सोचिए — जयपुर से सिर्फ डेढ़ घंटे की दूरी पर एक ऐसा गांव है, जहां सिर्फ छह महीने में 80 हजार से ज्यादा पर्यटक पहुंच गए। इनमें से 36 हजार तो विदेशी थे। ये आंकड़े किसी बड़े शहर के नहीं, दौसा जिले के छोटे से गांव आभानेरी के हैं। और इसी आभानेरी में 12 और 13 अक्टूबर को आभानेरी महोत्सव 2026 का आयोजन हुआ, जिसमें दो दिन तक राजस्थानी लोकसंस्कृति की धूम रही।
आभानेरी महोत्सव 2026: छह महीने में 80,181 सैलानी, विदेशियों की भीड़
44,140 घरेलू और 36,041 विदेशी — आंकड़े बता रहे असली कहानी
आभानेरी महोत्सव 2026 का सबसे बड़ा आकर्षण इस बार के पर्यटन आंकड़े रहे। जनवरी से जून 2026 तक आभानेरी में कुल 80,181 पर्यटक यात्राएं दर्ज की गईं। इनमें 44,140 घरेलू और 36,041 विदेशी सैलानी शामिल थे। यानी हर दो सैलानियों में से लगभग एक विदेशी था — ये अनुपात राजस्थान के किसी भी छोटे कस्बे के लिए बड़ी उपलब्धि है।
| अवधि | घरेलू पर्यटक | विदेशी पर्यटक | कुल पर्यटक यात्राएं |
|---|---|---|---|
| जनवरी–जून 2026 | 44,140 | 36,041 | 80,181 |
राजस्थान पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेंद्र सिंह शेखावत ने बताया कि आभानेरी महोत्सव के जरिए क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर, लोकसंस्कृति और ग्रामीण जीवन को पर्यटन से जोड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि ऐसे आयोजन विदेशी सैलानियों को राजस्थान की जड़ों से जोड़ते हैं, और स्थानीय कलाकारों व शिल्पकारों को अपनी कला दिखाने का मंच भी मिलता है।
आभानेरी महोत्सव का आयोजन राजस्थान पर्यटन विभाग और दौसा जिला प्रशासन के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। दो दिन चले इस उत्सव में राजस्थानी लोककलाओं, पारंपरिक हस्तशिल्प और ग्रामीण संस्कृति से जुड़ी गतिविधियों का आयोजन किया गया।
आभानेरी महोत्सव 2026 में दो दिन क्या-क्या हुआ: कच्छी घोड़ी से भपंग तक
महोत्सव के मंच पर राजस्थान की लोककलाओं का पूरा रंग देखने को मिला। पद दंगल, कच्छी घोड़ी नृत्य, बहरूपिया कला, नट कला, कठपुतली और भपंग वादन जैसी प्रस्तुतियां हुईं। शहनाई वादन और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने शाम को और यादगार बना दिया।
लेकिन महोत्सव सिर्फ मंच तक सीमित नहीं था। लाख की चूड़ियां बनाने वाले लाखेरे, मिट्टी के बर्तन गढ़ने वाले कुम्हार और लोहे के उत्पाद बनाने वाले लोहार — सब अपने पारंपरिक हुनर के साथ मौजूद थे। पर्यटक सिर्फ देखते ही नहीं रहे, कुम्हार के चाक पर मिट्टी को आकार लेते देखा और लाख की चूड़ियों की खरीददारी भी की। यानी स्थानीय कारीगरों की सीधी कमाई भी हुई।
ग्रामीण जीवन से जोड़ने के लिए कैमल कार्ट से ग्राम भ्रमण कराया गया, जिसमें पर्यटकों ने गांव के पारंपरिक परिवेश को करीब से देखा। नुक्कड़ नाटकों के जरिए स्थानीय संस्कृति और सामाजिक विषयों को भी प्रस्तुत किया गया।
चांद बावड़ी: 9वीं सदी की 3,500 सीढ़ियों वाली स्थापत्य कला का अजूबा
