनटों में इसे लिया जा सकता है। शपथ लेने के बाद एक प्रमाण-पत्र भी डाउनलोड किया जा सकेगा, यानी आपकी भागीदारी का एक छोटा सा दस्तावेज भी आपके पास रहेगा।
मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर का संदेश: “मन का ख्याल भी शरीर जैसा ही जरूरी”
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर प्रदेशवासियों से सीधी अपील की है। उनका कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य हमारे जीवन का उतना ही अहम हिस्सा है, जितना शारीरिक स्वास्थ्य। तनाव, चिंता या किसी भी तरह की परेशानी के समय अपने परिवार और दोस्तों से खुलकर बात करना सबसे पहला और सबसे असरदार कदम है।
मंत्री ने इस बात पर खास जोर दिया कि एक-दूसरे को समझना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेने में कोई शर्म नहीं होनी चाहिए। उनकी अपील है कि 10 अक्टूबर को ज्यादा से ज्यादा लोग मानसिक स्वास्थ्य की डिजिटल शपथ लें और अपने आस-पड़ोस के लोगों को भी इस अभियान से जोड़ें। यही वह भावना है जिससे यह अभियान सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम न रहकर एक जन आंदोलन बन सकता है।
प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने बताया शपथ लेने का पूरा तरीका
प्रमुख शासन सचिव (चिकित्सा एवं स्वास्थ्य) गायत्री राठौड़ ने साफ कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता सिर्फ एक दिन का काम नहीं है — इसके लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने स्कूल-कॉलेजों, सरकारी विभागों, सामाजिक संस्थाओं और आम नागरिकों — सभी की भागीदारी को इस अभियान की असली ताकत बताया।
शपथ लेना बेहद आसान बनाया गया है। प्रक्रिया इस तरह है:
- अपने मोबाइल फोन में QR कोड स्कैन करें या सीधे डिजिटल लिंक ihmslite.rajasthan.gov.in/manas पर जाएं।
- वहां मानसिक स्वास्थ्य शपथ के पेज पर अपना विवरण भरें।
- शपथ पढ़कर उसे पूरा करें — पूरी प्रक्रिया में बस कुछ मिनट लगेंगे।
- अंत में अपना प्रमाण-पत्र डाउनलोड कर लें।
राठौड़ ने कहा कि विद्यार्थियों और युवाओं के साथ-साथ सरकारी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी और आम नागरिक — हर कोई डिजिटल शपथ लेकर जुड़ सकता है। उन्होंने मीडिया संस्थानों से भी अपील की कि अखबार, टीवी, रेडियो, समाचार पोर्टल और सोशल मीडिया के जरिए मानसिक स्वास्थ्य शपथ के डिजिटल लिंक को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद करें।
स्कूल-कॉलेजों में रैली और जागरूकता सभाएं
मानसिक स्वास्थ्य माह के दौरान प्रदेश के स्कूलों और कॉलेजों में विशेष कार्यक्रम चल रहे हैं। रैलियां निकाली जा रही हैं और जागरूकता सभाओं का आयोजन हो रहा है। इसका मकसद युवा पीढ़ी को यह समझाना है कि परीक्षा का दबाव, भविष्य की चिंता या रिश्तों की उलझन — इन सबका बोझ अकेले ढोने की जरूरत नहीं।
विद्यार्थियों को बताया जा रहा है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर खुलकर बात करना जरूरी है। अगर कोई दोस्त या सहपाठी तनाव में दिखे, तो उसकी बात सुनना और जरूरत के समय उसका साथ देना भी हमारी जिम्मेदारी है। यह संदेश खास तौर पर कोटा जैसे शहरों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं पर मानसिक दबाव की खबरें अक्सर सामने आती रहती हैं।
मानसिक परेशानी के संकेत और मदद के रास्ते
| संकेत | क्या करें |
|---|---|
| लगातार दो हफ्तों से उदासी या निराशा का भाव | परिवार या भरोसेमंद व्यक्ति से बात करें |
| नींद का बार-बार टूटना या बहुत ज्यादा सोना | दिनचर्या सुधारें, डॉक्टर से सलाह लें |
| भूख में भारी बदलाव | शारीरिक जांच के साथ मन की स्थिति पर भी ध्यान दें |
| काम या पढ़ाई में ध्यान न लगना | ब्रेक लें, जरूरत हो तो काउंसलर से मिलें |
| खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आना | तुरंत 14416 पर कॉल करें — यह आपात स्थिति है |
राजस्थान में मानसिक स्वास्थ्य सहायता के लिए Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 पर 24×7 मुफ्त परामर्श उपलब्ध है। राज्य सरकार ने हर जिले में मानसिक स्वास्थ्य सेल और जयपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की योजना के साथ राज-ममता कार्यक्रम की भी घोषणा की है, ताकि मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं हर किसी की पहुंच में आ सकें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
मानसिक स्वास्थ्य शपथ क्या है और इसे कौन ले सकता है?
यह राजस्थान सरकार के मानसिक स्वास्थ्य माह का हिस्सा है — एक डिजिटल संकल्प जिसके जरिए आप मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता फैलाने और खुले मन से इस विषय पर बात करने की शपथ लेते हैं। 10 अक्टूबर को चलने वाले प्रदेशव्यापी अभियान में विद्यार्थी, युवा, सरकारी कर्मचारी और आम नागरिक — कोई भी जुड़ सकता है।
डिजिटल शपथ कैसे ली जाए?
अपने मोबाइल से QR कोड स्कैन करें या ihmslite.rajasthan.gov.in/manas लिंक पर जाएं, विवरण भरें, शपथ पढ़ें और प्रमाण-पत्र डाउनलोड कर लें। पूरी प्रक्रिया में सिर्फ कुछ मिनट लगते हैं और कहीं जाने की जरूरत नहीं।
अगर मैं या मेरा कोई अपना मानसिक परेशानी से गुजर रहा है तो तुरंत क्या करूं?
सबसे पहले किसी भरोसेमंद व्यक्ति से खुलकर बात करें। पेशेवर मदद के लिए Tele-MANAS हेल्पलाइन 14416 पर 24 घंटे मुफ्त परामर्श मिलता है। अगर खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आ रहे हैं तो इसे आपात स्थिति मानें और तुरंत मदद लें — संकोच न करें।
मानसिक स्वास्थ्य माह कब तक चलेगा और इसका मुख्य आयोजन कब है?
मानसिक स्वास्थ्य माह 10 सितंबर से 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। सबसे बड़ा आयोजन 10 अक्टूबर को प्रदेशभर में होने वाला डिजिटल शपथ अभियान है। इस दौरान स्कूल-कॉलेजों में रैली और जागरूकता सभाएं भी हो रही हैं।
निष्कर्ष: चुप्पी तोड़िए, शपथ लीजिए
मानसिक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी दुश्मन चुप्पी है। राजस्थान सरकार का यह डिजिटल शपथ अभियान हर नागरिक को मौका देता है कि वह अपने फोन से कुछ मिनट निकालकर इस बदलाव का हिस्सा बने। 10 अक्टूबर को शपथ लें — और अपने आसपास किसी एक व्यक्ति को जरूर बताएं: मन की बात करना कमजोरी नहीं, समझदारी है।