शारदीय नवरात्रि अपने अंतिम पड़ाव पर है और घर-घर में एक ही सवाल गूंज रहा है — कन्या पूजन आखिर 19 अक्टूबर को करें या 20 अक्टूबर को? अगर आप भी इसी उलझन में हैं तो सीधा जवाब पहले जान लीजिए: पंचांग के हिसाब से 19 अक्टूबर, सोमवार मुख्य दिन है, क्योंकि इसी दिन महाष्टमी और महानवमी दोनों की तिथियां पड़ रही हैं। लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है — कुछ परंपराओं में 20 अक्टूबर को भी पूजन होगा। इसलिए फैसला लेने से पहले तिथियों का पूरा गणित समझना जरूरी है।
पहले पूरा गणित समझ लीजिए — अष्टमी और नवमी कब से कब तक
इस बार तिथियों का खेल ही कंफ्यूजन की जड़ है। अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर की सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होकर 19 अक्टूबर की सुबह करीब 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी। इसके खत्म होते ही नवमी तिथि शुरू हो जाएगी, जो 20 अक्टूबर की दोपहर करीब 12 बजकर 50 मिनट तक चलेगी।
| तिथि | शुरू | समाप्त |
|---|---|---|
| महाष्टमी | 18 अक्टूबर, सुबह 8:27 | 19 अक्टूबर, सुबह 10:51 |
| महानवमी | 19 अक्टूबर, सुबह 10:51 | 20 अक्टूबर, दोपहर 12:50 |
यानी 19 अक्टूबर की सुबह एक ही दिन में अष्टमी का समापन और नवमी का आगमन हो रहा है। इसी वजह से उत्तर भारत के ज्यादातर पंचांगों में महाष्टमी और महानवमी दोनों 19 अक्टूबर को मानी जा रही हैं। 19 अक्टूबर को मां दुर्गा के नौवें स्वरूप देवी सिद्धिदात्री की पूजा का भी विधान है।
तो फिर 20 अक्टूबर वाला विकल्प कहां से आया?
यहां उदया तिथि का सिद्धांत काम करता है। 20 अक्टूबर, मंगलवार को सूर्योदय के समय नवमी तिथि मौजूद रहेगी। उदया तिथि को महत्व देने वाली परंपराओं में व्रत-त्योहार सूर्योदय वाली तिथि के हिसाब से मनाए जाते हैं, इसलिए कई परिवारों और क्षेत्रों में महानवमी का पूजन, हवन और व्रत का पारण 20 अक्टूबर को होगा।
सीधे शब्दों में कहें तो — अगर आपके घर में हमेशा अष्टमी पर कन्या पूजन होता आया है, तो 19 अक्टूबर की सुबह 10:51 से पहले पूजन कर लें। अगर नवमी की परंपरा है, तो 19 अक्टूबर को नवमी तिथि लगने के बाद या 20 अक्टूबर को उदया तिथि के अनुसार पूजन कर सकते हैं। अपने कुल की परंपरा और स्थानीय पंचांग को ही अंतिम मानें, क्योंकि शहर के हिसाब से सूर्योदय और मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है। नवरात्रि से जुड़ी हर परंपरा में स्थानीय पुरोहित की सलाह सबसे भरोसेमंद मानी जाती है।
शुभ मुहूर्त — किस दिन कब करें पूजन
कन्या पूजन 2026 के लिए पंचांग में बताए गए शुभ समय इस प्रकार हैं। सही मुहूर्त में पूजन करने से अनुष्ठान का पूरा फल मिलता है, ऐसा माना जाता है।
19 अक्टूबर (सोमवार) के मुहूर्त:
- सुबह 09:15 से 10:40 तक — शुभ-उत्तम चौघड़िया मुहूर्त
- सुबह 11:48 से दोपहर 12:34 तक — अभिजीत मुहूर्त
- दोपहर 01:37 से 03:03 तक — शुभ मुहूर्त
- शाम 04:22 से 05:48 तक — अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त
20 अक्टूबर (मंगलवार) को नवमी पूजन करने वालों के लिए:
- सुबह 09:15 से 10:40 तक — चर-सामान्य मुहूर्त
- सुबह 10:40 से दोपहर 12:06 तक — लाभ-उन्नति मुहूर्त
- दोपहर 12:06 से 01:31 तक — अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त
- दोपहर 11:48 से 12:34 तक — अभिजीत मुहूर्त
