झालाना लेपर्ड सफारी: पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने वन विभाग मुखिया के साथ किया जंगल भ्रमण — पर्यटन सीजन से पहले बड़ा संदेश

जयपुर के बीचों-बीच बसे झालाना के जंगलों में शुक्रवार की सुबह कुछ अलग नजारा था। राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे खुद जीप में बैठकर झालाना लेपर्ड सफारी के जंगल में उतरीं — और उनके साथ थे वन विभाग के सबसे बड़े अधिकारी, हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स (HoFF) अरिजीत बनर्जी। दीपावली का पर्यटन सीजन शुरू होने से ठीक पहले पूर्व सीएम और वन विभाग के मुखिया का एक साथ झालाना आना कोई साधारण सैर-सपाटा नहीं माना जा रहा — इसे वन्यजीव पर्यटन को लेकर एक बड़े संदेश की तरह देखा जा रहा है।

झालाना लेपर्ड सफारी वैसे भी इन दिनों सुर्खियों में है। अक्टूबर का महीना राजस्थान में पर्यटन का पीक सीजन माना जाता है। 1 अक्टूबर से रणथंभौर के दरवाजे खुल चुके हैं, नाहरगढ़ में टाइगर-लायन सफारी फिर शुरू हो गई है, और अक्टूबर के पहले हफ्ते में नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क से 72वें वन्यजीव सप्ताह-2026 का आगाज भी हुआ था — इस बार का फोकस तेंदुआ संरक्षण पर था। ऐसे में शुक्रवार सुबह झालाना में हुआ यह भ्रमण वन्यजीव पर्यटन की दिशा में एक और अहम कड़ी जुड़ने जैसा है।

शुक्रवार सुबह झालाना में क्या-क्या हुआ

शुक्रवार सुबह वसुंधरा राजे झालाना लेपर्ड सफारी पहुंचीं, जहां उन्होंने जंगल का भ्रमण किया। इस दौरान उनके साथ वन विभाग के मुखिया एवं हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स अरिजीत बनर्जी मौजूद रहे। भ्रमण के समय डीएफओ डॉ. आशीष व्यास, एसीएफ जितेंद्र सिंह, रेंजर विजयपाल सहित झालाना लेपर्ड सफारी के वनरक्षक और अन्य वनकर्मी भी साथ थे। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी ने इस भ्रमण को खास बना दिया। पूर्व सीएम ने जंगल के प्राकृतिक वातावरण का जायजा लिया और वन्यजीव पर्यटन से जुड़े क्षेत्र का भ्रमण किया।

झालाना से वसुंधरा राजे का पुराना नाता

झालाना और वसुंधरा राजे का रिश्ता नया नहीं है — यह दो दशक पुराना है। वर्ष 2006 में उन्होंने झालाना की शिकार औदी की पाल पर बरगद का पौधा लगाया था। इसके बाद उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान ही झालाना लेपर्ड सफारी की शुरुआत हुई। झालाना लेपर्ड रिजर्व की स्थापना 2016 में हुई थी। HoFF अरिजीत बनर्जी खुद 2015 में झालाना आए थे, जब उन्होंने पानी पीते एक तेंदुए को देखा था — उसी दौरे से झालाना को रिजर्व बनाने के विचार को बल मिला था। आज झालाना जयपुर को देश-विदेश में वन्यजीव पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

झालाना लेपर्ड सफारी: जानिए जरूरी जानकारी

झालाना राजस्थान का वह जंगल है जहां तेंदुआ देखने की संभावना सबसे ज्यादा मानी जाती है। शहर के बीचोबीच स्थित होने के कारण यहां पर्यटकों की पहुंच आसान है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक झालाना में 20 से 25 तेंदुओं के होने का अनुमान है। वन विभाग यहां सुबह और शाम दोनों शिफ्ट में सफारी संचालित करता है। झालाना के अलावा जयपुर में आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व भी है, जिसे 2023 में रिजर्व घोषित किया गया था।

