कोर्ट के आदेश से खरीदीं तीन दुकानों पर बिल्डर 6 करोड़ 13 लाख रुपए का मेंटेनेंस बिल थमा दे और धमकाए कि दुकान खाली करो, वरना बिजली कटवा देंगे — जयपुर की एक दुकानदार के साथ ठीक यही हुआ। और अब विवासिटी मॉल रेरा मामले में RAJ-RERA ने इस मनमानी पर ऐसा झटका दिया है, जिसकी गूंज पूरे रियल एस्टेट सेक्टर में सुनाई देगी।
रेरा सदस्य सुधीर कुमार शर्मा की पीठ ने 9 अक्टूबर 2026 के फैसले में कहा — प्रमोटर आपसी झगड़ों की आड़ में खरीदार की दुकान, कब्जे और बिजली पर हाथ नहीं डाल सकता। 6.13 करोड़ की मांग निराधार ठहराई गई, और बिना सहमति नक्शा बदलने की जांच के आदेश दिए गए। यह कमर्शियल संपत्ति का मामला है — दुकान या ऑफिस खरीदने वाले भी रेरा की सुरक्षा में उतने ही आते हैं, जितने घर खरीदार।
विवासिटी मॉल रेरा फैसले में दुकानदार को मिली 3 बड़ी राहतें
पहली राहत — कब्जे में दखल पर रोक: प्रमोटर अब तीनों दुकानों (SH-04, SH-16, SH-18) के शांतिपूर्ण उपयोग और कब्जे में किसी प्रकार का दखल नहीं देगी।
दूसरी राहत — बिजली पर हक: प्रमोटर को दुकानों में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करनी होगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दुकान के उपयोग, कॉमन एरिया और बिजली आपूर्ति का विधिक अधिकार सीधे यूनिट से जुड़ा है।
तीसरी राहत — पुराने बकाए से छुटकारा: 1 नवंबर 2023 से पहले के किसी भी बकाए के लिए आवंटी जिम्मेदार नहीं होगी — 6.13 करोड़ रुपए की मांग पूरी तरह निराधार करार दी गई।
विवाद की पूरी कहानी: DRT नीलामी से पुलिस FIR तक
यह मामला DRT जयपुर के एक आदेश से शुरू होता है — DRT के आदेशों के तहत मोरानी मोटर्स ने तीन दुकानों का विक्रय विलेख 1 नवंबर 2023 को ज्योति रानी के पक्ष में निष्पादित किया और भौतिक कब्जा सौंप दिया। ज्योति रानी ने पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर रविंद्र कुमार के माध्यम से रेरा में शिकायत दर्ज कराई।
लेकिन कब्जा मिलने के बाद प्रमोटर ने दबाव बनाना शुरू कर दिया। आरोप है कि दुकानें खाली करने की धमकियां दी गईं — इस संबंध में पुलिस में FIR भी दर्ज कराई गई — और आवंटी को बेदखल करने की नीयत से 6,13,21,115 रुपए का मनमाना मेंटेनेंस बिल थमा दिया गया, साथ ही बिजली कनेक्शन में बाधाएं खड़ी की गईं।
विक्रय विलेख नवंबर 2023 में हुआ और रेरा का फैसला अक्टूबर 2026 में आया — करीब तीन साल का सफर, जो बताता है कि सही दस्तावेज और धैर्य से लड़ी लड़ाई में आखिरकार खरीदार की ही जीत होती है।
प्रमोटर की दलीलें और रेरा कोर्ट ने उन्हें क्यों खारिज किया
प्रमोटर ने दो दलीलें रखीं — मोरानी मोटर्स से पुराना एग्रीमेंट था, और मामला दीवानी अदालत में लंबित है, इसलिए रेरा दखल न दे।
रेरा पीठ ने दोनों दलीलें खारिज कर दीं — कॉमर्शियल कोर्ट पहले ही आवंटी का कब्जा वैध ठहरा चुका है, इसलिए “आपसी विवाद” का बहाना नहीं चलेगा और दीवानी मुकदमे की आड़ में खरीदार के अधिकार नहीं छीने जा सकते। प्रमोटरों की यह पुरानी रणनीति रही है — मामले को दीवानी अदालत की लंबी प्रक्रिया में उलझा दो, ताकि खरीदार थककर समझौता कर ले — लेकिन इस फैसले ने साबित किया कि यह बहाना रेरा की कार्यवाही को नहीं रोक सकता।
नक्शा बदलने की जांच: रजिस्ट्री को क्या-क्या सौंपना होगा
फैसले का सबसे तीखा हिस्सा नक्शे से जुड़ा है — आरोप है कि प्रमोटर ने आवंटियों की सहमति के बिना ही जेडीए से संशोधित लेआउट स्वीकृत करा लिया। रेरा ने रजिस्ट्री को विस्तृत जांच कर चेयरपर्सन के समक्ष रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं। जांच के दायरे में दो और सवाल हैं — रेरा पोर्टल पर प्रोजेक्ट ‘लैप्स’ श्रेणी में मिला और निर्माण प्रगति शून्य पाई गई; और 2017 में कंप्लीशन सर्टिफिकेट का दावा होने के बावजूद प्रोजेक्ट 2018 में रेरा में पंजीकृत क्यों हुआ?