आभानेरी की असली पहचान है चांद बावड़ी — दुनिया की सबसे गहरी और बड़ी सीढ़ीदार बावड़ियों में गिनी जाने वाली ये संरचना 9वीं सदी में बनाई गई थी। 13 मंजिला इस बावड़ी में 3,500 से ज्यादा सममित सीढ़ियां हैं, जो जटिल ज्यामितीय पैटर्न बनाती हैं। पानी के संरक्षण और वास्तुकला का ये अद्भुत नमूना दूर से देखने वालों को भी हैरान कर देता है।
बावड़ी के पास ही हर्षद माता मंदिर है, जो क्षेत्र की धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ये दोनों स्थल मिलकर आभानेरी की ऐतिहासिक पहचान के प्रमुख आधार हैं। महोत्सव के दौरान पर्यटक इन स्थलों के साथ गांव की लोकपरंपराओं और ग्रामीण परिवेश से भी परिचित हुए।
दिलचस्प बात ये है कि आभानेरी का असली नाम ‘आभा नगरी’ था, जो आम बोलचाल में बिगड़कर आभानेरी हो गया। पर्यटन विभाग यहां हर साल सितंबर-अक्टूबर में दो दिवसीय आभानेरी महोत्सव आयोजित करता है, जिसमें राजस्थानी खाना, लोक कलाकारों के गीत-नृत्य और ऊंट सफारी जैसे कार्यक्रम होते हैं।
आभानेरी कैसे पहुंचें: जयपुर-आगरा रास्ते पर आसान सफर
अगर आप भी चांद बावड़ी देखना चाहते हैं, तो ये जानकारी काम की है। आभानेरी जयपुर-आगरा सड़क पर स्थित है। जयपुर से यहां की दूरी करीब 95 किलोमीटर है और सड़क मार्ग से डेढ़ से दो घंटे में पहुंचा जा सकता है। दौसा जिला मुख्यालय से भी यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
घूमने का सबसे अच्छा समय सितंबर से मार्च के बीच है, जब मौसम ठंडा और सुहावना रहता है। महोत्सव के दिनों में यहां खास रौनक होती है, लेकिन बाकी दिनों में भी चांद बावड़ी और हर्षद माता मंदिर देखे जा सकते हैं। राजस्थान के अन्य पर्यटन आयोजनों की तरह ही यहां का अनुभव भी परिवार के साथ घूमने लायक है — हाल ही में डीग में हुए डीग महोत्सव और जयपुर में आयोजित ऑक्टेव 2026 जैसे आयोजनों ने भी प्रदेश के सांस्कृतिक पर्यटन को नई पहचान दी है।
टाइगर सफारी जैसे अनुभवों के शौकीनों के लिए रणथंभौर सफारी भी इसी सीजन में शुरू हो चुकी है। राजस्थान पर्यटन विभाग की आधिकारिक जानकारी के लिए tourism.rajasthan.gov.in पर भी विवरण उपलब्ध है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
आभानेरी महोत्सव 2026 कब आयोजित हुआ?
आभानेरी महोत्सव 2026 का आयोजन 12 और 13 अक्टूबर को दौसा जिले के आभानेरी गांव में हुआ। इसका आयोजन राजस्थान पर्यटन विभाग और दौसा जिला प्रशासन ने संयुक्त रूप से किया।
आभानेरी में 2026 में कितने पर्यटक आए?
जनवरी से जून 2026 तक आभानेरी में 80,181 पर्यटक यात्राएं दर्ज हुईं, जिनमें 44,140 घरेलू और 36,041 विदेशी सैलानी शामिल थे।
चांद बावड़ी कहां स्थित है और ये क्यों खास है?
चांद बावड़ी दौसा जिले के आभानेरी गांव में स्थित है। 9वीं सदी में बनी ये 13 मंजिला सीढ़ीदार बावड़ी अपनी 3,500 से ज्यादा सीढ़ियों और जटिल ज्यामितीय डिजाइन के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।
आभानेरी कैसे पहुंचा जा सकता है?
आभानेरी जयपुर-आगरा सड़क पर स्थित है, जयपुर से करीब 95 किलोमीटर की दूरी पर। सड़क मार्ग से डेढ़ से दो घंटे में यहां पहुंचा जा सकता है। घूमने का सबसे अच्छा समय सितंबर से मार्च है।