राजस्थान के लिए अंतरराष्ट्रीय मंच से बड़ी खुशखबरी आई है। दूदू क्षेत्र के 132 साल पुराने छपरवाड़ा बांध को वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर (WHIS) अवॉर्ड 2026 से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान फ्रांस के मार्सिले में 11 से 16 अक्टूबर तक चल रहे इंटरनेशनल इरिगेशन कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया जाएगा। 1894 से यह बांध हजारों किसानों के खेतों को पानी दे रहा है।
जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार छह दिन के फ्रांस दौरे पर हैं, जहां वे ICID के अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और 77वीं इंटरनेशनल एग्जीक्यूटिव काउंसिल (IEC) में हिस्सा लेंगे। इसी मंच पर उन्हें यह अवॉर्ड ग्रहण करना है। दौरे के बाद उन्हें यात्रा के नतीजों पर रिपोर्ट विभाग को सौंपनी होगी, जो आगे नई दिल्ली में मंत्रालय को भेजी जाएगी।
1894 का छपरवाड़ा बांध: 132 साल से किसानों की लाइफलाइन
यह बांध दूदू विधानसभा क्षेत्र के हजारों किसानों की लाइफलाइन है। जल संसाधन विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक इसका निर्माण 1894 में करीब 7.30 लाख रुपये की लागत से हुआ था — यानी 132 साल बाद भी यह पूरी मजबूती से सिंचाई का काम कर रहा है।
इसका भराव 17 फीट और लंबाई 14,200 फीट है। कैचमेंट एरिया 322 वर्ग मील और जल भंडारण क्षमता करीब 1236 मिलियन क्यूबिक फीट है। अधिकतम सिंचित क्षेत्र 47,468 एकड़ दर्ज है, और बांध भरने पर करीब 29,000 एकड़ जमीन की सिंचाई हो सकती है। बनास नदी की स्थानीय नाली पर बना यह मिट्टी का (अर्थन) बांध दूदू, फागी और टोंक की मालपुरा तहसील के गांवों तक नहरों से सिंचाई का पानी पहुंचाता है।
पिछले साल मानसून की मेहरबानी से यह बांध 29 साल बाद लबालब भरा था और एक फीट चादर भी चली थी। सिंचाई के बाद भी इसमें चार फीट पानी का स्टोरेज बचा रहा, जिससे किसानों के चेहरों पर मुस्कान लौट आई थी। यही वजह है कि दूदू क्षेत्र के किसान इसे अपनी खुशहाली का आधार मानते हैं।
छपरवाड़ा बांध WHIS अवॉर्ड: फ्रांस के मार्सिले में सम्मान समारोह
अवॉर्ड समारोह फ्रांस के मार्सिले में हो रहा है, जहां 11 से 16 अक्टूबर तक ICID का 26वां अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस और 77वीं IEC बैठक चल रही है। दुनिया भर के सिंचाई विशेषज्ञ और नीति-निर्माता इसमें जुटे हैं।
इसी मंच पर उत्तर प्रदेश के झांसी स्थित 140 साल पुराने परीछा बांध को भी WHIS अवॉर्ड-26 से नवाजा जाएगा। एक ही मंच पर दो भारतीय धरोहरों का सम्मान देश के लिए गर्व का क्षण है।
WHIS अवॉर्ड आखिर है क्या?
