उसे एक बार भारत से डिपोर्ट किया जा चुका था। बावजूद इसके वह नेपाल बॉर्डर के रास्ते दोबारा देश में दाखिल हो गई और उदयपुर पहुंचकर एक होटल में रहने लगी। उदयपुर सीआईडी छापा थाईलैंड मूल की तीन महिलाओं के मामले में यही सबसे चौंकाने वाला खुलासा है। उदयपुर जिला पुलिस और सीआईडी जोन की संयुक्त टीम ने गोवर्धन विलास थाना क्षेत्र के होटल सिटी प्राइड में छापा मारकर बिना वैध दस्तावेजों के रह रही इन तीनों विदेशी महिलाओं को हिरासत में लिया है। पुलिस अब इन्हें देश से निष्कासित करने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर रही है, वहीं होटल संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई चल रही है।
19 अक्टूबर की टिप से छापे तक: उदयपुर सीआईडी छापा थाईलैंड का पूरा घटनाक्रम
उदयपुर सीआईडी छापा थाईलैंड कार्रवाई की जड़ 19 अक्टूबर को मिली एक गुप्त सूचना में है। सीआईडी की ‘काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट’ को जानकारी मिली थी कि गोवर्धन विलास क्षेत्र के होटल सिटी प्राइड में कुछ विदेशी महिलाएं अवैध रूप से रुकी हुई हैं और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त हैं। सूचना मिलते ही सीआईडी टीम और गोवर्धन विलास थाना पुलिस ने मिलकर होटल पर छापा मार दिया।
छापे के दौरान पुलिस ने होटल के कमरा नंबर 102, 103, 104 और 109 की तलाशी ली — इन्हीं कमरों में तीनों थाईलैंड मूल की महिलाएं रुकी हुई मिलीं। होटल के विजिटर रजिस्टर में इन विदेशी महिलाओं के ठहरने की कोई एंट्री नहीं मिली — यानी इन्हें बिना रिकॉर्ड के कमरे दिए गए थे। पूछताछ में होटल संचालक ने कबूल किया कि वह इन विदेशी महिलाओं से स्पा का काम करवा रहा था।
वीजा खत्म, फिर भी ठहराव: डिटेन की वजह
उदयपुर सीआईडी छापा थाईलैंड मामले में जांच में सामने आया कि तीनों महिलाओं के वीजा और पासपोर्ट की अवधि समाप्त हो चुकी थी — इसके बावजूद वे उदयपुर में अवैध रूप से रह रही थीं। इसी जांच में वह बात सामने आई जिसने मामले को साधारण वीजा उल्लंघन से कहीं बड़ा बना दिया: इनमें से एक महिला को पहले भी भारत से डिपोर्ट किया जा चुका था, लेकिन वह दोबारा नेपाल बॉर्डर के रास्ते अवैध रूप से देश में प्रवेश कर उदयपुर पहुंच गई।
पुलिस के संज्ञान में पहले से यह बात आई हुई है कि कुछ विदेशी नागरिक नेपाल के रास्ते अवैध रूप से देश में प्रवेश कर अनैतिक कार्यों में लिप्त हो जाते हैं, और कुछ पर्यटक वीजा पर आकर स्पा जैसे व्यावसायिक कार्यों में शामिल हो जाते हैं। इस मामले में दोनों ही बातें एक साथ सामने आई हैं। राजस्थान में सीआईडी की बड़ी कार्रवाइयां हाल में कई मोर्चों पर हुई हैं — जैसे पाली में 8303 लीटर मिलावटी घी जब्त करने के मामले में जयपुर सीआईडी टीम की कार्रवाई और भीलवाड़ा में सीआईडी क्राइम ब्रांच की तस्करों पर कार्रवाई। लेकिन उदयपुर का यह मामला इमीग्रेशन कानून और राष्ट्रीय सुरक्षा के दायरे में आता है, इसलिए इसकी प्रकृति अलग है।
इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट 2025: होटल मालिक पर क्या गाज गिरी
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक डॉ. विक्रम सिंह ने उदयपुर सीआईडी छापा थाईलैंड मामले पर कहा है कि विदेशी नागरिकों का इस तरह बिना वैध दस्तावेजों के अवैध रूप से रहना और संदिग्ध गतिविधियों में लिप्त होना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा हो सकता है। उनके राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में शामिल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह बयान मामले की गंभीरता रेखांकित करता है।
इसी लापरवाही और कानून के उल्लंघन को लेकर होटल मालिक के विरुद्ध इमीग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट 2025 की धारा 7(2) एवं धारा 29 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इससे कुछ दिन पहले ही उदयपुर पुलिस ने विदेशी नागरिकों के ठहरने के नियम तोड़ने पर 50 हजार रुपये तक के जुर्माने की चेतावनी दी थी, और अब होटल सिटी प्राइड का संचालक उसी सख्ती का सामना कर रहा है। विदेशी नागरिकों के प्रवेश और ठहरने से जुड़े नियमों की आधिकारिक जानकारी ब्यूरो ऑफ इमीग्रेशन (boi.gov.in) की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
