राजस्थान के बांधों में पिछले साल से 30% कम पानी, रबी सिंचाई पर मंडराया संकट का बादल

मानसून विदा हो चुका है, लेकिन उसके बाद सामने आई तस्वीर आने वाले महीनों की चुनौती बता रही है। जल संसाधन विभाग के ताजा आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के बांधों में इस बार पानी पिछले साल से काफी कम है। इसका सीधा असर रबी सीजन की सिंचाई और पेयजल पर पड़ने वाला है।

रबी सीजन से पहले किसानों की सबसे बड़ी चिंता

किसान भाई जानते हैं कि रबी की फसल का पूरा दारोमदार सिंचाई के पानी पर होता है। गेहूं, सरसों, चना और जौ जैसी फसलों को समय पर पानी न मिले तो पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। इस बार हालात ऐसे हैं कि बांधों में पानी ही कम है। जिन नहरों से खेतों तक पानी पहुंचता है, उनमें इस बार पानी छोड़ने की अवधि और मात्रा दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

पश्चिमी राजस्थान के किसानों के लिए यह खबर और भी चिंताजनक है। वहां पहले से पानी की किल्लत रहती है और इस बार मानसून ने भी साथ नहीं दिया।

आंकड़े क्या कहते हैं: पिछले साल 90.5%, इस बार सिर्फ 62%

जल संसाधन विभाग की ओर से इस सप्ताह जारी किए गए नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के 693 बड़े, मध्यम और छोटे बांधों में पानी का स्तर काफी नीचे है। पिछले साल मानसून के बाद बांध करीब 90.5 प्रतिशत तक भर गए थे, लेकिन इस बार यह आंकड़ा मुश्किल से 62 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है।

एक अन्य विश्लेषण के मुताबिक भराव क्षमता के मुकाबले पिछले साल की तुलना में करीब 30 प्रतिशत कम पानी रहा है। यानी जो पानी पिछले साल जमा हुआ था, उसका लगभग एक-तिहाई हिस्सा इस बार गायब है।

सबसे बुरी हालत: जोधपुर जोन में सिर्फ 16% पानी

प्रदेश के सभी जोनों में एक जैसी स्थिति नहीं है। सबसे गंभीर तस्वीर जोधपुर जोन की है, जहां बांधों में उनकी क्षमता का मात्र 16 प्रतिशत पानी ही आ पाया है। पश्चिमी राजस्थान में पहले से ही जल संकट रहता है, और इस बार की कम बारिश ने स्थिति को और कठिन बना दिया है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार भयंकर जल संकट को देखते हुए आपदा प्रबंधन के अधिकारियों ने पाली जैसे जिलों में पानी की ट्रेन चलाने की संभावना से भी इनकार नहीं किया है। गौरतलब है कि साल 2022 में भी पाली में पानी की ट्रेन भेजी गई थी।

202 बांध ऐसे जहां पानी पहुंचा ही नहीं

सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा यह है कि 202 बांध ऐसे हैं, जहां इस मानसून में पानी पहुंचा ही नहीं। इनमें जयपुर का रामगढ़ बांध भी शामिल है, जो कभी राजधानी की जीवनरेखा हुआ करता था। इतनी बड़ी संख्या में बांधों का सूखा रह जाना सरकार और समाज दोनों के लिए चेतावनी है।

मानसून हर साल एक जैसा नहीं होता, लेकिन इतने सारे बांधों का सूखा रह जाना बताता है कि सिर्फ मानसून के भरोसे रहना समझदारी नहीं है।

मानसून ने कहां-कहां साथ नहीं दिया

इस बार की कम बारिश का पूरा हिसाब भी सामने आया है। पिछले साल 23 जिले ऐसे थे जहां सामान्य से 60 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई थी। इस बार एक भी जिला ऐसा नहीं है जहां अत्यधिक बारिश हुई हो।