ध्यान रहे, ये समय सामान्य पंचांग के अनुसार हैं। शुभ मुहूर्त की सटीक जानकारी के लिए अपने शहर के पंचांग या पुरोहित से पुष्टि जरूर कर लें।
कन्या पूजन की विधि — स्टेप बाय स्टेप
- सुबह जल्दी स्नान करके साफ कपड़े पहनें और पूजा का स्थान अच्छी तरह साफ कर लें।
- सबसे पहले मां दुर्गा की पूजा करें, घी का दीपक जलाएं और पुष्प अर्पित करें।
- दो से दस साल तक की कन्याओं को आदरपूर्वक घर बुलाकर साफ आसन पर बैठाएं। एक बालक को भैरव स्वरूप मानकर साथ बैठाने की भी परंपरा है।
- कन्याओं के चरण धोएं, माथे पर रोली-कुमकुम का तिलक लगाएं और हाथ में कलावा बांधें।
- हलवा, पूरी और काले चने का सात्विक भोजन प्रेम से परोसें।
- भोजन के बाद अपनी सामर्थ्य के अनुसार फल, वस्त्र, दक्षिणा या उपयोगी उपहार भेंट करें।
- कन्याओं के चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लें और उन्हें सम्मानपूर्वक विदा करें।
पूजा की सामग्री — एक दिन पहले ही तैयार रखें
पूजन से पहले ये सामग्री जुटा लें ताकि आखिरी समय में भागदौड़ न हो। कन्या पूजन 2026 की तैयारी एक दिन पहले कर लेने से पूजन वाले दिन पूरा ध्यान भक्ति में लग सकेगा: चरण धोने के लिए थाली और साफ जल, साफ तौलिया, महावर या अलता, कुमकुम, अक्षत, फूल और फूलों की माला, लाल चुनरी, घी का दीपक, धूप-अगरबत्ती, हलवा-पूरी-चने के लिए सूजी, आटा, चना और घी, फल, दक्षिणा के लिए लिफाफे और उपहार।
नौ कन्याओं और कन्या भोज का क्या है महत्व?
मान्यता है कि छोटी कन्याओं में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों — शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री — का वास होता है। इसलिए नौ कन्याओं के पूजन की परंपरा है, हालांकि संख्या श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार कम-ज्यादा हो सकती है। कन्या भोज में हलवा मिठास और शुभता का, पूरी पूर्णता का और काले चने शक्ति व धैर्य का प्रतीक माने जाते हैं।
इन बातों का रखें खास ध्यान
- तारीख का फैसला अपनी कुल परंपरा और स्थानीय पंचांग देखकर करें, पड़ोसी के हिसाब से नहीं।
- अष्टमी पर पूजन कर रहे हैं तो सुबह 10:51 बजे से पहले का समय न चूकें।
- कन्याओं को बुलाते समय उनकी सुविधा का ध्यान रखें — दोपहर की तेज धूप में न बुलाएं।
- भोजन पूरी स्वच्छता से बनाएं; बच्चों के स्वास्थ्य से कोई समझौता नहीं।
- उपहार सामर्थ्य के अनुसार दें — दिखावा इस पूजा की भावना के खिलाफ है।
- पूजन के बाद बचा भोजन जरूरतमंदों में बांटना भी शुभ माना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: कन्या पूजन 2026 में 19 अक्टूबर सही है या 20 अक्टूबर?
जवाब: ज्यादातर पंचांगों के अनुसार 19 अक्टूबर मुख्य दिन है क्योंकि इसी दिन महाष्टमी और महानवमी दोनों पड़ रही हैं। उदया तिथि मानने वाले परिवार 20 अक्टूबर को भी पूजन कर सकते हैं।
सवाल: अष्टमी तिथि कब खत्म हो रही है?
जवाब: अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर की सुबह करीब 10:51 बजे समाप्त होगी, इसके बाद नवमी तिथि शुरू हो जाएगी।
सवाल: नवमी पर हवन और व्रत का पारण कब करें?
जवाब: नवमी तिथि 19 अक्टूबर सुबह 10:51 से 20 अक्टूबर दोपहर 12:50 तक है। हवन और पारण अपनी परंपरा के अनुसार 19 या 20 अक्टूबर को करें।
सवाल: कन्या पूजन में कितनी कन्याओं को बुलाना चाहिए?
जवाब: परंपरा के अनुसार नौ कन्याएं नवदुर्गा के नौ स्वरूपों का प्रतीक हैं, लेकिन संख्या आपकी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार हो सकती है।