गुरुवार की सुबह जयपुर के गांधी नगर रेलवे स्टेशन पर कुछ अलग ही नजारा था। देश की सबसे शाही ट्रेनों में गिनी जाने वाली पैलेस ऑन व्हील्स जयपुर पहुंची, और उसके डिब्बों से 13 अलग-अलग देशों के 57 पर्यटक उतरे। किसी के हाथ में कैमरा था, कोई राजस्थानी अंदाज देखकर मुस्कुरा रहा था, और स्टेशन पर मौजूद हर शख्स के लिए ये किसी उत्सव से कम नहीं था। दैनिक नवज्योति की रिपोर्ट के अनुसार ट्रेन गुरुवार सुबह स्टेशन पहुंची, जहां पर्यटकों का स्वागत किया गया।
पर्यटन के लिहाज से ये खबर सिर्फ एक ट्रेन के आने की नहीं है। अक्टूबर के साथ राजस्थान का टूरिस्ट सीजन रफ्तार पकड़ता है, और विदेशी पर्यटकों से भरी शाही ट्रेन का सीजन की शुरुआत में ही जयपुर पहुंचना इस बात का संकेत है कि इस बार का सीजन दमदार रहने वाला है।
13 देशों के मेहमान — कौन कहां से आया
इस फेरे में सबसे ज्यादा 17 पर्यटक अमेरिका से आए हैं। भारत के 13 पर्यटक भी इस शाही सफर का हिस्सा हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन से 4-4, कनाडा से 4 और स्विट्जरलैंड से 3 पर्यटक शामिल हैं। पोलैंड, मॉरीशस और चेक गणराज्य से 2-2, जबकि फ्रांस, इटली, ग्रीस और अल्बानिया से 1-1 पर्यटक जयपुर पहुंचे हैं।
| देश | पर्यटकों की संख्या |
|---|---|
| अमेरिका | 17 |
| भारत | 13 |
| ऑस्ट्रेलिया | 4 |
| ब्रिटेन | 4 |
| कनाडा | 4 |
| स्विट्जरलैंड | 3 |
| पोलैंड | 2 |
| मॉरीशस | 2 |
| चेक गणराज्य | 2 |
| फ्रांस | 1 |
| इटली | 1 |
| ग्रीस | 1 |
| अल्बानिया | 1 |
कुल मिलाकर 13 देशों के 57 पर्यटक इस फेरे में शाही ट्रेन का सफर कर रहे हैं। अमेरिका से सबसे ज्यादा पर्यटकों का आना बताता है कि भारतीय शाही विरासत का आकर्षण पश्चिमी देशों में कितना गहरा है।
पैलेस ऑन व्हील्स जयपुर आगमन — गांधी नगर स्टेशन पर सुबह का नजारा
ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर लगते ही पर्यटकों का स्वागत किया गया। इसके बाद सभी मेहमानों को बसों के जरिए शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों की सैर के लिए ले जाया गया। इस दौरान पर्यटक आमेर महल और जंतर-मंतर समेत जयपुर के अन्य ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण करेंगे।
पैलेस ऑन व्हील्स का जयपुर ठहराव इस शाही सफर का सबसे अहम पड़ाव माना जाता है। गुलाबी नगरी में पर्यटक एक ही दिन में राजपूताना शौर्य की कहानी, खगोल विज्ञान की विश्व धरोहर और शाही रहन-सहन की झलक देख लेते हैं। आमेर महल की विशाल प्राचीरें, शीश महल की कारीगरी और जंतर-मंतर की विशाल यंत्र-रचनाएं — यही वो तस्वीरें हैं जो विदेशी मेहमान अपने साथ लेकर जाते हैं और दुनिया भर में राजस्थान का प्रचार करती हैं।
8 दिन का शाही सफर — कहां-कहां जाती है ये ट्रेन
पैलेस ऑन व्हील्स का पूरा सफर 7 रात और 8 दिन का होता है। ट्रेन दिल्ली से रवाना होती है, राजस्थान के शाही शहरों से गुजरती है और आखिर में आगरा होते हुए वापस दिल्ली पहुंचती है।
| ठहराव | खास आकर्षण |
|---|---|
| नई दिल्ली | सफर की शुरुआत |
| जयपुर | आमेर महल, जंतर-मंतर, सिटी पैलेस |
| सवाई माधोपुर | रणथंभौर में टाइगर सफारी |
| चित्तौड़गढ़ | चित्तौड़ किला |
| उदयपुर | पिछोला झील, सिटी पैलेस |
| जैसलमेर | सोनार किला, सम के धोरे |
| जोधपुर | मेहरानगढ़ किला |
| भरतपुर | केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान |
| आगरा | ताजमहल |
| नई दिल्ली | सफर का समापन |
