किसी को नई किडनी मिली, किसी को नया लिवर — और उसी नई जिंदगी के दम पर अब मैदान में पदक भी आ रहे हैं। राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026 में राजस्थान के छह खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया, जिनमें रामदेव सिंह अकेले चार पदक जीत चुके हैं। उनकी कहानी यह साबित करती है कि प्रत्यारोपण किसी जिंदगी का आखिरी पड़ाव नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत हो सकती है।
इस खबर का असर पदक तालिका से कहीं आगे जाता है। आज भी हजारों मरीज ऐसे हैं, जिनके लिए किसी दाता की हामी ही जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन जाती है। जब प्रत्यारोपण करा चुके खिलाड़ी जेवलिन फेंकते हैं और तीरंदाजी में निशाना साधते हैं, तो समाज के मन में बैठा डर टूटता है — कि प्रत्यारोपण के बाद सामान्य, सक्रिय जीवन मुमकिन नहीं।
राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल: दिल्ली में ‘जिंदगी दोबारा’ का उत्सव
राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026 का आयोजन 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में हुआ, जिसकी थीम ‘जिंदगी दोबारा’ थी। उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया। आयोजन का संचालन रीनल केयर फाउंडेशन और सर गंगा राम अस्पताल ने किया, जबकि NOTTO ने तकनीकी सहयोग दिया।
कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति ने ‘जिंदगी दोबारा’ कैलेंडर का विमोचन किया और जर्मनी के ड्रेसडेन में हुए विश्व प्रत्यारोपण खेल 2025 के पदक विजेताओं को सम्मानित किया। मौके पर केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव और लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज भी मौजूद रहे।
इस आयोजन की एक और खास झलक रही — 570 अंग प्रत्यारोपण प्राप्तकर्ताओं और दाताओं ने एक साथ ताड़ासन करके विश्व रिकॉर्ड का प्रयास किया, जिसके बाद आयोजकों को वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की ओर से प्रमाण-पत्र मिला। उपराष्ट्रपति ने लोगों के साथ अंगदान की शपथ भी ली।
राजस्थान के छह खिलाड़ी: किसने कौन सा पदक जीता
राजस्थान के छह खिलाड़ियों ने विश्व प्रत्यारोपण खेल 2025 में पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया। इनका प्रदर्शन इस बात का उदाहरण है कि प्रत्यारोपण के बाद भी इच्छाशक्ति और मेहनत के दम पर खेलों में बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।
| खिलाड़ी | खेल | पदक |
|---|---|---|
| रामदेव सिंह | जेवलिन थ्रो | स्वर्ण |
| रामदेव सिंह | लंबी कूद | रजत |
| रामदेव सिंह | बॉल थ्रो और डिस्कस थ्रो | कांस्य (दोनों में) |
| अंकित कुमार | जेवलिन थ्रो | रजत |
| अंकित कुमार | पेटांक डबल्स | कांस्य |
| भवानी सिंह | पेटांक सिंगल्स | रजत |
| भवानी सिंह | पेटांक डबल्स | कांस्य |
| अमित कुमार शर्मा | तीरंदाजी | रजत |
| हर्षवर्धन सिंह | तीरंदाजी | कांस्य |
| हितेश शर्मा | तीरंदाजी | कांस्य |
रामदेव सिंह का प्रदर्शन सबसे चमकदार रहा — एक स्वर्ण, एक रजत और दो कांस्य, यानी कुल चार पदक। अंकित कुमार और भवानी सिंह ने दो-दो पदक जीते, जबकि तीरंदाजी में अमित कुमार शर्मा ने रजत और हर्षवर्धन सिंह व हितेश शर्मा ने कांस्य हासिल किया। अमित कुमार शर्मा खुद किडनी प्राप्तकर्ता हैं और पहले भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
ड्रेसडेन की कहानी: 57 खिलाड़ी, 63 पदक और 13वां स्थान
इन खिलाड़ियों की पदक-कहानी की जड़ जर्मनी के ड्रेसडेन में है, जहां विश्व प्रत्यारोपण खेल 2025 हुए थे। भारतीय दल में कुल 57 एथलीट शामिल थे, जिनमें 49 अंग प्राप्तकर्ता और 8 जीवित अंगदाता थे। भारतीय खिलाड़ियों ने कुल 63 पदक अपने नाम किए और भारत पदक तालिका में 13वें स्थान पर रहा।
इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में टीम इंडिया की भागीदारी सुनिश्चित करने में ऑर्गन इंडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। संस्था ने दल को संगठित करने, खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने और पूरी टीम के प्रबंधन में अहम योगदान दिया। दिल्ली के मंच पर इन्हीं खिलाड़ियों का सम्मान हुआ — इस बात की गवाही कि भारत में प्रत्यारोपण खेल अब सिर्फ जागरूकता अभियान नहीं, बल्कि पदक जीतने वाली हकीकत बन चुके हैं।
राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल क्यों होते हैं: डर तोड़ना ही मकसद
राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026 केवल एक खेल आयोजन नहीं, बल्कि अंगदान के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने की पहल भी है। ‘जिंदगी दोबारा’ की थीम के जरिए यह संदेश दिया गया कि अंगदान किसी जरूरतमंद को नया जीवन देने के साथ उसे अपने सपने पूरे करने का अवसर भी देता है।
उपराष्ट्रपति ने दिल्ली में अंगदान को ‘महादान’ बताया और कहा कि किसी के चले जाने के बाद भी इससे उम्मीदें बनी रह सकती हैं। उन्होंने दिवंगत अंगदाताओं और उनके परिवारों के प्रति श्रद्धा व्यक्त की, जिनके निस्वार्थ निर्णयों से दूसरों को जीवन जीने का दूसरा मौका मिलता है। उन्होंने यह भी कहा कि एक मृतक अंगदाता आठ लोगों तक की जान बचा सकता है।
समाज में अंगदान को लेकर भ्रांतियां आज भी हैं — जैसे यह कि प्रत्यारोपण के बाद व्यक्ति कमजोर ही रहेगा, या खेल-कूद उसके बस की बात नहीं। रामदेव सिंह की जेवलिन में स्वर्ण पदक वाली थ्रो और लंबी कूद में रजत पदक वाली छलांग इन भ्रांतियों का सबसे मजबूत जवाब है।
अंगदान का संकल्प कैसे लें: परिवार से बात ही पहला कदम
अगर आप अंगदान का संकल्प लेना चाहते हैं, तो सबसे पहला और सबसे जरूरी कदम अपने परिवार से बात करना है, क्योंकि अंतिम समय में परिवार की सहमति ही निर्णायक होती है। इसके बाद आप NOTTO के आधिकारिक संकल्प पोर्टल पर ऑनलाइन अपना संकल्प दर्ज कर सकते हैं। पोर्टल पर आधार आधारित सत्यापन से कुछ ही मिनटों में पंजीकरण पूरा हो जाता है। जानकारी के लिए NOTTO की टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-11-4770 पर संपर्क किया जा सकता है।
राजस्थान में प्रत्यारोपण की चिकित्सा क्षमता भी बढ़ रही है। जयपुर के SMS अस्पताल में हुए पहले HLA-मिसमैच्ड बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सफलता और मां योजना के तहत हुए हजारों अंग प्रत्यारोपणों की खबरें इसकी गवाही देती हैं। वहीं कोटा प्रसूता मामले में किडनी ट्रांसप्लांट की मांग ने दिखाया था कि जरूरतमंदों के लिए प्रत्यारोपण कितनी बड़ी उम्मीद होता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
राष्ट्रीय अंग प्रत्यारोपण खेल 2026 कहां और कब आयोजित हुए?
1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में। थीम ‘जिंदगी दोबारा’ थी और उद्घाटन उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने किया।
राजस्थान के कितने खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया?
छह खिलाड़ियों को। रामदेव सिंह ने कुल चार पदक जीते — जेवलिन में स्वर्ण, लंबी कूद में रजत और बॉल थ्रो व डिस्कस में कांस्य।
विश्व प्रत्यारोपण खेल 2025 में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा?
ड्रेसडेन में 57 सदस्यीय भारतीय दल ने कुल 63 पदक जीते और भारत 13वें स्थान पर रहा। दल में 49 अंग प्राप्तकर्ता और 8 जीवित दाता थे।
अंगदान का संकल्प कहां दर्ज कराया जा सकता है?
NOTTO के आधिकारिक पोर्टल notto.abdm.gov.in पर ऑनलाइन। जानकारी के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन 1800-11-4770 पर संपर्क करें। संकल्प से पहले परिवार से बात करना सबसे जरूरी है।
रामदेव सिंह और उनके साथियों की कहानी का सार एक ही पंक्ति में सिमटता है — अंगदान से जिंदगी खत्म नहीं होती, दोबारा शुरू होती है।