दीपावली सीजन में वन्यजीव पर्यटन का पूरा नक्शा

अक्टूबर-नवंबर का समय राजस्थान के जंगलों के लिए सबसे व्यस्त माना जाता है। रणथंभौर टाइगर रिजर्व में 1 अक्टूबर से नया सफारी सीजन शुरू हो चुका है। नाहरगढ़ बायोलॉजिकल पार्क में टाइगर-लायन सफारी चार हफ्ते बाद फिर शुरू हो गई है। वन विभाग ने रणथंभौर से कूनो और माधव तक वाइल्डलाइफ टूरिज्म सर्किट बनाने की दिशा में भी काम तेज कर दिया है। झालाना का महत्व इसी कड़ी में बढ़ जाता है — रणथंभौर या सरिस्का जाने में पूरा दिन लगता है, जबकि झालाना जयपुर शहर के अंदर ही है।

झालाना सफारी की योजना बना रहे हैं? ये बातें जान लें

झालाना लेपर्ड सफारी की बुकिंग वन विभाग के माध्यम से होती है। सफारी सुबह और शाम दोनों शिफ्ट में चलती है — तेंदुआ देखने के लिए सुबह की शिफ्ट को बेहतर माना जाता है। सर्दियों में सुबह की ठंड के लिए हल्के गर्म कपड़े साथ रखें। सफारी के दौरान तेज आवाज न करें और गाइड के निर्देशों का पालन करें। कैमरा जरूर ले जाएं, लेकिन फ्लैश का इस्तेमाल बिल्कुल न करें। दीपावली की छुट्टियों में भीड़ बढ़ने की संभावना है, इसलिए बुकिंग पहले से करा लेना बेहतर रहेगा।

HoFF अरिजीत बनर्जी और झालाना का संरक्षण मॉडल

झालाना की कहानी सिर्फ पर्यटन की नहीं, संरक्षण की भी है। 1991 बैच के आईएफएस अधिकारी बनर्जी ने 2024 में हेड ऑफ फॉरेस्ट फोर्स का पदभार संभाला था। उनके कार्यकाल में वन क्षेत्रों में अवैध खनन के खिलाफ मुहिम तेज हुई और पौधों की नर्सरियों के विकास पर खास ध्यान दिया गया। झालाना मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मानव गतिविधि को सीमित करके तेंदुओं और स्थानीय लोगों के बीच टकराव को कम किया गया। जंगल में नए ट्रैक, पानी के पॉइंट और बाड़ लगाई गई, जिससे वन्यजीवों को सुरक्षित आवास मिला। आमागढ़ लेपर्ड रिजर्व भी इसी सोच का विस्तार है — कभी अतिक्रमण से घिरा इलाका आज वन्यजीवों का ठिकाना बन चुका है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

  1. झालाना लेपर्ड सफारी कहां स्थित है? — जयपुर शहर के बीचों-बीच, मालवीय नगर के समीप। स्थापना 2016 में हुई थी।
  2. वसुंधरा राजे 16 अक्टूबर को झालाना क्यों गईं? — पूर्व मुख्यमंत्री ने शुक्रवार सुबह झालाना लेपर्ड सफारी में जंगल भ्रमण किया; साथ में वन विभाग मुखिया अरिजीत बनर्जी और वरिष्ठ अधिकारी थे। झालाना से उनका पुराना नाता है — 2006 में उन्होंने यहां बरगद का पौधा लगाया था।
  3. झालाना सफारी की बुकिंग कैसे करें? — वन विभाग, राजस्थान के माध्यम से; सफारी सुबह और शाम दोनों शिफ्ट में चलती है।
  4. झालाना में कितने तेंदुए हैं? — हाल की रिपोर्टों के मुताबिक 20 से 25 तेंदुओं का अनुमान है।

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स्रोत: Dainik Navajyoti — पूर्व सीएम वसुंधरा राजे ने लिया झालाना में सफारी का आनंद

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