उदयपुर सीआईडी छापा थाईलैंड के बाद होटल संचालकों के लिए सख्त निर्देश
इस घटना के बाद पुलिस प्रशासन ने उदयपुर के सभी होटल, विला और रिसॉर्ट संचालकों को कड़े निर्देश जारी किए हैं — किसी भी विदेशी नागरिक को ठहराने से पहले इमीग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट 2025 के नियमों का पूरी तरह पालन किया जाए। नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
नियम साफ हैं: विदेशी नागरिक के ठहरने से पहले मूल पासपोर्ट और वीजा देखना अनिवार्य है, 24 घंटे के भीतर ऑनलाइन सी-फॉर्म भरकर सूचना देनी होगी, और चेकआउट पर तुरंत जानकारी दर्ज करनी होगी। सबसे अहम निर्देश यह है कि अगर किसी विदेशी नागरिक के पासपोर्ट पर डिपोर्टेशन की स्टैम्प लगी हो तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस कार्यालय को देनी है — होटल सिटी प्राइड मामले में अगर यह नियम पालन हुआ होता, तो पहले डिपोर्ट हो चुकी महिला का दोबारा प्रवेश यहीं पकड़ा जा सकता था। जयपुर में मुरलीपुरा के स्पा सेंटरों पर हुई पुलिस कार्रवाई के बाद यह साफ है कि पुलिस अब दस्तावेजों की जांच को प्राथमिकता दे रही है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| कार्रवाई | 21 अक्टूबर 2026 (19 अक्टूबर को टिप मिली थी) |
| स्थान | होटल सिटी प्राइड, गोवर्धन विलास थाना क्षेत्र, उदयपुर |
| टीमें | सीआईडी काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट + उदयपुर जिला पुलिस |
| डिटेन | थाईलैंड मूल की 3 महिलाएं (वीजा/पासपोर्ट अवधि समाप्त) |
| बड़ा खुलासा | एक महिला पहले भी डिपोर्ट हो चुकी थी; नेपाल बॉर्डर से दोबारा एंट्री |
| तलाशी वाले कमरे | 102, 103, 104 और 109 |
| होटल की गलती | रजिस्टर में एंट्री नहीं; स्पा का काम करवाने की कबूलनामा |
| लागू कानून | इमीग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट 2025, धारा 7(2) एवं 29 |
| आगे की प्रक्रिया | महिलाओं के निष्कासन (डिपोर्टेशन) की कानूनी प्रक्रिया शुरू |
| पुलिस का बयान | ASP डॉ. विक्रम सिंह — राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
उदयपुर में CID ने किस होटल पर छापा मारा और क्यों?
गोवर्धन विलास थाना क्षेत्र के होटल सिटी प्राइड पर सीआईडी की काउंटर इंटेलिजेंस यूनिट और जिला पुलिस ने संयुक्त छापा मारा। यहां थाईलैंड मूल की तीन महिलाएं बिना वैध दस्तावेजों के रह रही थीं — विजिटर रजिस्टर में इनके ठहरने की कोई एंट्री नहीं मिली और संचालक ने इनसे स्पा का काम करवाने की बात कबूली। उदयपुर सीआईडी छापा थाईलैंड कार्रवाई 19 अक्टूबर को मिली गुप्त सूचना पर हुई थी।
तीनों महिलाओं को क्यों हिरासत में लिया गया?
तीनों के वीजा और पासपोर्ट की अवधि समाप्त हो चुकी थी, फिर भी वे अवैध रूप से उदयपुर में रह रही थीं। इनमें से एक महिला को पहले भी भारत से डिपोर्ट किया जा चुका था, जो नेपाल बॉर्डर से दोबारा अवैध रूप से देश में दाखिल हुई थी। उदयपुर सीआईडी छापा थाईलैंड मामले में अब इन्हें निष्कासित करने की कानूनी प्रक्रिया चल रही है।
होटल मालिक के खिलाफ क्या कार्रवाई हो रही है?
विदेशी नागरिकों के ठहरने के नियमों का उल्लंघन करने पर उदयपुर सीआईडी छापा थाईलैंड मामले में होटल संचालक के विरुद्ध इमीग्रेशन एवं फॉरेनर्स एक्ट 2025 की धारा 7(2) एवं धारा 29 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
उदयपुर के होटल संचालकों के लिए अब क्या नियम हैं?
मूल पासपोर्ट-वीजा देखना अनिवार्य, 24 घंटे में ऑनलाइन सी-फॉर्म, चेकआउट पर तुरंत सूचना, और डिपोर्टेशन स्टैम्प की जानकारी तुरंत पुलिस को देनी होगी। उदयपुर सीआईडी छापा थाईलैंड मामले के बाद नियम तोड़ने पर 50 हजार रुपये तक का जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।