WHIS यानी वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर — यह सम्मान इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज (ICID) देता है। ICID की स्थापना 1950 में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली में है। यह संस्था दुनियाभर में सिंचाई, जल निकासी और बाढ़ प्रबंधन के विशेषज्ञों का सबसे बड़ा नेटवर्क है।
WHIS की तर्ज यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थलों जैसी ही है — मकसद है सिंचाई के इतिहास को समझना, पुरानी संरचनाओं की खूबियों का दस्तावेजीकरण करना और इन धरोहरों का संरक्षण करना। हर देश अपनी राष्ट्रीय समिति के जरिए अधिकतम चार संरचनाओं का नामांकन कर सकता है, जिन पर विशेषज्ञ पैनल फैसला करता है।
भारत को पहले भी यह सम्मान मिल चुका है — 2020 में आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र की चार संरचनाओं को, और सितंबर 2025 में कुआलालंपुर में हुई 76वीं IEC बैठक में चार और भारतीय संरचनाओं को WHIS मान्यता दी गई थी। अब 2026 में इस सूची में राजस्थान का नाम जुड़ेगा।
छपरवाड़ा बांध WHIS अवॉर्ड: राजस्थान के लिए इसके मायने
राजस्थान देश का सबसे बड़ा राज्य है, लेकिन पानी के मामले में सबसे ज्यादा चुनौती झेलने वालों में भी गिना जाता है। ऐसे में 132 साल पुराने एक बांध का आज भी पूरी क्षमता से काम करना और विश्व स्तर पर सम्मान पाना कई मायनों में खास है।
पहला, यह राजस्थान की पारंपरिक जल प्रबंधन समझ की वैश्विक स्वीकृति है। दूसरा, इससे बांध के संरक्षण को गति मिलेगी, जिसका सीधा फायदा दूदू, फागी और मालपुरा के किसानों को होगा। तीसरा, अंतरराष्ट्रीय पहचान से हेरिटेज टूरिज्म की संभावनाएं खुलेंगी। और चौथा, WHIS, ICID और इस बांध से जुड़े तथ्य प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए भी बेहद उपयोगी हैं।
एक नजर में छपरवाड़ा बांध
| तथ्य | विवरण |
|---|---|
| स्थान | दूदू विधानसभा क्षेत्र, जयपुर संभाग |
| निर्माण वर्ष | 1894 (132 साल पुराना) |
| निर्माण लागत | करीब 7.30 लाख रुपये |
| बांध की लंबाई | 14,200 फीट |
| भराव क्षमता | 17 फीट |
| कैचमेंट एरिया | 322 वर्ग मील |
| जल भंडारण क्षमता | करीब 1236 मिलियन क्यूबिक फीट |
| अधिकतम सिंचित क्षेत्र | 47,468 एकड़ |
| लाभान्वित क्षेत्र | दूदू, फागी व मालपुरा तहसील के गांव |
| मिलने वाला सम्मान | WHIS अवॉर्ड 2026 |
| सम्मान समारोह | 11-16 अक्टूबर, मार्सिले (फ्रांस) |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
सवाल: WHIS अवॉर्ड क्या है?
जवाब: WHIS यानी वर्ल्ड हेरिटेज इरिगेशन स्ट्रक्चर — यह इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज (ICID) द्वारा ऐतिहासिक सिंचाई संरचनाओं को दिया जाने वाला अंतरराष्ट्रीय सम्मान है। यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची की तर्ज पर सिंचाई धरोहरों को मान्यता देता है।
सवाल: छपरवाड़ा बांध कहां स्थित है?
जवाब: यह बांध जयपुर संभाग के दूदू विधानसभा क्षेत्र में स्थित है। बनास नदी की स्थानीय नाली पर बना यह मिट्टी का बांध दूदू, फागी और टोंक की मालपुरा तहसील के गांवों को सिंचाई का पानी देता है।
सवाल: छपरवाड़ा बांध को सम्मान कब और कहां मिलेगा?
जवाब: यह सम्मान 11 से 16 अक्टूबर 2026 तक फ्रांस के मार्सिले में चल रहे ICID के 26वें अंतरराष्ट्रीय कांग्रेस और 77वीं IEC बैठक के दौरान दिया जाएगा। जल संसाधन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अभय कुमार यह सम्मान ग्रहण करेंगे।
सवाल: ICID क्या है और इसका मुख्यालय कहां है?
जवाब: ICID यानी इंटरनेशनल कमीशन ऑन इरिगेशन एंड ड्रेनेज — सिंचाई, जल निकासी और बाढ़ प्रबंधन के विशेषज्ञों का वैश्विक संगठन है। इसकी स्थापना 1950 में हुई थी और इसका मुख्यालय नई दिल्ली, भारत में स्थित है।
छपरवाड़ा बांध को मिला WHIS अवॉर्ड 2026 इस बात का सबूत है कि सही रखरखाव और पारंपरिक इंजीनियरिंग का मेल सदियों तक काम आ सकता है। यह सम्मान दूदू के किसानों के साथ-साथ पूरे प्रदेश की जल धरोहर के लिए गर्व का पल है।