सफर के दौरान मेहमानों को चलती ट्रेन में ही शाही अंदाज का खाना, सांस्कृतिक कार्यक्रम और हर शहर में गाइडेड टूर मिलता है। रणथंभौर की टाइगर सफारी से लेकर जैसलमेर के रेगिस्तान में सांस्कृतिक संध्या तक — हर पड़ाव अपने आप में एक अनुभव है। रणथंभौर से जुड़े वन्यजीव पर्यटन के नए सर्किट की योजना भी इसी क्षेत्र के बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है।
1982 से दौड़ रही शाही ट्रेन — इतनी खास क्यों है
पैलेस ऑन व्हील्स की शुरुआत 1982 में हुई थी। इसे राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) और भारतीय रेल मिलकर संचालित करते हैं। ट्रेन के डिब्बों को पुराने शाही सैलूनों के अंदाज में सजाया गया है — अंदर शाही सुइट, दो रेस्टोरेंट, बार और लाउंज की सुविधा मिलती है।
दुनिया की सबसे आलीशान ट्रेनों की हर सूची में इसका नाम आता है। विदेशी पर्यटकों के बीच ये भारत की शाही विरासत का चलता-फिरता प्रतीक है। एक हफ्ते के इस सफर का किराया लाखों रुपये में होता है, फिर भी हर सीजन में इसके फेरे लगभग भर जाते हैं — यही इस ट्रेन की लोकप्रियता का सबसे बड़ा सबूत है। सितंबर से अप्रैल तक चलने वाले टूरिस्ट सीजन में इसके नियमित फेरे निकलते हैं।
राजस्थान के टूरिज्म सीजन के लिए बड़ा संकेत
अक्टूबर से मार्च राजस्थान का पीक टूरिस्ट सीजन होता है। सीजन की शुरुआत में ही विदेशी पर्यटकों से भरी शाही ट्रेन का जयपुर पहुंचना होटल, गाइड, टैक्सी और हस्तशिल्प कारोबार के लिए अच्छी खबर है। जयपुर, उदयपुर, जोधपुर और जैसलमेर के होटल कारोबारियों की नजरें हर साल इस सीजन पर टिकी होती हैं।
इसी महीने पुष्कर मेले की तैयारियां भी जोरों पर हैं, और सर्दियों में डेजर्ट फेस्टिवल जैसे आयोजन विदेशी सैलानियों को और खींचते हैं। जानकारों का मानना है कि पैलेस ऑन व्हील्स जयपुर ठहराव से शुरुआत ऐसी रही तो इस बार विदेशी पर्यटकों की संख्या पिछले सालों से बेहतर रह सकती है।
पैलेस ऑन व्हील्स जयपुर — घूमने का प्लान बना रहे हैं तो ये जान लें
आमेर महल और जंतर-मंतर घूमने का सबसे अच्छा समय सुबह का है — भीड़ कम होती है और तस्वीरें भी अच्छी आती हैं। आमेर में हाथी सफारी और शाम का लाइट एंड साउंड शो अलग अनुभव देता है, जबकि जंतर-मंतर में दुनिया की सबसे बड़ी पत्थर की वेधशाला देखी जा सकती है। सप्ताहांत की बजाय सप्ताह के शुरुआती दिनों में जाएं तो भीड़ से बचा जा सकता है। टिकट काउंटर पर लंबी लाइन से बचने के लिए ऑनलाइन बुकिंग पहले से कर लेना समझदारी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
पैलेस ऑन व्हील्स क्या है? ये 1982 से चल रही भारत की सबसे प्रसिद्ध लग्जरी टूरिस्ट ट्रेन है, जिसे राजस्थान पर्यटन विकास निगम (RTDC) और भारतीय रेल मिलकर चलाते हैं। इसे दुनिया की सबसे आलीशान ट्रेनों में गिना जाता है।
ये ट्रेन किन शहरों में जाती है? 7 रात-8 दिन के सफर में ट्रेन दिल्ली से चलकर जयपुर, सवाई माधोपुर (रणथंभौर), चित्तौड़गढ़, उदयपुर, जैसलमेर, जोधपुर, भरतपुर और आगरा होते हुए वापस दिल्ली लौटती है।
15 अक्टूबर को जयपुर कितने पर्यटक पहुंचे? गुरुवार सुबह गांधी नगर स्टेशन पर 13 देशों के 57 पर्यटक पैलेस ऑन व्हील्स से जयपुर पहुंचे, जिनमें सबसे ज्यादा 17 पर्यटक अमेरिका से हैं।
इस ट्रेन में सफर कैसे बुक किया जा सकता है? बुकिंग RTDC और भारतीय रेल के अधिकृत चैनलों के जरिए होती है। किराया सीजन, केबिन की श्रेणी और यात्रा की तारीख के हिसाब से तय होता है, इसलिए सफर से पहले आधिकारिक जानकारी जरूर देख लें।
स्रोत: दैनिक नवज्योति