रेरा की एक और बड़ी कार्रवाई हाल ही में सामने आई थी, जब शिवशक्ति रियलहोम को डिफॉल्टर घोषित किया गया था — साफ है कि अथॉरिटी प्रमोटरों पर लगातार शिकंजा कस रही है। जेडीए से जुड़े मामलों में भी निगरानी बढ़ रही है, क्योंकि संशोधित लेआउट वहीं से स्वीकृत कराने का आरोप है।
प्रकरण के मुख्य तथ्य एक नजर में
प्रोजेक्ट: विवासिटी मॉल, जयपुर। प्रमोटर: मैसर्स विवासिटी मॉल प्राइवेट लिमिटेड (निदेशक: विकास अग्रवाल)। आवंटी: ज्योति रानी (पावर ऑफ अटॉर्नी: रविंद्र कुमार)। दुकानें: SH-04, SH-16, SH-18 — विक्रय विलेख 1 नवंबर 2023 (DRT जयपुर के आदेश पर, विक्रेता: मोरानी मोटर्स)। विवादित बिल: ₹6,13,21,115 (रेरा ने निराधार ठहराया)। फैसला: RAJ-RERA सदस्य सुधीर कुमार शर्मा की पीठ, 9 अक्टूबर 2026। जांच के आदेश: बिना सहमति नक्शा बदलाव, लैप्स प्रोजेक्ट, 2017 CC बनाम 2018 पंजीकरण।
दुकान और फ्लैट खरीदारों के लिए 5 काम के सबक
1. कोर्ट से खरीदी संपत्ति वैध है: “हमारा आपसी मामला है” कहकर प्रमोटर उसे चुनौती नहीं दे सकता — कब्जा वैध है, तो अधिकार भी वैध।
2. मनमाना बिल गैरकानूनी है: बिना हिसाब-किताब के करोड़ों का बिल और बिजली काटने की धमकी — दोनों रेरा की नजर में गलत।
3. नक्शा बिना सहमति नहीं बदल सकता: RERA कानून के तहत प्रमोटर आवंटियों की सहमति के बिना प्रोजेक्ट का लेआउट नहीं बदल सकता।
4. खरीद से पहले 3 जांचें: रेरा पोर्टल पर प्रोजेक्ट की श्रेणी (लैप्स तो नहीं?), CC और पंजीकरण की तारीखों का मिलान, स्वीकृत लेआउट की प्रति।
5. शिकायत कैसे करें: RAJ-RERA पोर्टल पर ऑनलाइन — विक्रय विलेख, कब्जे के दस्तावेज और बिल्डर से पत्राचार के साथ। धमकी पर पुलिस FIR और रेरा शिकायत दोनों साथ चल सकते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
सवाल 1: विवासिटी मॉल रेरा मामले में फैसला क्या हुआ?
जवाब: प्रमोटर को तीनों दुकानों के कब्जे और बिजली आपूर्ति में दखल से रोका गया है। 6.13 करोड़ का बिल निराधार ठहराया गया और बिना सहमति नक्शा बदलने की जांच के आदेश दिए गए हैं।
सवाल 2: क्या बिल्डर खरीदार की बिजली रोक सकता है?
जवाब: नहीं। दुकान के उपयोग, कॉमन एरिया और बिजली का अधिकार सीधे यूनिट से जुड़ा है — प्रमोटर आपसी विवाद की आड़ में इसे नहीं छीन सकता।
सवाल 3: DRT नीलामी से खरीदी दुकान पर पुराना बकाया किसका होगा?
जवाब: विक्रय विलेख की तिथि (1 नवंबर 2023) से पहले के बकाए के लिए नया आवंटी जिम्मेदार नहीं — पुरानी देनदारी खरीदार पर नहीं थोपी जा सकती।
सवाल 4: रेरा में शिकायत के लिए किन दस्तावेजों की जरूरत होती है?
जवाब: विक्रय विलेख या आवंटन पत्र, कब्जे का प्रमाण, बिल्डर से पत्राचार, विवादित बिलों की प्रतियां और पहचान दस्तावेज। शिकायत RAJ-RERA पोर्टल पर ऑनलाइन दर्ज होती है।
खरीदार अकेला नहीं है — सही मंच और सही दस्तावेज हों, तो कानून उसके साथ है।