मौसम विभाग ने तकनीकी रूप से 24 जिलों में बारिश को सामान्य माना है, लेकिन गहराई से देखने पर इनमें से 18 जिलों में बारिश औसत से नीचे ही रही है। पूरे प्रदेश में केवल धौलपुर, डीग और सलूम्बर ही ऐसे जिले रहे जहां 24 से 28 प्रतिशत तक अधिक पानी बरसा।

कम बारिश का सीधा असर खरीफ की फसलों पर भी पड़ा है। बाजरा, मूंग, ग्वार, मोठ और सोयाबीन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों को पानी की कमी से नुकसान पहुंचा है। फसल खराब होने से दाल और बाजरे जैसी आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है।

प्रमुख आंकड़े एक नजर में

आंकड़ा विवरण
कुल बांध 693 (बड़े, मध्यम और छोटे)
इस बार भराव क्षमता का करीब 62%
पिछले साल भराव क्षमता का 90.5%
पिछले साल से कमी करीब 30%
सूखे रहे बांध 202 (रामगढ़ समेत)
जोधपुर जोन की स्थिति क्षमता का सिर्फ 16% पानी
अधिक बारिश वाले जिले धौलपुर, डीग, सलूम्बर (24-28% अधिक)
चिंता के दायरे में करीब 11 जिले, अकाल जैसी स्थिति की आशंका

पेयजल की चुनौती: शहर संभल जाएंगे, गांवों का क्या?

विशेषज्ञों का कहना है कि शहरों में टैंकर और पाइपलाइन से राहत दी जा सकती है, लेकिन दूरदराज के गांवों और ढाणियों में पानी पहुंचाना कहीं अधिक कठिन चुनौती है। वहां कई बस्तियां आज भी सीमित जलस्रोतों पर निर्भर हैं।

पशुपालकों के लिए भी चिंता है। चारे का संकट पैदा होने की आशंका है और चारा महंगा होने से दूध व डेयरी उत्पादों की कीमतों में उछाल आ सकता है।

सरकार के सामने क्या विकल्प हैं

जल संकट जब दरवाजे पर पहुंचता है, तब इंतजाम करने में देर हो चुकी होती है। विशेषज्ञों की राय है कि सरकार को संकट आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। पहले से उन जिलों और क्षेत्रों की पहचान जरूरी है, जहां बांधों और जलाशयों में पानी कम है।

गांववार पेयजल व सिंचाई की जरूरत का आकलन, टैंकरों की उपलब्धता और दूरस्थ बस्तियों तक पानी पहुंचाने की कार्ययोजना पहले से तैयार होनी चाहिए।

किसानों के लिए सलाह यही है कि रबी की बुवाई से पहले अपने क्षेत्र की नहर और बांध की स्थिति की जानकारी स्थानीय कार्यालय से जरूर लें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: राजस्थान के बांधों में इस बार कितना पानी है?

जवाब: जल संसाधन विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार 693 बांधों में क्षमता का करीब 62 प्रतिशत पानी है, जो पिछले साल के 90.5 प्रतिशत से काफी कम है।

सवाल: कितने बांध ऐसे हैं जहां बिल्कुल पानी नहीं आया?

जवाब: 202 बांध ऐसे हैं जहां इस मानसून में पानी पहुंचा ही नहीं। इनमें जयपुर का रामगढ़ बांध भी शामिल है।

सवाल: सबसे खराब स्थिति किस क्षेत्र की है?

जवाब: जोधपुर जोन की स्थिति सबसे गंभीर है, जहां बांधों में क्षमता का मात्र 16 प्रतिशत पानी आ पाया है।

सवाल: क्या रबी की फसल पर असर पड़ेगा?

जवाब: हां, आशंका यही है। पानी कम होने से नहरों से सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की अवधि और मात्रा प्रभावित हो सकती है। किसानों को सलाह है कि बुवाई से पहले स्थानीय स्तर पर पानी की उपलब्धता की पुष्टि कर लें।

सवाल: क्या पाली में पानी की ट्रेन चलेगी?

जवाब: अभी इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन आपदा प्रबंधन के अधिकारियों ने इस संभावना से इनकार नहीं किया है। 2022 में भी पाली में पानी की ट्रेन भेजी गई थी।

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